Rescue from incurable disease

Rescue from incurable disease
लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |
Gastric/उदर के रोग लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Gastric/उदर के रोग लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

Ulcerative colitis - The Ayurvedic treatment. सव्रण बृहदांत्रशोथ - आयुर्वेदिक चिकित्सा- Dr Madhu Sudan Vyas.

Ulcerative colitis - The Ayurvedic treatment.  
सव्रण बृहदांत्रशोथ - आयुर्वेदिक चिकित्सा-  Dr Madhu Sudan Vyas. 
 Ulcerative colitis सव्रण बृहदांत्रशोथ 
रोग निदान और पुष्टि करने के बाद उपचार 
अक्सर इसका रोगी विभिन्न तरह के चूर्ण, एलोपेथिक दवाएं आदि यदि लेता हो तो न खायेक्योंकि हमारा अनुभव है, कि उनसे कोई लाभ नहीं होता, एंटिबायोटिक हानी पहुंचाते हैं | रोग से कष्ट अधिक न हो रहा हो तब, केवल सामान्य पाचन तंत्र ठीक करने वाली आयुर्वेदिक ओषधि, योग्य भोजन, और मानसिक विश्राम सतत देने से भी, रोगी रोग मुक्त हो जाता है

Irritable Bowel Syndrome (IBS) - Is it Sangrahani diseases according to Ayurveda ?

इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम (आईबीएस)- क्या आयुर्वेद अनुसार संग्रहणी है
डॉ मधु सूदन व्यास (उज्जैन) 
यदि किसी व्यक्ति को पेट दर्द होते होते ३ माह से अधिक हो गए हों, और अनियमित ( वक्त वेवक्त) मल त्याग हो तो उसे इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम हो सकता है| आँतों के इस रोग में, पेट में दर्द, बेचैनी व मल त्यागने (शौच करने) में समस्या होती है|  आधुनिक चिकित्सक इसे स्पैस्टिक कोलन, इर्रिटेबल कोलन, म्यूकस कोइलटिस जैसे नामों से भी जानते हैं।
पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक प्रभावित करने वाला यह रोग केवल शारीरिक कष्ट ही नहीं देते वरन उसकी सम्पूर्ण जीवन चर्या को प्रभावित करता है

Anal Burning or Pain - Warnings of future Piles or Fistula etc :-

 गुदा में जलन या दर्द :- भविष्य में हो सकने वाले ववासीर,  भगन्दर आदि की चेतावनी!! 
अक्सर किसी को भी, किसी भी मौसम में किसी भी समय मलाशय (Rectum, गुदा,) में जलन, दर्द, होने लगता है| शायद ही कोई हो जिसे इसका अनुभव न हुआ हो | अकसर सभी प्रारम्भ में इस पर ध्यान नहीं देते, क्यों की  उन्हें ज्ञात हो सकता है , की यह एक दिन पूर्व तीखा आदि  खाने पीने (विशेष कर अधिक मात्रा में) से हुआ है, और ठीक भी हो जाएगा, और ऐसा होता भी है |  
    पर क्या समस्या पूरी तरह हमेशा के लिए ठीक हो जाएगी?

The Enteritis and Ulcerative colitis- Crisis on Life .

आंत्रशोथ या सव्रण बृहदांत्रशोथ-  जीवन पर संकट:- 
यदि किसी रोगी को बार-बार दस्त (diarrhea) जाने लगते हों, मतली (nausea) या उल्टी (vomiting), भूख न लगना (loss of appetite), पेट में ऐंठन और दर्द (abdominal cramps and pain), जैसे लक्षण मिलते हों, साथ ही हमेशा या कभी कभी मल के साथ खून (bleeding) या आवं (mucus) निकलने लगती है , रोगी को ज्वर (fever), की प्रतीति भी हो सकती है - ये सब या कुछ लक्षण मिलते हों तो जान ले आपकी आंत विशेषकर बड़ी आंत में सूजन हो गई है, और हुए व्रण (घाव) से खून  बहने वाला रोग

