"Uttar Basti" - Panchakarma Process, by male and female genitals and urinary tract.
Know now -Prostate enlargement (BPH)-The problem of aging.
Ayurvedic treatment of Urethral stricture or Mutra ghat or Mutrotsang – Practical panchakarma procedure.
Urethral stricture or Mutra ghat/ Mutrotsang (मूत्राघात/ मुत्रोत्संग) – The Problem caused by Urinary failure.
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जी हाँ एसा हो सकता है, इस रोग में जिसे आयुर्वेद में मूत्राघात या आधुनिक चिकित्सा में युरिथ्रल स्ट्रीकचर (urethral stricture),मूत्र मार्ग संकोच, कहा जाता है|
Without any warning, attack in one night, the terrible disease- Gout or Vata-Rakta . बिना चेतावनी के एक रात में दर्द से आने वाला भयानक रोग, - गाउट या वातरक्त|
हाइड्रोसिल क्या है और इसका आयुर्वेदिक इलाज क्या है?
गुर्दे की पथरी
किडनी या गुर्दे का रोग विश्व में मौत का तीसरा कारण - कैसे बचें?
गुर्दा या किडनी जो वृक्क के नाम से भी जाना जाता है, शरीर की एक अति महत्व पूर्ण रचना है। यह शरीर को निरंतर साफ करते रहने की स्वचालित प्रणाली है। गुर्दे कमर के ऊपर अपनी पीठ के बीच में अपनी रीढ़ के दोनों तरफ स्थित एक जोड़ी अंग हैं । जीवन बनाए रखने के लिए पाचन के बाद रक्त से अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल पदार्थ को हटाने, रक्त को खनिजों (सोडियम, पोटेशियम, फास्फोरस,) और पानी के संतुलन को बनाए रखने, मांसपेशियों की गतिविधियों, और रसायनों या दवाओं के शेष रहे भाग को निकालने व एंजाइम रेनिन का उत्पादन कर रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। ईरिथ्रोप्रोटीन का उत्पादन करके लाल रक्त कोशिका निर्माण करता है। हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक विटामिन डी के उत्पादन में सक्रिय भूमिका।मूत्र त्याग करने में जलन- आपके प्रश्नो पर हमारे उत्तर ।
25 july 2013/12:44
sir mujhe urinary infection rahta he KFT or CTIVP ke bad bhi koi bimari nazar nahi aa rahi he par last 5 year se urine me jalan or backflow jesi problem aa rahi he
बड़ी हुई प्रोस्टेट 50 साल की उम्र के बाद की मुसीबत।
गुर्दे और मूत्राशय की पथरी - आयुर्वेदिक चिकित्सा

दुनिया में लाखों ऐसे मरीज है जो गुर्दे की पथरी से परेशान है। यह रोग पीड़ा देने के साथ साथ और भी अनेक तकलीफ पैदा करता है।
जब नमक एवं अन्य खनिज (जो आपके मूत्र में मौजूद होते हैं) वे एक दूसरे के संपर्क में आते है तो
पथरी का निर्माण होने लगता है जो गुर्दे की पथरी के रूप में जाना जाता है।गुर्दे की पथरी का आकार अलग अलग हो सकता है; कुछ पथरी रेत के दानों की तरह बहुत हीं छोटे आकार के होते हैं तो कुछ बहुत हीं बड़े। आमतौर पर छोटे मोटे पथरी मूत्र के जरिये शरीर के बाहर निकल जाया करते हैं लेकिन जो पथरी आकार में बड़े होते हैं वे मूत्र निष्काशन के समय बाहर नहीं निकल पाते एवं मूत्र के बाहर निकलने में बहुत हीं बाधा डालते हैं जिससे बहुत हीं पीड़ा उत्पन्न होती है।
विटामिन बी 6 लिया करें;- विटामिन बी 6 गुर्दे की पथरी को दूर करने में बहुत हीं प्रभावकारी साबित होता है।
अगर विटामिन बी -6 को विटामिन बी ग्रुप के अन्य विटामिन के साथ सेवन किया जाये तो गुर्दे की पथरी के इलाज में काफी सहायता मिलती है। शोधकर्ताओं ने अपने शोध में पाया है कि इस बी विटामिन की 100 से 150 मिलीग्राम की एक दैनिक खुराक गुर्दे की पथरी की चिकित्सीय उपचार में बहुत फायदेमंद हो सकता है। यह विटामिन मष्तिष्क सम्बन्धी विकारों को भी दूर करता है।
आयुर्वेदिक चिकित्सा
पुरे मूत्र वह संस्थान में रुकी पथरी को निकालने एवं बनने न देने के लिए निम्न चिकित्सा करे |
