Rescue from incurable disease

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लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |
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  • तिल या तिल्ली "सिसेमम इंडिकाम"


     मकर संक्रांति पर्व पर आप सभी को शुभ कामनाये| 
    सूर्य के इस परवर्तन के साथ ही सर्दिया कम होने की शुरुवात हो जाएगी| इस पर्व पर तिल या तिल्ली का बहुत ही महत्त्व हे | 
    क्यों हे? तिल्ली क्या हे ? क्या लाभ हें इसके ?
    "तिल" ,जिसे गुजराती में "तल" मराठीऔर पन्जाबी में "तिल्ली",अरबी में सिमसिम,तेलगु में नुबुल्लू ,तमिल में इलू, लेटिन में "सिसेमम इंडिकाम" कहा जाता हे | 

    एक समय में यह इस देश की प्रमुख तिलहन फसल थी| इस कारण सारे देश में इसे अच्छी तरह से जाना जाता हे| इसका तेल खाने के लिए प्रयुक्त किया जाता हे | काले रंग के तिल का प्रयोग औषधि के लिए किया जाता हे| आयुर्वेदिक मत से तिल भारी, कफ पित्त बर्धक, बल बर्धक,केशो(बाल) के लिए हितकारी, स्तनों में दूध उत्पन्न करने वाले,चर्म रोग और व्रण(फोड़ा फुंसी)ठीक करने वाले, मल रोधक, बुद्धि वर्धक होते हें काले तिल में ये सब गुण अधिक होते हें|
    रासायनिक विश्लेषण
     तिल में लोहा, केल्शियम, फास्फोरस प्रमुख होता हे | 
    लगभग १०० ग्राम तिल में १०.५ एम् जी आयरन ,१.४५ एम् जी केल्शियम,५.७ एम् जी फोस्फोरस होता हे|
     मनुष्य को आवश्यक मात्रा की ये धातुये या तत्व, मात्र ५० ग्राम तिल प्रति दिन लेने से मिल जाते हें| यदि तिल के गुड में लड्डू बना कर खाए जाये तो गुड में मोजूद आयरन और फोस्फोरस अतिरिक्त मिलने से और भी कम मात्र में काम चल जाता हे| 

    इसी कारण संकर्न्ति पर्व पर तिल गुड का महत्व हे| वर्तमान में आसानी से उपलब्ध गुड की गजक का सेवन भी इस हेतु किया जा सकता हे|
    तिल का औषधीय महत्व भी भी बहुत हे, सुखी खांसी में तिल को पानी में १/४ भाग शेष रहने तक क्वाथ बना कर मिश्री मिला कर पिलाने से कफ निकल कर खांसी ठीक हो जाती हे | तिल के पोधे की राख़ जिसे तिल क्षार भी कहते हें, के सेवन से मूत्र की जलन कम होती हे, पथरी को भी यह बाहर निकाल देती हे| 
    तिल को पीस कर गर्म कर पुल्टिस बना कर लगाने से व्रण और जख्म भर जाते हें| इससे ही खाज खुजली भी दूर हो जाती हे | इसीलिए तिल का उबटन लगा कर संक्रांति पर नहाने की परंपरा हे| यह उबटन शारीर को सुन्दर भी बनाता हे |
    तिल के प्रयोग से मासिक धर्म ठीक होता हे | तिल के पत्ते पेचिश रोग में आराम देते हें| सिरस की छाल का चूर्ण तिल और सिरके के साथ लेप करने से मुहांसे ठीक हो जाते हें |
    काले तिल भांगरे के पत्ते के साथ सेवन से बाल काले होते हें| तिल की जड़ और पत्तो के क्वाथ से सर धोने से भी बाल काले होते हें|
    ब्राम्ही आमला केश तेल यदि काले तिल के तेल से बनाया जाये तो बालो के लिए सर्वश्रेष्ठ होता हें | यह बालो की सभी परेशानियों से मुक्त करता हे मन मष्तिष्क को ठंडा कर जीवन में उत्साह जगाता हे |
    पुनह मकर सक्रांति पर बधाई के साथ गुड तिल प्रयोग बता कर जीवन भर तिल के लाभों को लेते रहने का सूत्र याद दिलाये| याद रखे की पर्वो पर इनका प्रयोग विशेष इनके गुणों को याद दिलाने भर के लिए होता हे| उनका पूरा लाभ तो जीवन भर प्रयोग करते रहने से ही मिलता हे | केवल एक दिन में नहीं|
    डॉ मधु सूदन व्यास 

    समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें|

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