Rescue from incurable disease

Rescue from incurable disease
लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |
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Is our body its own doctor? -हमारा शरीर स्वयंं चिकित्सक है?

Is our body its own doctor? -हमारा शरीर स्वयंं चिकित्सक है? 
जब भी किसी को कोई रोग होता है तो रोगी उसे तुरंत ठीक करने के लिए कौशिश करने लग जाता है, पहले वह स्वयं अपनी चिकित्सा, किसी टोटके, दवा- आदि से, किसी की सलाह से या चिकित्सक के पास पहुँच जाता है| 
वह यह नहीं जानता कि प्रकर्ति स्वयं चिकित्सक  है, जो उसे स्वस्थ कर देना चाहती है| 
इस बात को निम्न कुछ उदाहरणों से समझ जा सकता है|  
हममें से सभी ने अनुभव क्या होगा की कभी कभी पानी पीते समय या भोजन के समय पानी या खाना श्वास नली में जाने के बाद खांसी उठती है- यह प्रकृतिक रूप से इस तकलीफ को ठीक करने का प्रयत्न है| 
एसा ही तम्बाकू, या कुछ ख़राब खाना आदि पेट में जाने पर उल्टी होने से भी होता है| 
चोट आदि लगाने पर कुछ दिनों में घाव कैसे भर जाता है| 
हड्डी टूटने पर बिना कुछ करे वह कुछ दिनों में कैसे जुड़ जाती है|
अधिक खाने या अनर्गल खाने पीने से उल्टी दस्त इसीलिए लगते है की उस अवांछित खाद्य को शरीर बाहर फेकना चाहता है| 
हमको चाहिए की प्रकृति के इस स्वभाव को समझें, सामान्य छोटी छोटी तकलीफों होने पर कुछ भी दवा आदि न लेकर प्रकृति को अपन काम करने दें, घबराएँ नहीं, सोचें की तकलीफ किन कारणों से हुई है, और प्रकृति उसे हटाने का प्रयत्न कर रही है, उसमें हम सहायक बनें| 
वैध्य मधु सूदन व्यास उज्जैन 
https://healthforalldrvyas.blogspot.com/2024/05/is-our-body-its-own-doctor.html

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समस्त चिकित्सकीय सलाह, रोग निदान एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान (शिक्षण) उद्देश्य से है| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें| इसका प्रकाशन जन हित में आयुर्वेदिक चिकित्सा के ज्ञान, सामर्थ्य, हेतु किया जा रहा है। चिकित्सा हेतु नजदीकी प्राधिक्रत आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लेँ। चिकित्सक प्रशिक्षण हेतु सम्पर्क करै।

वलिष्ठ बनाने वाला भोजन ?- छोटी छोटी बातें-

वलिष्ठ बनाने वाला भोजन ?-     छोटी छोटी बातें- 

          भोजन के विषय में जनता में यह भ्रम फेला हुआ है कि शरीर को शक्ति शाली स्वस्थ्य और वलिष्ठ बनाने के लिए अधिक मूल्य वाले महंगे खाद्य की आवश्यकता होती है, इस विचार में आशिंक भी सत्यता नहीं है| 
सत्य यह है कि उचित समय (भोजन काल), उचित परिमाण (मात्रा) , उचित रूप (भोजन ठोस, तरल, परिपाक या पाचन योग्य बनाने के लिए निर्माण करना)  में, निश्चिन्त होकर ग्रहण किया जाने वाला भोजन सदा लाभ दायक होता है|  
वैध्य मधुसूदन व्यास उज्जैन. (healthforalldrvyas.blogspot.com) https://healthforalldrvyas.blogspot.com/2024/05/blog-post.html

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Irregular life invitation to serious diseases? अनियमित जीवन गंभीर रोगों को आमंत्रण ?


 अनियमित जीवन गंभीर रोगों को आमंत्रण ?

आज का स्वास्थ्य संदेश- क्या आप जानते हैं ?

