Rescue from incurable disease

Rescue from incurable disease
लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |
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Hair Loss,Whiteness. Dandruff, Thinning, or Baldness.-- The Treatment is "Thalapothichil or Shiro-lep". {बालों का झड़ना, सफेदी, रूसी, पतलापन, या गंजापन? उपचार है- थालापोथिचिल या शिरो लेप!}

Hair  Loss,whiteness, Dandruff, Thinning, or Baldness.-- TheTretment is Thalapothichil  or Shiro-lep. 
 बालों का झड़ना, सफेदी,  रूसी, पतलापन, या गंजापन?  उपचार है- थालापोथिचिल या शिरो लेप!
    सिर के बाल झड़ रहें हों, असमय सफ़ेद हो रहे हों डेंड्रफ का संक्रमण हो, बालों को सुन्दर, घने, चमकीला बनाना चाहते हों तो शिरोलेप, शिरोधारा, शिरोबस्ती, शिरो पिचु आदि कोई चिकित्सा जो पंचकर्म का एक भाग है करना लाभदायक सिद्ध होगा।

डेंड्रफ या रूसी

प्रश्न- Jai shree krishna ..aap bataa sakte he agar dandruff badi wali ka ilaaj?  kyo hoti he.? meri beti 20 year ko ho jaati he baar baar.
उत्तर --समान्यत: डेंड्रफ या रूसी शिर की त्वचा की त्वचा कोशिकाओं के मरने (डैड सेल्स) होती है। जो एक सामान्य प्रक्रिया है। प्रतिदिन सिर की साफ सफाई न कर पाना इसका प्रमुख कारण है।

खाज खुजली या स्केबीज का कारण एक कीट या पिशाच !

छूत का यह रोग हवा, पानी अथवा सांस द्वारा नहीं फैलता।
यह एक रोगी व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के निकट संपर्क में आने से ही फैलती है।
 इसलिए परिवार में एक व्यक्ति से यह सारे परिवार में ही अकसर फैल जाती है। यह नमी की स्थिति के चलते पनपता है।
आम तौर पर बच्चों को इसका सबसे अधिक ख़तरा बना रहता है और बच्चों में यह रोग बहुत आम है।
यह सामान्यतया उन लोगों को होती है जो साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखते।

       बेतकुल्ल्फ़ होकर किसी भी दोस्त के बिस्तर का उपयोग करने, या उसके गंदे तोलिया, पहने हुए कपड़े, कंघे आदि का प्रयोग करने ओर रोज न नहाने वालों में, ओर साफ सफाई पर ध्यान न देने वालों, ओर कुत्ते- बिल्लियों से अधिक संपर्क रखने वालों के शरीर पर संपर्क के एक माह बाद तक भी,यदि  खुजली चलने लगती है। सामान्यत: इस बात को साधारण सी बात समझ कर अक्सर नजर अंदाज भी कर दिया जाता है। यह साधारण सी खुजली शरीर के किसी विशेष अंग हाथ, पैर गर्दन ओर खुले हिस्सों को अधिक प्रभावित कर सकती है। अक्सर सामान्य जन इसका कारण समझ ही नहीं पाते। धीरे धीरे यह सारे शरीर में फेल सकती है, ओर शरीर को वीभत्स रूप दे सकती है।

फिल्मी सितारों की तरह आकर्षक शरीर कैसे पाये।

हमफिल्मी सितारों की तरह आकर्षक शरीर कैसे पाये। 
सब जानते हें, कि शुद्ध रक्त ही स्वास्थ्य, सुगठित सुंदर शरीर ओर शक्ति का प्रधान आधार होता है। शरीर में जितना अधिक रक्त बनता है, शरीर उतना ही स्वस्थ्य ओर सबल रहता है। अच्छे भोजन से अच्छा रक्त तो बनाता है, पर शरीर में रक्त के संचारित होकर शक्ति प्रदान करने के दोरान मृत सेल्स,ओर कई अशुद्धियाँ इसमें शामिल हो जाती हें। इसे बाहर निकाल फेकना भी जरूरी होता है। व्यायाम भी शरीर की गंदगी बाहर निकालने का एक तरीका है, शरीर की सक्रियता प्राणी के पेदा होते ही प्रकर्ति से मिल जाती है। बच्चे का रोना। हिलना, फिर हाथ पैर चलाने से लेकर उम्र भर बढ़ती शारीरिक सक्रियता एक प्रकार का व्यायाम ही होता है।

आपके प्रश्नो पर हमारे उत्तर-

04-JUN-2013 
Q-मेरे चेहरे पर कील मुहांसों के काफी दाग है। क्या इसे ठीक कैसे किया जा सकता है?
 A- 1-एलोवेरा जेल लगाने से त्‍वचा के दाग धब्बे धीरे धीरे हल्‍के पड़ने लगते हैं और इनसे मुंहसे भी ठीक हो जाते हैं।
2- नियमित रुप से लहसुन का पेस्ट दाग धब्बों पर लगाने से वे हल्‍के पड़ जाते हैं।
3- शहद को चंदन पाउडर के साथ मिलाइये और उसमें हल्‍का सा नींबू निचोड़ लीजिये। इस पैक को चेहरे पर लगा कर साफ त्वचा पाइये। नींबू का रस न केवल चेहरे से गहरे निशान मिटाता है बल्कि इसको चेहरे पर रगड़ने से चेहरे की रंगत भी बदल जाती है।
4- दूध से अपने चेहरे की मसाज करने पर उसमें नमी आती है, और दाग धब्‍बों का रंग भी हल्‍का पड़ जाता है।
5- प्‍याज के रस को गहरे निशान पर लगाइये और कुछ ही दिनों में देखिये कि गहरे रंग के दाग किस तरह से साफ हो जाते हैं।
6-चंदन पाउडर को दही के साथ मिक्‍स कीजिये और उसमें नींबू की चार बूंद डाल लीजिये। इसको लगाने से आपके चेहरे के डार्क स्‍पॉट गायब होने लगेगें।
----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें|

दूध सम्पूर्ण आहार ही नहीं -एक सोंदर्य वर्धक भी है।

मनुष्य में आहार का प्रारम्भ दूध से ही होता है। बच्चे के जन्म लेते ही प्राक़ृर्तिक रूप से दूध ही स्वाभाविक आहार के रूप में प्राप्त दूध एक मात्र सम्पूर्ण आहार होता है।   हम सब भारतीयों को दूध और दूध से बनी चीजें हमेशा से ही प्रिय रही हैं। बच्चे के बड़े होने के साथ साथ दूध की मात्रा में वृद्धि होने से इस स्वाभाविक आहार की  कमी ही अन्य आहार से सामंजस्य करने हेतु प्रेरित करती है।   इस प्रकार जो भी आहार प्राप्त होता हे, शरीर उसी के साथ जीना बढ़्ना सीखने लगता है।    यदि सारे जीवन दूध की उपलब्धता रहे तो यह अकेला ही सम्पूर्ण रूप से पूर्ण आहार होगा। 
  इसी कारण मनुष्य का ध्यान दूध के लिए अन्य पशुओं की ओर गया। 
प्राचीन काल से ही इस आहार को पाने के लिए गाय, भेंस, बकरी आदि पशु पालन को प्राथमिक आवश्यकता समझा गया था। 
आदिकाल से ही मनुष्यों के लिए माँ के बाद गाय, भेंस, बकरी, भेड, को ही क्रम से प्राथमिकता दी गई थी। इन सभी प्रकार की प्राथमिकताओं को निश्चित करने हेतु प्राचीन भारत के  चरक, सुश्रुत, वाग्भट्ट, आदि प्राणाचार्यों ने इनके अतिरिक्त गधी, घोडा, ऊंट, आदि से लेकर हाथी शेर, आदि के दूध को भी परीक्षण में लेकर उसका विस्तार से वर्णन भी किया हे। वे सभी अंत में इसी निष्कर्ष पर पहुचे की माँ के पश्चात गाय का दूध ही मनुष्य को सम्पूर्ण ओर श्रेष्ठ आहार होता हे। इसका सम्पूर्ण विवरण चरक साहिता आदि ग्रंथो में पढ़ने मिल सकता हे।

गाय का दूध अभिष्यंदी* न होने से अधिक गुण कारी है देखें -
गो दुग्ध :-
गोक्षीरमनभिष्यंदी स्निग्धं गरुरसायनम् ।
रक्तपित्तहरं शीतं मधुरं रसपाकयो॥
जीवनीयं तथा वातपित्तध्नं परमं स्मृतम्।

अर्थात् गौ का दुग्ध अभिष्यंदी नहीं (रसबह नाड़ियां को नहीं रोकता) स्निग्ध है, भारी है, रसायन है, रक्त पित्त दूर करता है। शीतल ह रस व विपाक में मीठा है, जीवनदाता है। वायु व पित्त को शाँत करने वाला है।

