Rescue from incurable disease

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लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |
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"Psoriasis"- Disease that is incurable by medicine - but you can cure it yourself?["सोराइसिस" दवा से ठीक न हो पाने वाला एक रोग - पर आप खुद इसे ठीक कर सकते हैं- कैसे? ]

"सोराइसिस"  दवा से ठीक न हो पाने वाला एक रोग - पर आप खुद इसे ठीक कर सकते हैं-  कैसे?  
सोराइसिस, psoriasis, अपरस, विचर्चिका, Eczema आदि नामों वाला भयानक कष्ट कारी इस रोग के बारे में बहूत सारे प्रश्न उठते होंगे आपके मन में जैसे -
  • सोराइसिस दवा से क्यों ठीक नहीं होता?
  • रोग का कारण क्या है?
  • कैसे हमारी रोग नियंत्रण प्रणाली ही सोरैसिस के लिये है,  जिम्मेदार?
  • रोग प्रतिरोधक शक्ति को कैसे ठीक करें?  
  • क्या इससे सोराइसिस के अतिरिक्त ओर रोग भी ठीक हो सकेंगे?
  • में तो अभी स्वस्थ्य हूं क्या मुझे एसा खराब रोग हो सकता है?
  • क्या कोई इसे ठीक करने में मेरी मदद कर सकता है?
  • चिकित्सा में समय कितना लगेगा?
  • क्या पंच कर्म निशुल्क या कम खर्च पर भी उपलब्ध है

Spring - Invasion of Allergies!

वसंत ऋतु - एलर्जी का आक्रमण !
डॉ मधु सूदन व्यास MIG 4/1 प्रगति नगर उज्जैन मप्र 

वसंत ऋतु का आगमन हो चूका है| निश्चय ही हम सभी ठण्ड के कपडे पेक कर रहे होंगे| वसंत ऋतु की ठंडी हवाओं का आनंद भी ले रहे होंगे, और आम जैसे मौसमी फलों, सब्जियों और उनसे बने व्यंजनों का का मजा लेने के लिए भी तैयार होंगे|
परन्तु हमको यह भी पता होना ही चाहिए की वसंत ऋतु आनंद के साथ कई स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं भी लेकर आता है| इनसे बचने के लिए जाने और समझे की उन्हें कैसे नियंत्रण में रख सकते हें|  मोसम के इस परिवर्तन काल में एलर्जी या प्रत्यूर्जता जो किसी भी पदार्थ पराग कण, कुछ विशेष खाने-पीने, धुआं, धूल, अगरबत्ती की गंध आदि आदि किसी भी कारण से हो सकता है, इस संमय अधिक देखा जाता है|
इसमें प्रभावित अपनी नाक रूकावट, एक या अधिक छींक, गले में खुजली या अपनी बांह या शरीर पर छोटे-छोटे दाने, खुजली, चकत्ते, मिल सकते हें, जो ध्यान न देने पर अधिक कष्टकारी भी सिद्ध हो सकते हें|
भ्रमित न हों की यह सब सर्दी जुकाम से है, यह मनुष्य की उसके शरीर द्वारा उस विशेष वस्तु से बचाव का प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया है, इसे उस वस्तु के प्रति हाइपरसेंसिटिव होना भी कहा जाता है|

Varicose veins Or Siraja Granthi – Can cause of death.

Varicose veins Or Siraja Granthi –It can cause of death.
अपस्फीत शिराएँ (वैरिकाज़ वेंस) या सिराज ग्रंथि- भी मृत्यु का कारण हो सकतीं है|
जी हाँ वैरिकाज़ वैन्स या सिराज ग्रंथियां जो जिम्मेदार हो सकतीं हैं पैरों में गम्भीर घाव या अल्सर (Ulcers), शिराओं में रक्त के थक्के (Blood clots) बनने और उनके ह्रदय तक पहुंचकर हृदय रोग (Cardiovascular or Heart Disease), बनने में, या गंभीर रक्तस्राव जो मृत्यु (Death) का कारण?
क्या हैं ये सिराज ग्रंथियां? 

Diabetic foot – Which can be disabled. (डायबिटिक फूट - एक अपंग बना सकने वाला रोग).

"Diabetic foot" Yes the disease of diabetic patient, can cripple you, if you are not conscious.
यदि आप मधुमेह के रोगी हैं, तो सावधान! कहीं आपको, अपना पैर कटवाना न पड जाये| 
चोरी चोरी शरीर में प्रवेश करने वाला रोग मधुमेह या डायबिटीज, वर्तमान की बड़ी समस्या है, पर उससे भी बड़ी समस्या उसके डायबिटीज हो जाने के बाद हो सकती है| मधुमेह होने के बाद भी उसे अनदेखा करना, रोग के प्रति लापरवाही भरा रुख अपनाना, उस मधुमेह के रोगी को कितनी मुश्किलों में पहुंचा सकता है, यह भुक्त भोगी ही जानता है, और अधिकतर मामलों में यह स्तिथी में गंभीर परिणाम उठाना मज़बूरी होती है|
मधुमेह से हो सकने वाले आँखों के अंधत्व (Diabetic retinopathy) के अतिरिक्त, मधुमेह के रोगी को स्वयं की अनदेखी से एक और गंभीर परिणाम जो हो सकता है, वह हें “डायबिटिक फुट”|
अभी आपके पेर सामान्य है तो शुभकामनाएं, पर हमेशा सामान्य रहें, इसके लिए आपका इसके बारे में आज जानना जरुरी है| लेख में रोग विषयक जानकारी के साथ कुछ सामान्य सावधानिया बताई हैं, जिन्हें अमल कर आप इस रोग से हमेशा बचे रह सकते हें|
यह “डायबिटिक फुट” है क्या?

Itching- Still can moves when there is no disease.[खुजली- जब कोई रोग न हो तब भी चल सकती है!]

