Rescue from incurable disease

Rescue from incurable disease
लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |
Urinary-Diseas/मूत्र रोग लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Urinary-Diseas/मूत्र रोग लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

"Uttar Basti" - Panchakarma Process, by male and female genitals and urinary tract.

उत्तर बस्ती – पुरुष और स्त्रियों के जननेद्रिय और मूत्र मार्ग से दी जाने वाली एक पंचकर्म प्रक्रिया|
आयुर्वेदिक चिकित्सामें पंचकर्म अंतर्गत चिकित्सा प्रक्रियाओं में उत्तर बस्ती (Uttarbasti) जननेंद्रिय (reproductive system) [स्त्रियों में योनी और मूत्र  एवं पुरुष के मूत्र मार्ग] से की जाने वाली प्रक्रिया है|
पंचकर्म की उत्तरबस्ती चिकित्सा बांझपन और गर्भाशय से संबंधित रोगों के लिए प्रमुख रूप से हजारों वर्षों से की जा रही है| यह एक भ्रान्ति है की उत्तर बस्ती केवल स्त्रियों में ही दी जाती है|

Know now -Prostate enlargement (BPH)-The problem of aging.

आज जाने -बुडापे की समस्या- पौरुष या प्रॉस्टेट ग्रंथि वृधि (BPH) :- बुडापे में हो सकने वाली कष्टकारी समस्या प्रोस्टेट वृद्धि  को यदि आज ही हम जान लें, तो बचने का प्रयत्न तो कर सकते हैं| 

Ayurvedic treatment of Urethral stricture or Mutra ghat or Mutrotsang – Practical panchakarma procedure.

 मूत्राघात / मुत्रोत्संग/ मूत्र मार्ग संकोच (यूरिथ्रल स्ट्रीकचर) की आयुर्वेदिक चिकित्सा व्यावहारिक पंचकर्म चिकित्सा| Ayurvedic treatment of Urethral stricture or Mutra ghat or Mutrotsang – Practical panchakarma procedure.
डॉ मधु सूदन व्यास
मूत्र मार्ग संकोच या (यूरिथ्रल स्ट्रीकचर) के लिए कई कई बार आधुनिक शल्य (Surgical) चिकित्सा और मूत्र मार्ग का सतत फेलाव (Urethral dilation)  करना पढता है| इन सबके बाद भी स्थाई लाभ नहीं होता| आयुर्वेदिक पंचकर्म चिकित्सा के अंतर्गत आने वाली प्रक्रिया उत्तर बस्ती इसका स्थाई हल सिद्ध हुआ है|

 इस लेख में इसकी कारगर चिकित्सा उत्तरबस्ती के विषय में जानेगें| यह लेख सामान्य जन को तो आयुर्वेद के चमत्कारों की झलक देगा है, साथ ही चिकित्सको का मार्ग दर्शन भी करेगा| विशेष प्रशिक्षण हेतु हमसे संपर्क भी कर सकते हें|
रोगी मूत्र मार्ग संकोच या Urethral stricture की  स्थाई चिकित्सा के लिए हमसे सम्पर्क कर सकते हें|  
कैसे देते हें उत्तर बस्ती? इसकी प्रक्रिया और परिणाम, के लिए देखें –

Urethral stricture or Mutra ghat/ Mutrotsang (मूत्राघात/ मुत्रोत्संग) – The Problem caused by Urinary failure.

मूत्र के रुक जाने से होने वाला कष्ट. - मूत्र मार्ग संकोच !
चिकित्सा के लिए संपर्क करें -क्लिक  लिंक 
किसी भी आयु के 90% पुरुषों में (स्त्रियों[A] में 10%) जिनमें बच्चे से लेकर बड़े तक चाहे वे किसी भी आयु के हों, कभी अचानक ही मूत्र प्रवाह (पेशाव आना) रुक जाये, कम आने लगे, बार-बार आने लगे, पेशाव करने (मूत्र त्यागने) में हल्का या तेज दर्द और जलन होने लगे, पेशाव (मूत्र) रोका न जा रहा हो, कमर (pelvic) और पेट के निचले भाग में दर्द हो, मूत्र बूंद बूंद कर निकले, लिंग या शिश्न (penile) में भी सुजन और दर्द होने लगे, कभी कभी खून या वीर्य आता नजर आये, मूत्र के रंग में गहरा हो रहा हो, तो स्तिथि बड़ी गंभीर हो जाती है, और इमरजेंसी चिकित्सा के लिए अस्पताल की और दोडना होता हैI  
जी हाँ एसा हो सकता है, इस रोग में जिसे आयुर्वेद में मूत्राघात या आधुनिक चिकित्सा में युरिथ्रल स्ट्रीकचर (urethral stricture),मूत्र मार्ग संकोच, कहा जाता है|