आधुनिक विज्ञान के द्वारा प्रयोग शाला परीक्षणों से भी यही उपर्युक्त तथ्य प्रमाणित हुआ हे। अन्य दूध जेसे भेंस आदि के दूध के संगठन से फेट आदि कम करके ही उपयोग किया जाना मनुष्य के लिए उपयुक्त हे यह स्वीकार किया गया है।  Teagasc डेयरी उत्पाद अनुसंधान केंद्र Moorepark  Fermoy द्वारा शरीर में कोलेस्ट्रॉल सामग्री को निष्क्रिय करने में दूध की ​​उपयोगिता पर हाल के हुए शोध से सूचित किया गया है।  वर्तमान के वेज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर राष्ट्रीय डेयरी परिषद के अनुसार, दूध में नौ आवश्यक पोषक तत्व होते हें जो की मनुष्य के स्वास्थ्य लाभ से ही जुड़े होते हें।  
  1. कैल्शियम:- इसकी सहायता से शरीर में स्वस्थ हड्डियों और दांतों का निर्माण होता हे। यह ही जीवन भर उन्हे मजबूत, ओर उपयोगी बनाए रखता हे, इसकी कमी से अस्थि-म्रदुता [ऑस्टियोपोरोसिस] ,या भंगुरता [टूटने  की प्रव्रत्ति] बनाती  है। हड्डी संरचना के समुचित विकास के लिए यह बहुत जरूरी है।  ऑस्टियोपोरोसिस के रूप में हड्डी विकारों को दूध की पर्याप्त मात्रा की दैनिक सेवन से रोका जा सकता है.  आयुर्वेद के अनुसार भी अस्थि धातु के लिए यह एक आवश्यक पदार्थ है। .कैल्शियम कैंसर रसायन, हड्डी हानि, गठिया रोग, माइग्रेन सिर दर्द, पूर्व मासिक धर्म सिंड्रोम, और अवांछित वसा नष्ट करने के लिए भी जरूरी है। 
  2. प्रोटीन:-आयुर्वेद के अनुसार मांस धातु के लिए प्रोटीन जरूरी होता हे, यह  ऊर्जा के स्रोत के रूप में कार्य करता है, शरीर पोषण/' मरम्मत / मांसपेशियों के ऊतकों का सतत निर्माण/ शरीर वृद्धि इसीसे होती हे। 
  3. पोटेशियम:-  एक स्वस्थ रक्त का दबाव बनाए रखने में मदद करता है, इससे रक्त धातु के द्वारा सम्पूर्ण शरीर को ऊर्जा मिलती रहती हे। इसकी कमी या अधिकता दोने रक्तचाप को दूषित कर देती हे।  दूध में यह पूर्ण आवश्यक मात्र में आसानी से उपलब्ध हो जाती है। 
  4. फास्फोरस:-  हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है और ऊर्जा उत्पन्न करने में सहायक होता हे। अस्थि के मध्य मज्जा धातु के साथ रसायनिक क्रियाओं के द्वारा रक्त कण बनाकर खून की कमी नहीं होने देता। 
  5. विटामिन डी  दूध में उपस्थित यह विटामिन सूर्य के प्रकाश द्वारा संश्लेषित होकर हड्डियों को बनाए रखने में मदद करता है। इसकी कमी से भी शरीर को खड़ा रखने वाला ढांचा [अस्थि तंत्र] कमजोर होकर गिर सकता है। 
  6. विटामिन बी 12:-  स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं और तंत्रिका ऊतक [टिशूज] में पुनर्जनन [निरंतर पेदा करने की प्रवृत्ति] बनाए रखता है। जो मनुष्य को दीर्घ जीवी बनाती है। 
  7. विटामिन ए: - शरीर की रक्षा के लिए "प्रतिरक्षा प्रणाली" को बनाए रखता है, यह सामान्य दृष्टि[आँख] और त्वचा को सक्षम बनाए रखने में मदद करता है। 
  8. राइबोफ्लेविन [Riboflavin (बी 2)] : - भोजन को ऊर्जा में परिवर्तन करने ओर ज्ञानेन्द्रियों को सक्षम बनाए रखता है। 
  9. Niacin:- शर्करा ओर फैटी एसिड  को चपापचय[ मेटाबोलिज़म] द्वारा शरीर के लिए उपयोगी बनाता है। 
 दूसरे शब्दों में, दूध प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट फेट्स, मिनरल, विटामीन्स, आदि समस्त संतुलित आहार में आवश्यक द्र्व्यो का सम्पूर्ण पोषक पदार्थ है।   यदि शरीर अन्य खाद्य रोटी सब्जी मांस मछ्ली आदि रेशदार पदार्थो सहित] द्वारा अनुकूलित नहीं हुआ है तो इस पर जीवन आसानी से जिया जा सकता हे। 
 
 आयु की परिपक्वता ओर रोगो से जीर्ण शीर्ण भोजन को पचा पाने की क्षमता नष्ट हो चुकी हो तो ऐसी परिस्थिति में शेष जीवन दूध पर निर्भर रह कर रहा जा सकता है। सभी को याद होगा की हमारे पूर्व प्रधान मंत्री स्व॰ मोरार जी भाई देसाई केवल दूध पर निर्वाह करते रहें हें।

 अन्य खाद्य पदार्थो के आदि या अनुकूलित हो चुके, हमारे शरीर को अनजाने हो रही संतुलित आहार की कमी को पूरा करने के लिए देनिक भोजन में दूध ओर दूध से बने सभी उत्पादो  दही Curd   छाछ, पनीर, मक्खन, घी, छाछ, आदि को निरंतर लेना ही होगा।
   
     गाय के घी के बारे में पाश्चात विद्वानो की राय है, की यह हानी कारक है, यह बात वस्तुत: गलत है। पश्चिम में ओर प्रयोशालाओं में फेट्स के बारे में जो निष्कर्ष निकाला है, वह बटर मिल्क, चर्बी, ओर एयर कंडीशंड पशुशालाओं में रखे गए अप्राक़ृतिक ओषधि/खाद्य/इंजेक्शनों की सहायता से पशुओं से प्राप्त दूध के फेट्स कंटेन्ट पर आधारित है। जबकि इसके विपरीत भारत में पशु प्राक़ृतिक वातवरण में रखे जाने की परंपरा है। इसी कारण चरक आदि प्राणाचार्यों ने गाय के देसी घी को रसायन कहा गया है। जो  को "ह्रद्ध्य" अर्थात ह्रदय को ठीक करने वाला कहा है। अर्जुन घृत ओर त्रिफला घृत का प्रयोग ह्रदय रोगियों में बड़े विश्वास के साथ आयुर्वेदिक चिकित्सकों द्वारा वर्षो से किया जा रहा है। वर्तमान में ह्रदय  रोग  BP आदि बढ़ने का कारण गाय की घी मक्खन नहीं, विविध खाद्य तेल, भेस का घी-दूध, ओर मांस मछ्ली आदि आहार ओर अपथ्याहारविहार ओर असंयंमित जीवन  होता है।
 यदि हमको एक सशक्त जाग्रत मेधावी मस्तिष्क चाहिए, शरीर में बल [क़ृष्ण- बलराम की तरह] चाहिए निरोगी दीर्घायु जीवन जीने की इच्छा हे, तो गाय के दूध से जीवन भर संबंध बनाए रखना होगा।    
     
स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए दूध के बड़े लाभ हें।  स्वस्थ हड्डी,  चिकनी त्वचा, मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली, उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों की रोकथाम, दंत क्षय, निर्जलीकरण, सांस की समस्याएं, मोटापा, ऑस्टियोपोरोसिस, आँखों की कमजोरी, कई प्रकार के कैंसर से बचाव , आदि दूध के देनिक सेवन से मिल ज़ाते हें।   पुरानी बीमारियों की रोकथाम में भी दूध मददगार होता है। 

दूध के पोषण का महत्व हमेशा से सारे विश्व ने सदियों माना हे। क़ृष्ण भगवान का संबंध गाय ओर माखन से सर्व विदित हे। वेदिक युग से आज तक पशु विशेषकर गाय पालन महत्वपूर्ण रहा हे। आश्रमों मे हजारों की संख्या में गाय होती थी ओर उनके ऊपर ही ऋषि ओर शिष्य परिवार सहित पलते बढ़ते थे।  ईसा मसीह को भेड़ बकरी पालन दूध आदि के लिए ही था। यह दूध आज भी सारी दुनिया भर के लोगों के आहार में किसी न किसी रूप में शामिल है। 

    कई पशु हमें इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य पदार्थ दूध को प्रदान करते हैं, लेकिन गाय के दूध के समान  बच्चों और वयस्कों के लिए कोई नहीं। यह सबसे अच्छा पौष्टिक पूरक माना जाता है।  अन्य जानवरों भैंस, बकरी ,भेड़ , ऊंट, हिरन, और याक का दूध, यहाँ तक की घोड़े और गधे की दूध भी मनुष्य द्वारा सेवन किया जाता है, हालांकि यह सभी स्थानो पर दुर्लभ होता है। .
    शरीर पोषण में दूध की ​​कमी या अभाव  गंभीर एनीमिया, ऑस्टियोपोरोसिस और अन्य संबंधित बीमारियों का कारण बन सकती है।  दूध का सेवन बहुत अच्छे स्वास्थ्य और सामान्य गतिविधियां बनाए रखने के लिए आवश्यक है।  यह सभी आयु समूहों के लिए कैल्शियम का सबसे अच्छा स्रोत है।

अभिष्यंदी - रसबह नाड़ियां को अवरुद्ध (Blocked) करने वाला|
लसिका ग्रंथियां ओर वाहनियां Lymph nodes and Ducts – सारे शरीर में शरीर में छोटी बीन्स के आकार का ग्रंथियों होती हैं| ये शरीर का सार या रस को (lymph fluid- the nutrients) समस्त कोशिकाओं तक पहुंचाता और, मल भाग को (waste material) मल-मुत्रादी के रूप में निकालता है| यह लसिका व्यवस्था (lymph system) रोग प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) का एक महत्व पूर्ण अंग होता है| 
  •  देखें केसे प्रयोग करें सोंदर्य के लिए दूध   दूध से बने खूबसूरत।:                                                             केवल पीने या खाने में ही नहीं नहाने शरीर पर मालिशसे  भी चमत्कारी सोंदर्य व्रद्धि होती  है।               दूध का प्रयोग करके चेहरे को निखारा जा सकता है। कच्चे दूध को गुलाबजल में मिलाकर चेहरे पर लगाने से त्वचा पर निखार आता है। 
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 प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें|