Irregular Life- What is the point of crying when birds ate whole farm already? [असंयंमित जीवन -अर्थात फिर पछताए का होत हे, जब चिड़िया चुग गई खेत।

[असंयंमित  जीवन -अर्थात  फिर पछताए का होत  है,  जब चिड़िया चुग गई खेत।]    
मनुष्य के शरीर ओर मन में शक्तियों का अकूत भंडार भरा हुआ है। इसको बचाया जा सके, ओर उसका सदुपयोग किया जा सके तो अभीष्ट [इच्छित] दिशा में आशाजनक सफलता पाई जा सकतीं हें। इस जानकारी के अभाव में हम अपनी बहुमूल्य शक्तियों का निरंतर अपव्यय करते रहते हें। इन शक्तियों को खोकर खोखला, रुग्ण [बीमार], अशक्त ओर असफल जीवन जीते हुए मोत तक के दिन को पूरे करते हें।
  हमारा शरीर ओर मन प्रकर्ति जनित क्रियाओं के माध्यम से अपने-अपने आहार ओर शक्तियों का निरंतर उत्पादन कर सामर्थ भंडार को भी निरंतर बडाते रहते हें। 
शरीर ओर मन  शक्तियों का अकूत भंडार।
केसे प्राप्त हो? 
  यदि हम इस उत्पादन को अपव्यय [खर्च] से बचा सकें, ओर रचनात्मक दिशा में प्रयुक्त कर सकें तो वह सब कुछ इच्छित किया जा सकता है, जो हम चाहते ओर सोचते हें।

विश्व लीवर (liver) दिवस 19 अप्रेल 15 के अवसर पर हम जाने अपने लीवर(यकृत) या जिगर के बारे में

विश्व लीवर दिवस 19 अप्रेल 15 के अवसर पर  हम जाने अपने लीवर(यकृत) या जिगर के बारे में -
यकृत का महत्त्व कितना अधिक है यह निम्न बात से जाना जा सकता है| 
1. शारीर में दाई और सबसे बड़ी ग्रंथि जिसका भार 1.2 से 1.4 किलोग्राम लगभग.
2. यह शरीर का एक कारखाना जहाँ कई रासायनिक यौगिक बनते हें| 
3. यह एक ख़राब द्रव्य (Waste disposal) समाप्त करने के वाले रसायन बनाने वाला सयंत्र(प्लांट)  भी है जहाँ से पित्त, यूरिया और डीटोक्सीफिकेशन (विषनाशक) प्रोडक्ट बनते हें| 
4. यह एक पावर प्लांट भी है जहाँ, मेटाबोलिज्म से एनर्जी उत्पन्न की जाती है| 
5. यह एक गोदाम भी है जहाँ ग्लाइकोजन, लोहा और विटामिन आदि रखे जाते हें| 

=============================
समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें| आपको कोई जानकारी पसंद आती है, ऑर आप उसे अपने मित्रो को शेयर करना/ बताना चाहते है, तो आप फेस-बुक/ ट्विटर/ई मेल/ जिनके आइकान नीचे बने हें को क्लिक कर शेयर कर दें। इसका प्रकाशन जन हित में किया जा रहा है।

कैसे हो जाते हैं, कब्ज आदि पेट के रोग? ठीक करने के लिए क्या करें?

कैसे हो जाते हैं, कब्ज आदि पेट के रोग? ठीक करने के लिए क्या करें? 

