Rescue from incurable disease

Rescue from incurable disease
लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |
Infertility बांझपन/नपुंसकता लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
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Infertility or Impotence in men and women.[पुरुष-स्त्रियों में बांझपन या नपुंसकता].

पुरूषों में बांझपन अर्थात  वो पुरूष जो पिता नहीं बन सकते। 
पुरुष प्रधान समाज में संतान नहीं होने पर अक्सर इस बात की जिम्मेदारी स्त्रियों पर डाल दी जाती हैजबकि पाया गया है, कि अधिकांश मामलों में पुरुष स्वयं ही इस बात का जिम्मेदार होता है| और अक्सर समाज में उसे नपुंसक न मान लिया जाये इस हैतु स्त्रियों को बाँझ करार देकर पिंड छुड़ा लेना चाहता हैवह अपने पुरुषत्व का प्रतीक सम्भोग क्षमता को या लेंगिक उत्तेजना मात्र को मानकर स्वयं को इसका कारण नहीं मानता 

"Uttar Basti" - Panchakarma Process, by male and female genitals and urinary tract.

उत्तर बस्ती – पुरुष और स्त्रियों के जननेद्रिय और मूत्र मार्ग से दी जाने वाली एक पंचकर्म प्रक्रिया|
आयुर्वेदिक चिकित्सामें पंचकर्म अंतर्गत चिकित्सा प्रक्रियाओं में उत्तर बस्ती (Uttarbasti) जननेंद्रिय (reproductive system) [स्त्रियों में योनी और मूत्र  एवं पुरुष के मूत्र मार्ग] से की जाने वाली प्रक्रिया है|
पंचकर्म की उत्तरबस्ती चिकित्सा बांझपन और गर्भाशय से संबंधित रोगों के लिए प्रमुख रूप से हजारों वर्षों से की जा रही है| यह एक भ्रान्ति है की उत्तर बस्ती केवल स्त्रियों में ही दी जाती है|

पुत्रजीवक (PUTRANJEEVAK-Puntrajiva roxburghii) क्या सचमुच पुत्र (संतान) प्राप्ति के लिए है?

PUTRANJEEVAK-Puntrajiva roxburghii
पुत्रजीवक जिसे सामान्य भाषा में विशेषकर भारत और श्रीलंका में चाइल्ड लाइफ ट्री, लकी बीन ट्री, कहा जाता है के और सामान्य नाम - child's amulet tree, child-life tree, lucky bean tree, officinal drypetes, spurious wild olive, को अन्य भाषाओँ में भी जिस नाम से भी जाना जाता है, उससे पुत्र (संतान) शब्द का ही बोध होता है| 

श्वेत प्रदर या ल्यूकोरिआ या लिकोरिआ (Leukorrhea) या "सफेद पानी आना"

   सामान्य परिस्थितियों में सहवास की सुविधा के लिए प्रकृतिक स्राव को छोड़कर, जब स्त्री-योनि से असामान्य मात्रा में सफेद रंग का गाढा और बदबूदार पानी निकलता है और जिसके कारण वे बहुत क्षीण तथा दुर्बल हो जाती है। यह महिलाओं में होने वाला रोग श्वेत प्रदर कहता है, अधिकांश स्त्रियॉं को उनके गुप्तांगों से पानी जैसा बहने वाला स्त्राव होता है। यह खुद कोई रोग नहीं होता परंतु अन्य कई रोगों के कारण होता है। यह रौग बांझपन का कारण भी हो सकता है। 

पोरुषीय शक्ति [सेक्सुयल पावर] - केसे मिले ?