दूध से बने खूबसूरत।


केवल पीने या खाने में ही नहीं नहाने शरीर पर मालिशसे  भी चमत्कारी सोंदर्य व्रद्धि होती  है।  कुछ प्रयोग देखें-- 
  • दूध का प्रयोग करके चेहरे को निखारा जा सकता है। कच्चे दूध को गुलाबजल में मिलाकर चेहरे पर लगाने से त्वचा पर निखार आता है।
  • गुलाब के 2 फूलों को पीसकर आधा ग्लास कच्चे दूध में 30 मिनट तक भिगोएं, फिर इस लेप को आहिस्ता-आहिस्ता त्वचा पर मलें, सूखने पर ठंडे पानी से धुल दें, त्वचा गुलाबी और नर्म हो जाएगी।
  • दूध में थोडा सा नमक मिलाकर चेहरे पर सुबह-शाम लगाने से मुहांसे दूर होते हैं।
  • आधा चम्मच काला तिल और आधा चम्मच सरसों को बारीक पीसकर दूध में मिलाकर मुहांसे पर लगाने से मुहांसे समाप्त हो जाते हैं।
  • नीबूं का रस, आलू का रस, आटे का चोकर दूध में मिलाकर उबटन बनाकर मुंहासे के समय लगाएं, मुहांसे समाप्त हो जाएंगे।
  • होंठ अगर काले हो गए हों तो दूध को होठों पर लगाने से कालापन दूर होता है।
  • अगर आपके होंठ फट गए हैं तो रात को सोने से पहले एक बूंद गुलाबजल और एक बूंद नींबू का रस दूध की मलाई में मिलाकर लगा लें, इससे राहत मिलती है।
  • बादाम, बेसन, गाजर का रस दूध में मिलाकर उबटन की तरह लगाने से त्वचा में निखार आता है।
  • दूध को पूरे शरीर में रगडने से त्वचा मुलायम होती और निखार आता है।
  • नाखूनों को सुंदर बनाने के लिए कुछ देर तक दूध में भिगोकर रखें।
  • बरतन साफ करने से हाथ खुरदुरा हो जाता है, इन पर दूध में नींबू का रस मिलाकर लगाने से हाथ की त्वचा मुलायम हो जाती है।
  • बादाम और लौंग को बराबर भाग में लेकर पावडर बना लें, आधा चम्मच दूध में चुटकी भर हल्दी मिलाकर चेहरे पर लगाएं, थोडी देर बाद धो लें, इससे चेहरे पर निखार आता है।
  • दूध की मलाई और हल्दी पावडर मिलाकर चेहरे पर मलें, दो हफ्ते बाद चेहरे पर निखार आ जाएगा।
  • काजू को रातभर दूध में भिगोकर सुबह उसे महीन पीसकर उसमें मुलतानी मिट्टी और नींबू का रस मिलाकर तैलीय और शुष्क दोनों प्रकार की त्वचा पर लगाया जा सकता है।
  • एक चम्मच दूध की मलाई में एक चम्मच शहद मिलाकर अपनी त्वचा पर लगाएं, इससे त्वचा की खुश्की समाप्त होगी।
  • दूध की मलाई में थोडा सा पानी‍ मिलाकर चेहरे का फेशियल किया जा सकता है।

 दूध सम्पूर्ण आहार ही नहीं -एक सोंदर्य वर्धक भी है।.. यदि सारे जीवन दूध की उपलब्धता रहे तो यह अकेला ही सम्पूर्ण रूप से पूर्ण आहार होगा। 
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केसे हो कांतिमान त्वचा ?

     उष्ण कटिबंधीय (गर्म) स्थानों पर रहने वाले, निम्न एवं मध्यम वर्ग का समाज जो नित प्रति जीवन की जद्धोजहद में हर समय व्यस्त रहता हे तब उस पर सर्दी, गर्मी, या बरसात हर मोसम की मार का असर उसकी त्वचा पर साफ देखा जा सकता हे, सर से लेकर पैर तक का जा भी भाग सामने या खुला होता हे, उसपर सूखापन या रुक्षता/ विबाई (पैर फटे होना)/मुरझाई सी कान्ति हीन त्वचा उसका स्थाई साथी होता हे। माना जाता हे की पोषक आहार की कमी से एसा हे। पर क्या सभी के साथ एसा होता हे? यदि नहीं तो यह कारण ही एक मात्र नहीं हे। हालांकि कई की त्वचा चमकदार/कांतिमाँन होती हें। पर ऐसे अधिकतर स्त्री-पुरुष सुपोषित होने के साथ एक विशेष बात का ध्यान रखते हे वह हे त्वचा की भी देखरेख। व्यक्ति चाहे कितना भी रफ एंड टफ रहे यदि वह अपनी त्वचा का ठीक तरह से प्रतिदिन शरीर के अन्य भाग की तरह त्वचा का ध्यान भी रखे तो एसा हो सकता हे।
    वास्तव में उष्ण भागो में रहने वाले स्त्री-पुरुषों की त्वचा सूर्य की ऊष्मा से सूखती रहती हे। यही सूखापन विभिन्न रूपों में शरीर पर नजर आता हे। यदि एसा कोई उपाय जो इसको सूखने से बचा ले तब त्वचा चमकदार बनी रह सकती हे। इसके लिए आजकल विज्ञापनों के माध्यम से बहुत सारी क्रीम आदि परोसी जाती हें। जिनका उपयोग कर निश्चय ही लाभ तो प्राप्त किया जा सकता हे पर इस वर्ग के सभी लोग इस पर व्यय होने वाले धन कमा  ही नहीं पाते।  यदि कभी खर्च करें तो भी निरतर होने वाला खर्च उनके इसके प्रति उदासीन बना देता हे। पर सब यह नहीं जानते की बहुत ही कम सभी कर सके इतने कम खर्च पर भी त्वचा को चमकदार बना कर रखा जा सकता हे।
   वर्तमान में हम पुरानी उन समस्त बातो को भुला बेठे हें जिनसे हमारे बुजुर्ग लाभ लिया करते थे , एसा होने का भी कारण  हे, वर्तमान विज्ञापनो की चकाचोंध ने कुछ आसन सा दिखा कर ठगने का प्रयत्न किया हे।  जबकि वह सब भी उन्ही सिधान्तो और साधनों पर काम करता हे। पर निरतर यह अधिक खर्च माध्यम वर्ग नहीं उठा पाता इससे कुछ दिन बाद पुनह पूर्व स्तिथि आ जाती हे। धीरे धीरे हम सब उन पुराने भूलते जा रहे हें ,इसका एक परिणाम यह भी होगा की आने वाली पीडी भी इन्हें नहीं जान पायेगी। 
त्वचा को चमकदार कांतिवान रखने के लिए पोष्टिक आहार जितना जरुरी हे उससे भी जरुरी हे, त्वचा को सूखने से बचाना .पर यह भी हानी कारक और अनावश्यक भी होगा की इसके लिए घर में केद रहा जाये। 
    इस त्वचा को सूखने से बचने का सबसे उत्तम उपाय हे नम रखना यह काम मोश्चारईजर का हे। और सबसे अच्छा मोश्चारईजर हे "तेल" जो विभिन्न प्रकार का जेसे तिल तेल,नारियल तेल,सरसों तेल  से लेकर विदेशो से आयत होने वाले आलिव आयल  और कुछ जो  बहुत  महंगे  बादाम आदि तेल भी हें। पर कोई नहीं जनता की लगभग सभी तेलीय पदार्थों का त्वचा पर असर लगभग एक जेसा होता हे ।  ये सभी त्वचा का मोश्चारईज ही करती हें। पर हम सब जहाँ महंगी चीजों का प्रयोग सब थोडा थोडा कम मात्रा में करते हें वहीँ सस्ते तेल अधिक मात्रा  में करते हे जो कपड़ों में गंध और चिकट करता हे और हम समझते हें की ये अच्छे नहीं। परंतु यह चिक्कट भी तो अच्छी नहीं होती। 
 तो फिर क्या करें? 
   इसका एक समाधान यह हे की इसका प्रयोग कम मात्रा में किया जाए। पर केसे?  यह एक प्रयोग हे जो आप कर सकते हें। नहाने के समय आप कोई भी साबुन/शेम्पू आदि का प्रयोग करते हें, इनमें उपस्थित रसायन अलग अलग शरीर में अलग अलग प्रतिक्रिया कर सकते हें अत: सूखापन आदि भी न्यूनाधिक हो सकता हे। इसी प्रकार से उनके लिए आवश्यक नमी की मात्रा में भी अंतर रखना होगा। पर जब भी हम मोश्चराईजर के रूप में तेल आदि का प्रयोग करते हें तब इसके अनुसार मात्रा का निर्धारण करना अत्यंत कठिन होता हे।अधिकता चिक्कट का कारण होती हे वहीं कमी से लाभ नहीं मिल पता।
   हम यह करें की जब नहाने के अंतिम चरण में (पोछने के पूर्व) सारे शरीर पर तेल लगा लें फिर पुन: पानी शरीर पर डाल लें। ताकि अतिरिक्त तेल छूट जाए या पनि भरी बाल्टी में थोड़ा तेल डालकर पानी को हाथ से मथ दे फिर इस पानी से नहा लें, इस प्रकार से हम पाएंगे की सारा शरीर पर नमी सी आ गई हे ओर इससे न केवल सूखापन दूर हो गया हे, वरन चिक्कट भी जमा नहीं हे। प्रतिदिन एसा करते रहने से कुछ दिनो में ही हमको अपनी स्वस्थ कांतिमान त्वचा मिल जाएगी। 
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Small Tips/छोटी छोटी बाते-बाल का सफ़ेद होना|