खुजली – जब कोई रोग न हो तब भी चल सकती है!
 “दिल है की मानता नहीं, खुजलाने के सिवा कुछ जानता नहीं” एसा इंसान ही नहीं लगभग सभी प्राणियों को अक्सर खुजलाने की इच्छा होती है| बन्दर, कुत्तों पक्षियों आदि को तो खुजलाते देखा भी होगा|
खुजली, कंडू, या प्रुराइटिस (pruritus) शरीर की त्वचा (Skin) पर होने वाली एक विशेष अनुभूति है, जिसे करने में सुख का अनुभव होता है, इसी लिए खुजली करने से-  . .  ‘दिल है की . . . मानता नहीं . . .’|

Your nails can tell what the disease. आपका नाखून बता सकता है क्या रोग है|

Your nails can tell what the disease. आपका नाखून बता सकता है क्या रोग है|
जी हाँ यह सच है, हमारे हाथ और पैर के नाख़ून के रंग, रूप आदि में परिवर्तन से आपके शरीर में हो रहे या होने वाले रोगों का पता चल जाता है| एक चिकित्सक भी नाख़ून देख कर सही रोग निदान कर लेता है|
लीवर, किडनी,मधुमेह, हृदय रोग,फेफड़ो के रोग, सोराइसिस, पीलिया, थाइरोइड, आदि आदि रोगों के शरीर में घुसने के या होने के संकेत भी इन नाख़ून को देख कर ही पता चल सकती है| एक प्रकार से नाख़ून शरीर के रोग जानने की प्रारम्भिक खिड़की भी है| अत: यदि हम स्वयं के या परिवार के किसी सदस्य के नाखुनो में सामान्य से अलग कोई परिवर्तन देखें, तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श करना ही चाहिए|

Particular or Secondary skin Disease (lesions) (चर्म रोग-2 विशेष या सोराईसिस).

 विशेष चर्म रोग (Particular skin lesions) या Secondary skin lesions:-(Skin Lesions-2) 
जब सामान्य से होने वाले चर्म रोगों की और [पूर्व लेख देखें लिंक- Skin lesions or damage an overview. {चर्म रोग एक अवलोकन}, ध्यान नहीं दिया जाता, ऐसे प्रारम्भिक त्वक विकार ही अघात (चोट)संक्रमण, अपथ्य  आहार सेवन (Unhealthy intake), मिथ्याविहार (अस्वस्थ जीवन शैली Unhealthy lifestyle), आदि कई कारणों से बढ़कर विशेष त्वक विकार उत्पन्न करते हेंइसके अंतर्गत स्केल्स Scale, क्रस्ट Crust, फटन Fissure, घाव Ulceration, त्वक विदारण Excoriation, और हस्ती चर्म Lichenification. आदि आते हेंविशेष चर्म रोगोंं को सोराईसिस भी कह सकते हैं, जो चार प्रकार के होते है।   

Skin lesions (primary) or damage an overview. {त्वक विकार या त्वचा में होने वाले रोग या चर्म रोग}.









चर्म रोग एक अवलोकन त्वक क्षति या विकार {त्वचा में होने वाले रोग या चर्म रोग}
त्वचा में तीन स्तर पर रोग पाए जाते हें|
 A. सपाट (Flat) या समतल क्षति; B. उन्नत Elevated) क्षतियाँC. गहरी क्षति Depressed lesion .
     चर्म रोगों को प्राथमिक (Usual skin lesions -1 ) और विशेष क्षति (Particular skin lesions- 2 ) दो भागों में विभाजन से समझने में आसानी होगी
प्राथमिक त्वक क्षति (Usual skin lesions -1 ) निम्न है;-

SKIN – The Outermost protective body covering & Responder for external stimuli.

Skin त्वचा शरीर की सुरक्षात्मक चादर, और सम्बेदना  का ज्ञान (अनुभव) कराने वाली एक ज्ञानेन्द्रिय . 

Food allergy or reaction of the food product.

 खाद्य एलर्जी या खाद्य उत्पाद की प्रतिक्रिया।
Food allergy or reaction of the food product.  
खाद्य पदार्थो की एलर्जी या रिएक्शन।  

मारा शरीर एक श्रेष्ठ कम्पुटर की तरह काम करता है। किसी भी वस्तु के मुख, नाक, कान, त्वचा आदि किसी भी अवयव शरीर में प्रवेश करते हीइम्यून सिस्टम उसकी जांच करता है, शरीर को हानी पहुचा सकने वाली किसी आगंतुक के बारे में तुरंत सूचित करता है, ओर शरीर को बचाने में जुट जाता है। कभी कभी प्रतिक्रिया स्वरूप शरीर पर ददोरे/ चकत्ते/ खुजली आदि लक्षण उभर आते हें। कभी ये तीब्र भी हो जाते हें जिससे प्राण पर संकट खड़ा हो जाती है।
कभी कभी कतिपय व्यक्तियों को सामान्य तोर पर खाये जा सकने वाले पदार्थो  के प्रति भी एसा देखा जाता है। भोजन में पाए जाने वाले किसी विशेष तत्व द्वारा आमतौर पर प्रोटीन के प्रति शरीर के प्रतिरोधी तंत्र (इम्यून सिस्टम) द्वारा की जाने वाली प्रतिक्रिया ही फूड एलर्जी है।  शरीर

शीतपित्त (urticaria) से परेशां हूँ?

प्रश्न -  शीतपित्त (urticaria) के बारे में सुश्री  प्रियंका जी दिल्ली से लिखतीं हैं -  मेरी आयु 26 वर्ष है,  मैं पिछले 2 वर्षों से शीतपित्त (urticaria) से पीड़ित हूँ। मेने इस दोरान एलोपेथिक (alopathic) उपचार लिया है,  कोई फायदा नहीं हुआ| दवा बंद करते ही दोबारा समस्या हो जाती है| में बहुत परेशान हूँ| में हमेशा के लिए ठीक होना चाहती हूँ| में रोज ‘alegra M’ लेती हूँ, तभी ठीक रह पातीं हूँ| कृपया मेरी मदद करें। Priyanka Dalal. 