हजरल यहूद भस्म १/२ ग्राम+क्षार पर्पटी १/२ ग्राम पानी के साथ दिन में दो बार + गोक्षुरादी गुगुलु २-२ गोली दो बार - सेवन करने से पथरी टूट कर बिखर कर मूत्र केसाथ धीरे धीरे निकल जाती हे | कभी कभी बड़े टुकड़े निकलने से मूत्र नली में अन्दर छिल जाने से खून भी आ जाता हे | घबराए नहीं अधिक हो तो आयुर्वेदिक चिकित्सक से संपर्क करे | अधिक अच्छा हे की पूर्व से ही उनके परामर्श से चिकित्सा ली जाये | इससे कुछ अन्य औषधि ( पाषण भेद वज्र रस आदि) भी दी जा सकेगी | पानी अधिक पीना और कुल्थी ( एक प्रकार का दलहन ) की दाल+ गोखरू का काड़ा उपरोक्त औषधि खाने के बाद पीने से पथरी जल्दी निकलती हे |
हजरल यहूद भस्म१०० मिली ग्राम+क्षार पर्पटी १०० मिली ग्राम -प्रति दिन एक बार लगातार लेते रहने से पथरी बनाने वाले शरीर के रसायन पथरी नहीं बना पाते | गोक्षुरादी गुगुलु से दर्द भी ठीक हो जाता हे |
अन्य सामान्य उपाय जो राहत दे सकते हें|
तुलसी के पत्तों में विटामिन बी पाया जाता है इसलिए तुलसी के कुछ ताजे पत्तों को रोजाना चबाया करें।
प्याज (कांदा) खाएं : प्याज में गुर्दे की पथरी के इलाज के लिए औषधीय गुण पाए जाते हैं। अगर आप सही ढंग से इस घरेलू उपचार का पालन करेंगे तो आपको इसका हैरान कर देने वाला परिणाम मिलेगा। आपको इसका रस पीना है लेकिन पके हुए प्याज का। इसके लिए आप दो मध्यम आकर के प्याज लेकर उन्हें अच्छी तरह से छिल लें। फिर एक बर्तन में एक ग्लास पानी डालें और दोनों प्याज को मध्यम आंच पर उसमें पका लें। जब वे अच्छी तरह से पक जाये तो उन्हें ठंढा होने दें फिर उन्हें ब्लेंडर में डालकर अच्छी तरह से ब्लेंड कर लें। तत्पश्चात उनके रस को लें|
--समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान ,एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें |.
चिकित्सा सेवा अथवा व्यवसाय?
स्वास्थ है हमारा अधिकार १
हमारा लक्ष्य सामान्य जन से लेकर प्रत्येक विशिष्ट जन को समग्र स्वस्थ्य का लाभ पहुँचाना है| पंचकर्म सहित आयुर्वेद चिकित्सा, स्वास्थय हेतु लाभकारी लेख, इच्छित को स्वास्थ्य प्रशिक्षण, और स्वास्थ्य विषयक जन जागरण करना है| आयुर्वेदिक चिकित्सा – यह आयुर्वेद विज्ञानं के रूप में विश्व की पुरातन चिकित्सा पद्ध्ति है, जो ‘समग्र शरीर’ (अर्थात शरीर, मन और आत्मा) को स्वस्थ्य करती है|
निशुल्क परामर्श
जीवन के चार चरणौ में (आश्रम) में वान-प्रस्थ,ओर सन्यास अंतिम चरण माना गया है, तीसरे चरण की आयु में पहुंचकर वर्तमान परिस्थिती में वान-प्रस्थ का अर्थ वन-गमन न मान कर अपने अभी तक के सम्पुर्ण अनुभवोंं का लाभ अन्य चिकित्सकौं,ओर समाज के अन्य वर्ग को प्रदान करना मान कर, अपने निवास एमआइजी 4/1 प्रगति नगर उज्जैन मप्र पर धर्मार्थ चिकित्सा सेवा प्रारंंभ कर दी गई है। कोई भी रोगी प्रतिदिन सोमवार से शनी वार तक प्रात: 9 से 12 एवंं दोपहर 2 से 6 बजे तक न्युनतम 10/- रु प्रतिदिन टोकन शुल्क (निर्धनों को निशुल्क आवश्यक निशुल्क ओषधि हेतु राशी) का सह्योग कर चिकित्सा परामर्श प्राप्त कर सकेगा। हमारे द्वारा लिखित ऑषधियांं सभी मान्यता प्राप्त मेडिकल स्टोर से क्रय की जा सकेंगी। पंचकर्म आदि आवश्यक प्रक्रिया जो अधिकतम 10% रोगियोंं को आवश्यक होगी वह न्युनतम शुल्क पर उपलब्ध की जा सकेगी। क्रपया चिकित्सा परामर्श के लिये फोन पर आग्रह न करेंं। ।
चिकित्सक सहयोगी बने:- हमारे यहाँ देश भर से रोगी चिकित्सा परामर्श हेतु आते हैं,या परामर्श करते हें, सभी का उज्जैन आना अक्सर धन, समय आदि कारणों से संभव नहीं हो पाता, एसी स्थिति में आप हमारे सहयोगी बन सकते हें| यदि आप पंजीकृत आयुर्वेद स्नातक (न्यूनतम) हें! आप पंचकर्म चिकित्सा में रूचि रखते हैं, ओर प्रारम्भ करना चाह्ते हैं या सीखना चाह्ते हैं, तो सम्पर्क करेंं। आप पंचकर्म केंद्र अथवा पंचकर्म और आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रक्रियाओं जैसे अर्श- क्षार सूत्र, रक्त मोक्षण, अग्निकर्म, वमन, विरेचन, बस्ती, या शिरोधारा जैसे विशिष्ट स्नेहनादी माध्यम से चिकित्सा कार्य करते हें, तो आप संपर्क कर सकते हें| सम्पर्क समय- 02 PM to 5 PM, Monday to Saturday- 9425379102/ mail- healthforalldrvyas@gmail.com केवल एलोपेथिक चिकित्सा कार्य करने वाले चिकित्सक सम्पर्क न करें|
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