ताकत या शक्ति दायक ओषधि आदि के बारे में जब भी कोई विचार करता हे, तब अपने मान से कई  बातें सोची जा सकती हें। एक यह की उसे खाकर कोई भी बड़ा पहलवान बन जाएगा? या पोरुष शक्ति में बृद्धी होगी? या फिर मस्तिष्क की शक्ति बडेगी? या इसी प्रकार से ओर भी कई विचार !
शक्ति की इस बात को अच्छी तरह से समझने के लिए आयुर्वेद द्वारा वर्णित सिद्धान्त या ज्ञान को समझना होगा। आयुर्वेद में धातुओं की संख्या सात बताई गई हें। 1 रस , 2 रक्त,  3 मांस,  4  मेद, 5 अस्थि, 6 मज्जा, ओर 7 शुक्र। इसी के आगे एक धातु "ओज"' को भी आठवीं धातु मान लिया गया हे। यहाँ यह बात समझने की हे की इसका मतलब मेटल से या निकालने वाले खून, या मांस आदि से नहीं हे। शरीर में पाये जाने वाले ये रक्त आदि इन धातुओं की प्रमुखता वाले पदार्थ मात्र हें। 
हम जो भी कुछ खाते पीते, या अन्य शिरा, गुदा, नाक, आदि अंगों के माध्यम से लेते हें, वह सर्व प्रथम "रस" में परिवर्तित होता हे, इस रस की ही सहायता से शरीर के विभिन्न भागों में रक्त ,मांस आदि धातुयें क्रम से बनती हें। ओर ये धातुयें शरीर की आवश्यकता ओर परिश्रम, आराम, आदि के अनुसार अपने समान गुणो वाले रक्त , माँस आदि सभी शारीरिक वस्तुओं की उत्पत्ति करती हें, ओर उन्हे संभालकर रख लेती हें , जिनका उपयोग भोज्य पदार्थो के अकाल[फास्टिंग] के अवसर पर शरीर द्वारा किया जाता हे। 
 रस से शुक्र तक निर्माण एक प्राकर्तिक प्रक्रिया हे, इसमें किसी भी अवरोध का कारण प्रक्रिया की अस्वाभिकता हे, जिन्हे हम रोग या विकार के नाम से जानते हें। 
 नियमित जीवन के कारण यह प्रक्रिया स्वभाविक चलती रहती हे। आवश्यकता के अनुसार इन एकत्र धातुओं को वांछित शक्ति के रूप में अर्थात पोरुष शक्ति, शारीरिक शक्ति, मानसिक शक्ति, आदि में परिवर्तित की जा सकती हें। 
उदाहरण के लिए यदि हम पहलवान बनाना चाहते हें तो शारीरिक शक्ति माँस- पेशी ओर अस्थि[हड्डियों] को मजबूत बनाना होगा इसके लिए अत्यधिक शारीरिक श्रम कसरत आदि करनी होगी। इसी प्रकार बोद्धिक शक्ति के लिए बोद्धिक श्रम करना होगा। इसी प्रकार से अन्य शक्ति का विचार किया जा सकता हे। 
पोरुषीय शक्ति [सेक्सुयल पावर] किसी भी प्राणी की स्वाभाविक आवश्यकता हे, क्योकि इसीके माध्यम से नई संतान का जन्म होता हे। इसीलिए प्रकृर्ति ने प्रत्येक को इसके लिए स्वभाविक व्यवस्था दी हे।  अत: इसके लिए कुछ विशेष योजना नहीं करनी होगी। बस यह ध्यान रखना होगा की सब कुछ प्राक्रतिक रूप से चलता रहे। किसी भी प्रकार की जीवन चर्या की अस्वाभिकता इसमे हानी कारक होगी। 
वर्तमान में इसी जीवन चर्या को मनमाने तरीके से अपनाने के कारण इसमें कमी महसूस की जाती हे। यदि कमी हे तो सर्व प्रथम जीवन चर्या को बदल कर ही पुन: खोई  पोरुषीय शक्ति प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए प्रयुक्त होने वाले ओषधि आदि द्रव्य भी तभी कारगर होंगे जब की हम जीवन चर्या सुधार लेंगे, ओर सुधरी ही जीवन चर्या वालों को कोई पोरुषीय ओषधि लेने की जरूरत ही नहीं। 
सफल सेक्स के लिए किसी भी प्रकार की ओषधि नहीं चाहिए। बस चाहिए तो "शांत मन" "चिंता थकावट रहित सामान्य शरीर" "एकाग्रता"। कोई भी ओषधि क्रमश: रस रक्त आदि का निर्माण करती हुई ही शुक्र बना सकते हे। जो पोरूष का कारण होता हे। 
सीधे सीधे मात्र घंटे दो घंटे में किसी भी प्रकार की उत्तेजक या मादक ओषधि या पदार्थ का सेवन क्षणिक उत्तेजना देकर पुरुष होने का भान करा तो सकते हें, पुरुष बना नहीं सकते। हाँ व्यभिचारी ओर अपराधी जरूर बना सकते हें। इनका प्रभाव हटते ही  व्यक्ति को तुच्छ होने की प्रतीति होने लगती ओर ओर मर्द कहलाने की भावना अपराधी बना सकती हे।  
आयुर्वेद में भी कई बाजीकारक [पोरूष वर्धक] खाध्य ओर ओषधियाँ वर्णित की हें, इनमें से अधिकतर शारीरिक दोषों के सुधार के साथ पोरुषीय शक्ति बड़ाती हें, पर इन सब के साथ ही नियमित जीवन की सलाह मानना भी आवश्यक होता हे। जिन्हे  मान कर अपनी भूलो के परिणाम स्वरूप उत्पन्न सेक्स समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता हे। 
यदि सेक्स की भावना को नियंत्रित रख सके, या सही आवश्यक मात्रा में प्रयोग कर सकें तो धातु परिपाक के अंत में आठवीं धातु जिसे "ओज" कहा गाया हे वह शरीर पर विशेष रूप से चेहरे पर झलकने लगता हे। व्यक्ति सूर्य के समान देदीप्यमान हो जाता हे।  

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समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें|

हाइपोथायरायडिज्म-थायरॉयड हॉर्मोन का अपर्याप्त उत्पादन |


हाइपोथायरायडिज्म-थायरॉयड हॉर्मोन का अपर्याप्त उत्पादन|
चिकित्सा के छात्रों सहित सामान्य जन के लिए भी उपयोगी लेख।
मनुष्य के शरीर में, शरीर की समस्त व्यवस्था  के सञ्चालन हेतु कई ग्रंधियाँ होती हें इन्ही ग्रथियों से विभिन्न हारमोंस या रस निकलकर उनके कार्य करते हें । किसी भी ग्रंथि की अतिसक्रियता या अधिक उत्पादन हाईपर ,(हाइपरथायरायडिज्‍़म: )। एवं कम उत्पादन को हाइपो के नाम से समझा जा सकता हे। 

हाइपोथायरायडिज्म मनुष्य  में थायरॉयड ग्रंथि से थायरॉयड हॉर्मोन के अपर्याप्त उत्पादन के कारण होने वाली रोग की अवस्था हे,या रोग (विकार) हे,   (अवटुवामनता (Cretinism) भी हाइपोथायरायडिज्म का ही एक रूप है जो छोटे बच्चों में पाया जाता है।)
जनसंख्या का लगभग तीन प्रतिशत भाग हाइपोथायरायडिज्म से पीड़ित है.। 
 कुछ कारण जैसे आयोडीन की कमी होना होता हे।
हाइपोथायरायडिज्म प्रसव पश्चात थायरोडिटिस (postpartum thyroiditis) के परिणामस्वरूप भी हो सकता है, यह एक ऐसी स्थिति है जो लगभग 5% महिलाओं को बच्चे को जन्म देने के बाद एक वर्ष के भीतर प्रभावित करती है।
हाइपोथायरायडिज्म कभी कभी आनुवंशिकी के परिणामस्वरूप भी होता है, कभी कभी यह गुणसूत्र (autosomal) पर अप्रभावी लक्षण (recessive) के रूप में भी पाया जा सकता हे।
लक्षण