Without any warning, attack in one night, the terrible disease- Gout or Vata-Rakta . बिना चेतावनी के एक रात में दर्द से आने वाला भयानक रोग, - गाउट या वातरक्त|

Without any warning, attack in one night, the terrible disease- Gout or Vata-Rakta .
बिना चेतावनी के एक रात में दर्द से आने वाला भयानक रोग, - गाउट या  वातरक्त|
बिना चेतावनी के एक ही रात में पैरों की अँगुलियों में सूजन, और तेज दर्द के साथ अचानक होने वाला रोग जो वात रक्त या गाउट हो सकता है, यह पुरुषों में 30 वर्ष की आयु के बाद युवावस्था में, और प्रोढ़ महिलाओं होता है| वातरक्त के प्रत्येक पांच रोगियों में रोगी पुरुष 4  और स्त्री 1 होती है|

हाइड्रोसिल क्या है और इसका आयुर्वेदिक इलाज क्या है?

प्रश्न- हाइड्रोसिल क्या है? और इसका आयुर्वेदिक इलाज क्या है?
उत्तर - 
         हाइड्रोसिल (Hydrocele) अंडकोशों के पास थैली में पानी जैसा तरल पदार्थ भरने और सूजन होने से होता है| यह दोनों अंडकोष के एक दर्द रहित वृद्धि है| यह शोथ कभी कभी बहुत बड़ा, भद्दा और असुविधाजनक हो सकता है, लेकिन यह आम तौर पर दर्द नहीं होता| यह आम तौर पर खतरनाक भी नहीं होता| Hydroceles नवजात शिशुओं में या आमतोर पर देखने मिलता है| बाद में भी किसी भी उम्र में हो सकता है।

गुर्दे की पथरी

गुर्दे की पथरी

   गुर्दे की पथरियों में कैल्शियम अधिक होता है, यह प्रकृति में चूने के रूप में, व शरीर में हड्डियों के अंदर पाया जाता है। समान्यत: भोजन के साथ शरीर में पहुंचने वाला अतिरिक्त कैल्शियम (सामान्यतया 24 घंटे में 150-200 मिलीग्राम) मूत्र में निकल जाता है।

किडनी या गुर्दे का रोग विश्व में मौत का तीसरा कारण - कैसे बचें?

        गुर्दा या किडनी जो वृक्क के नाम से भी जाना जाता है, शरीर की एक अति महत्व पूर्ण रचना है। यह शरीर को निरंतर साफ करते रहने की स्वचालित प्रणाली है। गुर्दे कमर के ऊपर अपनी पीठ के बीच में अपनी रीढ़ के दोनों तरफ स्थित एक जोड़ी अंग हैं । जीवन बनाए रखने के लिए पाचन के बाद रक्त से अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल पदार्थ को हटाने, रक्त को खनिजों (सोडियम, पोटेशियम, फास्फोरस,) और पानी के संतुलन को बनाए रखने, मांसपेशियों की गतिविधियों, और रसायनों या दवाओं के शेष रहे भाग को निकालने व एंजाइम रेनिन का उत्पादन कर रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। ईरिथ्रोप्रोटीन का उत्पादन करके लाल रक्त कोशिका निर्माण करता है। हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक विटामिन डी के उत्पादन में सक्रिय भूमिका।

रक्त में यूरिक एसिड अधिकता से -गठिया (Gout), गुर्दे की पथरी,या गुर्दे के फेल आदि होने से बचाव कैसे हो?

