Rescue from incurable disease

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लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |
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  • Careful - From the spray in the toilet.

    सावधान - शौचालय में उठने वाली फुहार (spray) से! 
    Your toilet too can make your family sick.  आपका टॉयलेट भी आपके परिवार को बीमार  बना सकता है| 
    कहीं आपका टॉयलेट ही आपके परिवार को बीमार नहीं बना रहा है? 
    आप रोगों के प्रति बड़ा ही सावधानी पूर्ण नजरिया रखते हें, रेल, बस, और सार्वजानिक स्थानों पर किसी के भी खांसते या छींकते समय आप बड़े ही सावधान होते हें, की उनके मुहं से निकली फुहार (स्प्रे), या एरोसोल आपकी साँस के साथ अन्दर न चली जाये| 
    परन्तु अधिकतर लोग यह नहीं जानते की शोच के बाद जब हम फ़्लैश चलाते हें तो भी बड़ी ही तेजी से फुहार या एरोसोल ऊपर की और उठती है, जो नजदीक से अनुभव भी की जा सकती है|  
    हम जानते हें की सभी यूरोपियन या इंडियन शोचालय सीट में एक निश्चित स्तर तक पानी पहिले से ही भरा होता है| इस पानी के स्तर की ठीक नीचे करोड़ों कीटाणु या बेक्टीरिया पनपते रहते हें| इन कीटाणुओं को सामान्य रूप से प्रयोग किये जाने वाले किसी भी टॉयलेट क्लीनर से भी साफ नहीं किया जा सकता| इसलिए ये दिन रात अपनी संख्या बढ़ते ही रहते हें| 
    जब भी हम फ्लश खोल कर गंदगी को बहाते हें तब तेजी से गिरते पानी के कारण  में 1 μm से भी छोटे व्यास के कण बन कर फुहार या एरोसोल के रूप में ऊपर की और उठते हें| इन कणों में जल स्तर के नीचे स्थित लाखों बेक्टीरिया, जीवाणु भी होते हें| 
    एक वैज्ञानिक अध्ययन जिसमें इसका चित्र विशेष केमरे से लिया गया था, यह पाया गया यह फुहार जो सामान्य आँखों से देखी नहीं जा सकती 15 फिट दूर तक चली जाती है|  
    उठती हुई यह एरोसोल पास ही खड़े व्यक्ति के शरीर, त्वचा, साँस द्वारा अन्दर चली जाती है, और साथ ही आसानी से पहुँच जाते हें वे सूक्ष्म बेक्टीरिया,  जिनमें सर्दी, जुकाम, पेचिश, हेजा, आदि आदि के कीटाणु होते हें, और व्यक्ति रोगी हो जाता है, और कारण पता भी नहीं होता| 
    यह नहीं ये उडती हुई फुहारें जो 15 फिट दुरी तक जा सकतीं है, बाथरूम में रखे ब्रश, तोलिया, कपडे, कप, आदि के साथ दीवारों, दरवाजों और उनके हेंडिल आदि पर भी जम जातीं है, जहाँ से आसानी से बेक्टीरिया धुले हुए हाथों में भी चिपक कर बाथ रूम में आने जाने वाले प्रत्येक पुरुष, स्त्री, और बच्चों को रोग से प्रभावित कर देता है| 
    फिर इस अद्रश्य प्रेत पिशाच रूपी कीटाणुओं बचने के लिए क्या करें?
    • संभव हो शोचालय और बाथरूम अलग अलग बनायें जिसमें अन्य कोई बस्तु नहीं रखी जाये| 
    • शोचालय को फ्लश करने के पाहिले हमेशा ढ़क्कन ढक दें| 
    • इन्डियन सीट पर भी ढ़क्कन लगायें| 
    • एक्स्जोस्ट फेन लगाये| 
    • ब्रश, कंघा, शेविंग का सामान, आदि आदि कवर कर, बंद हो सकने वाले शेल्फ या अलमारी आदि
    • में ही रखें| 
    • ब्रश आदि इन संसाधनों को भी प्रयोग के पूर्व अच्छी तरह साफ करें|
    • बाथ रूम के दीवाल, दरवाजे, हेंडिल, नल की टोंटी, बाशबेसन नियमित रूप से अच्छे कीटाणु नाशको से धोते -साफ करते रहें| 
    • हमेशा शोचालय सीट, उसका ढक्कन, बाशबेसन अलग अलग ब्रश/ कपडे से धोएं ताकि बेक्टीरिया स्थानांतरित न हो पायें| 
    • साफ़ करने वाले ब्रश आदि को भी अच्छी तरह जीवाणु रहित घोल से धोते रहें|  
    • बाथ रूम में नियमित कीटाणु नाशक स्प्रे करते रहें|  

    इन उपरोक्त सामान्य बातों का ध्यान रख आप स्वयं और अपने परिवार को भी कई रोगों से बचाकर स्वस्थ्य रख सकेंगे| 
    डॉ मधु सूदन व्यास 

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