प्रारम्भिक लक्षण  (वयस्कों में, हाइपोथायरायडिज्म होने पर निम्नलिखित लक्षण होते हें।)
  • मांसपेशियों की कार्य क्षमता की कमी (मस्कुलर  हाइपोटोनिया)
  • थकान ।
  • सर्दी (कोल्ड)को सहन करने की क्षमता में कमी, सर्दी के प्रति बहुत अधिक संवेदनशीलता का होना, या ठण्ड नहीं सहन हो पाना।
  • मानसिक डिप्रेशन या अवसाद।
  • मांसपेशियों में अकड़न और जोड़ों में दर्द।
  • गलगंड (Goiter)गले की रस वाहनियों में सुजन से बढना |
  • अंगुलियों के नाखुन पतले और भंगुर (आसानी से टूटने वाले)हो जाना ।
  • पतले, भंगुर (आसानी से टूटने वाले) बाल।
  • शरीर या चेहरे पर पीलापन।
  • पसीना कम आना।
  • शुष्क, खुजली वाली त्वचा का होना।
  • वजन का बढ़ जाना और प्यास अधिक लगाना ।
  • ब्रेडीकार्डिया (Bradycardia) (ह्रदय धडकन  कम होना-प्रति मिनट साठ धड़कन से कम)
  • कब्ज (शोच  कम या नहीं जाना )
  • रोग के बड़ने के साथ अन्य लक्षण भी आ जाते हें।
  • धीमी आवाज और एक कर्कश और टूटती हुई आवाज (हकलाहट) आवाज में गहराई या भारीपन भी देखी जा सकती है।
  • शुष्क फूली हुई त्वचा, विशेष रूप से चेहरे पर।
  • भौहों के बाहरी तीसरे हिस्से का पतला होना, (हेर्टोघ (Hertoghe) का चिन्ह)
  • महिलाओं में असामान्य मासिक चक्र हो जाना।
  • शरीर के आधारभूत तापमान में कमी
  • कभी कभी कुछ और लक्षण भी पाए जा सकते हें।
  • याददाश्त कमजोर होना स्मरण शक्ति कम हो जाना।
  • सोचने-समझने की क्षमता  का कमजोर होना (दिमाग में धुंधलापन) और असावधानी या बार बार भूलें होना।
  •  ह्रदय दर का धीमा होना, जिसमें कम वोल्टेज के संकेत शामिल हैं. कार्डियक आउटपुट का कम होना और संकुचन में कमी। यह लक्षण चिकित्सक ECG से जान लेता हे।
  •  खाने के बाद भी ग्लूकोज की कमी ( हाइपो ग्लाईसिमिया )
  • शरीर के प्रतिक्रियाओं (रिफ्लेक्स) का धीमा और सुस्त होना। या कोई भी प्रतिक्रिया देरी से होना।
  • बालों का झड़ना।
  • अनुपयुक्त हीमोग्लोबिन संश्लेषण के कारण एनीमिया (रक्ताल्पता) आंतों में लौह तत्व या फोलेट का अनुपयुक्त अवशोषण या B 12 की कमी  पर्निशियस एनीमिया (प्राणाशी रक्ताल्पता) के कारण.
  • निगलने में कठिनाई
  • सांस का छोटा होना और एक उथला और धीमा श्वसन ।
  • नींद की अधिकता।
  • चिड़चिड़ापन और मूड अस्थिर रहना
  • त्वचा का पीला पड़ना-बीटा-कैरोटिन के विटामिन A में ठीक प्रकार से रूपांतरित न होने के कारण ।
  • वृक्क (किडनी) के असामान्य कार्य और GFR में कमी।
  • सीरम कोलेस्ट्रॉल के स्तर का बढ़ना।
  • तीव्र मानसिकता (मिक्सेडेमा मेडनेस (myxedema madness)) हाइपोथायरायडिज्म का एक कभी कभी पाए जाने वाला रूप है।
  • वृषण (टेस्टीकल्स ) से कम मात्रा में टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन के कारण कामेच्छा (सेक्स) में कमी।
  • स्वाद और गंध को समझने में भूल या कमी (एनोस्मिया)
  • फूला हुआ चेहरा, हाथ और पैर (देर से प्रकट होने वाले, सामान्य लक्षण होते हें।)
नैदानिक परीक्षण
प्राथमिक हाइपोथायरायडिज्म के निदान के लिए, थायरॉयड उद्दीपक हॉर्मोन (TSH) का जाँच करते हैं। TSH के उच्च स्तर बताता हे की थायरॉयड ग्रंथि थायरॉयड हॉर्मोन का पर्याप्त उत्पादन नहीं कर रही है (मुख्य रूप से थायरोक्सिन (T4) और ट्राईआयोडोथायरोनिन (T3)) की कम मात्रा. हालांकि, TSH का मापन द्वितीयक (सेकेण्ड स्टेज) और तृतीयक(थर्ड स्टेज) हाइपोथायरायडिज्म का पता लगाने में असफल रहता है । 
 यदि TSH सामान्य है और फिर भी हाइपोथायरायडिज्म का संदेह है तो निम्न परीक्षणों की सलाह दी जाती है:
फ्री ट्राईआयोडोथायरोनिन (fT3)/ फ्री  लेवोथायरोक्सिन (fT4) / total T3  / total  T4
इसके अतिरिक्त, निम्नलिखित जाँच  की आवश्यकता भी हो सकती है।
24 घंटे यूरीन ( फ्री f T3)
एंटीथायरॉयड (प्रतिरक्षी-स्व प्रतिरोधी रोगों)  के लिए जो संभवतया थायरॉयड ग्रंथि को क्षति पहुंचा रहें हैं.
सीरम कोलेस्ट्रॉल - जिसकी मात्रा हाइपोथायरायडिज्म में बढ़ सकती है।
प्रोलेक्टिन -पीयूष के कार्य के लिए व्यापक रूप से उपलब्ध परीक्षण के रूप में।
एनीमिया के लिए परीक्षण,( फेरीटिन सहित)
शरीर के तापमान का  रिकार्ड।
उपचार
(देखें - थायराइड के लिए अश्वगंधा(असगंध))
हाइपोथायरायडिज्म का उपचार थायरोक्सिन (L-T4) ट्राईआयोडोथायरोनिन (L-T3) के साथ किया जाता है. इसके लिए गोलियां उपलब्ध हैं । अतिरिक्त थायरॉयड हॉर्मोन की आवश्यकता के समय मरीजों को इनकी सलाह दी जाती है. थायरॉयड हार्मोन को दैनिक रूप से लिया जाता है।  
चिकित्सक सही खुराक को बनाये रखने के लिए रक्त के स्तर पर नियंत्रण रखना होता हे।
 थायरॉयड प्रतिस्थापन थेरेपी में कई अभी कई जानकारियों का अभाव हे। पर शोध जारी हे।
वर्तमान में अन्तः स्रावी विशेषज्ञ  हैरान हैं क्योंकि TSH आमतौर पर बढ़ता है जब T4 और T3 के स्तर गिर जाता  हैं. TSH थायरॉयड ग्रंथि को और अधिक हार्मोन बनाने के लिए के लिए प्रेरित करता है. अन्तः स्रावी वैज्ञानिक इस बात के लिए सुनिश्चित नहीं हैं कि थायरायडिज्म कोशिकाओं की उपापचय(मेटाबोलिक) दर को कैसे प्रभावित करता है (और अंततः शरीर के अंगों को) क्योंकि सक्रिय हॉर्मोनों के स्तर उपयुक्त होते हैं।
 कुछ लोगों ने माना हे, की हाइपोथायरायडिज्म का ईलाज लेवोथायरोक्सिन से किया जा सकता है, यह हाइपोथायरायडिज्म के लिए यह एक प्रारूपिक उपचार हो सकता है, लेकिन इसके लाभ या नुकसान स्पष्ट नहीं हैं। 
अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ़ क्लिनिकल एंडोक्रिनोलोजिस्ट (ACEE) 0.45–4.5 mIU/L की सलाह देते हैं, जब इसकी रेंज नीचे 0.1 तक और ऊपर 10 mIU/L तक हो, इसके लिए नियंत्रण की आवश्यकता  है, उपचार की नहीं। 
 हाइपोथायरायडिज्म में जरुरत से ज्यादा उपचार देने में हमेशा जोखिम रहता है।अत:  सावधान रहना भी जरुरी हे।
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अलसी यानी फ्लैक्सीड- सेक्स समस्याओं का उपचार



