Rescue from incurable disease

Rescue from incurable disease
लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |

चिकित्सा सेवा अथवा व्यवसाय?

स्वास्थ है हमारा अधिकार १

हमारा लक्ष्य सामान्य जन से लेकर प्रत्येक विशिष्ट जन को समग्र स्वस्थ्य का लाभ पहुँचाना है| पंचकर्म सहित आयुर्वेद चिकित्सा, स्वास्थय हेतु लाभकारी लेख, इच्छित को स्वास्थ्य प्रशिक्षण, और स्वास्थ्य विषयक जन जागरण करना है| आयुर्वेदिक चिकित्सा – यह आयुर्वेद विज्ञानं के रूप में विश्व की पुरातन चिकित्सा पद्ध्ति है, जो ‘समग्र शरीर’ (अर्थात शरीर, मन और आत्मा) को स्वस्थ्य करती है|

निशुल्क परामर्श

जीवन के चार चरणौ में (आश्रम) में वान-प्रस्थ,ओर सन्यास अंतिम चरण माना गया है, तीसरे चरण की आयु में पहुंचकर वर्तमान परिस्थिती में वान-प्रस्थ का अर्थ वन-गमन न मान कर अपने अभी तक के सम्पुर्ण अनुभवोंं का लाभ अन्य चिकित्सकौं,ओर समाज के अन्य वर्ग को प्रदान करना मान कर, अपने निवास एमआइजी 4/1 प्रगति नगर उज्जैन मप्र पर धर्मार्थ चिकित्सा सेवा प्रारंंभ कर दी गई है। कोई भी रोगी प्रतिदिन सोमवार से शनी वार तक प्रात: 9 से 12 एवंं दोपहर 2 से 6 बजे तक न्युनतम 10/- रु प्रतिदिन टोकन शुल्क (निर्धनों को निशुल्क आवश्यक निशुल्क ओषधि हेतु राशी) का सह्योग कर चिकित्सा परामर्श प्राप्त कर सकेगा। हमारे द्वारा लिखित ऑषधियांं सभी मान्यता प्राप्त मेडिकल स्टोर से क्रय की जा सकेंगी। पंचकर्म आदि आवश्यक प्रक्रिया जो अधिकतम 10% रोगियोंं को आवश्यक होगी वह न्युनतम शुल्क पर उपलब्ध की जा सकेगी। क्रपया चिकित्सा परामर्श के लिये फोन पर आग्रह न करेंं। ।

चिकित्सक सहयोगी बने:
- हमारे यहाँ देश भर से रोगी चिकित्सा परामर्श हेतु आते हैं,या परामर्श करते हें, सभी का उज्जैन आना अक्सर धन, समय आदि कारणों से संभव नहीं हो पाता, एसी स्थिति में आप हमारे सहयोगी बन सकते हें| यदि आप पंजीकृत आयुर्वेद स्नातक (न्यूनतम) हें! आप पंचकर्म चिकित्सा में रूचि रखते हैं, ओर प्रारम्भ करना चाह्ते हैं या सीखना चाह्ते हैं, तो सम्पर्क करेंं। आप पंचकर्म केंद्र अथवा पंचकर्म और आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रक्रियाओं जैसे अर्श- क्षार सूत्र, रक्त मोक्षण, अग्निकर्म, वमन, विरेचन, बस्ती, या शिरोधारा जैसे विशिष्ट स्नेहनादी माध्यम से चिकित्सा कार्य करते हें, तो आप संपर्क कर सकते हें| सम्पर्क समय- 02 PM to 5 PM, Monday to Saturday- 9425379102/ mail- healthforalldrvyas@gmail.com केवल एलोपेथिक चिकित्सा कार्य करने वाले चिकित्सक सम्पर्क न करें|

Some people are worried about losing weight and some are worried about gaining weight! कुछ लोग वजन कम होने से चिंतित हैं और कुछ बडने से!

