Rescue from incurable disease

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लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |
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Erectile Dysfunctioning of male sex organ is not Impotence.(ध्वज-भंग होना नपुंसकता नहीं)

पुरुषों में  ध्वज-भंग होना नपुंसकता नहीं होती.  
Erectile Dysfunctioning is not Impotence.
नपुंसकता का अर्थ सामान्यत: लिंग में उत्तेजना में कमी (loss of erection ध्वज-भंग) माना जाता है| परन्तु वास्तव में यह सच नहीं है, नपुंसकता का अर्थ है, प्रजनन क्षमता का अभाव
स्पष्ट रूप से समझ लें की जो ध्वज-भंग (loss of erection) के कारण सेक्स में असमर्थ होते हें, वे भी प्रजनन कर सन्तान उत्पन्न कर सकते हें, इसलिए वे नपुंसक नहीं होते, उनकी इस कमी को दूर किया जा सकता है|
ध्वज भंग और नपुंसकता के कारण- ध्वज भंग (loss of erection) जिसे नपुंसकता समझा जाता है के इन कारणों को जानने से हम इसकी चिकित्सा कर पाएंगे|
संक्षेप में समझ लें की, यदि कोई व्यक्ति किसी भी कारण

Eating more fat leads to impotence.- Experiments & Results.

अधिक वसा सेवन से हो जाती है नपुंसकता- एक शोध परिणाम
देखा जाता है की पुरुष सबसे अधिक सचेत अपने पुरुषत्व के प्रति होता है| वह जीवन भर केवल यही चाहता है की वह हमेशा “मर्द” बना रहे| पुरुषत्व या मर्दानगी का कारण शुक्राणु का शरीर में बनते रहना होता है| परतु आश्चर्य की बात है की स्वाद और आनंद के लिए वर्तमान में जो भी चिकनाई युक्त खाना खाता वे शुक्र उत्पादन को कितनी हानि पहुँचा सकते हें यह वह नहीं जानता|  
हमारे देश में प्रतिदिन हलवा, खीर, पूरी मिठाइयाँ और पकवान, और कई मांसाहारी पकवान बनाये और खाए जाते हें, इन पकवानों को पोष्टिक भी माना  जाता है| 

हाइड्रोसिल क्या है और इसका आयुर्वेदिक इलाज क्या है?

प्रश्न- हाइड्रोसिल क्या है? और इसका आयुर्वेदिक इलाज क्या है?
उत्तर - 
         हाइड्रोसिल (Hydrocele) अंडकोशों के पास थैली में पानी जैसा तरल पदार्थ भरने और सूजन होने से होता है| यह दोनों अंडकोष के एक दर्द रहित वृद्धि है| यह शोथ कभी कभी बहुत बड़ा, भद्दा और असुविधाजनक हो सकता है, लेकिन यह आम तौर पर दर्द नहीं होता| यह आम तौर पर खतरनाक भी नहीं होता| Hydroceles नवजात शिशुओं में या आमतोर पर देखने मिलता है| बाद में भी किसी भी उम्र में हो सकता है।

हस्तमेथुन की आदत ओर व्यसन या लत बनती है तो हानी होना ही है।

प्रश्न -
    hello sir mera age 26 shal hai 14 shal se roj hatsmathun mai din mai 2,3 baar.leta hu ish se koi problem nhi na hota h sir aghar hota h tho koi upay batay sir plese
  • आर. रॉय

उत्तर -
यह प्राकृतिक क्रिया नहीं है। उत्तेजना में एकाध बार हस्तमैथुन से न हानी होती है ओर न ही व्यसन बनता है। पर यदि रोज होने लगे तो, व्यसन बन जाता है।  हस्तमेथुन जब रोज की आदत ओर एक नशा जैसा व्यसन या लत बनती है तो हानी होना ही है।

योनि से बदबूदार पानी निकलता है,खुजली ओर दर्द भी होता है, क्या करूँ?

