Rescue from incurable disease

Rescue from incurable disease
लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |
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हिमोफिलिया -एक घातक रोग जिसमें बहता खून रुकता नहीं?

हिमोफिलिया -एक  घातक रोग  जिसमें बहता खून रुकता नहीं? 
आज सत्रह अप्रैल को दुनियाभर में विश्व हीमोफीलिया दिवस मनाया जाता है। इस साल के विश्व हीमोफीलिया दिवस का लक्ष्य इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाना और सभी के लिए उपचार है।

मैकार्डल रोग( McArdle's Disease मांस पेशियों में में असहनीय दर्द), की आयुर्वेदिक चिकित्सा .

इस प्रश्न का उत्तर चिकित्सा विशेषकर आयुर्वेद के चिकित्सक और छात्रों के लिए उपयोगी है |
प्रश्न –
मैं अंकित कुमार हूँ और मैं बचपन से McArdle रोग से पीड़ित हूँ। और अब इस समस्या पिछले दो साल से बढ़ रही है। मैं 500 मीटर भी चलने में सक्षम नहीं हूँ। क्योंकि बाद मैं अपने पैरों में विशेष कर पैरों पीछे की ओर अधिक दर्द महसूस होता है, और उसके बाद मुझे रुकना होता है।

पाइल्स,बवासीर, अर्श, या हीमोरायड्स

बवासीर/ अर्श 
बवासीर या पाइल्स को हीमोरायड्स के नाम से भी जाना जाता है। बवासीर उत्तक (टिश्यूज)  के पिंड(गठान) ही मस्से होते हैं, ये गुदा के अन्दर या बाहरी भाग में हो सकते हें| इनमें बढ़ी हुई रक्तवाहिकाएं (ब्लड वेसल्स) होती हैं। यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें गुदा (ऐनस) के अंदरूनी और बाहरी क्षेत्र और मलाशय (रेक्टम) के निचले हिस्से की रक्त शिरा में सूजन आ जाती है। इसकी वजह से ऐनस के अंदर और बाहर या किसी एक जगह एक अंकुरों, उभार, गठान, या मस्से जैसा बन जाते है, जो अंदर की ओर या बाहर तक भी हो सकते हैं। इन्ही मांस के अंकुरों को बवासीर या अर्श कहते हैं ! 

कोलेष्ट्रोल या लिपोप्रोटीन जो शरीर को स्वस्थ्य निरोगी या रोगी बनाता है!

 कोलेष्ट्रोल या लिपोप्रोटीन जो शरीर को स्वस्थ्य निरोगी या रोगी बनाता है! 
कोलेस्ट्रॉल मोम जैसा एक पदार्थ होता है, जो यकृत से उत्पन्न होता है। यह सभी पशुओं और मनुष्यों के कोशिका झिल्ली समेत शरीर के हर भाग में पाया जाता है। कोलेस्ट्रॉल कोशिका झिल्ली का एक महत्वपूर्ण भाग है, यह उनकी कार्य क्षमता और तरलता स्थापित करने में सहायक होता है। 
 कोलेस्ट्रॉल शरीर में विटामिन डी, हार्मोन्स और पित्त (पाचक रस) का निर्माण करता है, जो शरीर के अंदर पाए जाने वाले वसा या चर्बी को पचाने में मदद करता है।

हाइपोथायरायडिज्म-थायरॉयड हॉर्मोन का अपर्याप्त उत्पादन |


हाइपोथायरायडिज्म-थायरॉयड हॉर्मोन का अपर्याप्त उत्पादन|
चिकित्सा के छात्रों सहित सामान्य जन के लिए भी उपयोगी लेख।
मनुष्य के शरीर में, शरीर की समस्त व्यवस्था  के सञ्चालन हेतु कई ग्रंधियाँ होती हें इन्ही ग्रथियों से विभिन्न हारमोंस या रस निकलकर उनके कार्य करते हें । किसी भी ग्रंथि की अतिसक्रियता या अधिक उत्पादन हाईपर ,(हाइपरथायरायडिज्‍़म: )। एवं कम उत्पादन को हाइपो के नाम से समझा जा सकता हे। 

