चमत्कारिक संजीवनी बूटी? - दशांग लेप!A Wondrous & Miraculous, Life saving herbal Medicine? - Dashang Lep,[coat].
चमत्कारिक संजीवनी बूटी? - दशांग लेप!
Wheat sprouts in boiling water can we treat diabetes.
पुत्रजीवक (PUTRANJEEVAK-Puntrajiva roxburghii) क्या सचमुच पुत्र (संतान) प्राप्ति के लिए है?
पुत्र जीवक या पुत्रन्जिवा या Putranjiva,Putranjiva roxburghii, एक आयुर्वेदिक ब्रक्ष ओषधि है आजकल सुर्ख़ियों में|
बाजरा या रागी Pearl Millet सेवन से - डाईविटीज, मोटापे से बचाव।
फलों का बेताज बादशाह "आम"
बिल्ब बेल फल, पत्ते,और जड़ शिवजी को प्रिय क्यों हें।
तुलसी एक वेद कालीन दिव्य ओषधि- क्या कहता है आधुनिक विज्ञान?
तुलसी, (ऑसीमम सैक्टम) तुलसी शब्द का अर्थ है जिसकी किसी से तुलना न की जा सके वह तुलसी है।
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| धर्म से जुढ्ने के कारण ही तुलसी वैदिक काल से वर्तमान काल तक की गिनी चुनी परिचित ओषधियों में से एक है। |
काम शक्ति का स्त्रोत -सालम मिश्रीओर उसके चमत्कार।
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| शक्ति का स्त्रोत सालम मिश्री |
नारियल- एक पोरुष वर्धक दिव्य फल।
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| नारियल- एक पोरुष वर्धक दिव्य फल। |
- कोमल कच्चा नारियल - पित्त ज्वर[ दाह जलन युक्त बुखार] , रक्त विकार, वमन[उल्टी] ठीक करने वाला, प्यास को शांत करने वाल होता हे। चबाने से मुहु के छाले मिटते हें। नारियल खाने से पेट के क्रमी नष्ट हो जाते हें। कब्ज दूर होती हे।
- पका हुआ नारियल- पित्त जनक[दाह करने वाला], भारी, मल रोधक, रुचि वर्धक, मधुर, बल-वीर्य वर्धक, होता हे।
- नारियल का पानी - विरेचक[दस्त लाने वाला], शीतल,वमन ओर मूर्छा दूर करने वाला, भारी,व शीतल होता हे। प्यास दूर करने के लिए सर्व श्रेष्ठ हे।
- सूखा नारियल- कठिनता से पचने वाला, दाह कारक,भारी, बल वीर्य वर्धक होता हे।
- नारियल का दूध- बल वर्धक, रुचिकारक, भारी, स्वादिष्ट, कुछ गर्म, कफ खांसी ओर गुल्म[पेट के गोले] ठीक करने वाला होता हे। बंगाल में माना जाता हे की इसका दूध अण्ड-कोश की सूजन ओर भरे पानी को ठीक कर देता हे। धातु क्षय की अवस्था में अति लाभकारी हे।
- नारियल का फूल- शीतल मधुर,मल रोधक, वैरी वर्धक मद[नशा] कारक, अम्लता वर्धक, क्रमी नाशक,ओर वात नाशक होता हे।
- नारियल से बनी ताजी ताड़ी-अति स्निग्ध, मद कारक[तत्काल] भारी, वीर्य वर्धक, होती हे। पर दोपहर बाद यही ताड़ी अम्ल युक्त होकर कफ कारक, पित्त जनक, ओर क्रमी नाशक हो जाती हे। यह शांति दायक ओर मूत्र रोगों को ठीक भी करती हे।
- नारियल का तेल- वाजी कारक [पोरुषत्व वर्धक], भारी, कमजोरों के लिए पोष्टिक,वैट-पित्त, नष्ट करने वाला, मूत्रघात[मूत्र रुकना] प्रमेह[मूत्ररोग], स्वास, खांसी, टी॰बी ठीक करने वाला, स्मरण शक्ति बड़ाने वाला, चोट या घाव को जल्दी भरने वाला होता हे। यह क्रमी नाशक, बाल [हैयर] वर्धक [खाने व लगाने से] ,होता हे। इसके तेल से बना मरहम दाद,खुजली ओर पेर के फटने को दूर करता हे। कोड लिवर आयल के स्थान पर इसका प्रयोग[दूध में मिलाकर खाने] भी लाभकारी हड्डियों को मजबूती देने का काम करता हे। शिशु की नारियल तेल से मालिश शिशु को सुंदर, बालिष्ट, बनती हे। यह ऑलिव आयल से अधिक लाभकारी होता हे।
समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें|
मोटापा कम करने के लिए विश्व मे धाक जमानेवाली- आयुर्वेदिक ओषधि।
--डॉ.मधु सूदन व्यास
- बाज़ार में
उपलब्ध इसके घन सत्व से बने एक से दो केपसूल पानी से लें ।
- फल का
चूर्ण बना कर पानी में मथ कर रख दें कुछ देर बाद में पिये ।
- चूर्ण सीधे
2-3 ग्राम तक खाया जा सकते हे।
त्रिफला एक अद्भुत ओषधि-विश्व में हुई कई शोध |
पृथ्वी पर जितने भी फल हें उनमे बिना कोई हानि पहुचाये केवल हित ही हित करने वाले तीन प्रकार के "फल" हमारे ऋषि-मुनियों को दिखलाई दिए वे तीन हरड बहेड़ा , और आंवले थे जिनके सयुक्त नाम को ही त्रिफला कहा गया।
त्रिफला इन तीन - हरड + बहेड़ा + आंवले ओषधिय पेड़ों के फलों का मिश्रण हे। अनुपात भेद या फल की जाती भेद से इसका शरीर पर प्रभाव न्यूनाधिक(कम-ज्यादा) हो सकता हे। जहाँ एकल ओषधि जो अपना प्रभाव हमारे शरीर पर करती हे वह प्रभाव उनके सम्मलित प्रभाव में अलग देखा जाता हे। फिर भी उन तीनो के अलग अलग सामान्य गुण समझना भी आवश्यक हे। देखें ।
महिर्षि चरक का कहना हे की "संसार में दो प्रकार के रसायन ( सभी रक्त, मांस आदि शारीर की धातुओं का पोषण कर सशक्त बनाना) होते हें,एक वय स्थापक ( आयु बडाने वाले) अथवा जीवन शक्ति(Vitality) बढाने वाले और दुसरे रोग निवारक शक्ति (Immunity) बडाने वाले।वयस्थापकों में आँवला और रोग निवारको में हरड सर्व श्रेष्ट होती हे। ये दोनों ही त्रिफला के प्रमुख घटक हें। गुठली रहित फल का छिलका त्रिफला के रूप में प्रयोग किया जाता हे।
अनेक शोधो द्वारा ज्ञात हुआ हे की त्रिफला एक अद्भुत ओषधि हे।
त्रिफला पाचन क्रिया को ठीक करने वाली और भूख को बढ़ाती हे।यह लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या में वृद्धि करने और शरीर में वसा कोलेष्ट्रोल की अवांछनीय मात्रा को हटाने में सहायता करती हे। त्रिफला का उपयोग रक्त के जमाव (थक्का जमने)से रोकने में किया जाता हे। यह गेस के कारन होने वाले सिर दर्द को दूर करने के लिएउपयोगी हे। मधु मेह या डाईवितिज के रोगी की में रक्त शर्करा के स्तरों को सामान्य बनाए रखने में मदद करती हे।
त्रिफला चपापचय या मेटाबोलिजम को नियंत्रित कर शरीर के आंतरिक अंगों की सुरक्षा करता हे। त्रिफला की तीनों जड़ीबूटियां एक प्रकार से शारीर की आंतरिक सफाई को बढ़ावा देती हैं। अनावश्यक जमाव और अधिकता को कम करती हैं, पाचन और पोषक तत्वों के शरीर को प्राप्त होने या लगने की स्तिथि बनती हे।
आयुर्वेदिक ऋषियों के अनुसार त्रिफला ऐसी ही आयुर्वेदिक औषधी है जो शरीर का कायाकल्प कर सकती है। संयमित आहार-विहार के साथ त्रिफला का सेवन करने वाले व्यक्तियों को ह्रदयरोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, नेत्ररोग, पेट के विकार, मोटापा आदि होने की संभावना नहीं होती। यह कोई 20 प्रकार के प्रमेह, विविध कुष्ठरोग, विषमज्वर व शोथ(सूजन) को नष्ट करता है। अस्थि, केश, दाँत व पाचन- संस्थान को बलवान बनाता है। इसका नियमित सेवन शरीर को निरामय, सक्षम व फुर्तीला बनाता है।
स्वस्थ रहने के लिए त्रिफला चूर्ण महत्वपूर्ण है।