Q -  मुझे योनि से बदबूदार पानी निकलता है,खुजली ओर दर्द भी होता है। बढ़ी कमजोरी लगती है, किसीको यह बात बताने में शर्म आती है, क्या करूँ?
 एक बहिन आयु 36 वर्ष। 

A-   अगर किसी महिला की योनि से लगातार 6 महीनों से स्राव होने के साथ-साथ उसमें खुजली होती है।
संबंध बनाते वक्त दर्द होता है। पेशाब करने के वक्त उसे परेशानी होती है। तब यह प्रदर रोग जो ट्राइकोमोनास के संक्रमण से होता है, हो सकता है।

फिल्मी सितारों की तरह आकर्षक शरीर कैसे पाये।

हमफिल्मी सितारों की तरह आकर्षक शरीर कैसे पाये। 
सब जानते हें, कि शुद्ध रक्त ही स्वास्थ्य, सुगठित सुंदर शरीर ओर शक्ति का प्रधान आधार होता है। शरीर में जितना अधिक रक्त बनता है, शरीर उतना ही स्वस्थ्य ओर सबल रहता है। अच्छे भोजन से अच्छा रक्त तो बनाता है, पर शरीर में रक्त के संचारित होकर शक्ति प्रदान करने के दोरान मृत सेल्स,ओर कई अशुद्धियाँ इसमें शामिल हो जाती हें। इसे बाहर निकाल फेकना भी जरूरी होता है। व्यायाम भी शरीर की गंदगी बाहर निकालने का एक तरीका है, शरीर की सक्रियता प्राणी के पेदा होते ही प्रकर्ति से मिल जाती है। बच्चे का रोना। हिलना, फिर हाथ पैर चलाने से लेकर उम्र भर बढ़ती शारीरिक सक्रियता एक प्रकार का व्यायाम ही होता है।

नाइटफॉल की समस्या से बचने का क्या उपाय है?

Q- muj nitfel hai to koi oupay btaiy.  भवदीय, mukesh kuldeep 

A- एसा होना कोई विशेष रोग या खराबी नहीं है। यह एक सामान्य बात है, जो अधिकांश अविवाहित नवयुवको मेँ पाई जाती है। उत्तेजक वातावरण/पत्रिकाए/ फिल्मे/ पोर्न साइट्स/ कामुक कल्पनाये, एवं अधिक मिर्च मसाले युक्त चाट-पकोड़ी खाने से अधिक होती हे, इनकी अधिकता से बचें। अधिक होने पर चिकित्सक से संपर्क करें। 
इसको विस्तार से निम्नानुसार समझें-
    वीर्य या सीमेन हमेशा बनता ही रहता है। इसमें से 99 फीसदी तरल या सीमेन की मात्रा सेमिनल वैसिकल और प्रोस्टेट ग्रंथि में बनती है। कुल वीर्य में से एक प्रतिशत से भी कम मात्रा शुक्राणुओं की होती है। ये हम बिना माइक्रोस्कोप के नहीं देख सकते। अधिक वीर्य (सीमेन) सामान्य तरीके से बाहर नहीं निकलता तो खुद निकल जाया करता है। जैसे पानी से लबालब भरे ग्लास में और पानी भरने की कोशिश करेंगे तो पानी छलक जाएगा। इसी तरह प्राणियों का सीमेन, स्वप्नमैथुन या नाइटफॉल के जरिए बाहर आ जाता है। अनिश्चित समय के लिए सीमेन रोककर नहीं रखा जा सकता। जिस तरह मल-मूत्र, आदि को हमेशा रोके रखना मुमकिन नहीं होता, उसी तरह वीर्य को भी अनिश्चित समय के लिए रोककर रखना नामुमकिन है।

काम शक्ति का स्त्रोत -सालम मिश्रीओर उसके चमत्कार।

शक्ति का स्त्रोत सालम मिश्री - या सालम पंजा  
शक्ति का स्त्रोत सालम मिश्री   
       अक्सर कुछ आदिवासी कबीले के स्त्री पुरुषों को सड़क पर मजमा लगाए, थेले टांग कर जड़ी बूटी बेचते हुए अकसर सभी ने देखा होगा। ये सालम मिश्री ले लो जेसी आवाज भी लगते देखे जाते हें। जिज्ञासा वश जब कोई उनसे पूछे तो वे मर्दांनगी की दवा बताते हें। कई लोग ले भी लेते हें विशेषकर ग्रामीण,  उसके उपयोग के बाद लाभ होने पर उनके अन्य साथी भी आकर्षित होते हें। अधिकांश लोग यह नहीं जानते की ये क्या हे?