हाइपोथायरायडिज्म मनुष्य  में थायरॉयड ग्रंथि से थायरॉयड हॉर्मोन के अपर्याप्त उत्पादन के कारण होने वाली रोग की अवस्था हे,या रोग (विकार) हे,   (अवटुवामनता (Cretinism) भी हाइपोथायरायडिज्म का ही एक रूप है जो छोटे बच्चों में पाया जाता है।)
जनसंख्या का लगभग तीन प्रतिशत भाग हाइपोथायरायडिज्म से पीड़ित है.। 
 कुछ कारण जैसे आयोडीन की कमी होना होता हे।
हाइपोथायरायडिज्म प्रसव पश्चात थायरोडिटिस (postpartum thyroiditis) के परिणामस्वरूप भी हो सकता है, यह एक ऐसी स्थिति है जो लगभग 5% महिलाओं को बच्चे को जन्म देने के बाद एक वर्ष के भीतर प्रभावित करती है।
हाइपोथायरायडिज्म कभी कभी आनुवंशिकी के परिणामस्वरूप भी होता है, कभी कभी यह गुणसूत्र (autosomal) पर अप्रभावी लक्षण (recessive) के रूप में भी पाया जा सकता हे।
लक्षण

प्रारम्भिक लक्षण  (वयस्कों में, हाइपोथायरायडिज्म होने पर निम्नलिखित लक्षण होते हें।)
  • मांसपेशियों की कार्य क्षमता की कमी (मस्कुलर  हाइपोटोनिया)
  • थकान ।
  • सर्दी (कोल्ड)को सहन करने की क्षमता में कमी, सर्दी के प्रति बहुत अधिक संवेदनशीलता का होना, या ठण्ड नहीं सहन हो पाना।
  • मानसिक डिप्रेशन या अवसाद।
  • मांसपेशियों में अकड़न और जोड़ों में दर्द।
  • गलगंड (Goiter)गले की रस वाहनियों में सुजन से बढना |
  • अंगुलियों के नाखुन पतले और भंगुर (आसानी से टूटने वाले)हो जाना ।
  • पतले, भंगुर (आसानी से टूटने वाले) बाल।
  • शरीर या चेहरे पर पीलापन।
  • पसीना कम आना।
  • शुष्क, खुजली वाली त्वचा का होना।
  • वजन का बढ़ जाना और प्यास अधिक लगाना ।
  • ब्रेडीकार्डिया (Bradycardia) (ह्रदय धडकन  कम होना-प्रति मिनट साठ धड़कन से कम)
  • कब्ज (शोच  कम या नहीं जाना )
  • रोग के बड़ने के साथ अन्य लक्षण भी आ जाते हें।
  • धीमी आवाज और एक कर्कश और टूटती हुई आवाज (हकलाहट) आवाज में गहराई या भारीपन भी देखी जा सकती है।
  • शुष्क फूली हुई त्वचा, विशेष रूप से चेहरे पर।
  • भौहों के बाहरी तीसरे हिस्से का पतला होना, (हेर्टोघ (Hertoghe) का चिन्ह)
  • महिलाओं में असामान्य मासिक चक्र हो जाना।
  • शरीर के आधारभूत तापमान में कमी
  • कभी कभी कुछ और लक्षण भी पाए जा सकते हें।
  • याददाश्त कमजोर होना स्मरण शक्ति कम हो जाना।
  • सोचने-समझने की क्षमता  का कमजोर होना (दिमाग में धुंधलापन) और असावधानी या बार बार भूलें होना।
  •  ह्रदय दर का धीमा होना, जिसमें कम वोल्टेज के संकेत शामिल हैं. कार्डियक आउटपुट का कम होना और संकुचन में कमी। यह लक्षण चिकित्सक ECG से जान लेता हे।
  •  खाने के बाद भी ग्लूकोज की कमी ( हाइपो ग्लाईसिमिया )
  • शरीर के प्रतिक्रियाओं (रिफ्लेक्स) का धीमा और सुस्त होना। या कोई भी प्रतिक्रिया देरी से होना।
  • बालों का झड़ना।
  • अनुपयुक्त हीमोग्लोबिन संश्लेषण के कारण एनीमिया (रक्ताल्पता) आंतों में लौह तत्व या फोलेट का अनुपयुक्त अवशोषण या B 12 की कमी  पर्निशियस एनीमिया (प्राणाशी रक्ताल्पता) के कारण.
  • निगलने में कठिनाई
  • सांस का छोटा होना और एक उथला और धीमा श्वसन ।
  • नींद की अधिकता।
  • चिड़चिड़ापन और मूड अस्थिर रहना
  • त्वचा का पीला पड़ना-बीटा-कैरोटिन के विटामिन A में ठीक प्रकार से रूपांतरित न होने के कारण ।
  • वृक्क (किडनी) के असामान्य कार्य और GFR में कमी।
  • सीरम कोलेस्ट्रॉल के स्तर का बढ़ना।