  आजकल शहरी मध्यम वर्ग, विशेषकर एसे वर्ग में जिसमें शारीरिक परिश्रम करके आजीविका नहीं चलाई जाती हो, उनमें कब्ज जैसी यह समस्या या इस जैसी पेट की अन्य समस्याए, अधिक देखने मिलती हें, और अक्सर, “ मुझे सुबह शौच बहुत देरी से आता है, कम आता है, आता नहीं है, शोच के बाद भी अच्छा नहीं लगता, जी चाहता है और शोच आये, क्या यह किसी पेट के रोग का लक्षण है, यदि है तो कोई उपाय बताएँ॥“ जैसे अन्य प्रश्न पूछे जाते है। 

  इस प्रकार के कब्ज आदि पेट रोगों का कारण वर्तमान आपाधापी से भरी जीवन शेली प्रमुख है। हम हर काम शीघ्र निपटा देना चाहते हैं। जैसे हमारे पास बहुत काम हैं। पर क्या स्वस्थ्य जीवन जीने से महत्वपूर्ण भी कोई काम है। यदि दो वक्त का खाना भी ठीक प्रकार से न खा पाए, तो फिर उसके लिए अर्जन(कमाने) से क्या लाभ? 

क्रोनिक टाइफोइड केसे ठीक हो? - आयुर्वेदिक चिकित्सा - प्रश्न पर उत्तर।


उत्तर - टाइफाइड बेसिलस साल्मोनेला टाइफी, के कारण से मियादी बुखार जिसे आंत्रिक ज्वर (आंतों का बुखार) भी कह सकते हें होता है। 
    यह टाइफाइड बेसिलस, दूषित भोजन या पानी के द्वारा फैलता है। इसका फैलाव (ट्रांसमिशन) कच्चे फल, मानव मल, दूषित दूध और दूषित दूध उत्पादों (फूड प्रोडक्ट) दूषित पानी से पैदा की गई (निषेचित) सब्जियों को खाने के माध्यम से भी होता है। मक्खियां भी खाद्य पदार्थों के संक्रामण के लिए जिम्मेदार हो सकती हें। अधिकतर मामलों में पीने के पानी और अन्य उपयोग हेतु पानी के एक ही स्रोत का उपयोग टाइफाइड बुखार की महामारी का कारण पाया गया है। 
    टाइफाइड बुखार के गंभीर मामलों बुखार, सिरदर्द, बेचैनी, आहार और अनिद्रा की क्रमिक शुरुआत विशेषत: देखि जाती है। वयस्कों में कब्ज और बड़े बच्चों में ज्यादा दस्त होना आम है। 
  सही चिकित्सा नहीं करने पर कुछ रोगियों, कभी कभी, निमोनिया निरंतर बुखार, मंदनाड़ी, यकृत-या प्लीहा की वृद्धि (hepatosplenomegaly), हो सकती हें। 
  शरीर के मध्य भाग(ट्रंक) की त्वचा पर गुलाबी धब्बे, दिखाई दे सकते हें। तीसरे सप्ताह में रोग 10-20% तक घातक हो सकता है।

प्रश्न- खट्टी और कड़वी उल्टी होना, खाना हजम न होना, पेट फुला रहना, सर्दी जुकाम रहना, कफ जमा प्रतीत होना?

उत्तर 
खट्टी और कड़वी उल्टी होना, खाना हजम न होना, पेट फुला रहना, सर्दी जुकाम रहना, कफ जमा प्रतीत होना? 