Small Tips/छोटी छोटी बाते-बाल का सफ़ेद होना
असमय बाल का सफ़ेद होना आहार या खानपान,  विहार या वातावरण का प्रभाव, रहनसहन अर्थात हम दिन भर किस तरह से रहते हें मसलन खुले वातावरण  में या ऑफिस  या एक कमरे में ,या कितना शारीरिक अथवा मानसिक श्रम करते हें| बाहरी तेल, ओषधि,या कोई भी अन्य प्रयोग का कोई उल्लेखनीय लाभ नहीं होता, हाँ अलबत्ता नियमित योग/आसन आदि शारीरिक समर्थ को बढाने से  अधिक आयु तक सफेदी से कुछ और समय तक बचा सकती हे पर आयु की परिपक्वता से बालों को सफेदी से बचाने का कोई उपाय नहीं हे| असमय सफेदी से बचने के लिए हमें उपरोक्त बातों पर द्यान देना ही होगा| 

उपवास एवं व्रतों से शरीर का कायाकल्प-चन्द्रायण व्रत|

जो व्रत चन्द्रमा की कलाओ के साथ साथ किया जाता है,
उसे चन्द्रायण व्रत कहते है
उपवास एवं व्रतों से शरीर का कायाकल्प---चन्द्रायण व्रत 
भारतीय संस्कृति में ब्रत उपवास आदि को बहुत ही महत्व दिया  है| परम्परागत हिन्दू परिवार की महिलाओं के ब्रत उपवासों की संख्या पुरुषो की तुलना में  बहुत अधिक होती  है|  इसके पीछे कारण हे की अधिकांश महिलाये घर गृहस्थी के देनिक कार्यक्रमों में अपना सारा जीवन बिता देती हें| एक छोटी सी चार दीवारी के बीच व्यतीत होती जिंदगी में यह सब शारीरिक फिटनेस को बनाये रखने का एक अच्छा उपाय हे, पर यदि सामान्य देनिक भोजन में असंतुलन हो तो इससे हानि भी हो जाती हे|  पर व्रत उपवास केवल उन्हें ही करना चाहिए यह विचार गलत है|  पुरुषो में भी मोटापन/ नई डाईविटीज आदि अनेक रोग को इन व्रतों के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता हे | 

मानसून में पेरों में फंगस (या फफूंद) एवं सोंदर्य की समस्याए |

फंगल या फफूंद ग्रस्त अंगुलियाँ 
 मानसून में पेरों की फंगस (या फफूंद) एवं सोंदर्य की समस्याए |

मानसून आ गया है,  लम्बी गर्मी और सूखे के मोसम के बाद बारिश सारी धरती को हरी भरी बना देती हे, जो हमारे मन को बड़ा ही आनंद देती है,  पर प्रत्येक मोसम के लाभ और हानिया भी हें| उसकी अधिकता से या हमारी उसका अति आनंद लेने या लापरवाही के कारण बारिश भी कई रोगों के साथ शारीरिक सोंदर्य को भी प्रभावित करती है।  इस मोसम में अनजाने से शारीर के अन्य भोगो की तुलना में पर अधिक प्रभावित होते हें| अत:आज कल पैरों का बचाव भी बहुत जरुरी हो जाता है।  बरसात में पैरों का ख्याल रखने के सोंदर्य के अतिरिक्त और भी कई दुसरे कारण भी हैं। ऐसे में पैरों की खूबसूरती से अधिक आवश्यक हो जाती है पैरों की सफाई। बारिश के मौसम में पेरों की सफाई की जरा सी भी कमी हुई नहीं की पैरों पर फंगस या फफूंद से संक्रमण होने की संभावना रहती है।

युवा रहने के लिए फल

सोंदर्य समस्या

"सौंदर्य की बात,जब भी आती हे तो सबसे पाहिले 'फल' याद आतें हें। वास्तव में जब हम इनको भूल  जाते हें तब ही सोंदर्य समस्याए जन्म लेने लगती हें।" 
माध्यम वर्गीय भारतीय परिवारों में सोंदर्य समस्या का मूल कारण मिनरल्स एवं विटामिन्स का अभाव होता हे । जो की भोजन की ख़राब या कह सकतें हें,यह संतुलित आहार नहीं लेने के कारण होता हे।हमारे यहं के फास्ट फ़ूड कचोरी समोसा,सेव, मिक्सचर आदि का सामान्य प्रयोग इन समस्याओ को बढाता हे। असंतुलन शरीर पर प्रघट भी सोंदर्य समस्याओ के रूप में होता हे। जब भी इन समस्या के बारे में किसी भी चिकित्सक या सोंदर्य विशेषज्ञ से राय लेते हें तब वह फल सब्जी आदि के प्रयोग के बारे में निर्देश देता हे ।
वास्तव में फल और सब्जियों सतत प्रयोग "हमेशा के लिए सोंदर्य सुख या सुन्दर काया प्रदान करने हेतु , सोंदर्य की समस्याओ को जन्म ही न देने करते रहना जीवन से जोड़े  रखना जीवन भर के लिए  एक खुशी है," हालांकि हम इस तथ्य नजर अंदाज कर के  का सामना हमारे दैनिक जीवन की हलचल से निपटने. उम्र हम पर ढोंगी करता है यह एक अमीर आहार का पालन करके में सुपर फल की उम्र को ख़त्म कि आप बंद उन झुर्रियाँ warding द्वारा सौंदर्य और साल अपने जीवन को जोड़ सकते हैं.

यहाँ कारक है कि तुम हमेशा के लिए युवा रहने में मदद कर सकते हैं की कुछ कर रहे हैं:

भूल फल

जब फल वास्तव में याद किया जाता है, यह सिर्फ एक सेब या वहाँ एक केले है. लेकिन हम भूल जाते हैं कि क्या है कि ताजा फल पोषक तत्वों से भरपूर हैं. वे कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा में, मैग्नीशियम, विटामिन सी, लोहा, बीटा कैरोटीन और फोलिक एसिड प्रदान करते हैं और सुपर कम कैलोरी में हैं. ", एक फल एक दिन आप कि कभी चमक त्वचा की गारंटी कर सकते हैं" डॉ. Ritika Samaddar, मुख्य आहार विशेषज्ञ, मैक्स हेल्थकेयर कहते हैं.
खट्टे फल जैसे संतरे, कीनू, नीबू और grapefruits बड़ी मात्रा में भस्म किया जाना चाहिए के रूप में इन विटामिन सी में अमीर हैं यह कोलेजन के संश्लेषण, त्वचा के एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक प्रोटीन के लिए आवश्यक है.
ब्लूबेरी, blackberries, चेरी, लाल और बैंगनी अंगूर, बीट और बैंगनी गोभी एंटीऑक्सीडेंट यौगिकों, जो मदद से आप उन उम्र लाइनों को कम होते हैं.
Cantaloupe आड़ू, खुबानी और महत्वपूर्ण - विरोधी oxidants, जो अत्यंत उपयोगी होते हैं के लिए उम्र बढ़ने के खिलाफ लड़ाई है.

स्थानीय और मौसमी फल

यह उचित लगता है कि एक एकल फल उन झुर्रीदार हाथ और पैर की उंगलियों पर एक जादू कर सकते हैं नहीं है. फल की व्यापक रूप से उपलब्ध स्थानीय किस्मों के लिए चुनते हैं. मौसम में उत्पादन अपने 50 साल की उम्र में 30 देखने की इच्छा के लिए इष्टतम पोषण का महत्व प्रदान करता है.
समयोचित सेब की खपत बहुत रूप में यह कोलेजन के उत्पादन को बढ़ावा देने. कोलेजन के उत्पादन के लिए त्वचा की लोच है जो wrinkling कम कर सकते हैं बनाए रखने के लिए आवश्यक है.
तरबूज़ विटामिन सी में अमीर तरबूज की 92% पानी है रहे हैं. यह हाइड्रेट आपके शरीर के लिए एक अच्छा तरीका है - सिर्फ एक स्वादिष्ट और मीठा ठग के लिए रस का उपयोग करें या सिर्फ दिन पर स्लाइस की जोड़ी को काटने के लिए रखने के लिए अपने युवाओं को हमेशा के लिए शुद्ध.
ब्लूबेरी विटामिन बी 6, सी, कश्मीर और आहार फाइबर में समृद्ध है. इन महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट के साथ अपने शरीर को बहुत प्रदान. अमेरिका में कृषि अनुसंधान सेवा द्वारा रासायनिक अध्ययन तथ्य यह है कि ब्लूबेरी रसायन, जो मस्तिष्क की शक्ति को बढ़ाने के नीचे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी होते हैं उजागर किया है.