  • तीव्र मानसिकता (मिक्सेडेमा मेडनेस (myxedema madness)) हाइपोथायरायडिज्म का एक कभी कभी पाए जाने वाला रूप है।
  • वृषण (टेस्टीकल्स ) से कम मात्रा में टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन के कारण कामेच्छा (सेक्स) में कमी।
  • स्वाद और गंध को समझने में भूल या कमी (एनोस्मिया)
  • फूला हुआ चेहरा, हाथ और पैर (देर से प्रकट होने वाले, सामान्य लक्षण होते हें।)
नैदानिक परीक्षण
प्राथमिक हाइपोथायरायडिज्म के निदान के लिए, थायरॉयड उद्दीपक हॉर्मोन (TSH) का जाँच करते हैं। TSH के उच्च स्तर बताता हे की थायरॉयड ग्रंथि थायरॉयड हॉर्मोन का पर्याप्त उत्पादन नहीं कर रही है (मुख्य रूप से थायरोक्सिन (T4) और ट्राईआयोडोथायरोनिन (T3)) की कम मात्रा. हालांकि, TSH का मापन द्वितीयक (सेकेण्ड स्टेज) और तृतीयक(थर्ड स्टेज) हाइपोथायरायडिज्म का पता लगाने में असफल रहता है । 
 यदि TSH सामान्य है और फिर भी हाइपोथायरायडिज्म का संदेह है तो निम्न परीक्षणों की सलाह दी जाती है:
फ्री ट्राईआयोडोथायरोनिन (fT3)/ फ्री  लेवोथायरोक्सिन (fT4) / total T3  / total  T4
इसके अतिरिक्त, निम्नलिखित जाँच  की आवश्यकता भी हो सकती है।
24 घंटे यूरीन ( फ्री f T3)
एंटीथायरॉयड (प्रतिरक्षी-स्व प्रतिरोधी रोगों)  के लिए जो संभवतया थायरॉयड ग्रंथि को क्षति पहुंचा रहें हैं.
सीरम कोलेस्ट्रॉल - जिसकी मात्रा हाइपोथायरायडिज्म में बढ़ सकती है।
प्रोलेक्टिन -पीयूष के कार्य के लिए व्यापक रूप से उपलब्ध परीक्षण के रूप में।
एनीमिया के लिए परीक्षण,( फेरीटिन सहित)
शरीर के तापमान का  रिकार्ड।
उपचार
(देखें - थायराइड के लिए अश्वगंधा(असगंध))
हाइपोथायरायडिज्म का उपचार थायरोक्सिन (L-T4) ट्राईआयोडोथायरोनिन (L-T3) के साथ किया जाता है. इसके लिए गोलियां उपलब्ध हैं । अतिरिक्त थायरॉयड हॉर्मोन की आवश्यकता के समय मरीजों को इनकी सलाह दी जाती है. थायरॉयड हार्मोन को दैनिक रूप से लिया जाता है।  
चिकित्सक सही खुराक को बनाये रखने के लिए रक्त के स्तर पर नियंत्रण रखना होता हे।
 थायरॉयड प्रतिस्थापन थेरेपी में कई अभी कई जानकारियों का अभाव हे। पर शोध जारी हे।
वर्तमान में अन्तः स्रावी विशेषज्ञ  हैरान हैं क्योंकि TSH आमतौर पर बढ़ता है जब T4 और T3 के स्तर गिर जाता  हैं. TSH थायरॉयड ग्रंथि को और अधिक हार्मोन बनाने के लिए के लिए प्रेरित करता है. अन्तः स्रावी वैज्ञानिक इस बात के लिए सुनिश्चित नहीं हैं कि थायरायडिज्म कोशिकाओं की उपापचय(मेटाबोलिक) दर को कैसे प्रभावित करता है (और अंततः शरीर के अंगों को) क्योंकि सक्रिय हॉर्मोनों के स्तर उपयुक्त होते हैं।
 कुछ लोगों ने माना हे, की हाइपोथायरायडिज्म का ईलाज लेवोथायरोक्सिन से किया जा सकता है, यह हाइपोथायरायडिज्म के लिए यह एक प्रारूपिक उपचार हो सकता है, लेकिन इसके लाभ या नुकसान स्पष्ट नहीं हैं। 
अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ़ क्लिनिकल एंडोक्रिनोलोजिस्ट (ACEE) 0.45–4.5 mIU/L की सलाह देते हैं, जब इसकी रेंज नीचे 0.1 तक और ऊपर 10 mIU/L तक हो, इसके लिए नियंत्रण की आवश्यकता  है, उपचार की नहीं। 
 हाइपोथायरायडिज्म में जरुरत से ज्यादा उपचार देने में हमेशा जोखिम रहता है।अत:  सावधान रहना भी जरुरी हे।
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समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें|