त्रिफला सिर्फ कब्ज (Constipation reduction) दूर करने ही नहीं बल्कि आतों के गति को [Colon tonification & Gastrointestinal tract tonifing]ठीक कर आंतो की सफाई कर [Intestinal cleansing] पाचन क्रिया{Digestive balance}नियमित करती हे । इससे भोजन का सम्यक पाचन {Better food assimilation} होता हे जिससे कोलेस्ट्रोल नियंत्रित{Serum cholesterol balance} होकर रक्त सञ्चालन{Better circulation} होता हे। पित्त सँशोधन(Bile duct opening) करती हे। इस तरह से यह अपरोक्ष रूप से होने वाले सिरदर्द मूत्ररोग,किडनी का सुधार ,यकृत या लीवर को ठीक करती हे।
सक्षेप में कहा जा सकता हे की त्रिफला के नियमित सेवन से कमजोरी दूर होती है। या त्रिफला के नियमित सेवन से लंबे समय तक रोगों से दूर रहा जा सकता है।त्रिफला और इसका चूर्ण वात,पित्त व कफ को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
बालों के खराब होने और समय से पूर्व सफेद होने से भी त्रिफला के सेवन से बचा जा सकता है।
केसे करें त्रिफला का सेवन -
सुबह के समय तरोताजा होकर खाली पेट ताजे पानी के साथ त्रिफला का सेवन करें और इसके बाद एक घंटे तक पानी के अलावा कुछ ना लें।
हमेशा मौसम के हिसाब से त्रिफला का सेवन करना चाहिए। यानी मौसम को ध्यान में रखकर त्रिफला के साथ गुड़, सैंधा नमक, देशी खांड, सौंठ का चूर्ण, पीपल छोटी का चूर्ण, शहद इत्यादि मिलाकर सेवन कर सकते हैं। अधिक अच्छा हे त्रिफला का सेवन करने से पहले या तो आप किसी अनुभवी वैद्य से संपर्क करें जिससे साथ त्रिफला का सही-सही और पूरा लाभ उठा सकें। पर यदि बिना परामर्श के भी लिया गया तो भी लाभ ही होगा यह कोई हानी नहीं करता। पर यह ध्यान रखना होगा की विशेषकर सस्ते के चक्कर में इसमें प्रयुक्त हरड , बहेड़ा और आवला पुराने फफूंद वाले न हों देखा गया हे की विक्रेता अधिक लाभ के लिए ख़राब द्रव्य का प्रयोग करते हे।
त्रिफला का नियमित सेवन चुस्त दुरुस्त और प्रसन्न कर सकता हे।
त्रिफला पर विश्व में हुई कई शोध
विकिपीडिया पर दर्ज जानकारी के अनुसार त्रिफला पर समकालीन अनुसंधान में त्रिफला में एंटीनियोप्लास्टिक (अर्बुद या केंसर विरोधी) गुण पाए गए हें।
भारत के कई प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों, जैसे भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय द्वारा की गई शोध से यह पता चला है कि एक त्रिफला में महत्वपूर्ण विषनाशक और कैंसर विरोधी कारक अत्यंत उपयोगी औषधीय गुण हैं।
कैंसर लेटर पत्रिका के जनवरी 2006 के अंक में प्रकाशित एक अध्ययन "एक कैंसर विरोधी औषधि के रूप में पारंपरिक आयुर्वेदिक मिश्रण त्रिफला की क्षमता" में, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के विकिरण जीवविज्ञान और स्वास्थ्य विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने पाया कि त्रिफला में ट्यूमर कोशिकाओं में साइटोटॉक्सिसिटी (कोशिका मृत्यु) प्रेरित करने की क्षमता तो है । जबकि वह सामान्य कोशिकाओं को वह इस रूप में प्रभावित नहीं करता।
इसी प्रकार जवाहर लाल विश्वविद्यालय में विकिरण एवं कैंसर जीवविज्ञान प्रयोगशाला के जरनल ऑफ़ एक्सपेरिमेंट एंड क्लिनिकल कैंसर रिसर्च में प्रकाशित दिसंबर 2005 की एक रिपोर्ट के अनुसार त्रिफला पशुओं के ट्यूमर के मामलों को कम करने और एंटीऑक्सीडेंट स्थिति बढ़ाने हेतु प्रभावी है.