उत्तर -प्रियंका जी इस बारे में हमने एक लेख लिख कर रोग विषयक जानकारी देने का प्रयत्न किया है आपकी समस्या का समाधान इसमें मिल सकता है|  

चमत्कारिक संजीवनी बूटी? - दशांग लेप!

चमत्कारिक संजीवनी बूटी? - दशांग लेप!
A Wondrous & Miraculous, Life saving herbal Medicine? - Dashang Lep,[coat]. 
  मेरे पिछले लगभग 50 वर्षीय चिकित्सकीय जीवन काल में आयुर्वेद के कई योगों ने आत्यधिक प्रभावित किया उनमें से एक है, दशांग लेप| 

डेंड्रफ या रूसी

प्रश्न- Jai shree krishna ..aap bataa sakte he agar dandruff badi wali ka ilaaj?  kyo hoti he.? meri beti 20 year ko ho jaati he baar baar.
उत्तर --समान्यत: डेंड्रफ या रूसी शिर की त्वचा की त्वचा कोशिकाओं के मरने (डैड सेल्स) होती है। जो एक सामान्य प्रक्रिया है। प्रतिदिन सिर की साफ सफाई न कर पाना इसका प्रमुख कारण है।

खाज खुजली या स्केबीज का कारण एक कीट या पिशाच !

छूत का यह रोग हवा, पानी अथवा सांस द्वारा नहीं फैलता।
यह एक रोगी व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के निकट संपर्क में आने से ही फैलती है।
 इसलिए परिवार में एक व्यक्ति से यह सारे परिवार में ही अकसर फैल जाती है। यह नमी की स्थिति के चलते पनपता है।
आम तौर पर बच्चों को इसका सबसे अधिक ख़तरा बना रहता है और बच्चों में यह रोग बहुत आम है।
यह सामान्यतया उन लोगों को होती है जो साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखते।

       बेतकुल्ल्फ़ होकर किसी भी दोस्त के बिस्तर का उपयोग करने, या उसके गंदे तोलिया, पहने हुए कपड़े, कंघे आदि का प्रयोग करने ओर रोज न नहाने वालों में, ओर साफ सफाई पर ध्यान न देने वालों, ओर कुत्ते- बिल्लियों से अधिक संपर्क रखने वालों के शरीर पर संपर्क के एक माह बाद तक भी,यदि  खुजली चलने लगती है। सामान्यत: इस बात को साधारण सी बात समझ कर अक्सर नजर अंदाज भी कर दिया जाता है। यह साधारण सी खुजली शरीर के किसी विशेष अंग हाथ, पैर गर्दन ओर खुले हिस्सों को अधिक प्रभावित कर सकती है। अक्सर सामान्य जन इसका कारण समझ ही नहीं पाते। धीरे धीरे यह सारे शरीर में फेल सकती है, ओर शरीर को वीभत्स रूप दे सकती है।

केसे हो कांतिमान त्वचा ?

     उष्ण कटिबंधीय (गर्म) स्थानों पर रहने वाले, निम्न एवं मध्यम वर्ग का समाज जो नित प्रति जीवन की जद्धोजहद में हर समय व्यस्त रहता हे तब उस पर सर्दी, गर्मी, या बरसात हर मोसम की मार का असर उसकी त्वचा पर साफ देखा जा सकता हे, सर से लेकर पैर तक का जा भी भाग सामने या खुला होता हे, उसपर सूखापन या रुक्षता/ विबाई (पैर फटे होना)/मुरझाई सी कान्ति हीन त्वचा उसका स्थाई साथी होता हे। माना जाता हे की पोषक आहार की कमी से एसा हे। पर क्या सभी के साथ एसा होता हे? यदि नहीं तो यह कारण ही एक मात्र नहीं हे। हालांकि कई की त्वचा चमकदार/कांतिमाँन होती हें। पर ऐसे अधिकतर स्त्री-पुरुष सुपोषित होने के साथ एक विशेष बात का ध्यान रखते हे वह हे त्वचा की भी देखरेख। व्यक्ति चाहे कितना भी रफ एंड टफ रहे यदि वह अपनी त्वचा का ठीक तरह से प्रतिदिन शरीर के अन्य भाग की तरह त्वचा का ध्यान भी रखे तो एसा हो सकता हे।
    वास्तव में उष्ण भागो में रहने वाले स्त्री-पुरुषों की त्वचा सूर्य की ऊष्मा से सूखती रहती हे। यही सूखापन विभिन्न रूपों में शरीर पर नजर आता हे। यदि एसा कोई उपाय जो इसको सूखने से बचा ले तब त्वचा चमकदार बनी रह सकती हे। इसके लिए आजकल विज्ञापनों के माध्यम से बहुत सारी क्रीम आदि परोसी जाती हें। जिनका उपयोग कर निश्चय ही लाभ तो प्राप्त किया जा सकता हे पर इस वर्ग के सभी लोग इस पर व्यय होने वाले धन कमा  ही नहीं पाते।  यदि कभी खर्च करें तो भी निरतर होने वाला खर्च उनके इसके प्रति उदासीन बना देता हे। पर सब यह नहीं जानते की बहुत ही कम सभी कर सके इतने कम खर्च पर भी त्वचा को चमकदार बना कर रखा जा सकता हे।
   वर्तमान में हम पुरानी उन समस्त बातो को भुला बेठे हें जिनसे हमारे बुजुर्ग लाभ लिया करते थे , एसा होने का भी कारण  हे, वर्तमान विज्ञापनो की चकाचोंध ने कुछ आसन सा दिखा कर ठगने का प्रयत्न किया हे।  जबकि वह सब भी उन्ही सिधान्तो और साधनों पर काम करता हे। पर निरतर यह अधिक खर्च माध्यम वर्ग नहीं उठा पाता इससे कुछ दिन बाद पुनह पूर्व स्तिथि आ जाती हे। धीरे धीरे हम सब उन पुराने भूलते जा रहे हें ,इसका एक परिणाम यह भी होगा की आने वाली पीडी भी इन्हें नहीं जान पायेगी। 
त्वचा को चमकदार कांतिवान रखने के लिए पोष्टिक आहार जितना जरुरी हे उससे भी जरुरी हे, त्वचा को सूखने से बचाना .पर यह भी हानी कारक और अनावश्यक भी होगा की इसके लिए घर में केद रहा जाये। 
    इस त्वचा को सूखने से बचने का सबसे उत्तम उपाय हे नम रखना यह काम मोश्चारईजर का हे। और सबसे अच्छा मोश्चारईजर हे "तेल" जो विभिन्न प्रकार का जेसे तिल तेल,नारियल तेल,सरसों तेल  से लेकर विदेशो से आयत होने वाले आलिव आयल  और कुछ जो  बहुत  महंगे  बादाम आदि तेल भी हें। पर कोई नहीं जनता की लगभग सभी तेलीय पदार्थों का त्वचा पर असर लगभग एक जेसा होता हे ।  ये सभी त्वचा का मोश्चारईज ही करती हें। पर हम सब जहाँ महंगी चीजों का प्रयोग सब थोडा थोडा कम मात्रा में करते हें वहीँ सस्ते तेल अधिक मात्रा  में करते हे जो कपड़ों में गंध और चिकट करता हे और हम समझते हें की ये अच्छे नहीं। परंतु यह चिक्कट भी तो अच्छी नहीं होती। 
 तो फिर क्या करें? 
   इसका एक समाधान यह हे की इसका प्रयोग कम मात्रा में किया जाए। पर केसे?  यह एक प्रयोग हे जो आप कर सकते हें। नहाने के समय आप कोई भी साबुन/शेम्पू आदि का प्रयोग करते हें, इनमें उपस्थित रसायन अलग अलग शरीर में अलग अलग प्रतिक्रिया कर सकते हें अत: सूखापन आदि भी न्यूनाधिक हो सकता हे। इसी प्रकार से उनके लिए आवश्यक नमी की मात्रा में भी अंतर रखना होगा। पर जब भी हम मोश्चराईजर के रूप में तेल आदि का प्रयोग करते हें तब इसके अनुसार मात्रा का निर्धारण करना अत्यंत कठिन होता हे।अधिकता चिक्कट का कारण होती हे वहीं कमी से लाभ नहीं मिल पता।
   हम यह करें की जब नहाने के अंतिम चरण में (पोछने के पूर्व) सारे शरीर पर तेल लगा लें फिर पुन: पानी शरीर पर डाल लें। ताकि अतिरिक्त तेल छूट जाए या पनि भरी बाल्टी में थोड़ा तेल डालकर पानी को हाथ से मथ दे फिर इस पानी से नहा लें, इस प्रकार से हम पाएंगे की सारा शरीर पर नमी सी आ गई हे ओर इससे न केवल सूखापन दूर हो गया हे, वरन चिक्कट भी जमा नहीं हे। प्रतिदिन एसा करते रहने से कुछ दिनो में ही हमको अपनी स्वस्थ कांतिमान त्वचा मिल जाएगी। 
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त्वचा के मोश्चराइजरस