हाइपरथाइराडिज़्म- अर्थात अवटुग्रंथि(थाइराड) की अधिक सक्रियता।


अवटुग्रंथि(थाइराड)
 हाइपरथाइराडिज़्म- अर्थात  अवटुग्रंथि(थाइराड) की अधिक सक्रियता।

इसके कारण निम्नलिखित हैं-
  • ग्रेव बीमारी(Graves' disease) में पूरा अवटु या थाइराड ग्रंथि अति सक्रिय हो जातीं  है । इसमें थाइराड ग्रंथि के नोड्यूल्स अति सक्रिय हो जाते है।जिससे  अधिक हार्मोन बनाने लगता है
  • थाइरोडिटिस अर्थात ग्रंथि में सुजन यह भी एक ऐसी बीमारी है जो  दर्द सहित या रहित हो भी सकती हे।  ऐसा भी हो सकता है कि अवटुग्रंथि(थाइराड) के स्टोर्ड हार्मोन बाहर आने लगें, जिससे कुछ सप्ताह या महीनों के लिए हाइपरथारोडिज़्म की बीमारी हो जाए। दर्दरहित थाईरोडिटिस अक्सर प्रसव के बाद महिला में पाया जाता है।
 आयोडिन की अधिकता कई औषधियों में मिलती हे,इससे भी किसी-किसी में  थाइराड ग्रंथि या तो बहुत अधिक (हाइपरथायरोडिज़्म) या फिर बहुत कम ( हाइपोथायरायडिज्म-) हार्मोन बनाने लगती है।यह उन ओषधियों का साईड इफेक्ट भी कहा जा सकता हे। जो सामन्यतय ओषधि बंद कर देने पर ठीक हो जाता हे 
हाइपरथायरोडिज़्म या हरमोंन  की अधिकता होने पर निम्न लक्षण हो सकते हें।
  • चिड़-चिड़ापन/अधैर्यता
  • मांस-पेशियों में कमजोरी/कंपकपीं
  • मासिक-धर्म अक्सर न होना या बहुत कम होना
  • वजन घटना
  • नींद ठीक से न आना
  • अवटुग्रंथि का बढ़ जाना
  • आंख की समस्या या आंख में जलन
  • गर्मी के प्रति संवेदनशीलता
यदि अवटुग्रंथि की बीमारी जल्दी पकड़ में आ जाती है, तो लक्षण दिखाई देने से पहले उपचार से यह ठीक भी हो सकती  है। अवटुग्रंथि जीवन भर रहती है। ध्यानपूर्वक इसके प्रबंधन से अवटुग्रंथि (थाइराड) से पीड़ित रोगी अपना जीवन स्वस्थ और सामान्य रूप से जी सकते हैं।
(देखें - थायराइड के लिए अश्वगंधा(असगंध))
थायराइड हार्मोन के बारे में कुछ और बातें ।

 थायराइड हार्मोन कोशिकाओं के सामान्य कार्य के लिए महत्वपूर्ण है। शरीर में प्रक्रियाओं की गति की एक नियंत्रक के रूप में थायराइड हार्मोन कार्य करता है। इस गति को मेटाबोलिक दर (चयापचय) कहा जाता है।   थायराइड हार्मोन एक सेलुलर स्तर पर तो महत्वपूर्ण होता ही है, साथ ही शरीर में लगभग हर प्रकार की टिसुज (ऊतक )  प्रभावित भी करता हें।
यह हारमोंन शरीर के हर कार्य को गति देता हे, अगर वहाँ बहुत ज्यादा थायराइड हार्मोन है, तो गतिशीलता की अधिकता से (hyperthyroidism के लक्षणों में से कुछ) जेसे  घबराहट, चिड़चिड़ापन, वृद्धि पसीना, दिल रेसिंग, हाथ कांपना, चिंता, सोने में कठिनाई, त्वचा के रुक्षता, ठीक भंगुर(टूटने वाले) बाल, और ऊपरी भाग और जांघों में मांसपेशियों में कमजोरी, विशेष रूप से हो सकता है।
 लगातार आंत्र में ऐठन सी अनुभूति होती हैं, दस्त असामान्य हो सकता है।
 अच्छी भूख के बावजूद वजन में कमी हो सकती हे । कभी कभी  उल्टी होती है।  महिलाओं के लिए मासिक धर्म प्रवाह हल्का और माहवारी अक्सर कम होने की शिकायत भी हो सकती हे।