Some people are worried about losing weight and some are worried about gaining weight!
कुछ लोग वजन कम होने से चिंतित हैं  और कुछ बडने से!
निम्न इस लेख में छुपा है, शरीर का बडाने या घटाने का राज?  
इससे आप शरीर की वजन बडाने वाली प्रक्रिया के विषय में जान कर मोटापे से बच सकते हैं या वजन कम भी कर सकते है, ओर हमेशा नियंत्रित भी रख सकते हैं !!
आजकल हम आयुर्वेदिक चिकित्सकों के पास वजन कम करने ईच्छुक तो बहुत आते हैं, पर बहुत से एसे लोग भी आते हैं जो चाह्ते हैं, कि उनका वजन बड जाय। कई बच्चों के माता-पिता भी बच्चों के कम वजन से चिंतित हो कर हमारे पास आते रहते हैं। यह लेख दोनों के लिये पडना ओर अमल करना चाहिये। 
में  अपनी बात बडे ही कम शब्दों में कह रहा  हूँ, सावधानी से समझ कर पडने से आप अपना वजन कम या अधिक कुछ भी कर सकते हैं।  

Some symptoms that can tell that you are getting "Obese" now. (कुछ लक्षण जो बता सकते है की, अब आप मोटे होते जा रहे हैं।)

कुछ लक्षण जो बता सकते है की, अब आप मोटे होते जा रहे हैं।
वजन बड रहा है केसे जाने?
अक्सर हम शरीर कि छोटी मोटी समस्याओं को को नजर अंदाज करते रहते हैं। थोडे से  श्रम या पैदल चलने से सांस फूलती हो या कमजोरी मह्सूस हो, थकान, अचानक पसीना, सोते समय  खरांटे, पीठ ओर जोडों में दर्द, आत्मविश्वास और आत्मसम्मान में कमी का अनुभव, अकेलापन लगने लगा हो तो समझा जा सकता है की आप मोटापे की ओर बड रहे हैं। 
कैसे बचेंं इस मोटापे से?   

Ideal weight table according to height.


  कद के अनुसार आदर्श  वजन तालिका।  
स्वस्थ व्यक्तियों (स्त्री पुरुषों का आदर्श वजन,उनकी ऊचाई के अनुसार कितना होना चहिये। यह जिज्ञासा सभी को होती है। आप अपने कद के अनुसार वजन देख सकते  है।  
आगे निम्नांकित तालिका में देखें :----  ।

Fistula, Bhagandar, एनल फिस्टुला, भगंदर, गुदा नाडी व्रण, रोग है क्या करुंं?

प्रश्नो पर उत्तर   2019   
  • प्रश्न – फिश्चुला 15 वर्ष से 

प्रश्न कर्ता- Shailendra dodiya/ Ujjain आयु - 78 
   
          एनल फिस्टुला, भगंदर, गुदा नाडी व्रण, आदि नामक इस रोग में गुदा के निकास के आस-पास बहरी भाग से अन्दर मलाशय के किसी भी हिस्से में खुलने वाली नाडी या नलकी जैसी रचना बन जाती है, इसके द्वारा खून, पस, या मलाशय के तरल द्रव्य निकलते रहते हें| संक्रमण के कारण मवाद (पस), निकलना, दर्द, सुजन, तेज खुजली और जलन, आदि समस्या पैदा हो जाती है|

Fasting on festivals - A mode of mind and self refinement, with the liberation of body disease! त्योहारों पर उपवास - शरीर की रोगों से मुक्ति के साथ मन और आत्म शोधन की एक विधा!

पर्व ओर त्योहारों पर उपवास – शरीर (रोग मुक्त्ति) , मन ओर आत्म शोधन की एक विधा! 
डॉ. मधु सूदन व्यास उज्जैन मप्र,  
https://healthforalldrvyas.blogspot.com/2019/09/
fasting-on-festivals-mode-of-mind-and.html
कई व्यक्ती नव रात्री सहित अन्य पर्वो पर एक या अधिक दिन के  ब्रत या उपवास रख साधना करते हैं। धर्म ग्रंथो में वर्णित उपवास के कई भावार्थ किये हैं। ईश्वर के पास बेठना, तप-जप करना, बल पूर्वक इंद्रियो को वश में करने का प्रयंत्न, आदि आदि हैं पर सामान्यत: इसे भोजन ग्रहण न करने से माना जाता है। वास्तव में इसे धर्म ग्रंथो में शरीर, मन ओर आत्मा को स्वस्थ्य ओर शुद्ध करने के विचार से ऋषियों ने शामिल किया है। इसलिये उपवास शरीर ओर मन की चिकित्सा से स्वत: जुड जाता है। 
चिकित्सकीय द्रष्टी से यहाँ उपवास का अभिप्राय, शरीर के पाचन संस्थान के विश्राम से है। प्रतिदिन दो से पांच बार या अधिक भी, कुछ न कुछ खाते रहने से यह पाचन संस्थान दिन रात सक्रिय रहता है। पाचन तंन्त्र भी विश्राम करे यह शरीर की प्राकृतिक मांग होती है, इसीलिये लगभग सभी प्राणी अकसर कभी कभी कुछ समय के लिये खाना छोडते देखे जाते हैं। मनुष्य को भी रोग प्रभाव होते समय खाना खाना छोडते देखा जाता है।
रोग की मजबूरी वश खाना छोडने की बजाय यदि विचार पूर्वक छोडा जाये, या उपवास किया जाये तो अधिक लाभकारी सिद्ध हो सकता है।  