 अलसी एक ऐसी ही जड़ी बूटी है जो कि ओमेगा 3 फैटी एसिड का महत्वपूर्ण स्रोत है। यह तो हम जानते ही हैं कि शरीर को चुस्त-दुरूस्त रखने में ओमेगा 3 फैटी एसिड का बहुत बड़ा योगदान है। लेकिन क्या आप जानते हैं अलसी यानी फ्लैक्सीड के जरिए तमाम तरह की सेक्स समस्याओं से निजात पाई जा सकती हैं।
प्राकृतिक जड़ी बूटियों का शरीर को स्वस्थ रखने और
कई  गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए आज के समय
 में प्राकृतिक जड़ी बूटियों का बहुत महत्व है, इनका
असर बहुत प्रभावशाली होता है और कोई
 साइड इफेक्ट भी नहीं होता।
 अलसी क्या है? अलसी का उपयोग कैसे किया जाता है और किस तरह अलसी से सेक्स समस्याओं का उपचार किया जा सकता है।  जानें अलसी से सेक्स समस्याओं के उपचार के बारे में कुछ और दिलचस्प बातें।
अलसी क्या है?
अलसी {अलसी स्टार फूड }एक जड़ी बूटी है जिसमें लिनोलेनिक नामक एसिड पाया जाता है जो कि ओमेगा 3 फैटी एसिड का महत्वपूर्ण स्रोत है। इतना ही नहीं अलसी एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर औषधी है जो कि व्‍यक्ति को प्रोटेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से भी बचाती हैं।
अलसी का प्रयोग
पुरूषों को आमतौर पर बढ़ती उम्र में प्रोटेस्ट कैंसर हो जाता है जो कि सेक्स समस्याओं का मुख्य कारक है। प्रोटेस्ट कैंसर से ब्लैडर कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। अलसी के सेवन से ना सिर्फ सेक्स समस्याओं से बचा जा सकता है बल्कि कैंसर जैसी भयंकर बीमारियों से भी बचा जा सकता है।
अलसी को चूर्ण, गोली के रूप में या फिर खाने के साथ मिक्स करके भी लिया जा सकता है।  
 विरूद्ध आहार-विहार:अर्थ हे, एक साथ नहीं 
अलसी एक प्राकृतिक तत्व है ।अलसी के सेवन से आप कुछ सेक्स समस्या्ओं जैसे जल्दी उत्तेजित होना या सेक्स के दौरान नर्वस होना, शारीरिक दुर्बलता होना, सेक्स में रूचि कम होना, बांझपन, बार-बार गर्भपात होना, स्तनपान के दौरान दूध ना आना इत्यादि समस्याओं से रोजाना अलसी का सेवन करके निजात पा सकते हैं।
क्या कहते हैं शोध?
हाल ही में आए शोध में भी इस बात को पुख्ता किया गया कि अलसी यानी फ्लैक्सीड से आप तमाम गंभीर सेक्स समस्याओं से भी निजात पा सकते हैं। शोधों के मुताबिक, यदि किसी को कोई सेक्स समस्या होती है तो उसका मुख्य कारण पेल्विक की कोशिकाओं में रक्त का ठीक तरह से संचार ना होना। लेकिन जब आप इस समस्या के दौरान अलसी का प्रयोग करते हैं तो आपकी रक्त वाहिनियां खुल जाती हैं और धीरे-धीरे रक्त वाहिनियों में रक्त का संचार भी बढ़ जाता है। इतना ही नहीं शोधों में यह भी बता सामने आई है कि जिन लोगों की सेक्स में रूचि नहीं होती उनकी उत्तेजना बढ़ाने में अलसी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दरअसल अलसी{अलसी स्टार फूड } में कई गुणकारी तत्व मौजूद होते हैं इनमें से उत्तेजना बढ़ाने वाला एक तत्व एफरोडाइसियेक्स भी मौजूद होता है।