Hyperthyroidism या हरमोंन  की अति सक्रियता आमतौर पर धीरे धीरे शुरू होती  है।प्रारम्भ में साधारण लक्षण -तनाव के कारण घबराहट,जेसी स्तिथि। कमजोरी सी (वजन घटने से)जेसी अन्य समस्याओं का कारण बनता है.
प्रमुख नैदानिक ​​लक्षण वजन कमी  (अक्सर भूख-वृद्धि  के साथ), चिंता, गर्मी असहिष्णुता, बालों के झड़ने, मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी, थकान, सक्रियता, चिड़चिड़ापन, हाइपोग्लाइसीमिया , उदासीनता, बहुमूत्रता, प्रलाप, कंपन ( pretibial myxedema,) और पसीना आदी है।
 इसके अलावा, रोगियों धडकन (palpitations) सांस की तकलीफ (dyspnea), कामेच्छा में कमी,अनार्तव ( amenorrhoea,) मिचली, उल्टी, दस्त अदि प्रमुख हें।
लंबी अवधि के हरमोंन ब्रद्धि ( hyperthyroidism) से ऑस्टियोपोरोसिस जेसी रोग भी आ सकते हें।

स्नायविक समस्याएं जेसे  कांपना, कोरिया, मायोपथी, और कुछ अतिसंवेदनशील व्यक्तियों में (विशेष रूप से एशियाई मूल के) आवधिक पक्षाघात भी इसके कारण हो सकता हे।
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समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें|

बड़ी हुई प्रोस्टेट 50 साल की उम्र के बाद की मुसीबत।


सामान्यतय: बड़ी हुई प्रोस्टेट 50 साल की उम्र के बाद की मुसीबत हे। पर कभी कभी कम आयु में भी देखा गया हे। आयुर्वेद के अनुसार अति मैथुन या हस्त मैथुन इसका मूल कारण हे। इस कारण इससे बचने के लिए नव जवानों को भी इसका ज्ञान होना आवश्यक हे ताकि समय रहते बचा जा सके। अनुवांशिक या जीन्स से भी यह हो सकता हे। 

प्रोस्टेट क्या होता हे और शरीर में क्या उपयोग हे ?

Thalassemia.थैलेसीमिया (With Vidio)

Thalassemia. थेलासिमिया  
थैलेसीमिया माता पिता के द्वारा विरासत में मिला (autosomal) रोग हे| थैलेसीमिया आनुवंशिक होता हे| यह असामान्य हीमोग्लोबिन अणुओं के गठन के कारण,और इस प्रकार से रक्ताल्पता या  एनीमिया (रक्त या खून की कमी):, thalassemias की विशेष लक्षण युक्त  होता हे|
इस बात को आसानी से इस विडिओ द्वारा समझा जा सकता हे| 



आम तौर पर, thalassemias उमस भरे मौसम में प्रचलित हैं. यह सभी जातियों को प्रभावित करता है,  
Thalassemia से भूमध्य मूल, अरब, और एशियाई लोग विशेष रूप से प्रभावित हैं. मालदीव जनसंख्या के 18% पर एक की  वाहक दर के साथ दुनिया में थैलेसीमिया के उच्चतम रूप से प्रभावित हे| एक अनुमान अनुसार, साइप्रस में 1% [7] थाईलैंड में लोगों में 16% है, और बांग्लादेश, चीन, भारत, मलेशिया और पाकिस्तान से आबादी का 3-8% है| वहाँ भी लैटिन अमेरिका और भूमध्यसागरीय देशों (जैसे ग्रीस, इटली, पुर्तगाल, स्पेन, और दूसरों) के लोगों की सन्तान में प्राथमिकता से पीता गया हे| इसका बहुत कम प्रसार उत्तरी यूरोप(0.1%) और अफ्रीका (0.9%) में देखा गया हे| उत्तरी अफ्रीका में उच्चतम प्रसार होनेके साथ. यह भी बेजा, Hadendoa, Sa'idi और भी नील नदी डेल्टा के लोगों में , लाल सागर हिल क्षेत्र और विशेष रूप से Siwans के बीच के रूप में ऊपरी मिस्र के स्वदेशी जातीय अल्पसंख्यकों की आबादी में आम(विशेष रूप से) है.
माता पिता से निम्न चार्ट के अनुसार यह रोग बच्चे में आ सकता हे|  
                चिकित्सा एवं  देखभाल
Thalassemia has an autosomal recessive