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर के वनस्पति विज्ञान विभाग की एक अन्य रिपोर्ट नेलिखा हे कि कैंसर कोशिका-रेखाओं पर "त्रिफला" का साइटोटॉक्सिक प्रभाव बहुत अच्छापाया गया और यह प्रभाव इस शोध में उपयोग की गई सभी कैंसर कोशिका रेखाओं पर एक समान था." फ़रवरी 2005 में जरनल ऑफ़ एथ्नोफ़ार्मेकोलॉजी में प्रकाशित परिणामों में यह कहा गया कि संभवतः "त्रिफला" में मौजूद एक प्रमुख पॉलीफ़िनॉल, गैलिक अम्ल इन परिणामों का कारण हो सकता है. इन्हीं लेखकों ने पूर्व में यह बताया था त्रिफला में "अत्यधिक एंटीम्यूटेजेनिक/ एंटीकार्सिनोजेनिक क्षमता थी."
एंटीऑक्सीडेंट गुण
फरवरी 2006 में, डा. ए. एल. मुदलियार पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ़ बेसिक मेडिकल साइंसेस, मद्रास विश्वविद्यालय, तारामणि कैंपस, के वैज्ञानिकों ने बताया कि त्रिफला की पूरक खुराक देने से एंटीऑक्सीडेंट में शोर-जनित-तनाव से होने वाले परिवर्तनों और साथ ही चूहों में कोशिका-प्रेरित प्रतिरोधक प्रतिक्रिया की रोकथाम होती है. इसका अर्थ यह है कि त्रिफला में एक तनाव-विरोधी कारक है।
इस अध्ययन का निष्कर्ष यह था, कि अपने एंटीऑक्सिडेंट गुणों के कारण त्रिफला शोर-जनित-तनाव से होने वाले परिवर्तनों को वापस ज्यों का त्यों कर देता है,या तनाव से रोगी को मुक्त करता हे।
ट्रॉम्बे स्थित भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के विकिरण रसायन विज्ञान और रासायनिक डायनेमिक्स प्रभाग में संचालित अध्ययनों में यह पता चला कि त्रिफला के तीनों घटक , सक्रिय हैं और वे अलग-अलग परिस्थितियों में कुछ भिन्न गतिविधियों का प्रदर्शन करते हैं और इन अलग-अलग घटकों की संयोजित गतिविधि के कारण त्रिफला मिश्रण के और अधिक कार्यकुशल होने की अपेक्षा की जाती है. इस अध्ययन के परिणाम फ़ाइटोथेरेपी रिसर्च के जुलाई 2005 के अंक में प्रकाशित किए गए थे.।
दो महीने बाद, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने त्रिफला के एक घटक की रेडियो रक्षात्मक क्षमता की जानकारी दी.