 संसार की समस्त प्राकृतिक और पशु पक्षियों सहित प्राणी मात्र की गतिविधियाँ तो एक निश्चित समय पर सतत चलती रहतीं हैं| परन्तु हम अधिकांश इंसान अक्सर अपने जीवन की गतिविधयां विशेषकर खाने-पीने का समय नियमित नहीं रखते|

इस अनियमितता का परिणाम है, --- गंभीर रोगों का आमंत्रण { नींद का न आना, बेचेनी, से करवट बदलना, अपचन, विवंध (शोच में कमी) कब्ज, ववासीर, पेचिश , वजन का बढना, और इससे आगे चलकर गंभीर, लीवर रोग, उदर रोग, मूत्र रोग, किडनी, रोग, मेटाबोलिक रोग, प्रोस्टेट बड़ने, आदि जैसे गंभीर रोग}

हिन्दू और जैन धर्म की मान्यता के अनुसार, यदि स्वास्थ जीवन भर ठीक रकना है तो सायंकाल बाद और रात्रि गरिष्ठ भोजन को त्याग दें| और भोजन नाश्ता, चाय, दोपहर भोजन ,रात्रि भोजन आदि सही समय पर होना चाहिए|

प्रतिदिन प्रात अच्छा नाश्ता खाना जरुरी होता है, क्योंकि रात्रि भोजन के बाद १० से १२ घंटे व्यतीत हो चुके होते हैं| इस समय शरीर को अच्छी केलोरी की जरुरत होती है|

नाश्ते के ४  से ५ घंटे बाद दोपहर का खाना खाना चाहिए| अर्थात यदि नाश्ता 7 बजे लिया है तो १२ बजे के लगभग खाना खाना आवशयक है|

दोपहर के इस भोजन या लंच के बाद या ४ घंटे बाद बूस्टर डोज के रूप में फल, खाना उचित है|

दोपहर के भोजन के लगभग ८ घंटे बाद डिनर या रात्रि भोज खाना चाहिए| रात्रि के इस खाने में अच्छे स्वास्थ्य बनांये रखने सुपाच्य और दोपहर की तुलना में हलका कम केलोरी वाला खाना खाना चाहिए| चूँकि इस भोजन के ३ से ४ घंटे में सो जाया करते हैं इसलिए पूरी पकवान और वर्तमान में डिनर पार्टियों में परोसा जाने वाला गरिष्ठ खाना पचाने में शरीर को मुश्किल आती है, इसका परिणाम कई  गंभीर रोगों के द्वारा खोलता है| प्रारम्भ में युवा वस्था में तो इन समस्याओं का पता नहीं चलता पर जब कई वर्ष भोजन की अनियमितता चलती रहती है तब प्रोड़ावस्था, या बुडापे के रोगों के रूप में बेवक्त, और रात्रि के गरिष्ठ भोजन के दुष्परिणाम आते हैं और तब तक देर हो चुकी होती है, वापिस स्वस्थ जीवन नहीं पाया जा सकता| 

हिन्दू धर्म में, और जैन धर्म में इसी कारण सूर्यास्त के बाद भोजन निषिद्ध किया है| हमारे अधिकांश जैन भाई इस का पालन करते है पर हिन्दू भाई इस को भूल गए है, और पश्चात डिनर में गरिष्ठ भोजन को आदर्श मान रोगों को आमंत्रित करते रहते हैं|

आयुर्वेद विज्ञान के अनुसार भी भोजन का क्रम उपरोक्त होना चाहिए|

कुछ विद्वानों ने प्रात: का भोजन रईसों की तरह अधिक केलोरी वाला, दोपहर का भोजन मध्यम वर्गीय सामान्य, और रात्रि भोजन गरीबों के भोजन के सामान, रुखा सुखा, कम केलोरी वाला सुपाच्य रखने की सलाह देते हैं| यह भोजन मन्त्र स्वास्थ के लिए सर्वथा उपयुक्त है|

मधुमेह आदि के रोगियों के लिए तो इससे अच्छा कोई विकल्प नहीं|    

वैद्य मधुसूदन व्यास l

1-2- चैत्र शुक्ल 2080 / 7 मार्च 2023

पूर्व जिला आयुष अधिकारी उज्जैन

वात्सल्य सेवार्थ ओषधालय

MIG 4/1 प्रगति नगर उज्जैन मप्र.