 यह प्रश्न किसी एक के अतिरिक्त अन्य का भी हो सकता है। क्योकि यह समस्या आजकल के जीवन व्यवहार के दुष्परिणामों के कारण आम हो रहे है। इसीलिए इस समस्या के लिए सभी के लिए जानना आवश्यक है। 

मूत्र त्याग करने में जलन- आपके प्रश्नो पर हमारे उत्तर ।

Q-   मूत्र त्याग करने में जलन होती है।    
25 july 2013/12:44
 sir mujhe urinary infection rahta he KFT or CTIVP ke bad bhi koi bimari nazar nahi aa rahi he par last 5 year se urine me jalan or backflow jesi problem aa rahi he

बड़ी हुई प्रोस्टेट 50 साल की उम्र के बाद की मुसीबत।


सामान्यतय: बड़ी हुई प्रोस्टेट 50 साल की उम्र के बाद की मुसीबत हे। पर कभी कभी कम आयु में भी देखा गया हे। आयुर्वेद के अनुसार अति मैथुन या हस्त मैथुन इसका मूल कारण हे। इस कारण इससे बचने के लिए नव जवानों को भी इसका ज्ञान होना आवश्यक हे ताकि समय रहते बचा जा सके। अनुवांशिक या जीन्स से भी यह हो सकता हे। 

प्रोस्टेट क्या होता हे और शरीर में क्या उपयोग हे ?

गुर्दे और मूत्राशय की पथरी - आयुर्वेदिक चिकित्सा


 गुर्दे और मूत्राशय की पथरी के घरेलू उपाय निकलने के लए आयुर्वेदिक चिकित्सा

दुनिया में लाखों ऐसे मरीज है जो गुर्दे की पथरी से परेशान है। यह रोग पीड़ा देने के साथ साथ और भी अनेक तकलीफ पैदा करता है।

जब नमक एवं अन्य खनिज (जो आपके मूत्र में मौजूद होते हैं) वे एक दूसरे के संपर्क में आते है तो 
पथरी का निर्माण होने लगता है जो गुर्दे की पथरी के रूप में जाना जाता है।
गुर्दे की पथरी का आकार अलग अलग हो सकता है; कुछ पथरी रेत के दानों की तरह बहुत हीं छोटे आकार के होते हैं तो कुछ बहुत हीं बड़े। आमतौर पर छोटे मोटे पथरी मूत्र के जरिये शरीर के बाहर निकल जाया करते हैं लेकिन जो पथरी आकार में बड़े होते हैं वे मूत्र निष्काशन के समय बाहर नहीं निकल पाते एवं मूत्र के बाहर निकलने में बहुत हीं बाधा डालते हैं जिससे बहुत हीं पीड़ा उत्पन्न होती है।

गुर्दे की पथरी होने के कुछ सामान्य लक्षण
जब गुर्दे की पथरी मूत्रवाहिनी में घुमती है या इधर से उधर होती है तब बहुत हीं पीड़ा देती है। यदि आपको मूत्र विसर्जन के समय अक्सर पीड़ा का एहसास होता हो तो यह गुर्दे की पथरी का एक लक्षण हो सकता है। पीड़ा के अलावा मूत्र विसर्जन के वक़्त पेशाब में जलन हो तो यह काफी हद तक इस बात का संकेत देता है कि आपको गुर्दे की पथरी की समस्या है। लेकिन पेशाब में जलन कई और कारणों से भी हो सकते हैं। इसलिए घबराएं नहीं और अगर आपको पेशाब में जलन की शिकायत अक्सर होती हो तो डाक्टरी जाँच अवश्य करवाएं। भूख में कमी या भूख मिटना, पेशाब में बदबू, पेशाब में रक्त के अंश का पाया जाना एवं चक्कर आना गुर्दे की पथरी होने के कुछ अन्य लक्षण हैं।
मासिक धर्म के दौरान महिलाएं को अगर पेट (उदर) के निचले भाग में अक्सर दर्द की शिकायत रहती हो तो यह भी गुर्दे की पथरी होने का संकेत हो सकता है।