इसी तरह के परिणाम कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज, मणिपाल की ओर से जरनल ऑफ़ ऑल्टरनेटिव एंड कॉंप्लिमेंटरी मेडिसिन में प्रकाशित किए गए थे जहां वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि "आयुर्वेदिक रसायन औषधि त्रिफला की मदद से विकिरण टॉलरेंस में 1.4 ग्रे गामा-किरणन की वृद्धि हुई". उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि जहां त्रिफला से गैस्ट्रोइंटेस्टिनल और हीमोपोयटिक मृत्यु से सुरक्षा प्रदान की जा सकी, वहीं पशु 11 GY से अधिक किरणन के संपर्क में आने के बाद 30 दिनों से अधिक नहीं जी पाए।
एलिसन रॉस, विज्ञान अधिकारी, नामक ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने आशा जताई है कि एक दिन भारतीय आयुर्वेदिक औषधि त्रिफला से पाचन ग्रंथि के
कैंसर का इलाज किया जा सकेगा।
पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय के कैंसर संस्थान की एक टीम ने चूहों पर किए एक प्रयोग में पाया कि
त्रिफला चूर्ण के इस्तेमाल से पैनक्रियाज़ यानी पाचन ग्रंथि में होने वाले कैंसर का बढ़ना कम हो
जाता है।
अमेरिकन ऐसोसिएशन फ़ॉर कैंसर रिसर्च में पेश अध्ययन से आशा जगी है कि एक दिन त्रिफला
से इस रोग का इलाज भी हो पाएगा।
लेकिन विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि अभी यह शोध अपनी प्रारंभिक अवस्था में ही है।
पाचन ग्रंथि का कैंसर का इलाज बहुत कठिन है इसलिए इलाज के नए तरीके खोजने की ज़रूरत है।
ये सब अभी प्रारंभिक प्रयोग हैं. त्रिफला को लेकर भविष्य में बहुत कुछ किए जाने की ज़रूरत है।
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त्रिफला से बनी कई ओषधियाँ जो बाज़ार में उपलब्ध हें।
त्रिफला चूर्ण / त्रिफला घृत, त्रिफलारिष्ट, त्रिफला के केप्सुल्स और गोलियां।
लगभग सभी आयुर्वेदिक ओषधियों में इनका उपयोग होता हे ।
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हरड- संसार की दो सर्वश्रेष्ट रसायन गुण वाली ओषधियो
बहेड़ा (टर्मिनेलिया वेलेरिका) - तीसरा सर्व श्रेष्ट आरोग्यकर ओषध|
समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें|
हरड- संसार की दो सर्वश्रेष्ट रसायन गुण वाली ओषधियों में से एक।
- हरड दातों से चबा कर खाने से अग्नि(भूख) बढाती हे।
- हरड पीस कर खाने से मल का शोधन(शोच ठीक करना) करती हे।
- हरड भून कर खाने से तीनो दोषों को ठीक करती हे।
- हरड भोजन के साथ खाने से बुद्धि और बल बढाती हे।मल मूत्र को साफ करती हे।
- भोजन के बाद खाई गई हरड खाए अन्न और जल के दोषों को दूर करती हे।
- हरड लवण (नमक) के साथ खाने से कफ दोष, मिश्री के साथ पित्त(जलन आदि)दोष ,घी के साथ सेवन से वात( दर्द युक्त) दोष एवं गुड के साथ सम्पूर्ण दोषों को नष्ट करती हे।
- हरड वर्षा ऋतु में सेंधा नामक के साथ शरद ऋतु में पीपर(लेंडी पीपल) के साथ, वसंत ऋतु में मधु(शहद) के साथ ग्रीष्म ऋतु में गुड के साथ खाने से परम रसायन( सभी रक्त, मांस आदि शारीर की धातुओं का पोषण कर सशक्त बनाना) का काम करती हे।
- बबासीर में सेंधा नमक के साथ पर खूनी बबासीर में इसका क्वाथ(काडा) दिया जाना लाभकारी हे। चूर्ण को गुड के साथ देने से खुनी बबासीर में लाभ होता हे।
- अर्श के मस्से पर इसको पानी के साथ पीस कर लेप करने से सुजन और दर्द ठीक होता हे।
- अधिक पसीना आने,पुरानी सर्दी जुकाम,नजला(नाक बहना),चोट के घावों के पाक जाने पास बहने की समस्या से इसका सेवन छुटकारा दिलाता हे।
- मुहांसे या मुहं पर व्रण इसे घिस कर लगाने से ठीक होते हें।
- हरड का चूर्ण गरम पानी के साथ देने पर 'हिचकी' आना बंद हो जाती हें।
- हरड का मुरब्बा आमातिसार (नए दस्त) बंद कर भूख बढाता हे।
बाज़ार में इससे बनी निम्न ओषधियां मिलती हें जो विवरण अनुसार लाभकारी हें।
*त्रिफला चूर्ण या गोली, * अभयारिष्ट * हरड मुर्रब्बा
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A to Z स्वास्थ्य:/ Herbal Plants / Fruts: /
आंवले की महिमा:/त्रिफला पर विशेष लेख शीघ्र
बहेड़ा (टर्मिनेलिया वेलेरिका) - तीसरा सर्व श्रेष्ट.