 

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Ideal weight table according to height.


  कद के अनुसार आदर्श  वजन तालिका।  
स्वस्थ व्यक्तियों (स्त्री पुरुषों का आदर्श वजन,उनकी ऊचाई के अनुसार कितना होना चहिये। यह जिज्ञासा सभी को होती है। आप अपने कद के अनुसार वजन देख सकते  है।  
आगे निम्नांकित तालिका में देखें :----  ।

The reason for growing weight, drinking water less - now American research also says!


The reason for growing weight, drinking water less - now American research also says!

वजन बढ़ने का कारण, पानी कम पीना - अब अमेरिकी शोध भी कहता है!
प्राचीन आयुर्वेद अनुसार हजारों वर्षों से कहा गया है की भोजन के पूर्व पानी पीना वजन में कमी, भोजन के साथ पीना वजन को स्थिर, और भोजन के बाद पानी पीना से वजन बड़ता है| 

अब अमेरिकन कैमिकल सोसाइटी ने भी इस संबंध में शोध करने पर पाया कि "खाने  के पहले पानी पी लेने से 3 महीने में करीब सवा 2 किलो वजन कम होने के परिणाम दिखे क्योंकि भोजन से पहले ग्रहण किया गया पानी भोजन में 75 से 90 फीसदी कैलोरी कम ग्रहण करने में मददगार साबित होता है|

Prayer after Awakining.(प्रात:स्मरण).

Prayer after Awakining.
प्रात: स्मरण आयुष्य, जीवन रक्षक, जीवन-शक्ति, Lifemanship है|
अक्सर सुबह का टेलीफोन सन्देश किसी परिजन को लकवा (Paralysis)होने, दिल का दोरा (Heart attack), मस्तिष्क अघात (Brain Stroke), या मृत्यु (Death) होने जैसा दुखद समाचार देता है|

Central obesity risk- What can be some kind of illness unnaturally come out of the stomach.

Q- पेट के मध्यभाग का अप्राकृतिक रूप से बाहर आना क्या किसी तरह की बीमारी हो सकती है. में इससे असहज महसूस कर रहा हूँ? यह प्रश्न किया है भुवनेश्वर, उडीसा के 25 वर्ष के कमलेश

Before Marriage is essential to match the body's horoscope.

क्यों विवाह पूर्व अधिक जरुरी है- 
- शरीर की कुंडली मिलाना? 
चाहे माता-पिता आदि द्वारा तय किया विवाह (अरेंज्ड मेरीज) हो, या गंधर्व विवाह (लव-मेरिज) विवाह मूल रूप से सामाजिक सन्तति वर्धन की प्रक्रिया है, इसी कारण विवाह का सम्बन्ध युवक -युवती के शरीर और स्वास्थ्य से जुडा हुआ हो ही जाता है|   
कई समाजों में विशेषकर हिन्दुओं में जन्म कुंडली मिलाना प्राथमिक माना जाता है, या इसके जैसी ही अन्य बातों पर धर्म के मान से विचार किया जाता है| “पड़े-लिखे” जो स्वयं को विद्वान समझते हें वे भी कुंडली मिलान या इस प्रकार की परम्परा को प्राथमिक आवश्यकता मानते हें|

Careful - From the spray in the toilet.