क्या हम जानते हें की  त्वचा को मोश्चारईजर करने वाली  क्रीमो आदि में हानिकारक हो सकने वाले और न जाने कोन कोन से तेल / सूअर आदि की चर्वियों,और रसायनिक तत्व होतें हें? 
यह जानने के पाहिले यह जानना होगा की शरीर की त्वचा को स्निग्ध या चिकना बनाये रखने वाले पदार्थ ही मोश्चराइजर कहलाते हें| अधिकतर गर्म स्थानों में रहने वालों की त्वचा खुश्क हो जाती हे इससे त्वचा के छिद्र बंद हो जाते हें और पसीना न आने से त्वचा का मल या गन्दगी निकल नहीं पाती परिणामस्वरूप खुजली /फोड़े फुंसी  आदि  चर्मरोग मुहं पर मुहांसे एक्ने आदि बनने लगते हें |

मानसून में पेरों में फंगस (या फफूंद) एवं सोंदर्य की समस्याए |

फंगल या फफूंद ग्रस्त अंगुलियाँ 
 मानसून में पेरों की फंगस (या फफूंद) एवं सोंदर्य की समस्याए |

मानसून आ गया है,  लम्बी गर्मी और सूखे के मोसम के बाद बारिश सारी धरती को हरी भरी बना देती हे, जो हमारे मन को बड़ा ही आनंद देती है,  पर प्रत्येक मोसम के लाभ और हानिया भी हें| उसकी अधिकता से या हमारी उसका अति आनंद लेने या लापरवाही के कारण बारिश भी कई रोगों के साथ शारीरिक सोंदर्य को भी प्रभावित करती है।  इस मोसम में अनजाने से शारीर के अन्य भोगो की तुलना में पर अधिक प्रभावित होते हें| अत:आज कल पैरों का बचाव भी बहुत जरुरी हो जाता है।  बरसात में पैरों का ख्याल रखने के सोंदर्य के अतिरिक्त और भी कई दुसरे कारण भी हैं। ऐसे में पैरों की खूबसूरती से अधिक आवश्यक हो जाती है पैरों की सफाई। बारिश के मौसम में पेरों की सफाई की जरा सी भी कमी हुई नहीं की पैरों पर फंगस या फफूंद से संक्रमण होने की संभावना रहती है।

विरूद्ध आहार-विहार


विरूद्ध आहार-विहार का अर्थ हे, एक साथ नहीं खाए जाने वाले खाद्य पदार्थ आहार एवं एक साथ नहीं किये जा सकने  वाले कम जेसे धुप में ठंडे पानी से नहाना आदि क्रियाये विहार कहलाती हें |
जो पदार्थ शरीर की धातुओं[ ( रस(तरल-पानी), रक्त, मांस,मेद (चर्बी)अस्थि( हड्डी),मज्जा,और शुक्र)] के विरूद्ध गुणधर्म वाले या एक दुसरे से विपरीत गुण वाले, इस बात को इस प्रकार भी समझ जा सकता हे की गरम और ठन्डे खाद्य एक साथ खाना | त्रिदोषों (वात-पित्त-कफ) को प्रकुपित करने वाले (खरावियाँ या रोग  बढाने वाले),  तथा रोगों को उत्पन्न करने वाले हैं, उनके सेवन को विरूद्ध आहार कहते हैं। जेसे एक साथ खट्टा और तला हुआ खाने से खांसी आदि होती हे|  