फल फाइबर

Avocado, अमरूद, खूबानी, अंजीर, तारीख और करौदा के रूप में फाइबर अमीर फल अच्छा काम कर हालत में पाचन तंत्र रखने जबकि कब्ज और बवासीर (बवासीर) को समाप्त. सेब, प्लम, आड़ू और नाशपाती के रूप में वे फाइबर सामग्री में उच्च जैसे फल की त्वचा से छील मत करो.

भोजन की एक इंद्रधनुष

", इंद्रधनुष अवधारणा बनाता है यह आसान करने के लिए सफेद कबाड़ खाने याद नहीं है" मैक्स हेल्थकेयर के मुख्य आहार विशेषज्ञ डॉ. Ritika Samaddar राज्यों. इस रंगीन संयोजन सरल carbs के खिलाफ सलाह देते हैं, साबुत अनाज और विविधता को बढ़ावा देता है, वह आगे बताया.

तो, हम सुरक्षित रूप से कह सकता हूँ कि समृद्ध रंग समृद्ध फल और इसके पोषक मूल्य के बराबर होती है. यह की तरह जो संयंत्र खुद की सुरक्षा के लिए एंटीऑक्सिडेंट और फाइटो - पोषक तत्वों के उच्च स्तर होते हैं एक इंद्रधनुष खाने 'है. Cranberries, खरबूजे, केले, प्लम और अंगूर जैसे चमकीले रंगों वाले फल खाने से हम हमारे शरीर में विटामिन और एंटी कि मुकाबला हमारी त्वचा में कोलेजन और elastin का टूटना है जो हमारी त्वचा फर्म और युवा रखने में मदद करता है. दे रहे हैं
रंगीन फल एंटीऑक्सिडेंट और अन्य phytonutrients कि आनुवंशिक क्षति के खिलाफ अपनी रक्षा को बढ़ावा देने का पूरा कर रहे हैं और तुम जवान रहने के लिए मदद करता है.

बस सुनहरा सोचा याद


अपने 20 देखो कुछ है जो आपकी त्वचा के नीचे छिपा हो सकता है. तो, आप सब करने की ज़रूरत है सिर्फ विनम्रता अपनी रसोई में चलना, कि रेफ्रिजरेटर खोलने और चबाना है कि आसानी से रंग का फल बैठे खाड़ी में आँख हलकों के तहत उन महंगी विरोधी उम्र बढ़ने लोशन, और झुर्रियों को रखना.








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सिर के जूं - रक्त पिपासु पिशाच आपके सर पर


     जुओं की समस्या ज़्यादातर 3 से 12 वर्ष के बच्चों में पाई जाती है। लेकिन यह समस्या किसी को भी परेशान कर सकती है।
जुओं का आहार और खान पान मनुष्य का रक्त होता है। वह जिसके सिर में रहती हैं उसका रक्त पीकर जीती हैं। इनको "पिशाच"कहा जा सकता हे|
इनकी उपस्थिति शारीर में रक्त की कमी का कारण बन सकती हे| इनके कारण बच्चे चिडचिडे,हो जाते हे उनका मन किसी भी कम में नहीं लगता |
जुएँ क्या हैं ?
जुएँ बहुत ही महीन, पंख रहित कीड़े होते हैं जो सिर में आसानी से नज़र नहीं आते। वे भूरे और स्लेटी रंग की होती हैं और हर जूँ की लम्बाई चौड़ाई एक तिल से ज़्यादा नहीं होती। सिर की जुएँ, माता पिता, बच्चों, स्कूल और स्वास्थ्य की देखभाल करनेवालों की सहायता से नियंत्रण में की जा सकती हैं।
जुएँ कैसे फैलती हैं
सिर की जुएँ एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे संपर्क में आने के कारण स्थानांतरित होती हैं। संदूषित कंघियाँ और हेयर ब्रश इस्तेमाल करने से, या संदूषित चद्दरें, तौलिये या शावर कैप मिल  बाँट कर इस्तेमाल करने से सिर की जुएँ फैलती हैं।
सिर में जुएँ होने के लक्षण
बालों में किसी चीज़ के चलने का एहसास।
जुओं के काटने के कारण सिर में खुजली का एहसास।
जुओं के काटने से सिर में घाव, जो कभी कभी संक्रमित हो सकते हैं।
सिर के जुओं का घरेलू और आयुर्वेदिक उपचार

  • अमरुद के पत्तों को पीसकर हल्दी के साथ मिलाकर मिश्रण बना लें और नहाने से दो घंटे पहले सिर पर मल दें। इससे आपको जुओं से छुटकारा मिल जायेगी।
  • नीम के पत्तों को पीसकर नहाने से 2 घंटे पहले सिर पर लगाने से भी जुओं से छुटकारा मिलता है।
  • निबौली (नीम का तैल), सरसों या माजूफल का तेल लगाने से या अरिठे का फेन लगाने से जूँ और लीखें मर जाती हैं।
  • तुलसी के पत्ते पीसकर सिर पर लगा लें, उसके बाद सिर पर कपड़ा बांध लें। सारी जुएँ मरकर कपडे से चिपक जायेंगी, और ऐसा दो तीन बार करने से पूर्ण रूप से जुएँ साफ़ हो जायेंगी।
  • आधा चम्मच काली मिर्च का पाउडर और एक कप दही दो चम्मच नींबू के रस के साथ मिलाकर, नहाने से 20 मिनट पहले सिर पर लगाने से सिर की जुओं का पूर्ण रूप से खात्मा होता है। पर एक बात याद रखें कि नहाते वक़्त अपनी आँखें बंद रखें वर्ना काली मिर्च का पाउडर आपकी आँखों को जलन से परेशान कर सकता है।
  • नींबू के टुकड़े को सिर पर रगड़ने से या नींबू का रस नारियल के तेल के साथ मिलाकर सिर पर लगाने से भी जुएँ पूर्ण रूप से नष्ट हो जाती हैं।
  • नीम के पत्ते और तुलसी के पत्ते तकिये के नीचे रखने से जुओं की समस्या काफी हद तक ख़तम हो जाती है।
  • लहसून का कसैला स्वाद भी जुओं को मारने में सहायक सिद्ध होता है। नहाने से पहले लहसून की लेई नींबू के रस के साथ मिलाकर सिर पर लगाने से भी जुओं को नष्ट करने में मदद मिलती है।
  • सिर के से बालों को नियमित  धोने से भी 2 दिन के अंदर जुएँ नष्ट हो जाती हैं।
  • तीन चम्मच नींबू रस को एक चम्मच मक्खन में मिलाकर अपने बालों में 15 मिनट के लिये लगाकर रखें। उसके बाद बालों को धो दें। यह जुओं के लिये बहुत ही आसान उपचार है।
बचाव

घर की साफ़ सफाई बनाये रखें। बालों की कंघियों और हेयर ब्रश की नियमित रूप से सफाई करें। जुओं से ग्रस्त व्यक्ति के द्वारा इस्तेमाल की गयी चद्दरें, तकियों के आवरण वगैरह गर्म पानी से वॉशिंग मशीन में अच्छी तरह धोएं। हो सके तो घर की सफाई वैक्यूम क्लीनर से करें।
सिर के जुओं का इलाज जल्द से जल्द करना चाहिये क्योंकि अगर ऐसा नहीं किया गया तो यह बालों की जड़ों को कमज़ोर कर सकती हैं, जिससे खुजली और बालों के झड़ने की संभावना हो सकती है।