सावधान - शौचालय में उठने वाली फुहार (spray) से! 
Your toilet too can make your family sick.  आपका टॉयलेट भी आपके परिवार को बीमार  बना सकता है| 
कहीं आपका टॉयलेट ही आपके परिवार को बीमार नहीं बना रहा है? 
आप रोगों के प्रति बड़ा ही सावधानी पूर्ण नजरिया रखते हें, रेल, बस, और सार्वजानिक स्थानों पर किसी के भी खांसते या छींकते समय आप बड़े ही सावधान होते हें, की उनके मुहं से निकली फुहार (स्प्रे), या एरोसोल आपकी साँस के साथ अन्दर न चली जाये| 
परन्तु अधिकतर लोग यह नहीं जानते की शोच के बाद जब हम फ़्लैश चलाते हें तो भी बड़ी ही तेजी से फुहार या एरोसोल ऊपर की और उठती है, जो नजदीक से अनुभव भी की जा सकती है|  

What & Why- do not eat, in the rainy season?

क्या और क्यों - वर्षा ऋतू में नहीं खाना चाहिए? 
         हर मोसम में कई खाद्य हानि कारक होते हें पर अक्सर कुछ लोग कहते सुने जाते हें की "वे तो खाते हें उन्हें कुछ नहीं होता" 
        वारिश के मोसम में पत्तेवाली सब्जियां और विशेष रूप से जो सीधे जमींन पर लगतीं हें जैसे पालक, मेथी आदि, नहीं खाना चाहिए| -

Beware from diabetes.मधुमेह से सावधान,

सावधान आपको मधुमेह {Diabetes} हो रहा ही या होने वाला है:-,
 यह इस बात पर निर्भर है की निम्न में से कितने लक्षण आप पर दिख रहे हें!

Be careful your blood pressure has increased.

सावधान आपका ब्लड प्रेशर बढ़ गया है!! 
  • आपको क्रोध (गुस्सा) अधिक आ रहा है?
  • दिल की धड़कन बड रही है

Depression: Let's Talk '- World Health Day, 7 April 2017, (The main goal of WHO).

Depression: Let's Talk' - विश्व स्वास्थ्य दिवस 7 अप्रैल 2017 का प्रमुख लक्ष्य
"विश्व स्वास्थ्य दिवस पर शुभ कामनाएं"
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू एच ओ) सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रतिवर्ष एक विशेष उद्धेश्य को लेकर विश्व स्वास्थ्य दिन मनाता है|
इस वर्ष २०१७ के लिए जागरूकता का विषय है-
'Depression: Let's Talk'. 'अवसाद: के बारे में बात करें.

What is the reason for the stench of mouth.(मुहं में बदबू),

What is the reason for the stench of mouth.(मुहं में बदबू),
कभी कभी एसा लगता है की लोग आपसे कन्नी काट रहे हें| आप उनके पास जाना चाहते हें, वे आपसे दूर भागते हें|  इसका पता जब चलता है तो बढ़ा ही अपमानित महसूस होता है| एसा हो सकता है और आपको पता ही न हो की आपके मुहं से बदबू आती है|
जी हाँ एसा हो सकता है, आपकी गंध आपके अन्दर बसी हुई होती है तो उसके अच्छे-बुरे होने का आपको पता तब तक नहीं चलता जब तक की कोई आपका हितेषी अपना या मुहं फट आपको बताता नहीं की आपके मुहं से बदबू आ रही है|
जब आपको पता चलता है तो आप इससे मुक्ति पाने में लग जाते हें| परन्तु जब तक आपको मालूम नहीं की इस दुर्गन्ध का करण क्या है आप मुक्ति नहीं पा सकते|
आपको जानना होगा की मुहं की बदबू का कारण क्या है?

Benefits of Drinking Water.

मधुर जलपान ३०/०६/१६ 
शक्कर(चीनी) मिले मीठे जल को पीने से कफ बढता है, और वात घटती है| मिश्री युक्त जल दोष नाशक, और शुक्र वर्धक होता है| गुड युक्त जल मूत्र क्रच्छ दूर करने वाला, और पित्त्कारी होता है| परन्तु पुराने गुड से युक्त जल पित्तनाशक और पथ्य है| शहद युक्त जल त्रिदोष नाशक होता है|