 आपके ये सारे लक्षण अपचन के हें। लगातार कुछ न कुछ और वह भी जंक फूड (या आयुर्वेद अनुसार  मिथ्याहार करना) खाते रहना इसका एक मात्र कारण है। इलाज भी यही है की रोग के कारण को हटा दें, अर्थात इन सबको न खाएं। हो सकता है, आप कहें की, अब तो में ये नहीं खा रहा हूँ फिर भी तकलीफ नहीं मिटती। तो भी कारण और निवारण वही होगा। ठीक होने में समय भी तो देना होगा। 
लगातार खाने के असंतुलन से शरीर की पाचक क्रिया भी असंतुलित हो जाती है और इस प्रकार का व्यवहार करने लगती है।
पेट में बनाने वाले पाचक रस उपयुक्त खाने के अभाव में आमाशय में दाह जलन पेदा कर देते हें, अधिक बडने पर अल्सर या छाले भी हो जाते हें, इसे अम्लपित्त या एसिडिटी भी कहते हें। खाने का असंतुलन मल प्रक्रिया तक को प्रभावित करता है, शोच(मल त्याग) अच्छा नहीं होता। भोजन के संतुलित न होने से रस, रक्त, माँस आदि का ठीक पोषण न होने से शरीर कमजोर होने लगता है, कमजोर शरीर की रोग प्रतिकारक क्षमता कम होने से प्रारम्भ में साधारण रोग सर्दी जुकाम आदि से प्रारम्भ होकर अन्य गंभीर रोग अग्रसर होते हें। शोच के ठीक न होने से पाइल्स फिशर आदि गुदा रोग, संग्रहणी आदि पेट के रोग होने का खतरा बढ़ जाता है। पाचन की यही गड़बड़ी प्राणघातक हृदय रोग, किडनी रोग, लीवर के रोग, उत्पन्न कराते हें। 
युवा वस्था में यह बात मज़ाक लगती है, क्योकि शरीर की रोग प्रतिकारक क्षमता उच्च स्तर पर होने से रोग ठीक भी होते रहते हें, पर जैसे जैसे आयु बडती है, क्षमताएं कम होती है तो रोग अपना असर दिखने लगते हें। इसलिए समय रहते चेत जाना संतुलित आहार खाना, जंक फूड की अति से बचना स्वस्थ और आनंद माय जीवन के लिए आधिक उचित है। 
  आप उपरोक्त सभी निर्देशों के अनुसार चलें,  और अविपत्ति कर चूर्ण (लिंक देखें) का सेवन करें लाभ होगा। साथ ही किसी अच्छे क्वालिफाइड और अनुभवी चिकित्सक से परामर्श लें जो आपका रोग निदान कर  चिकित्सा दे सके।  
  
समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें| आपको कोई जानकारी पसंद आती है, ऑर आप उसे अपने मित्रो को शेयर करना/ बताना चाहते है, तो आप फेस-बुक/ ट्विटर/ई मेल/ जिनके आइकान नीचे बने हें को क्लिक कर शेयर कर दें। इसका प्रकाशन जन हित में किया जा रहा है।

क्या? मियादी बुखार आंत्रिक ज्वर या टाइफोइड अधिकांशत: होता है स्वयं की गलती से!

क्या? मियादी बुखार आंत्रिक ज्वर या टाइफोइड अधिकांशत: होता है स्वयं की गलती से!  

जी हाँ यह सही है।

केवल मनुष्यों में सालमोनीला टायफ़ी नामक जीवाणु वाले संक्रमित जल और मल से दूषित खाद्य पदार्थ खाने से आंतों में पहुँच वहाँ से खून में जाकर तेजी से बढ़ते हें, और टाइफाइड, आंत्रिक ज्वर, आन्त्र ज्वर,  उत्पन्न करते हें।  
कुछ व्यक्तिओं में  इसके  कीटाणु तो मिलते हें, पर उन्हे यह रोग नही होता वे अन्य को रोग फेला सकते हें। एसे लोग रोग संबाहक होते हें।
बचने का रास्ता यही है की जोखिम भरे

आयुर्वेद द्वारा संभव है, यकृत के रोगों की चिकित्सा?

आयुर्वेद द्वारा संभव है, यकृत के रोगों की चिकित्सा?  
लीवर या यकृत शरीर के लिए अनावश्यक फेट्स आदि और हानी कारक पदार्थो को हटाने (डीटोक्सिफिकेशन) का काम [ देखें-लीवर-शरीर का विषों/ रसायनो/ शराब/ जहर/ ड्रग्स आदि के विरुद्ध(डीटॉक्सीफिकेशन) चौकीदार!] जब पूरी तरह नहीं कर पाता तो यह जमा या पेंडिंग काम लीवर को रोगी या खराब बनाता है।

लीवर - शरीर का विषों/ रसायनो/ शराब/ जहर/ ड्रग्स आदि के विरुद्ध(डीटॉक्सीफिकेशन) चौकीदार!

