Rescue from incurable disease

Rescue from incurable disease
लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |
  • Home
  • Contact Us
  • About Me
  • Q & A
  • Article's स्वास्थ्य लेख
  • Panchakarma(पंचकर्म)
  • Common Article
  • Specific article (विशेष लेख)
  • VIDEO
  • Hair Loss,Whiteness. Dandruff, Thinning, or Baldness.-- The Treatment is "Thalapothichil or Shiro-lep". {बालों का झड़ना, सफेदी, रूसी, पतलापन, या गंजापन? उपचार है- थालापोथिचिल या शिरो लेप!}

    Hair  Loss,whiteness, Dandruff, Thinning, or Baldness.-- TheTretment is Thalapothichil  or Shiro-lep. 
     बालों का झड़ना, सफेदी,  रूसी, पतलापन, या गंजापन?  उपचार है- थालापोथिचिल या शिरो लेप!
        सिर के बाल झड़ रहें हों, असमय सफ़ेद हो रहे हों डेंड्रफ का संक्रमण हो, बालों को सुन्दर, घने, चमकीला बनाना चाहते हों तो शिरोलेप, शिरोधारा, शिरोबस्ती, शिरो पिचु आदि कोई चिकित्सा जो पंचकर्म का एक भाग है करना लाभदायक सिद्ध होगा।
        सामान्यत: शिर के बालों की समस्या का होना सार्वदैहिक अर्थात शरीर की अन्य समस्याओं के कारण होती है। 
     बालों का झड़ना, सफेदी,  रूसी, पतलापन, या गंजापन?  उपचार है-
    थालापोथिचिल या शिरो लेप!
       आधुनिक लोग इसे खनिज (मिनरल), विटामिन्स, की कमी या हार्मोनल समस्या से जोड़ते है।  आयुर्वेद के मान से भी यह ठीक है, परन्तु इन समस्याओं की जड़ मेटाबोलोज़्म का बिगड़ना ही होता है। इसे ही रस रक्तादि समस्त धातुओं का सम्यक परिपोषण न होना भी कह सकते हैं। {देखें हमारा  पूर्व लेख "Panchakarma therapy is to destroy the roots of diseases.आयुर्वेदीय पंचकर्म चिकित्सा से जड़ से ठीक हो जाते हैं सब रोग।"} समस्या को पूर्ण रूप से ठीक करें हेतु वमन विरचनादि पंचकर्म प्रक्रिया करवा कर शिरो लेप करने से समस्या अति शीघ्र और हमेशा के लिए मिट जाती है।
        वास्तव में  बालों का झडंना या पकना कई वात विकारों या अन्य विशेष कारणों से जुड़ा हुआ भी होता है, पर सामान्यत: उन पर किसी का ध्यान नहीं जाता।
        ये समस्या चिंता, तनाव, एंजायटी, अवसाद, आदि या अधिक मानसिक परिश्रम, थायरॉइड जैसी हार्मोनल समस्या से भी होता है, अक्सर ऐसी स्थिति में अनिद्रा,  भ्रम, बेचेनी, मानसिक दौर्बल्य, रक्त दवाव विकृति, जैसे कारणों से भी हो सकती है।
        यदि समस्या सामान्य या नई हो तो केवल शिरो लेप आदि चिकित्सा से इन सब कष्टो से छुटकारा भी मिल सकता है, या समय के अभाव में अन्य पंचकर्म न करवा कर यदि शिरो लेप चिकित्सा ही की जाये तो भी आशिक लाभ मिल जाता है। यदि अन्य धातुएं अधिक दूषित हों तो चिकित्सक की सहायता से आवश्यक पंचकर्म चिकित्सा के साथ शिरो लेप, बस्ती, धारा  आदि करवाने के साथ ओषधि चिकित्सा से लाभ पूर्ण लिया जा सकता है। 
    क्या है यह शिरो लेप चिकित्सा?  
        शिरो लेप (anointment to head/ head pack) को केरला में थालापोथिचिल Thalapothichil, (मलयालम शब्द]  के नाम से जाना और सफलता पूर्वक किया जाता है।  यह एक विशेष प्रक्रिया है इसमें ओषधियों का लेप बनाकर रोगी के सर पर लगभग एक इंच मोटी तह बनाकर, केले या कमल के पत्ते से ढक कर ३० से ४५ मिनिट तक रखा जाता है। 
        पूर्व कर्म के अंतर्गत रोगी को स्थिर सुखासन में बिठाकर पहिले औषधीय तैल से शिर का स्नेहन (मालिश) की जाती है, एक तौलिया को उष्ण औषधीय क्वाथ में भिगो और निचोड़ कर शिर पर रख स्वेदन करने के बाद ही शिरोलेप, बस्ती, या धारा आदि क्रिया की जाती है।  पूर्ण लाभ हेतु प्रक्रिया में पंचकर्म नियमानुसार, षडबिन्दु तैल का नस्य दिया जाता है। यह भी जानना जरुरी है की केवल एक दो बार करने से लाभ नहीं होता। नई त्वचा, बाल  और टिशूज को बनने में लगभग १५ -२० दिन लगते हैं, अत: लगातार ५ -७  दिन शिरोलेप करवाना और प्रतिमाह के अंतराल से ५-७ कोर्स लेने पर ही लाभ मिलता है।  प्रक्रिया पूरी तरह प्राकृतिक होने से चिकित्सा बंद होने के बाद भी रोग पुनः नहीं लौटता। 