विमर्श 
वात और पित्तज रोग अर्थात जिनमे वेदना, जलन जैसे लक्षण होते हें, में शकर मिला मीठा जल लाभदायक दर्द और जलन को शांत करता है| गुड वाले मीठे जल से मूत्र की कमी दूर हो जाती है, मूत्र खुल कर आता है| जहाँ नया गुड जलन दाह उत्पन्न कर सकता है पर पुराने गुड का पानी उसे शांत कर देता है। शहद युक्त पानी सभी दोषो को सम बना कर लाभ देती है।    
मीठे पानी से रक्त में ग्लूकोज जल्दी पहुँचता है इससे एनर्जी या शक्ति का संचार शीघ्र होने से उसकी कमी से होने वाले दर्द, जलन, में आराम मिलने लगता हे। पानी की कमी या निर्जलीकरन  से वात और पित्त की उत्पन्न समस्याएं तत्काल दूर होने से कष्ट मिट जाता है। 

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जल नेती (नाक से पानी पीना) 

Morning Message-.[प्रभात संदेश- जल विषयक]

मधुर जलपान ३०/०६/१६ 
शक्कर(चीनी) मिले मीठे जल को पीने से कफ बढता है, और वात घटती है| मिश्री युक्त जल दोष नाशक, और शुक्र वर्धक होता है| गुड युक्त जल मूत्र क्रच्छ दूर करने वाला, और पित्त्कारी होता है| परन्तु पुराने गुड से युक्त जल पित्तनाशक और पथ्य है| शहद युक्त जल त्रिदोष नाशक होता है|

विमर्श 
वात और पित्तज रोग अर्थात जिनमे वेदना, जलन जैसे लक्षण होते हें, में शकर मिला मीठा जल लाभदायक दर्द और जलन को शांत करता है| गुड वाले मीठे जल से मूत्र की कमी दूर हो जाती है, मूत्र खुल कर आता है| जहाँ नया गुड जलन दाह उत्पन्न कर सकता है पर पुराने गुड का पानी उसे शांत कर देता है। शहद युक्त पानी सभी दोषो को सम बना कर लाभ देती है।    
मीठे पानी से रक्त में ग्लूकोज जल्दी पहुँचता है इससे एनर्जी या शक्ति का संचार शीघ्र होने से उसकी कमी से होने वाले दर्द, जलन, में आराम मिलने लगता हे। पानी की कमी या निर्जलीकरन  से वात और पित्त की उत्पन्न समस्याएं तत्काल दूर होने से कष्ट मिट जाता है। 

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जल नेती (नाक से पानी पीना) 

सर्वांग अभ्यंग और भाष्प स्नान से मिलता है अच्छा स्वास्थय |

आयु 40 पार आप स्वस्थ्य हैं शुभकामनाएं|

स्वस्थ्य रहना भी है| स्वस्थ्य रहने प्रतिदिन स्नानादि जरुरी है| 
व्यस्त जिन्दगी में इसी के साथ ही सप्ताह में एक बार सर्वांग अभ्यंग [ सारे शरीर पर तेल मालिश] और भाष्प स्नान यदि किया जाता रहे तो --
1- शरीर चुस्त और दुरुस्त [निरोगी] बना रहताहै|
2- थकावट से मुक्ति हल्कापन मिलताहै| 
3- आलस्य दूर होता है|
4- भूख अच्छी लगती है| 
5- नींद अच्छी आतीहै|
6- त्वचा चमक उठती है, कोमल होतीहै, झुर्रियां नही पड़तीं| 
7- मोटापा है तो चर्बी कम होतीहै| 
8- रक्त संचार बढता है इससे ब्लड प्रेशर, सुगर, कोलेस्ट्रोल बड़ने नही पाता, इससे ह्रदय रोग की संभावना मिटती है|
9- हाथ परों, घुटनों, पीठ, जोड़ों में दर्द, जकडन दूर हो जातीहै| 
इसके लिए किसी चिकित्सक से परामर्श भीआवश्यक नहीं, यदि सर्वांग स्नेहन आयुर्वेदीय चरक पद्धत्ति से हो तो सोने पर सुहागा, यह सब किसी भी पंचकर्म सेन्टर में भी मिल सकता है| 
लाभ लें और स्वस्थ्य रहें पुन: निरोगी जीवन केलिए शुभकामनाये|