 विरूद्ध आहार-विहार:अर्थ हे, एक साथ नहीं 


इन पदार्थों में परस्पर गुणविरूद्ध ,या विपरीत गुण वाले, *संयोगविरूद्ध,* संस्कार विरूद्ध * देश, काल, मात्रा, स्वभाव आदि से विरूद्ध होते हैं।
जैसे – 
 दूध के साथ -मूँग,उड़द, चना आदि दालें, सभी प्रकार के खट्टे व मीठे फल, गाजर, शकरकंद, आलू, मूली जैसे कंदमूल, तेल, गुड़, शहद, दही, नारियल, लहसुन, कमलनाल, सभी नमकयुक्त व अम्लीय पदार्थ संयोगविरूद्ध हैं।
दही के साथ -उड़द, गुड़, काली मिर्च, केला व शहद।
शहद के साथ- गुड़, घी के साथ तेल विरूद्ध है।
  शहद, घी, तेल व पानी इन चार द्रव्यों में से दो अथवा तीन द्रव्यों का समभाग मिश्रण मात्राविरूद्ध है। 
गर्म व ठंडे पदार्थों का एक साथ सेवन वीर्य विरूद्ध है।

दही व शहद को गर्म करना संस्कार विरूद्ध है।

दूध को विकृत कर बनाया गया छेना, पनीर आदि व खमीरीकृत पदार्थ स्वभाव से ही विरूद्ध (दूध के गुण के )हैं।

हेमंत व शिशिर  इन शीत ऋतुओं (सर्दियोंमें) में कम भोजन करना या भूखे रहना। 
 शीत, लघु, रूक्ष, वातवर्धक पदार्थों का सेवन तथा --
वसंत-ग्रीष्म शरद इन उष्ण ऋतुओं में - दही का सेवन काल विरूद्ध है।
मरूभूमि में रूक्ष, उष्ण, तीक्ष्ण पदार्थों व समुद्रतटीय पदार्थों में स्निग्ध-शीत पदार्थों का सेवन, क्षारयुक्त भूमि के जल का सेवन देशविरूद्ध है।

अधिक परिश्रम करने वाले व्यक्तियों के लिए अल्प, रूक्ष, वातवर्धक पदार्थों का सेवन व बैठे-बैठे काम करने वाले व्यक्तियों के लिए स्निग्ध, मधुर, कफवर्धक पदार्थों का सेवन अवस्थाविरूद्ध है।

अधकच्चा, अधिक पका हुआ, जला हुआ, बार-बार गर्म किया गया, उच्च तापमान पर पकाया गया (जैसे – फास्टफूड), अति शीत तापमान में रखा गया (जैसे – फ्रिज में रखे पदार्थ) भोजन पाकविरूद्ध हैं।

मल, मूत्र का त्याग किये बिना, भूख के बिना अथवा बहुत अधिक भूख लगने पर भोजन करना क्रम विरूद्ध है। जो आहार मनोनुकूल न हो, वह हृदय विरूद्ध है क्योंकि अग्नि प्रदीप्त होने पर भी आहार मनोनुकूल न हो तो सम्यक पाचन नहीं होता। 
इस प्रकार के विरोधी आहार के सेवन से बल, बुद्धि, वीर्य, आयु का नाश, नपुंसकता, अंधत्व, पागलपन, अर्श, भगंदर, कुष्ठरोग, पेट के विकार, शोथ, अम्लपित्त, सफेद दाग, ज्ञानेन्द्रियों में विकृति व अष्टौमहागद अर्थात् आठ प्रकार की असाध्य व्याधियाँ उत्पन्न होती हैं। विरूद्ध अन्न का सेवन मृत्यु का भी कारण हो सकता है।
अतः पथ्य-अपथ्य का विवेक कर नित्य पथ्यकर पदार्थों का ही सेवन करें। अज्ञानवश विरूद्ध आहार के सेवन से उपरोक्त व्याधियों में से कोई भी उत्पन्न हो गयी हो तो वमन-विरेचनादि पंचकर्म से शरीर की शुद्धि एवं अन्य शास्त्रोक्त उपचार करने चाहिए। ऑपरेशन व अंग्रेजी दवाएँ उपाचार करने चाहिए। ऑपरेशन व अंग्रेजी दवाएँ रोगों को जड़ मूल से नहीं निकालते। अपना संयम और निःस्वार्थ एवं जानकार वैद्य की देखरेख में पंचकर्म विशेष लाभ देता है। इससे रोग तो मिटते ही हैं, 10-15 साल आयुष्य भी बढ़ सकता है।
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नीम के स्वास्थ्य लाभ- गुडी पड़वा विशेष

नीम के पेड़ (Azadirachta इंडिका) एक उष्णकटिबंधीय सदाबहार 
वृक्ष भारत की  मूल प्रजाति है और कुछ अन्य दक्षिण पूर्वी देशों में 
भी पाया है| भारत में नीम अपनी चिकित्सा बहुमुखी प्रतिभा की 
वजह से "गांव फार्मेसी" या "गावों का वेध्य" के रूप में भी जाना 
जाता है, और यह इसके औषधीय गुणों के कारण 4,000 से अधिक 
वर्षों से इसका उपयोगआयुर्वेदिक चिकित्सा में किया जा रहा हे। 
 नीम भी कहा जाने वाले लेतीं शब्द  'एरिस्टा'  एक संस्कृत शब्द है
 जिसका अर्थ हे " पूर्ण  और अविनाशी " |. बीज, छाल और पत्तियों 
यौगिकों के परिक्षण से  यह साबित हो चूका हे की यह  एंटीसेप्टिक,
(antiseptic,) (anti-ulcer), ज्वरनाशक(antipyretic) विषाणु नाशक 
(antiviral) , सुजन  नाशक (anti-inflammatory)और ऐंटिफंगल
(antifungal) हैं। संस्कृत नाम 'निम्बा' शब्द 'निम्बती  स्वास्थ्यंददाति'
 अर्थात जो अच्छा स्वास्थ्य देने वाला हे।
 Health For All  

