Rescue from incurable disease

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लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |
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  • Central obesity risk- What can be some kind of illness unnaturally come out of the stomach.

    Q- पेट के मध्यभाग का अप्राकृतिक रूप से बाहर आना क्या किसी तरह की बीमारी हो सकती है. में इससे असहज महसूस कर रहा हूँ? यह प्रश्न किया है भुवनेश्वर, उडीसा के 25 वर्ष के कमलेश

    Erectile Dysfunctioning of male sex organ is not Impotence.(ध्वज-भंग होना नपुंसकता नहीं)

    पुरुषों में  ध्वज-भंग होना नपुंसकता नहीं होती.  
    Erectile Dysfunctioning is not Impotence.
    नपुंसकता का अर्थ सामान्यत: लिंग में उत्तेजना में कमी (loss of erection ध्वज-भंग) माना जाता है| परन्तु वास्तव में यह सच नहीं है, नपुंसकता का अर्थ है, प्रजनन क्षमता का अभाव
    स्पष्ट रूप से समझ लें की जो ध्वज-भंग (loss of erection) के कारण सेक्स में असमर्थ होते हें, वे भी प्रजनन कर सन्तान उत्पन्न कर सकते हें, इसलिए वे नपुंसक नहीं होते, उनकी इस कमी को दूर किया जा सकता है|
    ध्वज भंग और नपुंसकता के कारण- ध्वज भंग (loss of erection) जिसे नपुंसकता समझा जाता है के इन कारणों को जानने से हम इसकी चिकित्सा कर पाएंगे|
    संक्षेप में समझ लें की, यदि कोई व्यक्ति किसी भी कारण

    Eating more fat leads to impotence.- Experiments & Results.

    अधिक वसा सेवन से हो जाती है नपुंसकता- एक शोध परिणाम
    देखा जाता है की पुरुष सबसे अधिक सचेत अपने पुरुषत्व के प्रति होता है| वह जीवन भर केवल यही चाहता है की वह हमेशा “मर्द” बना रहे| पुरुषत्व या मर्दानगी का कारण शुक्राणु का शरीर में बनते रहना होता है| परतु आश्चर्य की बात है की स्वाद और आनंद के लिए वर्तमान में जो भी चिकनाई युक्त खाना खाता वे शुक्र उत्पादन को कितनी हानि पहुँचा सकते हें यह वह नहीं जानता|  
    हमारे देश में प्रतिदिन हलवा, खीर, पूरी मिठाइयाँ और पकवान, और कई मांसाहारी पकवान बनाये और खाए जाते हें, इन पकवानों को पोष्टिक भी माना  जाता है| 

    प्रश्न :- लम्बे समय से शरीर के अंगों में पीलापन, कमजोरी

    प्रश्न :- दिनांक - 12/ 9/2017 समय 21:21:27- नाम - कृष्णा पटेल निवासी गिरोता जिला इंदौर मप्र
    आयु -25 वर्ष,
    मेरे शरीर में हमेशा पीलापन रहता है, आँख भी पीली रहती हैं|  8 वर्ष से शरीर मे कमज़ोरी  ओर पीलापन है

    Be careful about the fun foods?

    आज से ही सोंचे आपको कैसा भविष्य/बुडापा चाहिए?
    हमारी जिव्हा (जीभ) या रसना -
    अर्थात स्वाद की अनुभूति (पता) करने वाला मुहं का यंत्र प्रकृति ने ज्ञान के लिए हमें दिया है, यह हमारी बोलने या भाषा द्वारा भावों को आदान प्रदान में भी सहायक होती है|
    पर अधिकतर हम इसका दुरूपयोग करते हें, बोलेने से होने वाले लाभ हानी स्वास्थ्य के विचार से छोड़ दें, तो हम पायेंगें वर्तमान में जितने भी कष्ट रोग ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रोल, फिर हार्ट डिसीज, मोटापा या शरीर का प्रत्येक अंग किसी न किसी रोग से ग्रस्त होता है तो आदि होते हें उसके पीछे भी सिर्फ यही जिव्हा ही है|
    हकीम लुक़मान का कहना है " आदमी अपनी जीभ से अपनी कब्र खोदता है"।

    Before Marriage is essential to match the body's horoscope.

    क्यों विवाह पूर्व अधिक जरुरी है- 
    - शरीर की कुंडली मिलाना? 
    चाहे माता-पिता आदि द्वारा तय किया विवाह (अरेंज्ड मेरीज) हो, या गंधर्व विवाह (लव-मेरिज) विवाह मूल रूप से सामाजिक सन्तति वर्धन की प्रक्रिया है, इसी कारण विवाह का सम्बन्ध युवक -युवती के शरीर और स्वास्थ्य से जुडा हुआ हो ही जाता है|   
    कई समाजों में विशेषकर हिन्दुओं में जन्म कुंडली मिलाना प्राथमिक माना जाता है, या इसके जैसी ही अन्य बातों पर धर्म के मान से विचार किया जाता है| “पड़े-लिखे” जो स्वयं को विद्वान समझते हें वे भी कुंडली मिलान या इस प्रकार की परम्परा को प्राथमिक आवश्यकता मानते हें|

    How dangerous it is to walk barefoot on a green grass, sand or soil.