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आयुर्वेद में अभ्यंग या मालिश "स्नेहन' के अंतर्गत आती है| स्नेहन विषयक जानकारी देखें-  स्नेहन पंचकर्म का पूर्व कर्म तो है ही साथ ही यह कई रोगों के लिए सम्पूर्ण चिकित्सा भी है -- 
समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें| आपको कोई जानकारी पसंद आती है, ऑर आप उसे अपने मित्रो को शेयर करना/ बताना चाहते है, तो आप फेस-बुक/ ट्विटर/ई मेल/ जिनके आइकान नीचे बने हें को क्लिक कर शेयर कर दें। इसका प्रकाशन जन हित में किया जा रहा है।

Rescue from Specific disorders The Overweight / Joint pain / Diabetes and Psoriasis by Panchkarma.(पंचकर्म का से कायाकल्प- स्वयं पर प्रयोग और उसके परिणाम|)

पंचकर्म का से कायाकल्प- स्वयं पर प्रयोग और उसके परिणाम|
Rescue from Specific disorders The Overweight / Joint pain / Diabetes  and Psoriasis by Panchkarma.
डॉ मधु सूदन व्यास
विशेष रोग अधिक वजन/ जोड़ों के कष्ट/ डाईविटिज और सोरायसिस, Psoriasis से मुक्ति की और| 
एजिंग से शरीर कमजोर होता है, धीरे धीरे रोग आक्रमण करते हें, जिनसे कोइ कुशल से कुशल, चिकित्सक भी बच नहीं पाता, देर सवेर सामना होना ही है|
रोग जो मुझे भी हुए!
में दुर्भाग्यवश डाइविटीज, को आने से रोक तो न सका, ओषधियों से एवं एलोपेथिक मित्रों के सहयोग से नियंत्रित अवश्य कर सका| पर बोनस में प्राप्त, सोरायसिस, Psoriasis (जो संपर्क या छूत से नही होती) के कुछ पेच, पेर पर हो गए, जब कई दिन की सामान्य चिकित्सा से लाभ नहीं हुआ, तो पंचकर्म द्वारा ठीक करने का मन बना लिया| क्योंकि इस जिद्धि रोग को एसे ही छोड़ना, उसे सारे शरीर पर विस्तार के लिए आमंत्रित करना जैसा ही सिद्ध होता|

Researching Ayurvedic Drug product by Specialist- see on video

Foundation of establishment of 'AYUSH CENTER.' AROGYA 2015

   देखें विडिओ लिंकAROGYA 2015   

उज्जैन के इस आयुष सेंटर जो की विराट रूप लेकर भारत भर में अपनी शाखायें स्थापति करने जा रहा है की स्थापना की नीव कानपुर उप्र में दिनांक 04-05 अप्रैल 2015 को हुई आयुर्वेद चिकित्सको की एक डॉ. गौरांग जोशी राजकोट के नेतृत्व में डॉ. उमाशंकर निगम मुंबई, डॉ मधुसूदन व्यास उज्जैन, डॉ नवीन जोशी देहरादून, डॉ जी एस तोमर, डॉ ओ पी सिंग, डॉ एम् पी चतुर्वेदी, डॉ विनोद कुमार गंगवार भोपाल, डॉ जी के जैन भोपाल, डॉ राम अरोरा उज्जैन,  डॉ रमेश राजगुरु अहमदनगर महा., डॉ अबरार मुल्तानी भोपाल, डॉ देवाशीष दास ईलाहबाद, डॉ ब्रिजेश प्रताप सिंह वाराणसी, डॉ ओम प्रकाश सिंग B H U, डॉ शशिकांत राय इलाहाबाद, डॉ यू एस राजरिया जुनझुन राजस्थान, डॉ अजित कुमार यादव Mau UP, डॉ देवेश कुमार श्रीवास्तव लखनऊ, ने भाग लिया|

Elimination of harmful bacteria may be transmitted by Panchakarma.