 नीम के स्वास्थ्य लाभ
गुडी पड़वा पर विशेष 
शुभकामना सहित  
आज नीम की कोमल पत्ती खाने की परंपरा हे।

नीम का तेल और नीम के पत्ते दोनों ही त्वचा के लिए अद्भुत सिद्ध हुई हे ।



नीम तेल शुष्क त्वचा की खुजली दूर करने और सुजन या लाली, जलन मिटाने चिकनाहट लाने (soothes.) एवं सामान्य त्वचा की स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा में सुधार, करने, जीवाणु संक्रमण का मुकाबला करने और मुँहासे, फोड़े, और अल्सर ठीक करने हेतु आत्याधिक सफल सिद्ध हुई हे। परन्तु व्यावसायिक कारणों से मल्टी नेशनल कम्पनियाँ नीम का नहीं  इससे बने उत्पादों के बैक्टीरिया प्रतिरोधी गुणो का प्रचार कर रहीं हें, और भारी मुनाफा कमा रही हें।

नीम के लाभ लेने से हम पर्यावरण के लिए हानिकारक ख़राब रसायनों और कीटनाशकों से बच सकते हें।
चर्म रोग,खुजली,एक्जिमा,सिर के जूँ,आदी के लिए कोई खुद को कीटनाशकों में पानी में गोता क्यों लगाना चाहेगा, या corticosteroids के द्वारा हमेशा के लिए शरीर को हानि क्यों पहुचना चाहेगा।
जबकि वह  नीम के इन अद्भुद गुणों का पूरा उपयोग कर लाभ ले सकता हो। 
पर इससे व्यापारियों को हानी तो पहुचेगी ही!और वे इसका विरोध भी करेंगे या कम से कम प्रचार तो होने ही नहीं देंगे।कुछ झूठी भ्रम पैदा करने वाली जानकारी शोध के नाम पर देकर उपयोग करने वालों को डरना जरुर चाहेंगे।
 यह तो भला हो जागरूक भारतीयों का की विदेशी/और व्यापारी  इसका पेटेंट हांसिल नहीं कर पाए अन्यथा यह हमारा प्राचीन वेद्या नीम हमको विदेशो को अधिक धन चुका कर खरीदना पड़ता। हमारे पास सिर्फ करने को "गर्व"रह जाता की नीम को हमारे बाप दादा सदियों से प्रयोग करते आ रहे हें!"  
लेकिन फिर भी हमारे हुक्मरान अभी इसकी आश्चर्यजनक गुणों की और से बेखबर हें। शायद उनको 'आर्थिक लाभ' नहीं हो पा रहा हे? परमात्मा उन्हें सदबुद्धि दे !

 नीम का प्रयोग अक्सर हम  एक उपरोक्त  चिकित्सा के लिए ही करते रहे हें, इसका अन्य  बेहतर उपयोग खेतों में प्रयुक्त किए गए कीटाणु नाशको के रूप में भी किया जाना चाहिए।
 नीम का तेल - बालों को चमकदार, स्वस्थ बाल के लिए,सूखापन दूर करने  के लिए कारगर हे। समय से पहले सफ़ेद होने से (graying) से रोकता है और यहां तक ​​कि बालों के झड़ने के लिए कुछ हद तक मदद कर सकता  हैं। इससे बालों में जू अदि क्रमियों से मुक्ति मिलती हे।



नीम के तेल का भी एक महान गुण यह भी हे की यह  नाखून में स्निग्धता  बनाता है, और भंगुर नाखून(टूटने और विकृत होने की समस्या) को हटा कर उन्हें नया-सुन्दर वर्ण प्रदान करता हे।इससे नाखून के कवक(फंगल) से छुटकारा मिल जाता हे।



नीम का तेल और नीम के पत्ते का सबसे बड़ा लाभ है कि वे अपने सामान्य स्वास्थ्य, आपकी त्वचा और शरीर की स्थिति, और अपने प्रणाली के लिए हानि नहीं करता। हम तो चाहे तो इसके उपयोग कर के शारीरिक प्रतिरक्षा  प्रणाली को सक्षम कर त्वचा हालत से लड़ने के लिए या किसी भी त्वचा से संबंधित समस्याओं को रोकने के लिए, सक्षम हो सकते हें।


नीम के पत्ते लेने के लाभ

नीम पत्ती कई आयुर्वेदिक उपचार में एक आवश्यक एवं बहुतायत से प्रयोग किया जाने वाला घटक है। इसे हम सब भारतीय पोराणिक काल से(हजारों साल)  जानाते है। नीम लेने केऔर भी कई फायदे हैं, यह प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्तेजित कर सक्रिय करता है। यकृत की क्रिया में (funcion) में सुधार कर  रक्त  का शोधन (detoxifies) कर  एक स्वस्थ मानसिक प्रसन्नता, एवं श्वसन और पाचन तंत्र को ठीक करने के लिए बहुत सक्षम हे। इसी कारण यह यह मलेरिया और मधुमेह के  इलाज के लिए प्रसिद्ध है।

पश्चिमी दुनिया के लोग प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाने और विशेष रूप से त्वचा की समस्याओं के लिए, आजकल ज्यादातर नीम चाय पी रहे हें, या नीम कैप्सूल ले रहे हें। 


नीम के औषधीय लाभ-
नीम के बीज, छाल और पत्तियों के यौगिकों के परिक्षण से यह साबित हो चूका हे की यह एंटीसेप्टिक,(antiseptic,) अल्सर नाशक (anti-ulcer), ज्वरनाशक(antipyretic) विषाणु नाशक(antiviral), सुजन नाशक (anti-inflammatory)और ऐंटिफंगल(antifungal) हैं। 