गुर्दे की पथरी से निजात पाने के कुछ कारगर घरेलू उपाय
अंगूर का सेवन करें : अंगूर गुर्दे की पथरी को दूर करने में बहुत हीं महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अंगूर प्राकृतिक मूत्रवर्धक के रूप में उत्कृष्ट रूप से कार्य करता है क्योंकि इनमें पोटेशियम नमक और पानी भरपूर मात्रा में होते हैं। अंगूर में अलबूमीन और सोडियम क्लोराइड बहुत हीं कम मात्रा में होते हैं जिनकी वजह से इन्हें गुर्दे की पथरी के उपचार के लिए बहुत हीं उत्तम माना जाता है।
विटामिन बी 6 लिया करें;- विटामिन बी 6 गुर्दे की पथरी को दूर करने में बहुत हीं प्रभावकारी साबित होता है।
अगर विटामिन बी -6 को विटामिन बी ग्रुप के अन्य विटामिन के साथ सेवन किया जाये तो गुर्दे की पथरी के इलाज में काफी सहायता मिलती है। शोधकर्ताओं ने अपने शोध में पाया है कि इस बी विटामिन की 100 से 150 मिलीग्राम की एक दैनिक खुराक गुर्दे की पथरी की चिकित्सीय उपचार में बहुत फायदेमंद हो सकता है। यह विटामिन मष्तिष्क सम्बन्धी विकारों को भी दूर करता है।
आयुर्वेदिक चिकित्सा
 पुरे मूत्र वह संस्थान में रुकी पथरी को नि
कालने एवं बनने न देने के लिए निम्न चिकित्सा करे |
हजरल यहूद भस्म १/२ ग्राम+क्षार पर्पटी १/२ ग्राम पानी के साथ दिन में दो बार + गोक्षुरादी गुगुलु २-२ गोली दो बार - सेवन करने से पथरी टूट कर बिखर कर मूत्र केसाथ धीरे धीरे निकल जाती हे | कभी कभी बड़े टुकड़े निकलने से मूत्र नली में अन्दर छिल जाने से खून भी आ जाता हे | घबराए नहीं अधिक हो तो आयुर्वेदिक चिकित्सक से संपर्क करे | अधिक अच्छा हे की पूर्व से ही उनके परामर्श से चिकित्सा ली जाये | इससे कुछ अन्य औषधि ( पाषण भेद वज्र रस आदि) भी दी जा सकेगी | पानी अधिक पीना और कुल्थी ( एक प्रकार का दलहन ) की दाल+ गोखरू का काड़ा उपरोक्त औषधि खाने के बाद पीने से पथरी जल्दी निकलती हे |
हजरल यहूद भस्म१०० मिली ग्राम+क्षार पर्पटी १०० मिली ग्राम -प्रति दिन एक बार लगातार लेते रहने से पथरी बनाने वाले शरीर के रसायन पथरी नहीं बना पाते | गोक्षुरादी गुगुलु से दर्द भी ठीक हो जाता हे |
अन्य सामान्य उपाय जो राहत दे सकते हें|
तुलसी के पत्तों में विटामिन बी पाया जाता है इसलिए तुलसी के कुछ ताजे पत्तों को रोजाना चबाया करें।
प्याज (कांदा) खाएं : प्याज में गुर्दे की पथरी के इलाज के लिए औषधीय गुण पाए जाते हैं। अगर आप सही ढंग से इस घरेलू उपचार का पालन करेंगे तो आपको इसका हैरान कर देने वाला परिणाम मिलेगा। आपको इसका रस पीना है लेकिन पके हुए प्याज का। इसके लिए आप दो मध्यम आकर के प्याज लेकर उन्हें अच्छी तरह से छिल लें। फिर एक बर्तन में एक ग्लास पानी डालें और दोनों प्याज को मध्यम आंच पर उसमें पका लें। जब वे अच्छी तरह से पक जाये तो उन्हें ठंढा होने दें फिर उन्हें ब्लेंडर में डालकर अच्छी तरह से ब्लेंड कर लें। तत्पश्चात उनके रस को  लें|

--समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान ,एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें |.

आज की बात (30) आनुवंशिक(autosomal) रोग (10) आपके प्रश्नो पर हमारे उत्तर (61) कान के रोग (1) खान-पान (70) ज्वर सर्दी जुकाम खांसी (22) डायबीटीज (17) दन्त रोग (8) पाइल्स- बवासीर या अर्श (4) बच्चौ के रोग (5) मोटापा (24) विविध रोग (52) विशेष लेख (107) समाचार (4) सेक्स समस्या (11) सौंदर्य (19) स्त्रियॉं के रोग (6) स्वयं बनाये (14) हृदय रोग (4) Anal diseases गुदरोग (2) Asthma/अस्‍थमा या श्वाश रोग (4) Basti - the Panchakarma (8) Be careful [सावधान]. (19) Cancer (4) Common Problems (6) COVID 19 (1) Diabetes मधुमेह (4) Exclusive Articles (विशेष लेख) (22) Experiment and results (6) Eye (7) Fitness (9) Gastric/उदर के रोग (27) Herbal medicinal plants/जडीबुटी (32) Infectious diseaseसंक्रामक रोग (13) Infertility बांझपन/नपुंसकता (11) Know About (11) Mental illness (2) MIT (1) Obesity (4) Panch Karm आयुर्वेद पंचकर्म (61) Publication (3) Q & A (10) Season Conception/ऋतु -चर्या (20) Sex problems (1) skin/त्वचा (26) Small Tips/छोटी छोटी बाते (71) Urinary-Diseas/मूत्र रोग (12) Vat-Rog-अर्थराइटिस आदि (24) video's (2) Vitamins विटामिन्स (1)

चिकित्सा सेवा अथवा व्यवसाय?