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युवा रहने के लिए फल

सोंदर्य समस्या

"सौंदर्य की बात,जब भी आती हे तो सबसे पाहिले 'फल' याद आतें हें। वास्तव में जब हम इनको भूल  जाते हें तब ही सोंदर्य समस्याए जन्म लेने लगती हें।" 
माध्यम वर्गीय भारतीय परिवारों में सोंदर्य समस्या का मूल कारण मिनरल्स एवं विटामिन्स का अभाव होता हे । जो की भोजन की ख़राब या कह सकतें हें,यह संतुलित आहार नहीं लेने के कारण होता हे।हमारे यहं के फास्ट फ़ूड कचोरी समोसा,सेव, मिक्सचर आदि का सामान्य प्रयोग इन समस्याओ को बढाता हे। असंतुलन शरीर पर प्रघट भी सोंदर्य समस्याओ के रूप में होता हे। जब भी इन समस्या के बारे में किसी भी चिकित्सक या सोंदर्य विशेषज्ञ से राय लेते हें तब वह फल सब्जी आदि के प्रयोग के बारे में निर्देश देता हे ।
वास्तव में फल और सब्जियों सतत प्रयोग "हमेशा के लिए सोंदर्य सुख या सुन्दर काया प्रदान करने हेतु , सोंदर्य की समस्याओ को जन्म ही न देने करते रहना जीवन से जोड़े  रखना जीवन भर के लिए  एक खुशी है," हालांकि हम इस तथ्य नजर अंदाज कर के  का सामना हमारे दैनिक जीवन की हलचल से निपटने. उम्र हम पर ढोंगी करता है यह एक अमीर आहार का पालन करके में सुपर फल की उम्र को ख़त्म कि आप बंद उन झुर्रियाँ warding द्वारा सौंदर्य और साल अपने जीवन को जोड़ सकते हैं.

यहाँ कारक है कि तुम हमेशा के लिए युवा रहने में मदद कर सकते हैं की कुछ कर रहे हैं:

भूल फल

जब फल वास्तव में याद किया जाता है, यह सिर्फ एक सेब या वहाँ एक केले है. लेकिन हम भूल जाते हैं कि क्या है कि ताजा फल पोषक तत्वों से भरपूर हैं. वे कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा में, मैग्नीशियम, विटामिन सी, लोहा, बीटा कैरोटीन और फोलिक एसिड प्रदान करते हैं और सुपर कम कैलोरी में हैं. ", एक फल एक दिन आप कि कभी चमक त्वचा की गारंटी कर सकते हैं" डॉ. Ritika Samaddar, मुख्य आहार विशेषज्ञ, मैक्स हेल्थकेयर कहते हैं.
खट्टे फल जैसे संतरे, कीनू, नीबू और grapefruits बड़ी मात्रा में भस्म किया जाना चाहिए के रूप में इन विटामिन सी में अमीर हैं यह कोलेजन के संश्लेषण, त्वचा के एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक प्रोटीन के लिए आवश्यक है.
ब्लूबेरी, blackberries, चेरी, लाल और बैंगनी अंगूर, बीट और बैंगनी गोभी एंटीऑक्सीडेंट यौगिकों, जो मदद से आप उन उम्र लाइनों को कम होते हैं.
Cantaloupe आड़ू, खुबानी और महत्वपूर्ण - विरोधी oxidants, जो अत्यंत उपयोगी होते हैं के लिए उम्र बढ़ने के खिलाफ लड़ाई है.

स्थानीय और मौसमी फल

यह उचित लगता है कि एक एकल फल उन झुर्रीदार हाथ और पैर की उंगलियों पर एक जादू कर सकते हैं नहीं है. फल की व्यापक रूप से उपलब्ध स्थानीय किस्मों के लिए चुनते हैं. मौसम में उत्पादन अपने 50 साल की उम्र में 30 देखने की इच्छा के लिए इष्टतम पोषण का महत्व प्रदान करता है.
समयोचित सेब की खपत बहुत रूप में यह कोलेजन के उत्पादन को बढ़ावा देने. कोलेजन के उत्पादन के लिए त्वचा की लोच है जो wrinkling कम कर सकते हैं बनाए रखने के लिए आवश्यक है.
तरबूज़ विटामिन सी में अमीर तरबूज की 92% पानी है रहे हैं. यह हाइड्रेट आपके शरीर के लिए एक अच्छा तरीका है - सिर्फ एक स्वादिष्ट और मीठा ठग के लिए रस का उपयोग करें या सिर्फ दिन पर स्लाइस की जोड़ी को काटने के लिए रखने के लिए अपने युवाओं को हमेशा के लिए शुद्ध.
ब्लूबेरी विटामिन बी 6, सी, कश्मीर और आहार फाइबर में समृद्ध है. इन महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट के साथ अपने शरीर को बहुत प्रदान. अमेरिका में कृषि अनुसंधान सेवा द्वारा रासायनिक अध्ययन तथ्य यह है कि ब्लूबेरी रसायन, जो मस्तिष्क की शक्ति को बढ़ाने के नीचे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी होते हैं उजागर किया है.


फल फाइबर

Avocado, अमरूद, खूबानी, अंजीर, तारीख और करौदा के रूप में फाइबर अमीर फल अच्छा काम कर हालत में पाचन तंत्र रखने जबकि कब्ज और बवासीर (बवासीर) को समाप्त. सेब, प्लम, आड़ू और नाशपाती के रूप में वे फाइबर सामग्री में उच्च जैसे फल की त्वचा से छील मत करो.

भोजन की एक इंद्रधनुष

", इंद्रधनुष अवधारणा बनाता है यह आसान करने के लिए सफेद कबाड़ खाने याद नहीं है" मैक्स हेल्थकेयर के मुख्य आहार विशेषज्ञ डॉ. Ritika Samaddar राज्यों. इस रंगीन संयोजन सरल carbs के खिलाफ सलाह देते हैं, साबुत अनाज और विविधता को बढ़ावा देता है, वह आगे बताया.