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पुरूषों में मुंहासे


    पुरूषों की त्वचा महिलाओं की त्वचा से बहुत अलग होती है, क्योंकि यह मोटी होती है और इसमें कनेक्टिव टिश्यूज (कोलेजेन और इलास्टिन) की ज़्यादा तादाद इसे अधिक मज़बूत और लोचदार बनाती है। ऑयली त्वचा और बड़े रंध्रों वाली त्वचा वाले पुरूषों की त्वचा पर एक्ने की समस्याएं ज़्यादा हो सकती हैं क्योंकि रंध्र सीबम(गंदगी) और मैल से जाम हो जाते हैं। चूंकि पुरूष अपने फेस पर शेविंग का नियमित रूटीन अपनाते हैं इससे त्वचा पर अतिरिक्त खिंचाव पड़ता है जिससे इरिटेशन, ड्राइनेस और सेंसिविटी उत्पन्न होती है। इनग्रोन हेयर्स और रेजर बम्पिंग की समस्याएं भी आम पाई जाती हैं। लिहाजा पुरूषों को भी बेसिक्स से शुरू करते हुए एक त्वचा केयर रूटीन अपनाने की ज़रूरत होती है।
चूंकि पुरूषों की त्वचा महिलाओं की अपेक्षा 20 परसेंट ज़्यादा ऑयली होती है और इसमें बड़े रंध्र होते हैं जिससे इरप्शन्स होने की संभावना भी ज़्यादा होती है इसलिये शुरूआत करने के लिये किसी अच्छे क्लींजर का इस्तेमाल ज़रूरी है। फेश वॉश या लिक्विड क्लींजर केवल महिलाओं के लिये ही नहीं बल्कि पुरूषों के लिये भी होते हैं और इनका इस्तेमाल कहीं से भी आपकी मर्दानगी को घटाता नहीं। सोप बार आपकी त्वचा पर ड्राइ इफेक्ट उत्पन्न कर सकते हैं खासकर यदि आपकी त्वचा ड्राइ प्रकार की है तो ऐसे सोप बार फायदेमंद हो सकते हैं जिनमें माइश्चराईजिंग के तत्व हों। ग्लाईकोलिक एसिड या लैक्टिक एसिड, सैलिसिलिक एसिड या बेंजाईल पैराक्साईड वाला क्लींजर ज़्यादा फायदेमंद हो सकता है क्योंकि इनमें एन्टिबैक्टीरियल गुणों के अलावा डीप पोर क्लीनिंग के लिये एक्सफॉलिएटिंग गुण भी होते हैं।
पुरूषों को अपनी त्वचा माइश्चराईज्ड रखने की कोशिश करनी चाहिये क्योंकि शेविंग से त्वचा ड्राइ हो जाती है। आपकी त्वचा की माइश्चराईजिंग एक त्वचा प्रकार से दूसरे के अनुसार अलग हो सकती है जबकि ऑयली त्वचा प्रकार के लोग माईश्चराईजर के बजाय किसी टोनर का इस्तेमाल कर सकते हैं ड्राइ त्वचा को हैवी ड्यूटी मॉइश्चराईज़र की ज़रूरत होती है। नार्मल त्वचा पर लाइट माईश्चराईजर उपयोग किया जा सकता है। किसी अल्फा-हाईड्रॉक्सी एसिड जैसे कि ग्लाईकोलिक एसिड या सैलिसिलिक एसिड वाला माईश्चराईजर त्वचा टोन और क्वॉलिटी बेहतर करने में मददगार साबित होता है।
त्वचा और हेल्थ केयर का अन्य ज़रूरी हिस्सा है सन प्रोटेक्शन जिसे किसी भी कीमत पर उपेक्षित नहीं किया जाना चाहिये। धूप में ओवर एक्सपोजर न केवल त्वचा को डैमेज करता है बल्कि त्वचा कैंसर का खतरा भी उत्पन्न करता है। पर्याप्त एसपीएफ सुरक्षा वाली सनस्क्रीन का उपयोग किया जाना चाहिये और लेबल पर दिये निर्देशों के अनुसार इसको दोबारा लगायें। 30 एसपीएफ वाली सनस्क्रीन, जो यूवीए और यूवीबी दोनों किरणों को ब्लॉक करती हो, उपयोग की जा सकती है। पूरे कपडे पहनना और सनग्लॉसेज इस्तेमाल करना सन प्रोटेक्शन के अन्य उपाय हैं।

शेविंग ज़्यादातर पुरूषों की दैनिक दिनचर्या में शामिल रहती है और इस काम को करते समय इनग्रोन हेयर्स के कारण कई कट् या रेजर बम्प लग जाते हैं। यदि शेविंग से आपकी त्वचा पर जलन होती है तो इसके लिये आपका रेजर दोषी हो सकता है। इलेक्ट्रिक और मैनुअल दोनों मेल के रेजरों की अपनी खूबियां और कमियां होती हैं और इनको प्रयोग करने से पहले इनका मूल्यांकन अवश्य कर लेना चाहिये। मैनुअल रेजर से क्लोजर शेव बनती है क्योंकि ब्लेड त्वचा के नजदीक पहुंचते हैं जो त्वचा इरिटेशन की वजह बन सकते हैं। यदि आपको अक्सर रेजर बम्प होते हैं तो इलेक्ट्रिक रेजर का उपयोग कर सकते हैं जिससे क्लोज शेव नहीं मिलती लेकिन यह त्वचा को समान रूप से इरिटेट कर सकता है क्योंकि यह बालों को "खींचता" है। जो आपके लिये कारगर हो उसे इस्तेमाल करें। आपकी शेविंग दिनचर्या में क्लीन्ज के लिये, प्री-शेव इस्तेमाल के लिये, शेविंग, टोनिंग और माइश्चराईजिंग के लिये बाजार में अनेक शेविंग प्रोडक्ट्स उपलब्ध हैं। शेविंग करने से इरिटेशन फ्री त्वचा पाने के लिये पहले फेश वॉश का इस्तेमाल करें जिसके बाद प्री-शेव ऑयल का उपयोग करने से आपकी दाढ़ी सॉफ्ट होकर फेशियल त्वचा को सुरक्षा मिलती है और क्लोज शेव मुमकिन होती है। शेव करने के बाद ऑफ्टर केयर रूटीन में किसी ऑफ्टर शेव से टोन-अप करना और हल्के मॉइश्चराईज़र का प्रयोग करना ज़रूरी है। एल्कोहल वाले ऑफ्टर शेव से बचें। एलोवेरा युक्त लोशन या विटामिन ई युक्त सूदिंग ऑफ्टरशेव का इस्तेमाल करें ताकि इरिटेटेड त्वचा को राहत मिल सके।

  • यदि चेहरे पर मुंहासों जैसे ढेर सारे दाने पास-पास और गुच्छे की शक्ल में हों और बहुत दिनों तक बने रहें तो सावधान हो जाइए। यह एक्ने हो सकता हे। 

देखें --  एक्ने /पिंपल्स/ या मुहासे --घरेलू इलाजएक्ने सौंदर्य पर दाग।   

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मुंहासों के लिए फलों के रस

यदि चेहरे पर मुंहासों जैसे ढेर सारे दाने पास-पास और गुच्छे की शक्ल में हों और बहुत दिनों तक बने रहें तो सावधान हो जाइए। यह एक्ने हो सकता हे। देखें- एक्ने /पिंपल्स/ या मुहासे --घरेलू इलाज/-- एक्ने सौंदर्य पर दाग    
200 ग्राम टमाटर-कच्ची हल्दी का रस एक से तीन महीने तक लगातार पीने से मुंहासों में फायदा होता है।
बीटरूट-सेबफल-अमरूद तथा पपीते का रस रोज पिएं। खीरा ककड़ी-गाजर-धनिया पत्ती का रस तथा आंवले का चूर्ण रोज लें।
अंगूर, नाशपाती, का रस, पालक-टमाटर का रस लेने से कब्ज दूर होगी तथा मुंहासे गायब हो जाएंगे।
टमाटर को पीसकर चेहरे पर इसका लेप लगाने से त्वचा की कांति और चमक दो गुना बढ़ जाती है। मुंहासे, चेहरे की झाइयां और दाग-धब्बे दूर करने में मदद मिलती है।
रक्त शुद्धि के लिए : गाजर-पालक, पत्तागोभी-लाल शलगम, टमाटर-पालक, टमाटर-कच्ची हल्दी और सेबफल का मिश्रण सेवन किया जा सकता है।
आंवला-अमरूद, संतरा आदि का रस उचित मात्रा में लेना चाहिए।



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एक्ने /पिंपल्स/ या मुहासे --घरेलू इलाज


   कुछ सौंदर्य संबंधी समस्‍याएं ऐसी भी होती हैं जिससे टीनेजर्स और युवा, खासकर लड़कियां हीनभावना से भर जाती हैं। इतना ही नहीं सौंदर्य समस्याओं के चलते लड़कियां अपना आत्मविश्वास खोने लगती हैं। एक्ने ऐसी ही समस्या है जिसको लेकर लड़कियां खासा परेशान रहती हैं क्योंकि यह समस्या आमतौर पर टीनेज और युवावस्था में अधिक होती है। हालांकि अधिक उम्र में भी एक्नें की समस्या परेशान कर सकती हैं। दरअसल, एक्ने त्वचा में जलन और पिंपल्स होने की स्थिति को कहते हैं। आपको ऐसे में कुछ ऐसे ब्यूटी टिप्स अपनाने की जरूरत है ताकि एक्ने परेशान न करें।
एक्ने आमतौर पर बॉडी के उन हिस्सों में ज्यादा होते हैं, जहां ऑयल ग्लैंड्स ऐक्टिव होते हैं। यही वजह है कि चेहरे, पीठ, छाती, गर्दन और बाहों के ऊपरी हिस्से में ये बहुत ज्यादा होते हैं। लेकिन समय पर इलाज न होने से ये दाग भी छोड़ सकते हैं।
चेहरे और अन्य जगहों पर ऑयल का जमाव न हो इसके लिए बार-बार चेहरा धोते रहना चाहिए।
सौंदर्य संबंधी चेहरे की समस्याओं को दूर करने के लिए चंदन बहुत ही किफायती होता है। आप चंदन और हल्दी पाउडर दूध के साथ मिलाकर चेहरे पर लगाएंगे तो आपको त्‍वचा की जलन और मुंहासों से आराम मिलेगा।
पानी के साथ घिसा हुआ जायफल एक्ने और पिंपल के इलाज में कारगर होता है।
रात को सोने से पहले अच्छी् तरह मुंह धोकर, खीरे के रस में हल्दी पाउडर लगाने से एक्ने की समस्या का समाधान किया जा सकता हैं।
फुलक्रीम दूध में चिरौंजी मिलाकर पेस्ट बनाना भी एक्ने की समस्या में लाभदायक है।
त्वचा की जलन और मुंहासों को दूर करने के लिए मसूर की काली दाल को पीसकर उसमें दूध, घी मिलाकर पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाना चाहिए।
नीम की पत्तियों को धीमी आंच पर उबालें। ठंडा होने पर पत्तियों का पेस्ट बनाएं और चेहरे पर लगाएं। ऐसा प्रतिदिन करने से एक्ने की समस्या से निजात मिलती हैं।
एक्ने की समस्या से बचने के लिए आपको मेकअप कम से कम करना होगा और मेकअप करें भी तो वाटरप्रूफ मेकअप ही करें।
एक्नें की समस्या‍ को खानपान से भी दूर किया जा सकता हैं लेकिन उसके लिए आपको तैलीय खाद्य पदार्थों और चॉकलेट, पेस्ट्री इत्यादि खाद्य पदार्थों को नजरअंदाज करना होगा।
इन सब उपायों को करने के बाद भी यदि आपकी समस्या कम नहीं होती या फिर आपको आराम नहीं मिल रहा हो बिना देर किए आपको तुरंत स्किन स्पेशलिस्ट से मिलना चाहिए, क्योंकि एक्ने की समस्या आमतौर पर हार्मोंस में होने वाले बदलाव और असंतुलन के कारण भी हो सकती है।