Beware: - With The repeated Tonsillitis- you can be a victim for a lifetime, of disability, arthritis, or gout?

सावधान :- बार-बार टांसिलाइटिस होने से,  आप जीवन भर के लिए हो सकते हैं शिकार - अपंगता, आमवात,  या गाउट के ?

  • टोंसिलाइटिस सामन्यत: जल्दी ठीक हो भी जाता है पर-- ?
  • इसे सामान्य रोग समझ कर उपेक्षा कर वेपरवाह रहना जीवन भर का संकट उत्पन्न कर सकता है। 
  • टोंसिल्स बार-बार होते रहने से क्या हो सकता है?
  • कोई नहीं चाहेगा कि युवा वस्था के बाद ही इस प्रकार का रोग उसे हो।
  • कैसे बचेंगें ?
  • टोंसिल्स बढ़ने को रोकने के लिए होने के कारण हटाना होगा? 
  • बड़ी ही आसान है - चिकित्सा ? 

टोंसिलाईटिस क्या है? 

"Psoriasis"- Disease that is incurable by medicine - but you can cure it yourself?["सोराइसिस" दवा से ठीक न हो पाने वाला एक रोग - पर आप खुद इसे ठीक कर सकते हैं- कैसे? ]

"सोराइसिस"  दवा से ठीक न हो पाने वाला एक रोग - पर आप खुद इसे ठीक कर सकते हैं-  कैसे?  
सोराइसिस, psoriasis, अपरस, विचर्चिका, Eczema आदि नामों वाला भयानक कष्ट कारी इस रोग के बारे में बहूत सारे प्रश्न उठते होंगे आपके मन में जैसे -
  • सोराइसिस दवा से क्यों ठीक नहीं होता?
  • रोग का कारण क्या है?
  • कैसे हमारी रोग नियंत्रण प्रणाली ही सोरैसिस के लिये है,  जिम्मेदार?
  • रोग प्रतिरोधक शक्ति को कैसे ठीक करें?  
  • क्या इससे सोराइसिस के अतिरिक्त ओर रोग भी ठीक हो सकेंगे?
  • में तो अभी स्वस्थ्य हूं क्या मुझे एसा खराब रोग हो सकता है?
  • क्या कोई इसे ठीक करने में मेरी मदद कर सकता है?
  • चिकित्सा में समय कितना लगेगा?
  • क्या पंच कर्म निशुल्क या कम खर्च पर भी उपलब्ध है

Dry Eye Syndrome (shushkashipak), Parishushskaksha netra and its management. (For Ayurvedic physicians.)

ड्राई आई (शुष्काक्षिपाक) परिशुष्कश नेत्र और आयुर्वेद चिकित्सा प्रबंधन:- आयुर्वेदिक चिकित्सकों के लिए।
(DryEye Syndrome (shushkashipak), Parishushskaksha netra and its management.
आधुनिक चिकित्सकों के पास ड्राय आई की स्थाई चिकित्सा नहीं है, आयुर्वेद की इयह नेत्र बस्ती पद्धती से चिकित्सक अपने क्लिनिक पर आसानी से चिकित्सा करके अनेक रोगियों को लाभ दे सकता है, इस प्रकार की नेत्र बस्ती चश्मे का नंबर भी उतार, या काम कर सकती है-
 नेत्र या हमारी आंख हमारे शरीर का एक बहुत ही महत्व पूर्ण अंग है, इसके बिना जीवन दूभर हो सकता है| आंख की स्वस्थता, सक्रियता (Activism) के लिए प्रकृति ने लगातार नम या आद्र (Moist) रखने के लिए आंसू (Tear) दिए हें| इन आंसुओं के बनना बंद होने या कम होने से कन्जेकट्टाइबा शुष्क हो जाता है, या आँखों में खुश्की या सूखापन आता है और दृष्टि क्षमता में कमी आने लगती है, और चुभन, और रेत गिरने या कोई बाहरी वस्तु होने जैसा अनुभव, जलन, विशेषकर पंखे या एयर कंडिशनर में रहने पर, टीवी देखने में, पड़ने में, अधिक गर्मी या धूप से, अधिक कष्ट होता है

"Nasya Karma" (A Panchakarma process) - Therapy for diseases affecting the head..