त्रिफला एक अद्भुत ओषधि-विश्व में हुई कई शोध |:
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समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें|
गिलोय- शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट- स्वाइन फ्लू के चिकित्सा के लिए दिव्य ओषधि
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| यह एक जड़ी बूटी है जो स्वामी रामदेव के पतंजलि योग के द्वारा स्वाइन फ्लू के इलाज के लिए सिफारिश की गई हे। यह भी बर्ड फ्लू और chikengunia के मामले में सिफारिश की है. |
- गिलोय सत्व एवं गिलोय घन सत्व': जब गिलोय जड़ी बूटी सूख जाती है तब इसके छोटे-छोटे टुकड़े कर
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चिकित्सकीय सलाह रोग निदान एवं चिकित्सा की जानकारी शिक्षण उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें|
अजवायन -घर पर छुपा हुआ वेद्य |
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| अलसी यानी फ्लैक्सीड- सेक्स समस्याओं का उपचार: / लौंग (लवंग Cloves )/ नीम के स्वास्थ्य लाभ/ अंगूर खाकर वजन घटाए: |
अजवायन में लाल मिर्च की तेजी, राई की कटुता तथा हींग और लहसुन की वातनाशक गुण एक साथ मिलते हें। इस लिए यह गुणों का भंङार है । इसी लिए यह उदर शूल, गैस, वायुशोला, पेट फूलना, वात प्रकोप आदि को दूर करता है। इसी कारण इसे घर पर छुपा हुआ वेद्य कहा गया है।
चावल से चिकित्सा
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विरूद्ध आहार-विहार:अर्थ हे, एक साथ नहीं खाए खाद्य
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अलसी यानी फ्लैक्सीड- सेक्स समस्याओं का उपचार
अलसी {अलसी स्टार फूड }एक जड़ी बूटी है जिसमें लिनोलेनिक नामक एसिड पाया जाता है जो कि ओमेगा 3 फैटी एसिड का महत्वपूर्ण स्रोत है। इतना ही नहीं अलसी एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर औषधी है जो कि व्यक्ति को प्रोटेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से भी बचाती हैं।
अलसी का प्रयोग
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विरूद्ध आहार-विहार:अर्थ हे, एक साथ नहीं
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समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें|
तुलसी एक 'दिव्य पौधा' -BENEFITS OF TULSI
कम कैलोरी वाला पौष्टिक फल जामुन
- जामुन की गुठली के चूर्ण 1-2 ग्राम पानी के साथ सुबह फांकने से मधुमेह रोग ठीक हो जाता है।
- नए जुते पहनने पर पांव में छाला या घाव हो जाए तो इस पर जामुन की गुठली घिसकर लगाने घाव ठीक हो जाता है।
- इसके ताजे, नरम पत्तों को गाय के पाव-भर दूध में घोट-पीसकर प्रतिदिन सुबह पीने से खून ववासीर में लाभ होता है।
- जामुन का रस, शहद, आँवले या गुलाब के फूल का रस बराबर मात्रा में मिलाकर एक-दो माह तक प्रतिदिन सुबह के वक्त सेवन करने से रक्त की कमी एवं शारीरिक दुर्बलता दूर होती है। यौन तथा स्मरण शक्ति भी बढ़ जाती है।
-जामुन के एक किलोग्राम ताजे फलों का रस निकालकर ढाई किलोग्राम चीनी मिलाकर शरबत जैसी चाशनी बना लें। इसे एक ढक्कनदार साफ बोतल में भरकर रख लें। जब कभी उल्टी-दस्त या हैजा जैसी बीमारी की शिकायत हो, तब दो चम्मच शरबत और एक चम्मच अमृतधारा मिलाकर पिलाने से तुरंत राहत मिल जाती है।
- जामुन और आम का रस बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से मधुमेह के रोगियों को लाभ होता है।
- जामुन की गुठली के चूर्ण को एक चम्मच मात्रा में दिन में दो तीन बार लेने पर पेचिश में आराम मिलता है।
- पथरी हो जाने पर इसके चूर्ण का उपयोग चिकित्सकीय निर्देशन में दही के साथ करें।
- रक्तप्रदर की समस्या होने पर जामुन की गुठली के चूर्ण में पच्चीस प्रतिशत पीपल की छाल का चूर्ण मिलाएं और दिन में दो से तीन बार एक चम्मच मात्रा में ठंडे पानी से लें।
- गठिया के उपचार में भी जामुन बहुत उपयोगी है। इसकी छाल को खूब उबालकर बचे हुए घोल का लेप घुटनों पर लगाने से गठिया में आराम मिलता है।
- जामुन का रस, शहद, आँवले या गुलाब के फूल का रस बराबर मात्रा में मिलाकर एक-दो माह तक प्रतिदिन सुबह के वक्त सेवन करने से रक्त की कमी एवं शारीरिक दुर्बलता दूर होती है। यौन तथा स्मरण शक्ति भी बढ़ जाती है।
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समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें|
चिकित्सा सेवा अथवा व्यवसाय?