      इससे पूर्ण लाभ प्राप्त करने हेतु चिकित्सक का निष्णात होना आवश्यक शर्त है। अनघड़, अपरिपक्व अशिक्षित चिकित्सक द्वरा की गई चिकित्सा से हानि भी सम्भावित है। चिकित्सा की इस प्रक्रिया को पड कर कोई इसे स्वयं न करें, यह आग्रह है। 
    शिरोलेप (anointment to head/ head pack) या थालापोथिचिल [Thala = The headpothichil =  The covering] में सामान्यता निम्न ओषधियाँ प्रयोग की जातीं हैं।
    1. स्नेहन हेतु सामान्यत: तिल तैल या ब्राह्मी, शंखपुष्पी, भ्रंगराज आदि ओषधि से सिद्ध तैल। 
    2. शिरो लेप के लिए तक्र (मट्ठा) में रात्रि भर मिटटी के पात्र में भिगोया आंवला चूर्ण। 
    3. अथवा रोगानुसार चरक संहिता में वर्णित ओषधियों के कल्क का प्रयोग। 
    4. चिकित्सक अपने अनुभव और आवश्यकता के मान से विभिन्न ओषधियों का प्रयोग कर रोगी को लाभ दे सकता है, प्रक्रिया यही रहती है। 
    शिरो लेप के माध्यम से प्रमुखतः निम्न पित्त दोष दूर कर निम्न लाभ मिलता है।  
    1 -आराम, मन की शांति और शरीर पर एक सुखदायक प्रभाव। 
         Relaxes and calms down the mind; has a soothing effect on the body. 
    2 - तंत्रिका तंत्र पर शामक प्रभाव (शांति)। 
         Stabilizes the nervous system. 
    3 - मर्म (नेत्र आदि महत्वपूर्ण अंग) को  सक्रिय करता है।
         Activates the Marma (vital areas) points. 
    4 - तनाव, चिंता, सिर का भारीपन से छुटकारा दिलाता है। 
          Relieves stress, tension, heaviness of the head. 
    5 - शांत और अच्छी नींद प्राप्ति |
         Improves quality of sleep. 
    6 - बालों की चमक, और स्निग्धता में  वृद्धि| 
         Improves lustre and smoothness of hair. 
    7  - स्मरण शक्ति में वृद्धि | 
          Improves memory.  
    8  -आराम की अनुभूती, शिर और गर्दन क्षेत्र का पोषण और त्वचा नवीनीकरण| 
          Relaxes, rejuvenates and nourishes the head and neck region.
    शिरो लेप या Thalapothichil द्वारा निम्न रोगों में चिकित्सा की जा सकती है।
    अनिद्रा एवं निद्रा विषयक विकार| Insomnia and sleep disorders. 
    1 - उच्च रक्त चाप | 
         Hypertension. 
    2 - माइग्रेन, जैसे सिर के दर्द| 
        Chronic headaches like migraines. 
    3- शरीर में जलन|
         Burning sensation of the body. 
    4- शिर के कई चर्म रोग जैसे  डेंड्रफ, खुजली, बाल झड़ना आदि।
         Certain skin diseases of scalp like dermatitis of scalp, dandruff, hair loss. 
    8- समय से पूर्व बाल सफ़ेद होना।  
         Premature graying of hair. 
    9- कुछ विशेष पागलपन जैसे रोग। 
        Certain types of Insanity. 
    10- मिर्गी या अप्स्मार।
           Epilepsy. 
    11- जीर्ण नासा कला शोथ (साइनोसाइटिस) 
           Chronic sinusitis. 
    12- चिंता, अवसाद। 
           Anxiety, depression. 
          उपर्युक्त रोगों में लाभ शिरोधारा, शिरो बस्ती, और मूर्ध तैल आदि अन्य पंचकर्म के अंतर्गत ही आने वाली कई प्रक्रियाओं के माध्यम से भी किया जा सकता है। आपके रोग के अनुसार किस विधि के प्रयोग से अधिक लाभ मिलेगा यह कोई निष्णात अनुभवी चिकित्सक से निश्चित करना और उसकी देखरेख में सही पद्धत्ति से  ही करवाना चहिये। 

    समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें| आपको कोई जानकारी पसंद आती है, ऑर आप उसे अपने मित्रो को शेयर करना/ बताना चाहते है, तो आप फेस-बुक/ ट्विटर/ई मेल/ जिनके आइकान नीचे बने हें को क्लिक कर शेयर कर दें। इसका प्रकाशन जन हित में किया जा रहा है।
    Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
    Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

    स्वास्थ /रोग विषयक प्रश्न यहाँ दर्ज कर सकते हें|

    स्वास्थ है हमारा अधिकार

    हमारा लक्ष्य सामान्य जन से लेकर प्रत्येक विशिष्ट जन को समग्र स्वस्थ्य का लाभ पहुँचाना है| पंचकर्म सहित आयुर्वेद चिकित्सा, स्वास्थय हेतु लाभकारी लेख, इच्छित को स्वास्थ्य प्रशिक्षण, और स्वास्थ्य विषयक जन जागरण करना है| आयुर्वेदिक चिकित्सा – यह आयुर्वेद विज्ञानं के रूप में विश्व की पुरातन चिकित्सा पद्ध्ति है, जो ‘समग्र शरीर’ (अर्थात शरीर, मन और आत्मा) को स्वस्थ्य करती है|

    चिकित्सक सहयोगी बने:
    - हमारे यहाँ देश भर से रोगी चिकित्सा परामर्श हेतु आते हैं,या परामर्श करते हें, सभी का उज्जैन आना अक्सर धन, समय आदि कारणों से संभव नहीं हो पाता, एसी स्थिति में आप हमारे सहयोगी बन सकते हें| यदि आप पंजीकृत आयुर्वेद स्नातक (न्यूनतम) हें! आप पंचकर्म केंद्र अथवा पंचकर्म और आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रक्रियाओं जैसे अर्श- क्षार सूत्र, रक्त मोक्षण, अग्निकर्म, वमन, विरेचन, बस्ती, या शिरोधारा जैसे विशिष्ट स्नेहनादी माध्यम से चिकित्सा कार्य करते हें, तो आप संपर्क कर सकते हें| 9425379102/ mail- healthforalldrvyas@gmail.com केवल परामर्श चिकित्सा कार्य करने वाले चिकित्सक सम्पर्क न करें|