क्या है लीवर?

   शरीर में लीवर, यकृत या जिगर को आयुर्वेद में रक्तवह (रक्त को धारण करने वाला) स्त्रोतस कहा गया है, यह पेट मे ऊपरी दाएँ भाग में स्थित दिखने त्रिभुज आकार का सबसे बड़े ठोस अंगों में से एक है। लीवर का अधिकांश भाग छाती या रिब की हड्डियों के नीचे होता है।

डाईबीटीज़ ह्रदय रोगी, कब्ज, एसिडिटी आदि के रोगी के लिए भोजन व्यवस्था?

यह लेख एक कब्ज के रोगी की व्यथा को दूर करने के उद्धेश्य से लिखा गया है, पर लाभ  डाईबीटीज़ ह्रदय रोगी, एसिडिटी आदि के रोगो के लिए भी उपयोगी हें। 

मल द्वार पर जलन

Q- maldwar me jalan lagati
Sender Name: nitesh / Sender Email Address: nitesh.suman@yahoo.com

A- मल द्वार पर जलन होने के सामान्यत: निम्न कारण हो सकते हें,

प्रश्न- कॉन्स्टिपेशन ओर गेस की समस्या हे क्या करूँ?

प्रश्न- कॉन्स्टिपेशन ओर गेस की समस्या है क्या करूँ? 
सर नमस्ते,
मेरा नाम संजय वडनेकर है, पेशे से मेँ एक टीचर हूँ। सर मेँ लंबे समय से कॉन्स्टिपेशन से ग्रसित हूँ, और पिछले कुछ समय से मुझे रात को सोते समय गॅस के उपर चड़ने से नींद न आने की समस्या है। शायद GERD जैसा मैने नेट से पता लगाया। मेँ धार

हिंग्वाष्टक चूर्ण-मनुष्य के लिए आयुर्वेद का एक अनमोल तोहफा।

हिंग्वाष्टक चूर्ण-मनुष्य के लिए आयुर्वेद का एक अनमोल तोहफा।
माना जाता है की हर रोग का बीज पेट से ही पनपता है, इसी कारण  पेट को ठीक रखा जाए तो कोई रोग कैसे होगा। 
प्रारम्भिक समस्या पेट के कारण ही उत्पन्न होती है। 

आपके प्रश्न हमारे उत्तर -पेट में गैस ओर बहुत दर्द ।

Q- नमस्ते सर मेरे पेट में हमेशा गैस बना रहता है जिससे पेट में बहुत तेज दर्द होता है  और खाना खाते-२ पेट में दर्द होने लगता ह और लेटरिंग हो जाती है दिन में ३-४ बार लेटरिंग जाना पड़ता है कृपा कोई उपाय बाते ?
भवदीय,
धीरज | dheerajsaini.blb@gmail.com
A- धीरज जी,
पेट में हमेशा गेस बनने/ दर्द/ आदि यह सब मिथ्याहार (अनावश्यक खाने) से खाने से होता है। खाना खाते खाते पेट में दर्द ओर मल त्याग की प्रवृत्ति हाजमा खराब होने का प्रतीक है।
आप भोजन के पूर्व एक चम्मच 4-5 ग्राम हिंग्वाष्टक चूर्ण लें भोजन के बाद जीरे से बघारी हुई एक ग्लास छाछ  पिये लाभ मिलेगा । चना/ बेसन से बनी वस्तु ओर बाज़ार के खाने पीने से दूर रहें।पानी अधिक पिये।   निम्न लेखों को भी पढ़ लें ओर लाभ उठाएँ।


समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें|

टूथ पेस्ट हो सकता है बच्चों के पेट दर्द का कारण?