    कितना खतरनाक है, हरी घास, मिट्टी, या रेत पर नंगे पैर चलना
    हरी घास, मिट्टी या रेत पर नंगे पैर चलने और घुमने की इच्छा कई लोगों की होती है, कई लोग इसके लिए कहते और आग्रह करते हुए भी देखे जाते हें, बेशक इससे कुछ लाभ जिनमे तनाव से मुक्ति, जैसे कई लाभ भी होते हें, परन्तु यह जानना भी जरुरी है की घास, रेत या जमीन पर बिना जूते घूमना अत्यंत हानि कारक भी हो सकता है|
    वर्तमान स्तिथियों में एक चिकित्सक के दृष्टिकोण से, और चिकित्सा के लिए पिछले 40 वर्षों के अनुभव अनुसार मेरा मानना है की कहीं भी, विशेषकर सार्वजानिक बाग़-बगीचों, सड़कों, मैदानों, नदी या समुद्र के किनारे वाले या इस जैसे स्थानों पर बिना जूते पहिने घूमना लाभ 20% की तुलना में नुकसान देह 80%, अधिक है| 

    The causes of autoimmune disease and prevention & therapy,

     ऑटोइम्‍यून रोग (निज रोग) उनके कारण, निवारण और चिकित्सा.
     According to Ayurveda “Nij Roga’s” are-  Autoimmune disease.
    आयुर्वेद के अनुसार निज रोगही होते हें - स्व-प्रतिरक्षित (ऑटोइम्‍यून) रोग.
    वर्तमान में हम सबको भोजन, पानी, हवा, आदि सब कुछ मिलावट से भरपुर, विषाक्त लेने के लिए मजबूर होना होता है, इन खाने-पीने-श्वास आदि के साथ मिली अशुद्धियों को मेटाबोलिक प्रक्रिया से दूर करने के लिए, हमारी प्रतिरोधक क्षमता संघर्ष करती है, यह सतत प्रक्रिया, शरीर के ऊतको को कमजोर बनाती हैं, इससे रोग प्रतिरोध क्षमता कम होती चली जाती है, ऐसे में यह प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर के कुछ अंगों, या उन्हें बनाने वाले पदार्थों को ही शरीर का दुश्मन समझ उन पर हमला कर देती है, इस आपसी युद्ध से कमजोर शरीर में कई रोग उत्पन्न होने लगते हें| ये रोग ही ऑटोइम्यून रोग होते हें, इन्ही के समान परिभाषा वाले रोगों को ही आयुर्वेद ने निज रोग कहा है
    कई बार जोड़ों में दर्द, थकान, अनिद्रा या ज्वर होने पर वह ठीक नहीं होता और न ही उसका कारण पता चलता विशेषकर 65 वर्ष से अधिक आयु की 60% महिला और 40% पुरुषों में तो यह स्वप्रतिरक्षित रोग हो सकता है

    Freedom from the big crisis by examining diseases at the time. {समय पर रोगों की जांच बड़े संकट से मुक्ति|}

    समय पर रोगों की जांच बड़े संकट से मुक्ति|  
    कुछ लोग ज्योतिषी से भविष्य पूछते हें, जबकि सच्चा भविष्य ज्ञान तो किसी चिकित्सक की जाँच लेब में ही मिल सकता है|  पर अक्सर सामान्य स्तिथि में जाँच करने जाने से डरते हें|  
    डरें नहीं, 
    जांचों में कोई खतरा नहीं होता-
    किसी जाँच से कोई रोग हो नहीं जाता-
    जब अच्छा और सुखी जीवन जीने के लिए हम भोजन, भोग-विलास आदि पर व्यय कर सकते हें तो कुछ व्यय उसे वैसा ही सुखी रखने में क्यों नहीं करते? 

    Exposed body- it means health, energy & power.

    खुले शरीर का अर्थ है- स्वास्थ्य, ऊर्जा और शक्ति!
    सूर्य धूप से बचने का अर्थ है, कमजोर शरीर?  
    गोरे रंग के लिए धुप से बचने का मतलब जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द और बीमार कमजोर हड्डियों वाला शरीर प्राप्त करना, पर जब शरीर को खड़े रखने वाली हड्डियाँ ही कमजोर होने लगेंगीं तो कोई कितने दिन स्वस्थ खड़ा रह पायेगा| क्या इस मूल्य पर गोरा रंग पाने के लिए कोशिश ठीक होगी|
    यहाँ हमारा मतलब शरीर के अंगों का कामुक प्रदर्शन भी नहीं है|
    अक्सर हम आधुनिक लोग इस बात को गंभीरता से नहीं लेते, कुछ तो इसे असभ्यता (Vulgar) कह कर नकारते भी है| 
    आधुनिक समाज के लोगों की तुलना में ग्रामीण

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