हल्के थैलेसीमिया: थैलेसीमिया के लक्षण के साथ रोगियों के प्रारंभिक निदान के बाद चिकित्सा या अनुवर्ती देखभाल की आवश्यकता नहीं होती हे|

 β-थैलेसीमिया विशेषता के साथ मरीजों को चेतावनी दी है, कि उनके रक्त  में लोहे की कमी जैसा दिखता है| उन्हें आयरन चिकित्सा का  उपयोग करना चाहिए| अभी तक लोहे की कमी, गर्भावस्था के दौरान एवं  पश्चात  खून को बहने से रोक कर सकते हैं 
 परामर्श 
आनुवंशिक विकारों के साथ सभी व्यक्तियों को संकेत किया जाना चाहिए की, खासकर जब परिवार में, रोग का एक गंभीर रूप है,  कि हो सकता है प्रसव या संतान पर जोखिम हो|
गंभीर थैलेसीमिया
 गंभीर थैलेसीमिया के साथ रोगियों के चिकित्सा उपचार की आवश्यकता होती है, और एक रक्त आधान (खून चडाना)ही एक मात्र और प्राथमिक उपाय हे| जो जीवन के समय को बढ़ाने में प्रभावी हे|
औषधि 
बीटा थैलेसीमिया के लिए चिकित्सा चिकित्सा मुख्य रूप से लोहा केलेशन शामिल है.
 Deferoxamine नसों या subcutaneously प्रशासित |
आयुर्वेद  में मंडूर, लोह भस्म अदि योग चिकित्सक से परामर्श कर लिए जाये|


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हाइपरथायरायडिज्‍़म


हाइपरथाइराडिज़्म   का अर्थ है, थाइरोइड हार्मोन का बढ जाना।

 थाइरोइड  की अधिकता  को  हाइपोथायरायडिज्म-थायरॉयड हॉर्मोन का अधिक उत्पादन|

 थाइरोइड हार्मोन, जो कि गर्दन के निचले सामने वाले भाग में पाई जाने वाली थायरॉयड ग्रंथि द्वारा बनाया जाता है, शरीर की ऊर्जा को विनियमित करता है। जब थाइरोइड हार्मोन का स्तर असामान्य रूप से अधिक हो जाता है तो शरीर ऊर्जा को तेजी से जलाता है |


इसके तीन सबसे सामान्य कारण हैं:

ग्रेव्स रोग
 एक प्रतिरक्षा तंत्र विकार है जिसके कारण थायरॉयड से थायरॉयड हार्मोन का स्राव बहुत अधिक बढ़ जाता है। ग्रेव्स रोग विशिष्ट रूप से 20 और 40 की उम्र के बीच की युवतियों को प्रभावित करता है हालांकि रोगियों में 12% पुरुष हैं। क्योंकि ग्रेव्स रोग आनुवंशिक कारकों से संबंधित वंशानुगत विकार है, इसलिए थाइरोइड रोग एक ही परिवार में कई लोगों को प्रभावित कर सकता है।
विनाइन (नॉनकैन्सरस) थाइरोइड ट्यूमर, 
जो कि अनियंत्रित ढंग से थाइरोइड हार्मोन की बढ़ी हुई मात्रा का निस्सारण करता है।
विषाक्त मल्टीनोडूलर गण्डमाला (गोईटर),
 ऐसी अवस्था जिसके कारण थायरॉयड ग्रंथि, कई विनाइन (नॉनकैन्सरस) थाइरोइड ट्यूमर की वजह से बड़ी हो जाती है और थायरॉयड हार्मोन के स्राव की मात्रा को बढ़ा देती है।
वायरल संक्रमण (इन्फेक्शन) के बाद, थाइरोइड सूजन के कुछ प्रकार कुछ समय का हाईपरथाईरोइडिज्म का कारण हो सकते हैं।