स्वास्थ है हमारा अधिकार १
हमारा लक्ष्य सामान्य जन से लेकर प्रत्येक विशिष्ट जन को समग्र स्वस्थ्य का लाभ पहुँचाना है| पंचकर्म सहित आयुर्वेद चिकित्सा, स्वास्थय हेतु लाभकारी लेख, इच्छित को स्वास्थ्य प्रशिक्षण, और स्वास्थ्य विषयक जन जागरण करना है| आयुर्वेदिक चिकित्सा – यह आयुर्वेद विज्ञानं के रूप में विश्व की पुरातन चिकित्सा पद्ध्ति है, जो ‘समग्र शरीर’ (अर्थात शरीर, मन और आत्मा) को स्वस्थ्य करती है|
निशुल्क परामर्श
जीवन के चार चरणौ में (आश्रम) में वान-प्रस्थ,ओर सन्यास अंतिम चरण माना गया है, तीसरे चरण की आयु में पहुंचकर वर्तमान परिस्थिती में वान-प्रस्थ का अर्थ वन-गमन न मान कर अपने अभी तक के सम्पुर्ण अनुभवोंं का लाभ अन्य चिकित्सकौं,ओर समाज के अन्य वर्ग को प्रदान करना मान कर, अपने निवास एमआइजी 4/1 प्रगति नगर उज्जैन मप्र पर धर्मार्थ चिकित्सा सेवा प्रारंंभ कर दी गई है। कोई भी रोगी प्रतिदिन सोमवार से शनी वार तक प्रात: 9 से 12 एवंं दोपहर 2 से 6 बजे तक न्युनतम 10/- रु प्रतिदिन टोकन शुल्क (निर्धनों को निशुल्क आवश्यक निशुल्क ओषधि हेतु राशी) का सह्योग कर चिकित्सा परामर्श प्राप्त कर सकेगा। हमारे द्वारा लिखित ऑषधियांं सभी मान्यता प्राप्त मेडिकल स्टोर से क्रय की जा सकेंगी। पंचकर्म आदि आवश्यक प्रक्रिया जो अधिकतम 10% रोगियोंं को आवश्यक होगी वह न्युनतम शुल्क पर उपलब्ध की जा सकेगी। क्रपया चिकित्सा परामर्श के लिये फोन पर आग्रह न करेंं। ।
चिकित्सक सहयोगी बने:- हमारे यहाँ देश भर से रोगी चिकित्सा परामर्श हेतु आते हैं,या परामर्श करते हें, सभी का उज्जैन आना अक्सर धन, समय आदि कारणों से संभव नहीं हो पाता, एसी स्थिति में आप हमारे सहयोगी बन सकते हें| यदि आप पंजीकृत आयुर्वेद स्नातक (न्यूनतम) हें! आप पंचकर्म चिकित्सा में रूचि रखते हैं, ओर प्रारम्भ करना चाह्ते हैं या सीखना चाह्ते हैं, तो सम्पर्क करेंं। आप पंचकर्म केंद्र अथवा पंचकर्म और आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रक्रियाओं जैसे अर्श- क्षार सूत्र, रक्त मोक्षण, अग्निकर्म, वमन, विरेचन, बस्ती, या शिरोधारा जैसे विशिष्ट स्नेहनादी माध्यम से चिकित्सा कार्य करते हें, तो आप संपर्क कर सकते हें| सम्पर्क समय- 02 PM to 5 PM, Monday to Saturday- 9425379102/ mail- healthforalldrvyas@gmail.com केवल एलोपेथिक चिकित्सा कार्य करने वाले चिकित्सक सम्पर्क न करें|
स्वास्थ /रोग विषयक प्रश्न यहाँ दर्ज कर सकते हें|
Accor
टाइटल
‘head’.
matter"
matter ."
"हडिंग|matter "