पोरुषीय शक्ति [सेक्सुयल पावर] - केसे मिले ?

ताकत या शक्ति दायक ओषधि आदि के बारे में जब भी कोई विचार करता हे, तब अपने मान से कई  बातें सोची जा सकती हें। एक यह की उसे खाकर कोई भी बड़ा पहलवान बन जाएगा? या पोरुष शक्ति में बृद्धी होगी? या फिर मस्तिष्क की शक्ति बडेगी? या इसी प्रकार से ओर भी कई विचार !
शक्ति की इस बात को अच्छी तरह से समझने के लिए आयुर्वेद द्वारा वर्णित सिद्धान्त या ज्ञान को समझना होगा। आयुर्वेद में धातुओं की संख्या सात बताई गई हें। 1 रस , 2 रक्त,  3 मांस,  4  मेद, 5 अस्थि, 6 मज्जा, ओर 7 शुक्र। इसी के आगे एक धातु "ओज"' को भी आठवीं धातु मान लिया गया हे। यहाँ यह बात समझने की हे की इसका मतलब मेटल से या निकालने वाले खून, या मांस आदि से नहीं हे। शरीर में पाये जाने वाले ये रक्त आदि इन धातुओं की प्रमुखता वाले पदार्थ मात्र हें। 
हम जो भी कुछ खाते पीते, या अन्य शिरा, गुदा, नाक, आदि अंगों के माध्यम से लेते हें, वह सर्व प्रथम "रस" में परिवर्तित होता हे, इस रस की ही सहायता से शरीर के विभिन्न भागों में रक्त ,मांस आदि धातुयें क्रम से बनती हें। ओर ये धातुयें शरीर की आवश्यकता ओर परिश्रम, आराम, आदि के अनुसार अपने समान गुणो वाले रक्त , माँस आदि सभी शारीरिक वस्तुओं की उत्पत्ति करती हें, ओर उन्हे संभालकर रख लेती हें , जिनका उपयोग भोज्य पदार्थो के अकाल[फास्टिंग] के अवसर पर शरीर द्वारा किया जाता हे। 
 रस से शुक्र तक निर्माण एक प्राकर्तिक प्रक्रिया हे, इसमें किसी भी अवरोध का कारण प्रक्रिया की अस्वाभिकता हे, जिन्हे हम रोग या विकार के नाम से जानते हें। 
 नियमित जीवन के कारण यह प्रक्रिया स्वभाविक चलती रहती हे। आवश्यकता के अनुसार इन एकत्र धातुओं को वांछित शक्ति के रूप में अर्थात पोरुष शक्ति, शारीरिक शक्ति, मानसिक शक्ति, आदि में परिवर्तित की जा सकती हें। 
उदाहरण के लिए यदि हम पहलवान बनाना चाहते हें तो शारीरिक शक्ति माँस- पेशी ओर अस्थि[हड्डियों] को मजबूत बनाना होगा इसके लिए अत्यधिक शारीरिक श्रम कसरत आदि करनी होगी। इसी प्रकार बोद्धिक शक्ति के लिए बोद्धिक श्रम करना होगा। इसी प्रकार से अन्य शक्ति का विचार किया जा सकता हे। 
पोरुषीय शक्ति [सेक्सुयल पावर] किसी भी प्राणी की स्वाभाविक आवश्यकता हे, क्योकि इसीके माध्यम से नई संतान का जन्म होता हे। इसीलिए प्रकृर्ति ने प्रत्येक को इसके लिए स्वभाविक व्यवस्था दी हे।  अत: इसके लिए कुछ विशेष योजना नहीं करनी होगी। बस यह ध्यान रखना होगा की सब कुछ प्राक्रतिक रूप से चलता रहे। किसी भी प्रकार की जीवन चर्या की अस्वाभिकता इसमे हानी कारक होगी। 
वर्तमान में इसी जीवन चर्या को मनमाने तरीके से अपनाने के कारण इसमें कमी महसूस की जाती हे। यदि कमी हे तो सर्व प्रथम जीवन चर्या को बदल कर ही पुन: खोई  पोरुषीय शक्ति प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए प्रयुक्त होने वाले ओषधि आदि द्रव्य भी तभी कारगर होंगे जब की हम जीवन चर्या सुधार लेंगे, ओर सुधरी ही जीवन चर्या वालों को कोई पोरुषीय ओषधि लेने की जरूरत ही नहीं। 
सफल सेक्स के लिए किसी भी प्रकार की ओषधि नहीं चाहिए। बस चाहिए तो "शांत मन" "चिंता थकावट रहित सामान्य शरीर" "एकाग्रता"। कोई भी ओषधि क्रमश: रस रक्त आदि का निर्माण करती हुई ही शुक्र बना सकते हे। जो पोरूष का कारण होता हे। 
सीधे सीधे मात्र घंटे दो घंटे में किसी भी प्रकार की उत्तेजक या मादक ओषधि या पदार्थ का सेवन क्षणिक उत्तेजना देकर पुरुष होने का भान करा तो सकते हें, पुरुष बना नहीं सकते। हाँ व्यभिचारी ओर अपराधी जरूर बना सकते हें। इनका प्रभाव हटते ही  व्यक्ति को तुच्छ होने की प्रतीति होने लगती ओर ओर मर्द कहलाने की भावना अपराधी बना सकती हे।  
आयुर्वेद में भी कई बाजीकारक [पोरूष वर्धक] खाध्य ओर ओषधियाँ वर्णित की हें, इनमें से अधिकतर शारीरिक दोषों के सुधार के साथ पोरुषीय शक्ति बड़ाती हें, पर इन सब के साथ ही नियमित जीवन की सलाह मानना भी आवश्यक होता हे। जिन्हे  मान कर अपनी भूलो के परिणाम स्वरूप उत्पन्न सेक्स समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता हे। 
यदि सेक्स की भावना को नियंत्रित रख सके, या सही आवश्यक मात्रा में प्रयोग कर सकें तो धातु परिपाक के अंत में आठवीं धातु जिसे "ओज" कहा गाया हे वह शरीर पर विशेष रूप से चेहरे पर झलकने लगता हे। व्यक्ति सूर्य के समान देदीप्यमान हो जाता हे।  