पंचकर्म द्वरा हानिकारक बेक्टीरिया नष्ट किये जा सकते हें|
अमेरिका के होवार्ड विश्वविध्यालय में हुए एक अध्ययन में 73% व्यक्तियों के वजन न घटने का कारण एक हानिकारक बेक्टीरिया को माना गया है|
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चिकित्सा सेवा अथवा व्यवसाय?

स्वास्थ है हमारा अधिकार १

हमारा लक्ष्य सामान्य जन से लेकर प्रत्येक विशिष्ट जन को समग्र स्वस्थ्य का लाभ पहुँचाना है| पंचकर्म सहित आयुर्वेद चिकित्सा, स्वास्थय हेतु लाभकारी लेख, इच्छित को स्वास्थ्य प्रशिक्षण, और स्वास्थ्य विषयक जन जागरण करना है| आयुर्वेदिक चिकित्सा – यह आयुर्वेद विज्ञानं के रूप में विश्व की पुरातन चिकित्सा पद्ध्ति है, जो ‘समग्र शरीर’ (अर्थात शरीर, मन और आत्मा) को स्वस्थ्य करती है|

निशुल्क परामर्श

जीवन के चार चरणौ में (आश्रम) में वान-प्रस्थ,ओर सन्यास अंतिम चरण माना गया है, तीसरे चरण की आयु में पहुंचकर वर्तमान परिस्थिती में वान-प्रस्थ का अर्थ वन-गमन न मान कर अपने अभी तक के सम्पुर्ण अनुभवोंं का लाभ अन्य चिकित्सकौं,ओर समाज के अन्य वर्ग को प्रदान करना मान कर, अपने निवास एमआइजी 4/1 प्रगति नगर उज्जैन मप्र पर धर्मार्थ चिकित्सा सेवा प्रारंंभ कर दी गई है। कोई भी रोगी प्रतिदिन सोमवार से शनी वार तक प्रात: 9 से 12 एवंं दोपहर 2 से 6 बजे तक न्युनतम 10/- रु प्रतिदिन टोकन शुल्क (निर्धनों को निशुल्क आवश्यक निशुल्क ओषधि हेतु राशी) का सह्योग कर चिकित्सा परामर्श प्राप्त कर सकेगा। हमारे द्वारा लिखित ऑषधियांं सभी मान्यता प्राप्त मेडिकल स्टोर से क्रय की जा सकेंगी। पंचकर्म आदि आवश्यक प्रक्रिया जो अधिकतम 10% रोगियोंं को आवश्यक होगी वह न्युनतम शुल्क पर उपलब्ध की जा सकेगी। क्रपया चिकित्सा परामर्श के लिये फोन पर आग्रह न करेंं। ।

चिकित्सक सहयोगी बने:
- हमारे यहाँ देश भर से रोगी चिकित्सा परामर्श हेतु आते हैं,या परामर्श करते हें, सभी का उज्जैन आना अक्सर धन, समय आदि कारणों से संभव नहीं हो पाता, एसी स्थिति में आप हमारे सहयोगी बन सकते हें| यदि आप पंजीकृत आयुर्वेद स्नातक (न्यूनतम) हें! आप पंचकर्म चिकित्सा में रूचि रखते हैं, ओर प्रारम्भ करना चाह्ते हैं या सीखना चाह्ते हैं, तो सम्पर्क करेंं। आप पंचकर्म केंद्र अथवा पंचकर्म और आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रक्रियाओं जैसे अर्श- क्षार सूत्र, रक्त मोक्षण, अग्निकर्म, वमन, विरेचन, बस्ती, या शिरोधारा जैसे विशिष्ट स्नेहनादी माध्यम से चिकित्सा कार्य करते हें, तो आप संपर्क कर सकते हें| सम्पर्क समय- 02 PM to 5 PM, Monday to Saturday- 9425379102/ mail- healthforalldrvyas@gmail.com केवल एलोपेथिक चिकित्सा कार्य करने वाले चिकित्सक सम्पर्क न करें|

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