तो, हम सुरक्षित रूप से कह सकता हूँ कि समृद्ध रंग समृद्ध फल और इसके पोषक मूल्य के बराबर होती है. यह की तरह जो संयंत्र खुद की सुरक्षा के लिए एंटीऑक्सिडेंट और फाइटो - पोषक तत्वों के उच्च स्तर होते हैं एक इंद्रधनुष खाने 'है. Cranberries, खरबूजे, केले, प्लम और अंगूर जैसे चमकीले रंगों वाले फल खाने से हम हमारे शरीर में विटामिन और एंटी कि मुकाबला हमारी त्वचा में कोलेजन और elastin का टूटना है जो हमारी त्वचा फर्म और युवा रखने में मदद करता है. दे रहे हैं
रंगीन फल एंटीऑक्सिडेंट और अन्य phytonutrients कि आनुवंशिक क्षति के खिलाफ अपनी रक्षा को बढ़ावा देने का पूरा कर रहे हैं और तुम जवान रहने के लिए मदद करता है.

बस सुनहरा सोचा याद


अपने 20 देखो कुछ है जो आपकी त्वचा के नीचे छिपा हो सकता है. तो, आप सब करने की ज़रूरत है सिर्फ विनम्रता अपनी रसोई में चलना, कि रेफ्रिजरेटर खोलने और चबाना है कि आसानी से रंग का फल बैठे खाड़ी में आँख हलकों के तहत उन महंगी विरोधी उम्र बढ़ने लोशन, और झुर्रियों को रखना.








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याद्दाश्त बढ़ाने के कुछ टिप्स


याद्दाश्त बढ़ाने के कुछ टिप्स

  • एक्टिव रहें
कम से कम हफ्ते में 5 दिन एक्टिव रहें। ताज़ा हवा में 30 मिनट तक टहलें या हाथ योगा की 12 साइकिल करें जिसे कि सन सैल्युटेशन कहते हैं।
  • सांस लें
ऐसी योगिक प्रक्रीयाएं करें जिनमें कि नाक से सांस लेनी होती है जैसे अनुलोम विलोम। इनसे हमारे लेफ्ट और राइट हैमिस्फियर एक्टिवेट होते हैं और याद्दाश्त ठीक रहती है।
  • सीधा खड़े हो जायें और गहरी सांस लें। सांस लेते समय आसमान की ओर देखें। सांस छोड़ते समय अपनी चिन को चेस्ट की ओर करके ज़मीन की ओर देखें। ऐसा 7 बार करें।
  • कुछ पढ़ते रहें
हमारी याद्दाश्त हमारी मांस पेशियों की तरह है। जिस प्रकार मांस पेशियों का इस्तेमाल ना होने से वो कमज़ोर हो जाती हैं उसी प्रकार हमारी याद्दाश्त भी लगातार प्रैक्टिस ना करने से कमज़ोर हो जाती है।
  • स्वस्थ खायें
आयुर्वेद के अनुसार याद्दाश्त बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ स्वीट पोटैटो, संतरा, कैरट, दूध, घी, बादाम खायें।
अपने शरीर को डीटाक्सिफाई करें|
हफ्ते में एक दिन खिचड़ी खायें इससे आपका शरीर भी ठीक रहेगा और आप हल्का महसूस करेंगे ।
  • हर्बल पदार्थो का सेवन
कुछ हर्बल पदार्थ मेमोरी बढ़ाने में सहायक होते हैं जैसे मेधा ,ब्राह्मी ,जटामासी, भृंगराज और शंख पुष्पी।
  • नाक में तेल डालें
आयुर्वेद के अनुसार हमारे नाक हमारे दिमाग का दरवाजा़ हैं इसलिए कुछ खास फूलों की महक हमें कुछ याद दिलाती हैं।
आप अपनी आल्फैक्टरी बल्ब को एक्टिवेट करने के लिए आप गरम ब्राह्मी घृत (घी) को एक एक चम्मच दूध के साथ लें| और सोने से पहले अपनी नाक में भी डाल सकते हैं। सोने से पहले आधा चम्मच ब्राह्मी और आधा चम्मच सैफरन को एक कप। दूध में मिला लें और इस दूध को 2 से 3 बार उबालें और फिर पीयें। 
ब्राह्मी वटी, और ब्राह्मी रसायन ,जो आयुर्वेदिक स्टोर्स पर मिल जाते हें लाभ कारी हें|


समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान ,एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें|

पुरुषत्व बढाने/ और शक्ति(स्त्री-पुरुष दोनों को) देने बाले खाद्य और आयुर्वेदिक औषधियां |