स्वास्थ है हमारा अधिकार १

हमारा लक्ष्य सामान्य जन से लेकर प्रत्येक विशिष्ट जन को समग्र स्वस्थ्य का लाभ पहुँचाना है| पंचकर्म सहित आयुर्वेद चिकित्सा, स्वास्थय हेतु लाभकारी लेख, इच्छित को स्वास्थ्य प्रशिक्षण, और स्वास्थ्य विषयक जन जागरण करना है| आयुर्वेदिक चिकित्सा – यह आयुर्वेद विज्ञानं के रूप में विश्व की पुरातन चिकित्सा पद्ध्ति है, जो ‘समग्र शरीर’ (अर्थात शरीर, मन और आत्मा) को स्वस्थ्य करती है|

निशुल्क परामर्श

जीवन के चार चरणौ में (आश्रम) में वान-प्रस्थ,ओर सन्यास अंतिम चरण माना गया है, तीसरे चरण की आयु में पहुंचकर वर्तमान परिस्थिती में वान-प्रस्थ का अर्थ वन-गमन न मान कर अपने अभी तक के सम्पुर्ण अनुभवोंं का लाभ अन्य चिकित्सकौं,ओर समाज के अन्य वर्ग को प्रदान करना मान कर, अपने निवास एमआइजी 4/1 प्रगति नगर उज्जैन मप्र पर धर्मार्थ चिकित्सा सेवा प्रारंंभ कर दी गई है। कोई भी रोगी प्रतिदिन सोमवार से शनी वार तक प्रात: 9 से 12 एवंं दोपहर 2 से 6 बजे तक न्युनतम 10/- रु प्रतिदिन टोकन शुल्क (निर्धनों को निशुल्क आवश्यक निशुल्क ओषधि हेतु राशी) का सह्योग कर चिकित्सा परामर्श प्राप्त कर सकेगा। हमारे द्वारा लिखित ऑषधियांं सभी मान्यता प्राप्त मेडिकल स्टोर से क्रय की जा सकेंगी। पंचकर्म आदि आवश्यक प्रक्रिया जो अधिकतम 10% रोगियोंं को आवश्यक होगी वह न्युनतम शुल्क पर उपलब्ध की जा सकेगी। क्रपया चिकित्सा परामर्श के लिये फोन पर आग्रह न करेंं। ।

चिकित्सक सहयोगी बने:
- हमारे यहाँ देश भर से रोगी चिकित्सा परामर्श हेतु आते हैं,या परामर्श करते हें, सभी का उज्जैन आना अक्सर धन, समय आदि कारणों से संभव नहीं हो पाता, एसी स्थिति में आप हमारे सहयोगी बन सकते हें| यदि आप पंजीकृत आयुर्वेद स्नातक (न्यूनतम) हें! आप पंचकर्म चिकित्सा में रूचि रखते हैं, ओर प्रारम्भ करना चाह्ते हैं या सीखना चाह्ते हैं, तो सम्पर्क करेंं। आप पंचकर्म केंद्र अथवा पंचकर्म और आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रक्रियाओं जैसे अर्श- क्षार सूत्र, रक्त मोक्षण, अग्निकर्म, वमन, विरेचन, बस्ती, या शिरोधारा जैसे विशिष्ट स्नेहनादी माध्यम से चिकित्सा कार्य करते हें, तो आप संपर्क कर सकते हें| सम्पर्क समय- 02 PM to 5 PM, Monday to Saturday- 9425379102/ mail- healthforalldrvyas@gmail.com केवल एलोपेथिक चिकित्सा कार्य करने वाले चिकित्सक सम्पर्क न करें|

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

स्वास्थ /रोग विषयक प्रश्न यहाँ दर्ज कर सकते हें|

Accor

टाइटल

‘head’
.
matter
"
"head-
matter .
"
"हडिंग|
matter "