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समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें|

अलसी यानी फ्लैक्सीड- सेक्स समस्याओं का उपचार



 अलसी एक ऐसी ही जड़ी बूटी है जो कि ओमेगा 3 फैटी एसिड का महत्वपूर्ण स्रोत है। यह तो हम जानते ही हैं कि शरीर को चुस्त-दुरूस्त रखने में ओमेगा 3 फैटी एसिड का बहुत बड़ा योगदान है। लेकिन क्या आप जानते हैं अलसी यानी फ्लैक्सीड के जरिए तमाम तरह की सेक्स समस्याओं से निजात पाई जा सकती हैं।
प्राकृतिक जड़ी बूटियों का शरीर को स्वस्थ रखने और
कई  गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए आज के समय
 में प्राकृतिक जड़ी बूटियों का बहुत महत्व है, इनका
असर बहुत प्रभावशाली होता है और कोई
 साइड इफेक्ट भी नहीं होता।
 अलसी क्या है? अलसी का उपयोग कैसे किया जाता है और किस तरह अलसी से सेक्स समस्याओं का उपचार किया जा सकता है।  जानें अलसी से सेक्स समस्याओं के उपचार के बारे में कुछ और दिलचस्प बातें।
अलसी क्या है?
अलसी {अलसी स्टार फूड }एक जड़ी बूटी है जिसमें लिनोलेनिक नामक एसिड पाया जाता है जो कि ओमेगा 3 फैटी एसिड का महत्वपूर्ण स्रोत है। इतना ही नहीं अलसी एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर औषधी है जो कि व्‍यक्ति को प्रोटेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से भी बचाती हैं।
अलसी का प्रयोग
पुरूषों को आमतौर पर बढ़ती उम्र में प्रोटेस्ट कैंसर हो जाता है जो कि सेक्स समस्याओं का मुख्य कारक है। प्रोटेस्ट कैंसर से ब्लैडर कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। अलसी के सेवन से ना सिर्फ सेक्स समस्याओं से बचा जा सकता है बल्कि कैंसर जैसी भयंकर बीमारियों से भी बचा जा सकता है।
अलसी को चूर्ण, गोली के रूप में या फिर खाने के साथ मिक्स करके भी लिया जा सकता है।  
 विरूद्ध आहार-विहार:अर्थ हे, एक साथ नहीं 
अलसी एक प्राकृतिक तत्व है ।अलसी के सेवन से आप कुछ सेक्स समस्या्ओं जैसे जल्दी उत्तेजित होना या सेक्स के दौरान नर्वस होना, शारीरिक दुर्बलता होना, सेक्स में रूचि कम होना, बांझपन, बार-बार गर्भपात होना, स्तनपान के दौरान दूध ना आना इत्यादि समस्याओं से रोजाना अलसी का सेवन करके निजात पा सकते हैं।
क्या कहते हैं शोध?
हाल ही में आए शोध में भी इस बात को पुख्ता किया गया कि अलसी यानी फ्लैक्सीड से आप तमाम गंभीर सेक्स समस्याओं से भी निजात पा सकते हैं। शोधों के मुताबिक, यदि किसी को कोई सेक्स समस्या होती है तो उसका मुख्य कारण पेल्विक की कोशिकाओं में रक्त का ठीक तरह से संचार ना होना। लेकिन जब आप इस समस्या के दौरान अलसी का प्रयोग करते हैं तो आपकी रक्त वाहिनियां खुल जाती हैं और धीरे-धीरे रक्त वाहिनियों में रक्त का संचार भी बढ़ जाता है। इतना ही नहीं शोधों में यह भी बता सामने आई है कि जिन लोगों की सेक्स में रूचि नहीं होती उनकी उत्तेजना बढ़ाने में अलसी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दरअसल अलसी{अलसी स्टार फूड } में कई गुणकारी तत्व मौजूद होते हैं इनमें से उत्तेजना बढ़ाने वाला एक तत्व एफरोडाइसियेक्स भी मौजूद होता है।

समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें|

पुरुषत्व बढाने/ और शक्ति(स्त्री-पुरुष दोनों को) देने बाले खाद्य और आयुर्वेदिक औषधियां |

