Rescue from incurable disease

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लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |
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  • केसे हो कांतिमान त्वचा ?

         उष्ण कटिबंधीय (गर्म) स्थानों पर रहने वाले, निम्न एवं मध्यम वर्ग का समाज जो नित प्रति जीवन की जद्धोजहद में हर समय व्यस्त रहता हे तब उस पर सर्दी, गर्मी, या बरसात हर मोसम की मार का असर उसकी त्वचा पर साफ देखा जा सकता हे, सर से लेकर पैर तक का जा भी भाग सामने या खुला होता हे, उसपर सूखापन या रुक्षता/ विबाई (पैर फटे होना)/मुरझाई सी कान्ति हीन त्वचा उसका स्थाई साथी होता हे। माना जाता हे की पोषक आहार की कमी से एसा हे। पर क्या सभी के साथ एसा होता हे? यदि नहीं तो यह कारण ही एक मात्र नहीं हे। हालांकि कई की त्वचा चमकदार/कांतिमाँन होती हें। पर ऐसे अधिकतर स्त्री-पुरुष सुपोषित होने के साथ एक विशेष बात का ध्यान रखते हे वह हे त्वचा की भी देखरेख। व्यक्ति चाहे कितना भी रफ एंड टफ रहे यदि वह अपनी त्वचा का ठीक तरह से प्रतिदिन शरीर के अन्य भाग की तरह त्वचा का ध्यान भी रखे तो एसा हो सकता हे।
        वास्तव में उष्ण भागो में रहने वाले स्त्री-पुरुषों की त्वचा सूर्य की ऊष्मा से सूखती रहती हे। यही सूखापन विभिन्न रूपों में शरीर पर नजर आता हे। यदि एसा कोई उपाय जो इसको सूखने से बचा ले तब त्वचा चमकदार बनी रह सकती हे। इसके लिए आजकल विज्ञापनों के माध्यम से बहुत सारी क्रीम आदि परोसी जाती हें। जिनका उपयोग कर निश्चय ही लाभ तो प्राप्त किया जा सकता हे पर इस वर्ग के सभी लोग इस पर व्यय होने वाले धन कमा  ही नहीं पाते।  यदि कभी खर्च करें तो भी निरतर होने वाला खर्च उनके इसके प्रति उदासीन बना देता हे। पर सब यह नहीं जानते की बहुत ही कम सभी कर सके इतने कम खर्च पर भी त्वचा को चमकदार बना कर रखा जा सकता हे।
       वर्तमान में हम पुरानी उन समस्त बातो को भुला बेठे हें जिनसे हमारे बुजुर्ग लाभ लिया करते थे , एसा होने का भी कारण  हे, वर्तमान विज्ञापनो की चकाचोंध ने कुछ आसन सा दिखा कर ठगने का प्रयत्न किया हे।  जबकि वह सब भी उन्ही सिधान्तो और साधनों पर काम करता हे। पर निरतर यह अधिक खर्च माध्यम वर्ग नहीं उठा पाता इससे कुछ दिन बाद पुनह पूर्व स्तिथि आ जाती हे। धीरे धीरे हम सब उन पुराने भूलते जा रहे हें ,इसका एक परिणाम यह भी होगा की आने वाली पीडी भी इन्हें नहीं जान पायेगी। 
    त्वचा को चमकदार कांतिवान रखने के लिए पोष्टिक आहार जितना जरुरी हे उससे भी जरुरी हे, त्वचा को सूखने से बचाना .पर यह भी हानी कारक और अनावश्यक भी होगा की इसके लिए घर में केद रहा जाये। 
        इस त्वचा को सूखने से बचने का सबसे उत्तम उपाय हे नम रखना यह काम मोश्चारईजर का हे। और सबसे अच्छा मोश्चारईजर हे "तेल" जो विभिन्न प्रकार का जेसे तिल तेल,नारियल तेल,सरसों तेल  से लेकर विदेशो से आयत होने वाले आलिव आयल  और कुछ जो  बहुत  महंगे  बादाम आदि तेल भी हें। पर कोई नहीं जनता की लगभग सभी तेलीय पदार्थों का त्वचा पर असर लगभग एक जेसा होता हे ।  ये सभी त्वचा का मोश्चारईज ही करती हें। पर हम सब जहाँ महंगी चीजों का प्रयोग सब थोडा थोडा कम मात्रा में करते हें वहीँ सस्ते तेल अधिक मात्रा  में करते हे जो कपड़ों में गंध और चिकट करता हे और हम समझते हें की ये अच्छे नहीं। परंतु यह चिक्कट भी तो अच्छी नहीं होती। 
     तो फिर क्या करें? 
       इसका एक समाधान यह हे की इसका प्रयोग कम मात्रा में किया जाए। पर केसे?  यह एक प्रयोग हे जो आप कर सकते हें। नहाने के समय आप कोई भी साबुन/शेम्पू आदि का प्रयोग करते हें, इनमें उपस्थित रसायन अलग अलग शरीर में अलग अलग प्रतिक्रिया कर सकते हें अत: सूखापन आदि भी न्यूनाधिक हो सकता हे। इसी प्रकार से उनके लिए आवश्यक नमी की मात्रा में भी अंतर रखना होगा। पर जब भी हम मोश्चराईजर के रूप में तेल आदि का प्रयोग करते हें तब इसके अनुसार मात्रा का निर्धारण करना अत्यंत कठिन होता हे।अधिकता चिक्कट का कारण होती हे वहीं कमी से लाभ नहीं मिल पता।
       हम यह करें की जब नहाने के अंतिम चरण में (पोछने के पूर्व) सारे शरीर पर तेल लगा लें फिर पुन: पानी शरीर पर डाल लें। ताकि अतिरिक्त तेल छूट जाए या पनि भरी बाल्टी में थोड़ा तेल डालकर पानी को हाथ से मथ दे फिर इस पानी से नहा लें, इस प्रकार से हम पाएंगे की सारा शरीर पर नमी सी आ गई हे ओर इससे न केवल सूखापन दूर हो गया हे, वरन चिक्कट भी जमा नहीं हे। प्रतिदिन एसा करते रहने से कुछ दिनो में ही हमको अपनी स्वस्थ कांतिमान त्वचा मिल जाएगी। 
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