Rescue from incurable disease

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  • हरड- संसार की दो सर्वश्रेष्ट रसायन गुण वाली ओषधियों में से एक।


    हरड- संसार की दो सर्वश्रेष्ट रसायन गुण वाली ओषधियों में से एक।
    हरड - हरडे ,हर्र, हरीतकी,अभया, Myrobalans / Terminaliya Chebula आदि नामो से जानी जाने वाली इस हरड के बारे में  महिर्षि चरक का कहना हे की "संसार में दो प्रकार के रसायन ( सभी रक्त, मांस आदि  शारीर की धातुओं का पोषण कर सशक्त बनाना) होते हें,एक वय स्थापक ( आयु बडाने वाले) अथवा जीवन शक्ति(Vitality) बढाने वाले और दुसरे रोग निवारक शक्ति (Immunity) बडाने वाले।वयस्थापकों में आँवला और रोग निवारको में हरड सर्व श्रेष्ट होती हे। इसीकारण यह त्रिफला   का एक प्रमुख घटक हे। 
    इसका  15-24  मीटर ऊँचा एक बृक्ष होता हे इसकी एक जोड़ी के साथ अण्डाकार रुए दार पत्तियां होती हें। अंडाकार  पीलापन लिए सफेद फूल दुर्गन्ध युक्त होते हें। और हरड या फल  नारंगी रंग से बदलते हुए पीले लाल या काले और कठिन परिपक्व, 3-5 सेमी लम्बा, पाँच स्पष्ट रेखा जिसे निशान वाला, सुखाने पर काटने का निशानवाला होता हे। सात जाती की हरड में से विजया सर्वत्र पैदा होती हे और बड़ी हरड के नाम से जानी जाती हे सफ़ेद फुल वाली चेतकी जाती की एक अंगुल लम्बी काली बाल हरड होती हे।  हरड में रसायन गुण कम रेचक गुण अधिक होने से त्रिफला के लिए श्रेष्ट नहीं माना गया हे। पर जहाँ रेचक गुणों की जरुरत अधिक हो वहां इसका उपयोग किया जाना चाहिए।
    यह एक अत्यंत प्रभावशाली दिव्य, रसायन गुण वनस्पति हे। 
    हरड का प्रमुख काम शरीर के विजातीय(अनावश्यक) द्रव्यों को बाहर कर प्रत्येक अंग की गति शीलता को व्यवस्थित करना होता हे। इस तरह पेट,रक्त,मष्तिष्क ,ह्रदय,जननेद्रिय,आदि में जहाँ कही भी दोष हो उसे बाहर कर शोधित कर देगी। 
    यही विलक्षणता इसकी आदि काल से आज तक की प्रसिद्धि का कारण हे। किसी भी आयु के मनुष्य (शिशु से पूर्णायु तक) ही नहीं किसी भी प्राणी को उसके लिए उचित मात्रा देने पर माता के सामान लाभ देती है।  (मात्रा अधिक या कम होने पर भी हानी नहीं पहुचाती)।  यह दस्तावर होने के बाद भी पेट शोधन के बाद दस्त बंद भी करती हे। इससे जठराग्नि (भूख)प्रबल हो जाती हे। 

    • हरड दातों से चबा कर खाने से अग्नि(भूख) बढाती हे।
    • हरड  पीस कर खाने से मल का शोधन(शोच ठीक करना) करती हे।
    • हरड भून कर खाने से तीनो दोषों को ठीक करती हे। 
    • हरड भोजन के साथ खाने से बुद्धि और बल बढाती हे।मल मूत्र को साफ करती हे।
    • भोजन के बाद खाई गई हरड खाए अन्न और जल के दोषों को दूर करती हे।
    • हरड लवण (नमक) के साथ खाने से कफ दोष, मिश्री के साथ पित्त(जलन आदि)दोष ,घी के साथ सेवन से वात( दर्द युक्त) दोष एवं गुड के साथ सम्पूर्ण दोषों को नष्ट करती हे।
    • हरड वर्षा ऋतु में सेंधा नामक के साथ शरद ऋतु में पीपर(लेंडी पीपल) के साथ, वसंत ऋतु में मधु(शहद) के साथ ग्रीष्म ऋतु में गुड के साथ खाने से परम रसायन( सभी रक्त, मांस आदि  शारीर की धातुओं का पोषण कर सशक्त बनाना) का काम करती हे। 
    • बबासीर में सेंधा नमक के साथ पर खूनी बबासीर में इसका क्वाथ(काडा) दिया जाना लाभकारी हे। चूर्ण को गुड के साथ देने से खुनी बबासीर में लाभ होता हे।
    • अर्श के मस्से पर इसको पानी के साथ पीस कर लेप करने से सुजन और दर्द ठीक होता हे।
    • अधिक पसीना आने,पुरानी सर्दी जुकाम,नजला(नाक बहना),चोट के घावों के पाक जाने पास बहने की समस्या से इसका सेवन छुटकारा दिलाता हे।
    • मुहांसे या मुहं पर व्रण इसे घिस कर लगाने से ठीक होते हें।
    • हरड का चूर्ण गरम पानी के साथ देने पर 'हिचकी' आना बंद हो जाती हें।
    • हरड का मुरब्बा आमातिसार (नए दस्त) बंद कर भूख बढाता हे।

    बाज़ार में इससे बनी निम्न ओषधियां मिलती हें जो विवरण अनुसार लाभकारी हें।
    *त्रिफला चूर्ण या गोली, * अभयारिष्ट * हरड मुर्रब्बा
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     बहेड़ा (टर्मिनेलिया वेलेरिका) - तीसरा सर्व श्रेष्ट.
    त्रिफला एक अद्भुत ओषधि-विश्व में हुई कई शोध |:

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