टूथ पेस्ट हो सकता है बच्चों के पेट दर्द का कारण? 
यूं तो पेट का दर्द एक साधारण समस्‍या है, लेकिन टूथपेस्ट इस्‍तेमाल करते समय इस बात का ध्‍यान रखना चाहिए कि बच्‍चा उसे निगल तो नहीं रहा। बाजार में विभिन्न प्रकार के स्वाद और सुगंधयुक्त पेस्ट बिक रहे हैं, विशेषकर फ्लोराइड युक्त, वे बच्‍चे के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकते हैं। इस कारण बच्चे मुंह धोने के दौरान इसे निगल जाते हैं या चाटते हैं।

भोजन की नियम - जिन्हे अपना कर सौ वर्ष जियेँ।

वजन को नियंत्रित करना है तो
1-धीरे- धीरे चबा- चबाकर खाओ।
2-शांति से एकाग्र चित्त होकर भोजन करो।
3-छोटे छोटे कोर(निवाले) खाओ।
4-सोचो की भोजन में बड़ा स्वाद लग रहा है।
 
पेट का हमेशा भारी रहना,  भूख का नहीं लगना यह बताता है, 
की आपका पेट साफ  नहीं रहता है। एसा भोजन के न पचने के कारण होता है। चरक के अनुसार भूख न लगी हो फिर भी भोजन करने से रोग होते हें।  इसीलिए जब भोजन करें तो विना भूख के न करें। 

अमीबायसिस या पेचिश

     अमीबायसिस या पेचिश (गेस्ट्रो इन्टेस्टाइनल अमीबायसिस) अधिकतर अमीबा के संक्रमण से प्रारम्भ में कोई लक्षण नहीं होते हैं। लक्षण प्राय महीनो बाद शुरू होते हैं, कुछ लोगो में लक्षण सामान्य होते हैं, जो की हल्का दर्द और पेट के निचले भाग में गुडगुड की आवाज से प्रारम्भ होते हें, और बाद में दो से तीन ढीले मल आते है । कुछ लोगो में अमीबिक डिसेंट्री के पूरे लक्षण होते हैं जेसे तेज बुखार, पेट में दर्द और रोजाना १० - 15 या अधिक दस्त। प्राय:  यह दस्त पानी जैसा होता है और इसमें रक्त और आव (म्यूकस) रहता है।
         जब अमीबा यकृत तक फ़ैल जाते हैं तो यकृत में फोड़ा हो सकता है,इससे बुखार , उबकाई , उलटी और दर्द जो की पेट के ऊपरी सीधे तरफ होने लगता है , वजन का घटना और बढ़ा हुआ यकृत। यह लक्षण बिना दस्त के साथ भी संभव है|
आज की बात (30) आनुवंशिक(autosomal) रोग (10) आपके प्रश्नो पर हमारे उत्तर (61) कान के रोग (1) खान-पान (70) ज्वर सर्दी जुकाम खांसी (22) डायबीटीज (17) दन्त रोग (8) पाइल्स- बवासीर या अर्श (4) बच्चौ के रोग (5) मोटापा (24) विविध रोग (52) विशेष लेख (107) समाचार (4) सेक्स समस्या (11) सौंदर्य (19) स्त्रियॉं के रोग (6) स्वयं बनाये (14) हृदय रोग (4) Anal diseases गुदरोग (2) Asthma/अस्‍थमा या श्वाश रोग (4) Basti - the Panchakarma (8) Be careful [सावधान]. (19) Cancer (4) Common Problems (6) COVID 19 (1) Diabetes मधुमेह (4) Exclusive Articles (विशेष लेख) (22) Experiment and results (6) Eye (7) Fitness (9) Gastric/उदर के रोग (27) Herbal medicinal plants/जडीबुटी (32) Infectious diseaseसंक्रामक रोग (13) Infertility बांझपन/नपुंसकता (11) Know About (11) Mental illness (2) MIT (1) Obesity (4) Panch Karm आयुर्वेद पंचकर्म (61) Publication (3) Q & A (10) Season Conception/ऋतु -चर्या (20) Sex problems (1) skin/त्वचा (26) Small Tips/छोटी छोटी बाते (71) Urinary-Diseas/मूत्र रोग (12) Vat-Rog-अर्थराइटिस आदि (24) video's (2) Vitamins विटामिन्स (1)

चिकित्सा सेवा अथवा व्यवसाय?

