Rescue from incurable disease

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लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |
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  • डाईबीटीज़ ह्रदय रोगी, कब्ज, एसिडिटी आदि के रोगी के लिए भोजन व्यवस्था?

    यह लेख एक कब्ज के रोगी की व्यथा को दूर करने के उद्धेश्य से लिखा गया है, पर लाभ  डाईबीटीज़ ह्रदय रोगी, एसिडिटी आदि के रोगो के लिए भी उपयोगी हें। 
    प्रश्न-  डिअर सर, प्रणाम,
    यह प्रश्न एक व्यक्ति का नहीं, कई भाई
    इस कब्ज या एसी ही किसी समस्या से
    पीड़ित हें, इसके उत्तर में केवल खान-पान
    से ही तकलीफ दूर की जा सकती है। 
    आपके ब्लॉग पढ़े, काफी ज्ञान प्राप्त हुआ, साथ ही जिज्ञासा भी बढ़ी और जानने की सीखने की, मदद लेने की |
    मैं २८ बर्ष का हूँ और 12 साल से कब्ज से परेशान हूँ, त्रिफला चूर्ण, बैधनाथ कब्ज हर दाने, कायम चूर्ण, नित्यम चूर्ण, और एक सौफ का चूर्ण जिसका मुझे नाम याद नही है जैसे कितने ही चूर्ण ले डाले है और उपयोग किया | कुछ दिन तो ये सब असर करते हैं फिर बेकार | अगर आप मेरी इस समस्या को जड़ से मिटा दें तो मैं जिस दिन तक जिन्दा रहूँगा आपका ऋणी और अहसानमंद रहूँगा |
    कब्ज की वजह से सर दर्द और बदन दर्द भी रहता है, शरीर में आलस्य रहता है|
    मुझे आपसे बहुत उम्मीद है। 
    भवदीय
    मनीष दुबे , फफूंद, औरैया, उत्तर-प्रदेश   
    ============================ 
    उत्तर- आपकी बात से प्रतीत होता है की आप बहुत परेशान हें। हम आपको बताना चाहते हें की डाईबीटीज़ ओर ह्रदय रोग का बीज कब्ज में होता है।  इसलिए इसके प्रति अधिक ध्यान  रखना चाहिए।
    यह दिक्कत केवल आपकी नहीं उस प्रत्येक व्यक्ति की है, जिसे यह समस्या है। यदि आपको इसके अतिरिक्त ओर कोई समस्या नहीं है, (यदि अन्य कोई रोग/ कष्ट है तो चिकित्सक से प्रत्यक्ष संपर्क कर रोग निदान करें।) ,
     केबल कब्ज है, तो आपकी खान -पान की आदत बदलना जरूरी है,  आप निश्चय ही  भोजन में रेशा नहीं लेते हें, शारीरिक श्रम जैसे कार्य न कर टेबल वर्क आदि बैठे रहने का काम करते हें, आपको भूख लगती रही,  तो जो भी मिलता है विशेषकर स्नेक्स, आदि ले लेते हें, पानी कम पीते हें, चना के बेसन से बने सेव पकोरी या ओर कुछ अधिक खाते रहे हें, हो सकता है, ओर अब कष्ट के कारण छोड़ दिये हों, पर एसे कारणो से ही आपका सिस्टम खराब हो चुका है, अत: सब छोड़ देने के बाद भी कब्ज दूर नहीं हो ही है। गलत सलाह या स्वेच्छा या विज्ञापनो से प्रभावित होकर चूर्ण आदि खाकर अधिक हानी पहुंचा रहें हें, यह सब अब बंद कर दें , पाचन क्रिया को अब फिर से सामान्य करना होगा। 
      केवल कब्ज के रोगी को ही नहीं, डाईबीटीज़ह्रदय रोगी, पाइल्स रोगीएसिडिटी, आदि, के लिए भी यह निम्न भोजन व्यवस्था अति उपयोगी होगी।  
    1. आप रोज दोनो समय खाना खाने के पहिले लगभग 200 ग्राम से अधिक मुली/ गाजर/ ककड़ी/ प्याज/टमाटर, नीबू आदि (सलाद)  खाएं। 
    2. प्रात: नाश्ते में चाय दूध आदि के साथ प्रति दिन बदल बदल कर, अंकुरित मूंग मोठ आदि, या उपमा, या दलीया, या ब्राउन ब्रेड लें। 
    3. खाने (लंच) में कम मिर्च मसाले वाली दाल 25--50 ग्राम, हरी सब्जी 200ग्राम , उबला चावल50 ग्राम (या दलीया,) 100 ग्राम रोटी। 
    4.  दोपहर बाद 200 ग्राम फल (सेव,पपीता,अनार,अमरूद ओर डाईबिटीज़ न हो तो आम केला,अंगूर आदि लें, साथ में दहीछाछ, या दूध (चाय अधिक लाभ नहीं देती) लें।
    5.  यदि रात्री में देर से 8 बजे के बाद खाना खाने की आदत हो तो, संध्या के समय भी नाश्ते जेसा दलिया आदि लें। 
    6.  रात्री भोजन में सलाद सहित लंच की तरह,  पर मात्रा में कम खाना लें । 
    7. रात्री को एक गिलास दूध  पिये ( ध्यान रखें की दूध  मलाई क्रीम रहित, कम उबला केवल गरम किया हुआ ही हो अन्य दूध चाहे स्वादिष्ट लगते हें पर लाभ नही देते)। 
    8. नान वेज की आदत अच्छी नहीं है। पेट ठीक हो एसीडिटी या कब्ज नहीं हो तो कभी कभी कम मिर्च मसले वाला लेने में अधिक हानी नहीं होती। 
    9. प्रतिदिन अधिक पानी पीने की आदत बनाए। 
    10. नियमित दिनचर्या जैसे प्रात: उठकर घूमने जाना, थोड़ा व्यायाम करना, शरीर को स्वछ रखना, धुले वस्त्र पहिनना, प्रसन्न रहना, समय पर सोना, आदि सामान्य सी लगने वाली बातें भी कब्ज दूर रखने में सहायक होती हें।
    आप उपरोक्त भोजन क्रम बना लें, तो कब्ज से छुटकारा जल्दी मिल जाएगा। यह क्रम जीवन भर रख कर नया जीवन स्फूर्त्ति बनाए रख सकते हें। पुनः ध्यान दें की यदि कोई रोग हो तो निदान व चिकित्सा इसके अतिरिक्त हो सकती है।

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