 पुरुषत्व बढाने/ और शक्ति(स्त्री-पुरुष दोनों को) देने बाले खाद्य और आयुर्वेदिक औषधियां |
सर्दियों के मोसम में जब सबकी अग्नि तेज हो जाती हे, और सबकुछ हजम करने की शक्ति होती हे और वर्ष भर के लिए पोरुष-शक्ति/या स्टेमिना  बनाये  रखने के लिए यह एक अच्छा समय माना जाता हे, तब सभी का ध्यान परंपरागत बनाये जाने वाले लडुओपर जाता हे | आधुनिक लोग जो यह सब पसंद नहीं करते और जो अपने खान-पान पर सही तरह से ध्यान नहीं दे पाने से कई बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। इससे  सेक्स क्षमता पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। शरीर को शक्तिशाली बनाने और ऊर्जा प्राप्त करने के लिए उत्तम एवं पौष्टिक आहार का सेवन करना जरुरी हो जाता हे ।
 पोरुषीय शक्ति [सेक्सुयल पावर] - केसे मिले ?
निम्न कुछ खाद्य/आयुर्वेदिक द्रव्य के  सेवन से  इसको बरक़रार रखा जा सकता हे |
  • क्षमता बढ़ाने में शहद तथा भीगे हुए बादाम या किशमिश को दूध में मिलाकर प्रतिदिन पीने से बहुत लाभ मिलता है।
  • बादाम, किशमिश और मनुक्का को भिगोकर नाश्ते में लेने से भी लाभ होता है।
  • हरी सब्जी और छिलकों वाली दाल का सेवन चपाती के साथ करें। चपाती मक्खन या मलाई के साथ लें।
  • भोजन में सलाद का भरपूर उपयोग और प्याज, लहसुन तथा अदरक का संतुलित सेवन करें।
  • शक्ति  को बढ़ाने या बरकरार रखने के लिए प्राकृतिक भोजन का सेवन करना चाहिए। जैसे- अन्न, ताजी हरी सब्जियां, सलाद, बिना पॉलिश किया चावल, ताजे फल, सूखे मेवे, चोकरयुक्त आटे की रोटिया, अंकुरित खाद्यान्न, दूध, घी, अंडा तथा समुद्र से प्राप्त होने वाला भोजन इत्यादि।
  • शाकाहार का सेवन करने से सेक्स क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है। इसमें आप दाल, अनाज, दूध तथा दूध से बने पदार्थ ले सकते हैं।
  • तमाम शोधों में भी साबित हो चुका है कि मांसाहारी व्यक्ति की तुलना में शाकाहारी व्यक्ति और अधिक प्रभावशाली ढ़ंग से सेक्स करने में सक्षम होता है।
  • आपको  क्षमता बढ़ाने के लिए मांसाहारी के बजाय शाकाहारी भोजन लेना चाहिए और उसमें भी नियमित रूप से हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करना चाहिए।
  •  क्षमता में वृद्धि करने के लिए प्रोटीन और विटामिन बहुत मददगार साबित होते हैं। इसीलिए आपको अपने भोजन में प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों को लेना चाहिए जिससे आपके शरीर में फुर्ती भी आएगी।आप प्रचूर मात्रा में प्रोटीन ले|
  • फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक्स, चॉकलेट, पिज्जा, बर्गर एंव चाऊमीन आदि का सेवन नियमित रूप से करने से सेक्स ऊर्जा में कमी आने लगती है। ऐसे में इन चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए।
  • क्षमता बढ़ाने के लिए पौष्टिक और संतुलित आहार लेना आवश्यक होता है। लिहाजा आपको तैलीय, मसालेदार और वसायुक्त भोजन को लेने से बचना चाहिए। इससे आप स्वस्थ होगे  ही साथ ही आप अतिरिक्त कॉलेस्ट्रॉल को बढ़ने से भी रोक पाएंगे, जो कि कई बीमारियों की जड़ है।
  • डायटिंग करने, उपवास रखने से आप जरूरी कैलोरी नहीं ले पाते जिससे आपमें कमजोरी आ जाती है। जिससे "काम- Sex " के दौरान आपमें ऊर्जा की कमी के हो जाती है और आप बीमार भी पड़ सकते हैं। ऐसे में आप दिनभर में 2000 कैलोरीयुक्त भोजन अवश्य लें। इससे आप स्वस्थ भी रहेंगे।
आयुर्वेदिक द्रव्य भी इसके लिए हमेशा 
(गर्मी या  हानि नहीं करते, यह एक भ्रम हे )  
विशेषकर सर्दियों के दोरान लिए जाना उचित होगा |
अष्ट वर्ग का चूर्ण (ऋद्धी,ब्रद्धि,मेदा,महामेदा,जीवक,ॠषभक,काकोली,क्षीर काकोली, ) 
या इसके  वर्तमान  प्रतिनिधि द्रव्य-
 खरेंटी, पंजा सालब, शकाकुल छोटी, शकाकुल बड़ी, लम्बा सालब, काली मुसली, सफेद मुसली, और सफ़ेद बहमन
(ये सभी कच्ची आयुर्वेदिक जड़ी बूटी विक्रेताओ विक्रेताओ[अत्तार /पंसारी आदि नामो के ] के यंहा आसानी से मिल जाते हें| सड़क किनारे बेठे हुए जडी-बुटी बेचने वाले यही सब दे कर इसका इलाज करते हे और मनमाना धन ठगते हें ।
इनका कपड छन चूर्ण+ बराबर मिश्री मिला कर प्रतिदिन दो बार, 5 से 10  ग्राम तक  गाय के घी और मलाई वाले दूध के साथ लेने से पुरुषो का पुरुषत्व और महिलायों की प्रजनन शक्ति बढती हे | 
इस चूर्ण को  घर पर सर्दियों में बनाये जाने वाले लड़ुओं में, मेवा/गोंद आदि साथ मिला कर खाया  जाये और गो दुग्ध पिए तो अधिक लाभकारी के साथ लेना भी सहज हो जाता हे | 
बाज़ार में भी मुसली पाक ,सलाम पाक,अदि भी मिलते हें पर वे व्यबसायिक विचार  से बनाये गए होने से अधिक अच्छे नहीं कहे जा सकते| अत ये सामान्य प्रयोग अधिक कारगर होते हें | इनके उपयोग से वजन बड़ने से रोकने के लिए पर्याप्त व्यायाम /योग/परिश्रम भी करना चाहिए | 
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गर्भधारण टिप्स

     विवाह का एक मकसद संतानोत्पति भी होता है। किसी भी महिला के लिए मां बनने से अच्छा कोई अनुभव नहीं होता। हर महिला के जीवन में यह समय कभी न कभी आता हैं।पर यह भी सही हे की गर्भ धारण में अधिकांश तह पुरुष भी जिम्मेदार होता हे।देखे  पुरूषों में बांझपन या नपुंसकता: ।लेकिन कुछ महिलाएं ऐसी भी होती हैं जिन्हें किन्हीं कारणों से गर्भधारण में परेशानी होती है। ऐसे में उनके लिए जानना बेहद जरूरी हैं कि वे गर्भधारण के लिए कैसे सेक्स करें। गर्भधारण में सहायक कौन-कौन सी पोजीशंस हो सकती हैं।  जानें गर्भधारण टिप्स के बारे में।