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एक्ने सौंदर्य पर दाग


   मुंहासों जैसे ढेर सारे दाने पास-पास और गुच्छे की शक्ल में हों और बहुत दिनों तक बने रहें तो सावधान हो जाइए। यह एक्ने हो सकता है। अगर आपके परिवार में एक्ने की हिस्ट्री रही है यानी आपके मां या पिता को भी यह समस्या रही है तो भी आपको इससे बचाव की कोशिशें शुरू कर देनी चाहिए।

एक्ने त्वचा का एक डिसऑर्डर है। यह मुंहासों का ही बिगड़ा हुआ रूप है। फर्क यह है कि आमतौर पर मुंहासे जहां बिना किसी विशेष उपचार के किशोरावस्था के बाद स्वयं ही ठीक हो जाते हैं, वहां एक्ने के साथ ऐसा नहीं होता और जब तक इसका सही ढंग से इलाज न हो, यह ठीक नहीं होता।
------क्यों होता है एक्ने
त्वचा के नीचे स्थित सिबेशस ग्लैंड्स से त्वचा को नमी देने के लिए तेल निकलता है। ये ग्लैंड्स चेहरे, पीठ, छाती और कंधों पर सबसे ज्यादा होते हैं। अगर ये ज्यादा सक्रिय हो जाएं तो रोमछिद्र चिपचिपे होकर ब्लॉक हो जाते हैं और उनमें बैक्टीरिया पनपने लगते हैं जो एक्ने का कारण बनते हैं। सामान्य स्थिति में सूर्य की किरणें इनको पनपने नहीं देतीं। सिबेशस ग्लैंड्स की अति सक्रियता की प्रमुख वजह एंड्रोजन हार्मोन की अधिकता है। एंड्रोजन पुरुष सेक्स हार्मोन है और यह लड़के और लड़कियों दोनों में ही होता है। युवावस्था में इसका रिसाव अधिक होता है।
कई लड़कियों को पीरियड्स से पहले हर बार मुंहासे निकल आते हैं जो बिगड़कर एक्ने का रूप ले सकते हैं। ऐसा ओव्यूलेशन के बाद प्रोजेस्टरॉन हार्मोन के ज्यादा सिक्रीशन की वजह से होता है। इससे त्वचा पर छोटे-छोटे दानों के गुच्छे से बन जाते हैं। इसी तरह सिबेशस ग्रंथियों से उत्पन्न सीबम त्वचा के पिगमेंट (रंग निर्धारक तत्व) से मिलकर रोमछिद्रों को ब्लॉक कर देता है तो ब्लैकहेड्स बनते हैं। अगर त्वचा की अंदरूनी परत में सीबम जमा हो जाता है तो व्हाइटहेड्स बनते हैं। कई बार ब्लैकहैड्स और व्हाइटहेड्स त्वचा के भीतर फैलने के बाद फूट जाते हैं, जिससे बाहरी त्वचा पर एक्ने और फैल सकता है।
टॉक्सीन भी है कारण
शरीर में जरूरत से ज्यादा टॉक्सिक तत्व भी एक्ने का कारण हो सकते हैं। त्वचा का एक महत्वपूर्ण कार्य पसीने के जरिए शरीर से टॉक्सिक तत्वों को बाहर निकालना है। ऐसे में अगर टॉक्सिक तत्व बहुत ज्यादा हो जाएं तो इस पूरी प्रक्रिया में त्वचा के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।
इसके अलावा एलर्जी, तनाव, जंकफूड, सैचुरेटड फैट, हाइड्रोजेनेटेड फैट और पशु उत्पादों के प्रयोग, कुपोषण और प्रदूषण से भी एक्ने की संभावना बढ़ जाती है। कुछ दवाओं जैसे स्टीरॉयड, ओरल कांट्रेसेप्टिव पिल्स और मिरगी की दवाओं आदि के रिएक्शन से भी एक्ने हो सकता है। 
बचाव--
कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो एक्ने को रोका जा सकता है, कम से कम उसका ज्यादा बढ़ना तो कम किया ही जा सकता है। बेहतर होगा कि आप मुंहासे निकलते ही एक्ने की रोकथाम के उपाय शुरू कर दें|
खान-पान -- क्या करे?, क्या न करे ?

भोजन में ऐसी चीजें लें जिनमें फैट और मसालों की मात्रा बहुत कम हो। अधिक चिकनाई, तेज मीठा, स्टार्चयुक्त और मसालेदार भोजन से एक्ने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसलिए ऐसे भोजन से बचें।
रेशेदार पदार्थ अधिक मात्रा में लें। इससे पेट साफ रहता है और शरीर के विषाक्त पदार्थ भी (टॉक्सीन) अच्छी तरह बाहर निकल जाते हैं।

ऐसी चीजें अपने भोजन में शामिल करें, जिनमें जिंक काफी मात्रा में हो। जैसे शेलफिश, सोयाबीन, साबुत अनाज, सूरजमुखी के बीज और सूखे मेवे। जिंक एंटी बैक्टीरियल होता है।
खट्टी चीजें जैसे लो फैट दही पर्याप्त मात्रा में खाएं ।
प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थो और आयोडीन नमक का प्रयोग कम से कम करें। इनमें आयोडीन बहुत होता है और इससे एक्ने बढ़ता है। मछली और प्याज में भी आयोडीन पाया जाता है, इसलिए इनसे भी दूर रहें।
शराब, मक्खन, कॉफी, चीज, चॉकलेट, क्रीम, कोको, अंडे, मांस, पोल्ट्री उत्पाद, सॉफ्ट और ब्रोमिनेटेड वेजिटेबल ऑयल का इस्तेमाल बिलकुल न करें।
सप्ताह में एक दिन उपवास करें।
रोज कम से कम आठ-दस गिलास पानी जरूर पिएं ताकि विषाक्त पदार्थ शरीर से अच्छी तरह बाहर निकल सकें। नियमित व्यायाम करें और ताजी हवा में अधिक देर तक रहें।
दूध से बनी चीजों को कम से कम एक महीने तक अपनी डाइट से हटा दें। कभी-कभी इनसे एलर्जी के कारण भी एक्ने हो सकता है, साथ ही इनमें शामिल वसा से एक्ने बढ़ जाता है। एक महीने बाद एक-एक कर दूध से बनी चीजें लेना एक वक्त शुरू करें और यह जांचें कि एक्ने दोबारा तो नहीं हो|


समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान ,एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें |.

बालों का झड़ना कैसे रोके?

बालों का झड़ना कैसे रोके?
बाल झड़ना आम बात है। सामान्यतः दिन में करीब 100 बाल झड़ते हैं तो कोई परेशानी वाली बात नहीं, क्योंकि इतने ही बाल प्रतिदिन झड़ते ही हें | लेकिन अगर आपके बाल इससे कहीं ज्यादा झड़ते हैं तो ये परेशानी की बात है। आज हर किसी को कोई न कोई बालों की समस्या रहती हैं। लेकिन यदि आप अपने आहार में विटामिन बी की मात्रा बढ़ा देंगे तो काफी हद तक आपको इस समस्या से निजात मिल जाएगी। अपने बालों को जरुरत के अनुसार ही आपको अपने बालों को ट्रीटमेंट देना चाहिए। तभी वह प्रभावी ढंग से परिणाम देगा।
कुछ लोग बालों में बार-बार कंधी करते हैं,ये सोचकर कि इससे बाल लंबे होंगे या फिर बाल सुलझें रहेंगे लेकिन आपको बता दें इससे भी कई बार बाल झड़ते है। आपको बालों को दिन में कम से कम 2-3 बार कंधी करें, इससे आपके बाल कम से कम उलझेंगे और बाल कम टूटेंगे। यानी बाल सुलझे भी रहेंगे और बालों के टूटने का डर भी खत्म।
बालों को झड़ने से बचाने के लिए आपको अपने बालों को धूप से बचाना चाहिए। जब भी आप बाहर धूप में जाएं तो अपने साथ छाता लेकर जाएं या फिर अपने बालों को कपड़े से पूरी तरह ढक लें।
बहुत गर्म पानी से बाल ना धोएं,वरना आपके बाल अधिक खराब हो जाएंगे और जल्दी टूटने लगेंगे।
बालों को टूटने से बचाने के लिए आपको डाइट में प्रोटीन, आयरन, जिंक, सल्फर, विटामिन सी, के
अलावा विटामिन बी से युक्त खाघ पदार्थ भरपूर मात्रा में लेने चाहिए।
पर यह भी जरुरी हे की जंक फ़ूड से बचा जाये ,क्योकि यदि इनसे ही पेट भरा होगा तो अच्छी डाईट कब और केसे ले पायेगे |
बालों को टाइट बांधना, हॉट रोलर्स व ब्लो ड्रायर व आयरन के ज्यादा इस्तेमाल करने से भी बाल डैमेज हो जाते हैं। इसीलिए कोशिश करें कि बालों को प्राकृतिक ही रहने दें और बालों पर बहुत ज्यादा एक्सेपेरिमेंट करने से बचें।
बालों को सही पोषण न मिलने से भी बाल झड़ने लगते हैं, ऐसे में बालों को झड़ने से बचाने के लिए समय-समय पर बालों में मेंहदी लगानी चाहिए या फिर बालों को पोषण देने के लिए दही भी लगा सकते हैं।
बालों को मजबूत बनाने और टूटने से बचाने के लिए आपको सप्ताह में कम से कम दो बार बालों की जड़ों में आंवला, बादाम, ऑलिव ऑयल, नारियल का तेल, सरसो का तेल इत्यादि में से कोई एक लगाना चाहिए। इससे बालों का झड़ना, बाल पतले होना, डैंड्रफ, दोमुंहे बाल व उम्र से पहले बालों का सफेद होने जैसी प्रॉब्लम्स से निपटा जा सकता है।
बालों के लिए प्रयोग होने वाले उत्पाद जैसे शैंपू, कंडीशनर इत्यादि प्रॉडक्ट्स अच्छी क्वालिटी के ही प्रयोग करने चाहिए। इससे बाल अच्छे होंगे और टूटने से बचेंगे।
अच्हा हे की खुद के द्वारा बनया हुआ प्राकतिक प्रोडक्ट प्रयोग करे |
बालों पर कलर करने से भी बाल खराब हो जाते हैं और जल्दी टूटने भी लगते हैं। इसीलिए बालों को कलर करने से पहले ध्यान रखें कि डाई में अमोनिया की मात्रा कम से कम हो यानी आप प्राकृतिक कलर मेहदी आदि को ही बाल कलर करने के लिए चुनें। इससे आपके बाल प्रभाव ढंग से हेल्दी् और स्वस्थ रहेंगे।
प्रति दिन नियम पूर्वक ५ बादाम,5 अखरोट ५ मुनक्का १ आबला,और एक चम्मच गुलकंद खाने से बालो झड़ना बंद हो जाते हें | पर कुछ दिन नहीं हमेशा लेते रहना ठीक हे |