 पुरुषत्व बढाने/ और शक्ति(स्त्री-पुरुष दोनों को) देने बाले खाद्य और आयुर्वेदिक औषधियां |
सर्दियों के मोसम में जब सबकी अग्नि तेज हो जाती हे, और सबकुछ हजम करने की शक्ति होती हे और वर्ष भर के लिए पोरुष-शक्ति/या स्टेमिना  बनाये  रखने के लिए यह एक अच्छा समय माना जाता हे, तब सभी का ध्यान परंपरागत बनाये जाने वाले लडुओपर जाता हे | आधुनिक लोग जो यह सब पसंद नहीं करते और जो अपने खान-पान पर सही तरह से ध्यान नहीं दे पाने से कई बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। इससे  सेक्स क्षमता पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। शरीर को शक्तिशाली बनाने और ऊर्जा प्राप्त करने के लिए उत्तम एवं पौष्टिक आहार का सेवन करना जरुरी हो जाता हे ।
 पोरुषीय शक्ति [सेक्सुयल पावर] - केसे मिले ?
निम्न कुछ खाद्य/आयुर्वेदिक द्रव्य के  सेवन से  इसको बरक़रार रखा जा सकता हे |
  • क्षमता बढ़ाने में शहद तथा भीगे हुए बादाम या किशमिश को दूध में मिलाकर प्रतिदिन पीने से बहुत लाभ मिलता है।
  • बादाम, किशमिश और मनुक्का को भिगोकर नाश्ते में लेने से भी लाभ होता है।
  • हरी सब्जी और छिलकों वाली दाल का सेवन चपाती के साथ करें। चपाती मक्खन या मलाई के साथ लें।
  • भोजन में सलाद का भरपूर उपयोग और प्याज, लहसुन तथा अदरक का संतुलित सेवन करें।
  • शक्ति  को बढ़ाने या बरकरार रखने के लिए प्राकृतिक भोजन का सेवन करना चाहिए। जैसे- अन्न, ताजी हरी सब्जियां, सलाद, बिना पॉलिश किया चावल, ताजे फल, सूखे मेवे, चोकरयुक्त आटे की रोटिया, अंकुरित खाद्यान्न, दूध, घी, अंडा तथा समुद्र से प्राप्त होने वाला भोजन इत्यादि।
  • शाकाहार का सेवन करने से सेक्स क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है। इसमें आप दाल, अनाज, दूध तथा दूध से बने पदार्थ ले सकते हैं।
  • तमाम शोधों में भी साबित हो चुका है कि मांसाहारी व्यक्ति की तुलना में शाकाहारी व्यक्ति और अधिक प्रभावशाली ढ़ंग से सेक्स करने में सक्षम होता है।
  • आपको  क्षमता बढ़ाने के लिए मांसाहारी के बजाय शाकाहारी भोजन लेना चाहिए और उसमें भी नियमित रूप से हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करना चाहिए।
  •  क्षमता में वृद्धि करने के लिए प्रोटीन और विटामिन बहुत मददगार साबित होते हैं। इसीलिए आपको अपने भोजन में प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों को लेना चाहिए जिससे आपके शरीर में फुर्ती भी आएगी।आप प्रचूर मात्रा में प्रोटीन ले|
  • फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक्स, चॉकलेट, पिज्जा, बर्गर एंव चाऊमीन आदि का सेवन नियमित रूप से करने से सेक्स ऊर्जा में कमी आने लगती है। ऐसे में इन चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए।
  • क्षमता बढ़ाने के लिए पौष्टिक और संतुलित आहार लेना आवश्यक होता है। लिहाजा आपको तैलीय, मसालेदार और वसायुक्त भोजन को लेने से बचना चाहिए। इससे आप स्वस्थ होगे  ही साथ ही आप अतिरिक्त कॉलेस्ट्रॉल को बढ़ने से भी रोक पाएंगे, जो कि कई बीमारियों की जड़ है।
  • डायटिंग करने, उपवास रखने से आप जरूरी कैलोरी नहीं ले पाते जिससे आपमें कमजोरी आ जाती है। जिससे "काम- Sex " के दौरान आपमें ऊर्जा की कमी के हो जाती है और आप बीमार भी पड़ सकते हैं। ऐसे में आप दिनभर में 2000 कैलोरीयुक्त भोजन अवश्य लें। इससे आप स्वस्थ भी रहेंगे।
आयुर्वेदिक द्रव्य भी इसके लिए हमेशा 
(गर्मी या  हानि नहीं करते, यह एक भ्रम हे )  
विशेषकर सर्दियों के दोरान लिए जाना उचित होगा |
अष्ट वर्ग का चूर्ण (ऋद्धी,ब्रद्धि,मेदा,महामेदा,जीवक,ॠषभक,काकोली,क्षीर काकोली, ) 
या इसके  वर्तमान  प्रतिनिधि द्रव्य-
 खरेंटी, पंजा सालब, शकाकुल छोटी, शकाकुल बड़ी, लम्बा सालब, काली मुसली, सफेद मुसली, और सफ़ेद बहमन
(ये सभी कच्ची आयुर्वेदिक जड़ी बूटी विक्रेताओ विक्रेताओ[अत्तार /पंसारी आदि नामो के ] के यंहा आसानी से मिल जाते हें| सड़क किनारे बेठे हुए जडी-बुटी बेचने वाले यही सब दे कर इसका इलाज करते हे और मनमाना धन ठगते हें ।
इनका कपड छन चूर्ण+ बराबर मिश्री मिला कर प्रतिदिन दो बार, 5 से 10  ग्राम तक  गाय के घी और मलाई वाले दूध के साथ लेने से पुरुषो का पुरुषत्व और महिलायों की प्रजनन शक्ति बढती हे | 
इस चूर्ण को  घर पर सर्दियों में बनाये जाने वाले लड़ुओं में, मेवा/गोंद आदि साथ मिला कर खाया  जाये और गो दुग्ध पिए तो अधिक लाभकारी के साथ लेना भी सहज हो जाता हे | 
बाज़ार में भी मुसली पाक ,सलाम पाक,अदि भी मिलते हें पर वे व्यबसायिक विचार  से बनाये गए होने से अधिक अच्छे नहीं कहे जा सकते| अत ये सामान्य प्रयोग अधिक कारगर होते हें | इनके उपयोग से वजन बड़ने से रोकने के लिए पर्याप्त व्यायाम /योग/परिश्रम भी करना चाहिए | 
समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान ,एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें |.
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चिकित्सा सेवा अथवा व्यवसाय?