संभोग की कई ऐसी पोजीशंस बताई गई हैं, जो गर्भधारण में सहायक होती हैं। पति-पत्नी को इन पोजीशंस के बारे में पता होना चाहिए।
लोगों का मानना है कि संभोग के बाद यदि स्त्री पीठ के बल थोड़ी देर लेटी रहे तो गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है।
ऐसा माना जाता है कि गर्भधारण के लिए दिन का समय सबसे अच्छा रहता है क्योंकि दिन के समय आप तरोताजा़ रहते हैं।
गर्भधारण के लिए जरूरी है कि महिलाएं माहवारी के समय गर्भधारण का प्रयास न करें।
सेक्स का ध्येय गर्भधारण है , तो संभोग के दौरान बहुत ज्या‍दा उत्साहित न हो।
गर्भधारण करना बहुत मुश्किल नहीं है लेकिन कुछ कपल्स के लिए ये एक जटिल समस्या बन जाता हैं। ऐसे में गर्भधारण न होने पर डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है।
कई बार पुरूषों या महिलाओं में किसी तरह का यौन विकार होने से गर्भधारण में परेशानी होती है। यदि ऐसा हो तो जल्द से जल्द चिकित्सा शुरू कर देनी चाहिए ।
पुरूष या महिला में किसी भी तरह का रोग होने पर बेझिझक डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए व अपने साथी को इस बारे में बताना चाहिए।
गर्भधारण के लिए मानसिक रूप से तैयार होना भी जरूरी है। कई बार गर्भधारण से पहले महिलाएं डरी हुई होती हैं या फिर उनमें कुछ चीजों को लेकर शंकाएं बनी रहती हैं। जिससे गर्भधारण में समस्या आती है । ऐसे में जरूरी हो जाता है कि महिलाएं पहले पूरी तरह से सुनिश्चित हो कि वाकई वे गर्भधारण और होने वाले बच्चे की परवरिश के लिए तैयार हैं या नहीं।
आज बदलती तकनीक ने जहां हमारी समस्याएं बढ़ाई हैं, वहीं कुछ बातें आसान भी की हैं। ऐसे में आप गर्भधारण से पहले थोड़ी प्लानिंग भी कर सकती हैं।



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चिकित्सा सेवा अथवा व्यवसाय?

स्वास्थ है हमारा अधिकार १

हमारा लक्ष्य सामान्य जन से लेकर प्रत्येक विशिष्ट जन को समग्र स्वस्थ्य का लाभ पहुँचाना है| पंचकर्म सहित आयुर्वेद चिकित्सा, स्वास्थय हेतु लाभकारी लेख, इच्छित को स्वास्थ्य प्रशिक्षण, और स्वास्थ्य विषयक जन जागरण करना है| आयुर्वेदिक चिकित्सा – यह आयुर्वेद विज्ञानं के रूप में विश्व की पुरातन चिकित्सा पद्ध्ति है, जो ‘समग्र शरीर’ (अर्थात शरीर, मन और आत्मा) को स्वस्थ्य करती है|

निशुल्क परामर्श

जीवन के चार चरणौ में (आश्रम) में वान-प्रस्थ,ओर सन्यास अंतिम चरण माना गया है, तीसरे चरण की आयु में पहुंचकर वर्तमान परिस्थिती में वान-प्रस्थ का अर्थ वन-गमन न मान कर अपने अभी तक के सम्पुर्ण अनुभवोंं का लाभ अन्य चिकित्सकौं,ओर समाज के अन्य वर्ग को प्रदान करना मान कर, अपने निवास एमआइजी 4/1 प्रगति नगर उज्जैन मप्र पर धर्मार्थ चिकित्सा सेवा प्रारंंभ कर दी गई है। कोई भी रोगी प्रतिदिन सोमवार से शनी वार तक प्रात: 9 से 12 एवंं दोपहर 2 से 6 बजे तक न्युनतम 10/- रु प्रतिदिन टोकन शुल्क (निर्धनों को निशुल्क आवश्यक निशुल्क ओषधि हेतु राशी) का सह्योग कर चिकित्सा परामर्श प्राप्त कर सकेगा। हमारे द्वारा लिखित ऑषधियांं सभी मान्यता प्राप्त मेडिकल स्टोर से क्रय की जा सकेंगी। पंचकर्म आदि आवश्यक प्रक्रिया जो अधिकतम 10% रोगियोंं को आवश्यक होगी वह न्युनतम शुल्क पर उपलब्ध की जा सकेगी। क्रपया चिकित्सा परामर्श के लिये फोन पर आग्रह न करेंं। ।

चिकित्सक सहयोगी बने:
- हमारे यहाँ देश भर से रोगी चिकित्सा परामर्श हेतु आते हैं,या परामर्श करते हें, सभी का उज्जैन आना अक्सर धन, समय आदि कारणों से संभव नहीं हो पाता, एसी स्थिति में आप हमारे सहयोगी बन सकते हें| यदि आप पंजीकृत आयुर्वेद स्नातक (न्यूनतम) हें! आप पंचकर्म चिकित्सा में रूचि रखते हैं, ओर प्रारम्भ करना चाह्ते हैं या सीखना चाह्ते हैं, तो सम्पर्क करेंं। आप पंचकर्म केंद्र अथवा पंचकर्म और आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रक्रियाओं जैसे अर्श- क्षार सूत्र, रक्त मोक्षण, अग्निकर्म, वमन, विरेचन, बस्ती, या शिरोधारा जैसे विशिष्ट स्नेहनादी माध्यम से चिकित्सा कार्य करते हें, तो आप संपर्क कर सकते हें| सम्पर्क समय- 02 PM to 5 PM, Monday to Saturday- 9425379102/ mail- healthforalldrvyas@gmail.com केवल एलोपेथिक चिकित्सा कार्य करने वाले चिकित्सक सम्पर्क न करें|

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