और भी देखें-- असमय सफेद होने वाले बालों का इलाज
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असमय सफेद होने वाले बालों का इलाज

असमय सफेद होने वाले बालों का इलाज
सफेद बालों का नज़र आना आज युवाओ में लगभग आम हो गया है। बालों के सफेद होने की समस्या आमतौर पर पोषक तत्वों की कमी के कारण होती है। हालांकि असमय सफेद होने वाले बालों का इलाज संभव है। लेकिन यह जानना भी बेहद जरूरी है कि आखिर वे कौन से ऐसे कारक हैं जिनसे असमय बाल सफेद होते हैं|
शरीर जब मेलानिन कोशिकाओं का निर्माण करना बंद कर देता है, तो बालों की रंगत बदलने लगती है। मेलानिन ही वास्तव में बालों को काला रखने का कारण होता है। इस प्रक्रिया में मेलानोसाइट्स नामक कोशिकाएं एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
मेलानिन की निर्माण प्रक्रिया शरीर में विटामिन बी 12 की कमी होने से बाधित होती है।
सिरदर्द या सायनस जैसी बीमारी के कारण भी बाल सफेद होते हैं।
तनावयुक्तस माहौल में काम करने या जरूरत से ज्यादा तनाव के कारण भी बाल असमय सफेद होने लगते हैं।
यदि आप हरी सब्जियों व फलों का कम सेवन करते हैं तो भी आपके बाल सफेद हो सकते हैं।
खाने में प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और विटामिन की कमी भी बालों की सफेदी का प्रमुख कारण है।
बालों में केमिकलयुक्त शैंपू लगाने या हेयर डाई के प्रयोग से भी बाल जल्दी सफेद हो जाते हैं
कम उम्र में डायबिटीज का शिकार होने से भी सफेद बालों की समस्या होने लगती हैं।
युवाओं में थाइराइड ग्लैड ग्रंथी की अधिकता या स्राव में कमी के कारण भी बाल समय से पहले ही सफेद होने लगते हैं।
अधिक दवाओं के कारण भी बाल सफेद होने लगते हैं यानी हार्मोन्स में होने वाले बदलावों के चलते या किन्हीं दवाइयों के सेवन से बाल अपनी असली रंगत खोने लगते हैं।
विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के कारण होने वाली शारीरिक कमजोरी, धूम्रपान, आधुनिक जीवनशैली, अल्कोहल या नशीले पदार्थों के अधिक सेवन के कारण बाल समय से पहले ही सफेद होने लगते हैं।
युवावस्था में जैनेटिक एग्जिमा के कारण सिर में सफेद बाल दिखाई दे सकते हैं।
अधिक चिंता करना,जिम्मेदारी का बोझ,खान-पान में लापरवाही या पोषक तत्वों की कमी के कारण बाल असमय सफेद होने लगते हैं।
एनीमिया और बार-बार तेज बुखार होने से भी बालों सफेद हो जाते है।
अनिद्रा भी सफेद बालों के लिए जिम्मेदार है।
सिर में रक्त की आपूर्ति में बाधा उत्पन्न होने से सफेद बालों की समस्या उत्पन्न होने लगती हैं।
युवाओं में प्रायः धूम्रपान और मादक पदार्थों के सेवन से भी बालों के सफेद होने की समस्या लगातार बढ़ रही हैं|
ख़राब आदतों को बदल डाले ऊपर के कुछ कारण हों चिकित्सक से संपर्क करें | पूरी जाँच करावे ,और चिकित्सा लें |
प्रति दिन नियम पूर्वक ५ बादाम,5 अखरोट ५ मुनक्का १ आबला,और एक चम्मच गुलकंद खाने से बाल स्वस्थ रहते हें | पर कुछ दिन नहीं लगातार लेते रहना ठीक हे |
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चिकित्सा सेवा अथवा व्यवसाय?

स्वास्थ है हमारा अधिकार १

हमारा लक्ष्य सामान्य जन से लेकर प्रत्येक विशिष्ट जन को समग्र स्वस्थ्य का लाभ पहुँचाना है| पंचकर्म सहित आयुर्वेद चिकित्सा, स्वास्थय हेतु लाभकारी लेख, इच्छित को स्वास्थ्य प्रशिक्षण, और स्वास्थ्य विषयक जन जागरण करना है| आयुर्वेदिक चिकित्सा – यह आयुर्वेद विज्ञानं के रूप में विश्व की पुरातन चिकित्सा पद्ध्ति है, जो ‘समग्र शरीर’ (अर्थात शरीर, मन और आत्मा) को स्वस्थ्य करती है|

निशुल्क परामर्श

जीवन के चार चरणौ में (आश्रम) में वान-प्रस्थ,ओर सन्यास अंतिम चरण माना गया है, तीसरे चरण की आयु में पहुंचकर वर्तमान परिस्थिती में वान-प्रस्थ का अर्थ वन-गमन न मान कर अपने अभी तक के सम्पुर्ण अनुभवोंं का लाभ अन्य चिकित्सकौं,ओर समाज के अन्य वर्ग को प्रदान करना मान कर, अपने निवास एमआइजी 4/1 प्रगति नगर उज्जैन मप्र पर धर्मार्थ चिकित्सा सेवा प्रारंंभ कर दी गई है। कोई भी रोगी प्रतिदिन सोमवार से शनी वार तक प्रात: 9 से 12 एवंं दोपहर 2 से 6 बजे तक न्युनतम 10/- रु प्रतिदिन टोकन शुल्क (निर्धनों को निशुल्क आवश्यक निशुल्क ओषधि हेतु राशी) का सह्योग कर चिकित्सा परामर्श प्राप्त कर सकेगा। हमारे द्वारा लिखित ऑषधियांं सभी मान्यता प्राप्त मेडिकल स्टोर से क्रय की जा सकेंगी। पंचकर्म आदि आवश्यक प्रक्रिया जो अधिकतम 10% रोगियोंं को आवश्यक होगी वह न्युनतम शुल्क पर उपलब्ध की जा सकेगी। क्रपया चिकित्सा परामर्श के लिये फोन पर आग्रह न करेंं। ।

चिकित्सक सहयोगी बने:
- हमारे यहाँ देश भर से रोगी चिकित्सा परामर्श हेतु आते हैं,या परामर्श करते हें, सभी का उज्जैन आना अक्सर धन, समय आदि कारणों से संभव नहीं हो पाता, एसी स्थिति में आप हमारे सहयोगी बन सकते हें| यदि आप पंजीकृत आयुर्वेद स्नातक (न्यूनतम) हें! आप पंचकर्म चिकित्सा में रूचि रखते हैं, ओर प्रारम्भ करना चाह्ते हैं या सीखना चाह्ते हैं, तो सम्पर्क करेंं। आप पंचकर्म केंद्र अथवा पंचकर्म और आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रक्रियाओं जैसे अर्श- क्षार सूत्र, रक्त मोक्षण, अग्निकर्म, वमन, विरेचन, बस्ती, या शिरोधारा जैसे विशिष्ट स्नेहनादी माध्यम से चिकित्सा कार्य करते हें, तो आप संपर्क कर सकते हें| सम्पर्क समय- 02 PM to 5 PM, Monday to Saturday- 9425379102/ mail- healthforalldrvyas@gmail.com केवल एलोपेथिक चिकित्सा कार्य करने वाले चिकित्सक सम्पर्क न करें|

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