स्वास्थ है हमारा अधिकार १

हमारा लक्ष्य सामान्य जन से लेकर प्रत्येक विशिष्ट जन को समग्र स्वस्थ्य का लाभ पहुँचाना है| पंचकर्म सहित आयुर्वेद चिकित्सा, स्वास्थय हेतु लाभकारी लेख, इच्छित को स्वास्थ्य प्रशिक्षण, और स्वास्थ्य विषयक जन जागरण करना है| आयुर्वेदिक चिकित्सा – यह आयुर्वेद विज्ञानं के रूप में विश्व की पुरातन चिकित्सा पद्ध्ति है, जो ‘समग्र शरीर’ (अर्थात शरीर, मन और आत्मा) को स्वस्थ्य करती है|

निशुल्क परामर्श

जीवन के चार चरणौ में (आश्रम) में वान-प्रस्थ,ओर सन्यास अंतिम चरण माना गया है, तीसरे चरण की आयु में पहुंचकर वर्तमान परिस्थिती में वान-प्रस्थ का अर्थ वन-गमन न मान कर अपने अभी तक के सम्पुर्ण अनुभवोंं का लाभ अन्य चिकित्सकौं,ओर समाज के अन्य वर्ग को प्रदान करना मान कर, अपने निवास एमआइजी 4/1 प्रगति नगर उज्जैन मप्र पर धर्मार्थ चिकित्सा सेवा प्रारंंभ कर दी गई है। कोई भी रोगी प्रतिदिन सोमवार से शनी वार तक प्रात: 9 से 12 एवंं दोपहर 2 से 6 बजे तक न्युनतम 10/- रु प्रतिदिन टोकन शुल्क (निर्धनों को निशुल्क आवश्यक निशुल्क ओषधि हेतु राशी) का सह्योग कर चिकित्सा परामर्श प्राप्त कर सकेगा। हमारे द्वारा लिखित ऑषधियांं सभी मान्यता प्राप्त मेडिकल स्टोर से क्रय की जा सकेंगी। पंचकर्म आदि आवश्यक प्रक्रिया जो अधिकतम 10% रोगियोंं को आवश्यक होगी वह न्युनतम शुल्क पर उपलब्ध की जा सकेगी। क्रपया चिकित्सा परामर्श के लिये फोन पर आग्रह न करेंं। ।

चिकित्सक सहयोगी बने:
- हमारे यहाँ देश भर से रोगी चिकित्सा परामर्श हेतु आते हैं,या परामर्श करते हें, सभी का उज्जैन आना अक्सर धन, समय आदि कारणों से संभव नहीं हो पाता, एसी स्थिति में आप हमारे सहयोगी बन सकते हें| यदि आप पंजीकृत आयुर्वेद स्नातक (न्यूनतम) हें! आप पंचकर्म चिकित्सा में रूचि रखते हैं, ओर प्रारम्भ करना चाह्ते हैं या सीखना चाह्ते हैं, तो सम्पर्क करेंं। आप पंचकर्म केंद्र अथवा पंचकर्म और आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रक्रियाओं जैसे अर्श- क्षार सूत्र, रक्त मोक्षण, अग्निकर्म, वमन, विरेचन, बस्ती, या शिरोधारा जैसे विशिष्ट स्नेहनादी माध्यम से चिकित्सा कार्य करते हें, तो आप संपर्क कर सकते हें| सम्पर्क समय- 02 PM to 5 PM, Monday to Saturday- 9425379102/ mail- healthforalldrvyas@gmail.com केवल एलोपेथिक चिकित्सा कार्य करने वाले चिकित्सक सम्पर्क न करें|

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टाइटल

‘head’
.
matter
"
"head-
matter .
"
"हडिंग|
matter "