नीम के संस्कृत नाम 'निम्बा' शब्द 'निम्बती स्वास्थ्यंददाति' से ही बना हे।अर्थात जो अच्छा स्वास्थ्य देने वाला हे।



नीम परिवार के लिए एक जन्म नियंत्रण हेतु परिवार नियोजन के प्राकृतिक साधन के रूप में उपयोगी सिद्ध हुआ हे, और इसकी बनी औषधियां की उपयोगिता WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) ने भी स्वीकार कर ली हे।

मुहं और दांतों की  देखभाल और दंतरोग (periodontal) रोग में नीम का बहुत लाभ होता हे।  भारत में लोग टूथब्रश के रूप में, मुख-दन्त की  या क्रमी से बने छेद (cavities) आदी की समस्याओं से बचने के लिए, नीम पेड़ से बनाई दातून का इस्तेमाल सदियों से करते रहें हें। 

वर्तमान में अब नीम का उपयोग  कई उत्पाद टूथपेस्ट,मंजन(toothpowder,) कवल धारण (mouthwash,) और दूसरों अनेको रूप में कर रहे हैं।



नीम पर शोध भी  किया जा रहा है। इससे एक और जहां  इलाज के लिए विकल्पों का विस्तार हुआ हे, एड्स, कैंसर, मलेरिया, मधुमेह, हेपेटाइटिस, ग्रहणी अल्सर, गुर्दे संबंधी विकार, फंगल संक्रमण, खमीर संक्रमण, एसटीडी, त्वचा रोग skin disordes,दंतरोग periodontal dieases , mononucleosis, रक्त विकार, तंत्रिका संबंधी विकार, एलर्जी आदी के लिए विस्तृत विविधता पूर्ण हानी रहित उपलब्धयां मिली हें। इन उपलब्धयों ने आयुर्वेद और हमरी प्राचीन अन्य चिकित्सा पद्धति की और विश्व का ध्यान आकर्षित किया हे।

पशुओं के लिए भी लाभकारी हे 
नीम डाल कर उबला पानी-या नीम साबुन या शैम्पू के साथ अपने कुत्ते और बिल्ली स्नान कृमियों और संक्रमण ( infestacion) और चोट-कटने, ticks और fleas, दाद, कण और कई त्वचा विकारों या फंगल संक्रमण को रोकने के लिए चमत्कारी उपयोगी और सस्ता साधन हे।



अपने और अपने जानवरों पर नीम के साथ उत्पादों का उपयोग करके, आप आर्थिक लाभ के साथ हानिकारक रसायनों और दवाओं, के दुष्प्रभाव  से बच कर प्रतिरक्षा प्रणाली पर बिना प्रभाव डाले एक स्वस्थ जीवन जीने का आनंद ले सकते हें।



माली और किसानों के लिए नीम के लाभ

नीम से बने कीटनाशक जैविक विषरहित  होने से मनुष्य के लिए और अन्य स्तनधारियों, पक्षियों, मक्खियों के साथ और अन्य कीड़ों फायदेमंद होते हैं।

नीम का तेल बाहर नीम के पेड़ से प्राप्त बीज से बनाया जाता है.इसे एक जैविक कीटनाशक स्प्रे के रूप में  उपयोग किया जानाअधिक अच्छा हे।   इसके अतिरिक्त, नीम का तेल औषधीय और सौंदर्य प्रसाधन के रूप  में इस्तेमाल किया जाना लाभकारी हे,जिसे आप स्वयं बना कर कर लाभ उठायें।


 एक उत्पाद के जरिये (Dyna-Gro) बताते हैं कि कैसे नीम तेल एक जैविक कीटनाशक के रूप में काम करता है: इससे "यह 'कीड़े हार्मोनल संतुलन को बाधित किये बिना मर जाते हैं।



नीम तेल स्प्रे भी एक निजी कीट repellant के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. नीम मच्छरों को दूर रखता है और यह आपकी त्वचा के लिए अच्छा है! 
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समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें|

हरिद्रा,Turmerik

हल्दी 
हरिद्रा,हलधर, Turmerik या लेटिन में Curcuma  Longa  के नाम से जनि जाने वाली भारतीय रसोई घर की, और संस्कृति,और सोंदर्य में चार चाँद लगाने वाला यह द्रव्य एक चमत्कारिक औषधि भी हे | यही रसोई घर में रह कर विना हमारे जाने या बताये हमारी स्वस्थ सेवा भी करता रहता हे, और इस बात से सभी अनभिज्ञ होते हें|