“नस्य कर्म” (एक पंचकर्म प्रक्रिया)- सिर के सम्पूर्ण अंगों के रोगों को ठीक करने वाली विधा है।
 डॉ. मधु सूदन व्यास
सामान्य रोग सर्दी जुकाम से प्रारम्भ होकर शरीर में किसी भी स्थान पर कोई भी रोग, या आकस्मिक घटना, दुर्घटना क्रोध,शोक, खूशी आदि आवेग, कुछ भी क्योंं न हो उसका प्रभाव गरदन से उपरी भाग पर अवश्य होता है। अधिकांश मामलों में मुहुँ बंद होने, या उससे लेने में असमर्थ होने से नाक से देने का उध्योग किया जाने लगता है, यह प्रक्रिया ही 'नस्य' का एक स्वरूप है। इसी कारण आयुर्वेदिक चिकित्सा विज्ञान में "नस्य कर्म" की पंच कर्म के एक उपक्रम के रूप में, बडी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। 
समाज में प्रचलित बफारे (भाप लेना), विक्स आदि कुछ सुंघाना, आदि जो नस्य का रूप हैं, के स्थान पर  आयुर्वेदिक विधि से नस्य द्वारा, रोगों की चिकित्सा करेंगे तो परिणाम अधिक लाभकारी मिल सकेंगें। कम से कम प्रत्येक आयुर्वेदिक चिकित्सक को तो इनका प्रयोग चिकित्सा में करना ही चहिये, ओर देनिक जीवन चर्या में कुछ प्रतिमर्श नस्य कर्म (नस्य जो चिकित्सक की निगरानी में करना जरुरी नहीं, आगे पड़ें -) प्रतिदिन करते रहने की प्रेरणा रोगी ओर समाज को देना ही चाहिये।

  • नस्य क्या है?  
  • नस्य कैसे लेते हैं? 
  • क्या चिकित्सक की सलाह बिना कैसा नस्य ले सकते हैं? 
  • कौन सा नस्य सलाह बिना नहीं लेना चाहिए? 
  • चिकित्सक नस्य कैसे करें? 

आदी आदि प्रश्नो के उत्तर जानने के लिए आगे पड़ें :-  

Sinusitis:- permanent treatment through Ayurveda panchakarma. साइनोसाइटिस: - आयुर्वेदिक पंचकर्म के माध्यम से स्थायी उपचार।

Sinusitis:- permanent treatment through Ayurveda panchakarma. साइनोसाइटिस: - आयुर्वेदिक पंचकर्म के माध्यम से स्थायी उपचार।
कुछ वर्ष पूर्व एक राजनेता को सतत जुकाम से पीडित देख, मफलर धारी होने पर मजाक बनाये जाते देखा गया था, आज वे पूर्ण स्वस्थ हैं, कैसे हममेंं से अधिकतर व्यक्ति नहीं जानते, ओर यह भी नहीं जानते कि उन्हेंं था क्या? 

वर्तमान समय की अनियमित और विलासी अर्थात आराम जिंदगी जीने वालों, और प्रदूषित हवा में साँस लेने, खुले बाज़ार में सस्ते तेल घी आदि से बने पूरी, कचोरी आदि खाने से, संक्रमित खाना खाने और पानी पीने वालों को, प्रतिदिन ठीक तरह और दोनों समय ब्रश न करने वालों को, गले और नाक की प्रतिदिन ठीक से सफाई न करने से, इंसानी खोपड़ी के शिर और मस्तक के पास के हवा भरे स्थानों जिन्हे कैविटी (चित्र देखें), जो हमारे सिर में हल्कापन व श्वास वाली हवा लाने ले जाने में मदद करती है, में कफ या बलगम जमा हो जाता है
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