स्वास्थ है हमारा अधिकार १

हमारा लक्ष्य सामान्य जन से लेकर प्रत्येक विशिष्ट जन को समग्र स्वस्थ्य का लाभ पहुँचाना है| पंचकर्म सहित आयुर्वेद चिकित्सा, स्वास्थय हेतु लाभकारी लेख, इच्छित को स्वास्थ्य प्रशिक्षण, और स्वास्थ्य विषयक जन जागरण करना है| आयुर्वेदिक चिकित्सा – यह आयुर्वेद विज्ञानं के रूप में विश्व की पुरातन चिकित्सा पद्ध्ति है, जो ‘समग्र शरीर’ (अर्थात शरीर, मन और आत्मा) को स्वस्थ्य करती है|

निशुल्क परामर्श

जीवन के चार चरणौ में (आश्रम) में वान-प्रस्थ,ओर सन्यास अंतिम चरण माना गया है, तीसरे चरण की आयु में पहुंचकर वर्तमान परिस्थिती में वान-प्रस्थ का अर्थ वन-गमन न मान कर अपने अभी तक के सम्पुर्ण अनुभवोंं का लाभ अन्य चिकित्सकौं,ओर समाज के अन्य वर्ग को प्रदान करना मान कर, अपने निवास एमआइजी 4/1 प्रगति नगर उज्जैन मप्र पर धर्मार्थ चिकित्सा सेवा प्रारंंभ कर दी गई है। कोई भी रोगी प्रतिदिन सोमवार से शनी वार तक प्रात: 9 से 12 एवंं दोपहर 2 से 6 बजे तक न्युनतम 10/- रु प्रतिदिन टोकन शुल्क (निर्धनों को निशुल्क आवश्यक निशुल्क ओषधि हेतु राशी) का सह्योग कर चिकित्सा परामर्श प्राप्त कर सकेगा। हमारे द्वारा लिखित ऑषधियांं सभी मान्यता प्राप्त मेडिकल स्टोर से क्रय की जा सकेंगी। पंचकर्म आदि आवश्यक प्रक्रिया जो अधिकतम 10% रोगियोंं को आवश्यक होगी वह न्युनतम शुल्क पर उपलब्ध की जा सकेगी। क्रपया चिकित्सा परामर्श के लिये फोन पर आग्रह न करेंं। ।

चिकित्सक सहयोगी बने:
- हमारे यहाँ देश भर से रोगी चिकित्सा परामर्श हेतु आते हैं,या परामर्श करते हें, सभी का उज्जैन आना अक्सर धन, समय आदि कारणों से संभव नहीं हो पाता, एसी स्थिति में आप हमारे सहयोगी बन सकते हें| यदि आप पंजीकृत आयुर्वेद स्नातक (न्यूनतम) हें! आप पंचकर्म चिकित्सा में रूचि रखते हैं, ओर प्रारम्भ करना चाह्ते हैं या सीखना चाह्ते हैं, तो सम्पर्क करेंं। आप पंचकर्म केंद्र अथवा पंचकर्म और आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रक्रियाओं जैसे अर्श- क्षार सूत्र, रक्त मोक्षण, अग्निकर्म, वमन, विरेचन, बस्ती, या शिरोधारा जैसे विशिष्ट स्नेहनादी माध्यम से चिकित्सा कार्य करते हें, तो आप संपर्क कर सकते हें| सम्पर्क समय- 02 PM to 5 PM, Monday to Saturday- 9425379102/ mail- healthforalldrvyas@gmail.com केवल एलोपेथिक चिकित्सा कार्य करने वाले चिकित्सक सम्पर्क न करें|

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

स्वास्थ /रोग विषयक प्रश्न यहाँ दर्ज कर सकते हें|

Accor

टाइटल

‘head’
.
matter
"
"head-
matter .
"
"हडिंग|
matter "