हल्दी में एक तत्व करक्यूमिन होता हे यह विषाणु रोधी है। इसमें ह्यूमन पापिलोमा वायरस (एचपीवी) से लड़ने के गुण भी हैं।  करक्यूमिन ही सोन्दर्य क्रीम आदि में सक्रिय तत्व होता है। 
जिन रोगों में कफ (मयूकस)अधिक मात्रा में निकलने लगता हे, जेसे गले नाक से सेडा या खकार निकलना, उसको यह ठीक कर देती हे|  मूत्र  की जलन हो, या आँखों का रोग ,महिलाओ का प्रदर और सर्दी से होने वाला पेरो का दर्द,पेट के क्रमी से होने वाले रोग , शीतपित्त या किसी एलर्जी से होने वाली खुजली या शरीर पर ददोरे (चिक्कत्ते), हल्दी ठीक कर देती हे | हल्दी का उबटन सोंदर्य के लिए जाना माना नाम हे | प्रसव के बाद गर्भाशय को स्वस्थ कर बच्चे के लिए शुद्ध दूध देने वाली हल्दी ही हे | हल्दी के काडे से आँखों को धोने से कन्जेक्टीवाईटस ठीक होता हे | हल्दी और फिटकरी का चूर्ण कान में भरने से पुराने कान बहने या उससे मवाद बहने की समस्या से मुक्ति मिलती हे |नई चोट हो या पुराना घाव यह एंटी सेप्टिक का कम करती हे और घाव को जल्दी ठीक कर देती हे | यह  दादी नानी के चिकित्सा पोटली का यह बहुमूल्य रत्न हे | 
कुल मिला कर हम सब यदि इस मसाले को रसोईघर से बहार कर दे तो रोगों का चारो और से हम पर हमला हो जायेगा |
नबम्बर दिसम्बर में हमारी सब्जी मंडियों में ताज़ा हल्दी आती हे | हममे से कई के घरो में इसका आचार,चटनी,सब्जी बना कर खाते हें| इसकी मावा शक्कर के साथ चक्की,या लड्डू भी बनाकर खाया जाता हे|
इससे बनी आयुर्वेदिक औषधि  ' हरिद्रा खंड' के सेवन से शीतपित्त,खुजली,एलर्जी,और चर्म रोग नष्ट होकर देह में सुन्दरता आ जाती हे | बाज़ार में यह सुखा चूर्ण के रूप में मिलता हे | इसे खाने के लिए मीठे दूध का प्रयोग अच्छा होता हे | परन्तु शास्त्र विधि में इसको निम्न  प्रकार से घर पर बना कर खाया जाये तो अधिक गुणकारी रहता हे| बाज़ार में इस विधि से बना कर चूँकि  अधिक दिन तक नहीं रखा जा सकता, इसलिए नहीं मिलता हे | घर पर बनी इस विधि बना हरिद्रा  खंड अधिक गुणकारी और स्वादिष्ट होता हे | मेरा अनुभव हे की कई सालो से चलती आ रही एलर्जी ,या स्किन में अचानक उठाने वाले चकत्ते ,खुजली इसके दो तीन माह के सेवन से हमेशा के लिए ठीक हो जाती हे | इस प्रकार के रोगियों को यह बनवा कर जरुर खाना  चाहिए |  और अपने मित्रो कोभी बताना चाहिए| यह हानि रहित निरापद बच्चे बूढ़े सभी को खा सकने योग्य हे | जो नहीं बना सकते वे या शुगर के मरीज, कुछ कम गुणकारी, चूर्ण रूप में जो की बाज़ार में उपलब्ध हे का सेवन कर सकते हे | 

निर्माण विधि क्लिक हरिद्रा खंड:

इसके सेवन से शीतपित्त,खुजली,एलर्जी,और चर्म रोग नष्ट होकर देह में सुन्दरता  

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चिकित्सा सेवा अथवा व्यवसाय?

स्वास्थ है हमारा अधिकार १

हमारा लक्ष्य सामान्य जन से लेकर प्रत्येक विशिष्ट जन को समग्र स्वस्थ्य का लाभ पहुँचाना है| पंचकर्म सहित आयुर्वेद चिकित्सा, स्वास्थय हेतु लाभकारी लेख, इच्छित को स्वास्थ्य प्रशिक्षण, और स्वास्थ्य विषयक जन जागरण करना है| आयुर्वेदिक चिकित्सा – यह आयुर्वेद विज्ञानं के रूप में विश्व की पुरातन चिकित्सा पद्ध्ति है, जो ‘समग्र शरीर’ (अर्थात शरीर, मन और आत्मा) को स्वस्थ्य करती है|

निशुल्क परामर्श

जीवन के चार चरणौ में (आश्रम) में वान-प्रस्थ,ओर सन्यास अंतिम चरण माना गया है, तीसरे चरण की आयु में पहुंचकर वर्तमान परिस्थिती में वान-प्रस्थ का अर्थ वन-गमन न मान कर अपने अभी तक के सम्पुर्ण अनुभवोंं का लाभ अन्य चिकित्सकौं,ओर समाज के अन्य वर्ग को प्रदान करना मान कर, अपने निवास एमआइजी 4/1 प्रगति नगर उज्जैन मप्र पर धर्मार्थ चिकित्सा सेवा प्रारंंभ कर दी गई है। कोई भी रोगी प्रतिदिन सोमवार से शनी वार तक प्रात: 9 से 12 एवंं दोपहर 2 से 6 बजे तक न्युनतम 10/- रु प्रतिदिन टोकन शुल्क (निर्धनों को निशुल्क आवश्यक निशुल्क ओषधि हेतु राशी) का सह्योग कर चिकित्सा परामर्श प्राप्त कर सकेगा। हमारे द्वारा लिखित ऑषधियांं सभी मान्यता प्राप्त मेडिकल स्टोर से क्रय की जा सकेंगी। पंचकर्म आदि आवश्यक प्रक्रिया जो अधिकतम 10% रोगियोंं को आवश्यक होगी वह न्युनतम शुल्क पर उपलब्ध की जा सकेगी। क्रपया चिकित्सा परामर्श के लिये फोन पर आग्रह न करेंं। ।

चिकित्सक सहयोगी बने:
- हमारे यहाँ देश भर से रोगी चिकित्सा परामर्श हेतु आते हैं,या परामर्श करते हें, सभी का उज्जैन आना अक्सर धन, समय आदि कारणों से संभव नहीं हो पाता, एसी स्थिति में आप हमारे सहयोगी बन सकते हें| यदि आप पंजीकृत आयुर्वेद स्नातक (न्यूनतम) हें! आप पंचकर्म चिकित्सा में रूचि रखते हैं, ओर प्रारम्भ करना चाह्ते हैं या सीखना चाह्ते हैं, तो सम्पर्क करेंं। आप पंचकर्म केंद्र अथवा पंचकर्म और आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रक्रियाओं जैसे अर्श- क्षार सूत्र, रक्त मोक्षण, अग्निकर्म, वमन, विरेचन, बस्ती, या शिरोधारा जैसे विशिष्ट स्नेहनादी माध्यम से चिकित्सा कार्य करते हें, तो आप संपर्क कर सकते हें| सम्पर्क समय- 02 PM to 5 PM, Monday to Saturday- 9425379102/ mail- healthforalldrvyas@gmail.com केवल एलोपेथिक चिकित्सा कार्य करने वाले चिकित्सक सम्पर्क न करें|

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