बाहरी लक्षण

किसी भी प्रकार की वृद्धि या असामान्य गांठों , अन्य संकेतों जैसे, बढ़ी हुई हृदय दर, हाथ में स्पंदन, एक पलटे हुए हथौड़े के साथ दोहन करने के लिए तीव्र प्रतिक्रिया, अत्यधिक पसीना आना, मांसपेशियों में कमजोरी और उभरी हुई आँखें, आदि|
निदान जांच
 थाइरोइड हार्मोन के स्तर का पता लगाने के लिए रक्त जांच । अन्य निदान जांचों में कुछ एंटीबोडिस स्तर की जांच के लिए रक्त परीक्षण, थाइरोइड का अल्ट्रासाउंड और थाइरोइड स्केन शामिल है।
चिकित्सा 

वे लोग जिन्हें, हाईपरथाईरोइडिज्म कुछ विशिष्ट प्रकार की थाइरोइड सूजन या वायरल थाइरोइड संक्रमण के कारण होता है, प्रायःकुछ समय बाद सामान्य हो जाते हें|

ग्रेव्स रोग से ग्रस्त लोगों को दीर्घ कालीन चिकित्सा की आवश्यकता होती है, हालांकि यह भी  कभी कभी अपने आप सुधर जाती है।

थाइरोइड की दवाओं के अत्यधिक सेवन से होने वाले हाईपरथाईरोइडिज्म से बचने के लिए अपने डॉक्टर के निर्देशों का पालन करें और थाइरोइड स्तरों के लिए नियमित रक्त जांच करवाते रहें। प्राकृतिक रूप से होने वाले  हाइपरथाइराडिज़्म    से बचाव संभव नहीं है।

ग्रेव्स रोग से प्रभावित 50% तक लोग, जिनका 12 से 24 महीनों तक एंटी-थाइरोइड दवाओं से उपचार किया जाता है, उनको लंबे समय तक के लिए इस बिमारी से छुटकारा मिल जाता है। रेडियोधर्मी आयोडीन भी ग्रेव्स रोग के लिए एक प्रभावी चिकित्सा है और अतिउत्पादक थाइरोइड ग्रंथियों वाले रोगियों में लगभग हमेशा उपयोग की जाती है। कई लोगों में इस चिकित्सा के बाद कम सक्रिय थाइरोइड (हाइपोथाइरोईडिज्म) विकसित हो जाता है। हालांकि, इस स्थिति का आसानी से थाइरोइड प्रतिस्थापन दवा की एक गोली के दैनिक सेवन से इलाज किया जाता है।
आयुर्वेदिक औषधि असगंध/ दशमूल क्वाथ/ पुनर्नवादी मंडूर/ आदि अच्छा लाभ देती हें | 


समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान ,एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें |.

थायराइड के लिए अश्वगंधा(असगंध)


             थायरॉयड,-- गर्दन में स्थित एक ग्रंथि थायरोक्सिन नाम के हार्मोन का उत्पादन करती हैं, जो शरीर की चयापचय (मेटाबोलिक) प्रक्रिया को चलते रहने  में मदद करता है। थायरोक्सिन हार्मोन  की कमी   हाइपोथायरायडिज्म  से बच्चों में बौनापन और वयस्कों में त्वचा (स्किन)के नीचे चरबी बढ़ जाती हैं। और बड़ा हुआ थायरोक्सिन    हाइपरथाइराडिज़्म  हार्मोन गण्डमाला (गले पर गठानो ) का कारण बनता हैं।   हाइपरथाइराडिज़्म    की स्थिती 30 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं में ज्यादा आम पायी जाती हैं। इसके लक्षणों में, गुस्सा, ज्यादा चिंता, दिल के धडकन का तेज होना, गहरा या उथला श्वसन, मासिक धर्म में बाधा, थकान और उभरी हुई आँखें आदी दिखते हैं। हालांकि यह सभी लक्षण एक साथ प्रकट होना जरुरी नहीं हे , उनमें से कोई एक भी    हाइपरथाइराडिज़्म    का संकेत हो सकता हैं।
थायरोक्सिन की निष्क्रियता(या कमी) के कारण   हाइपोथायरायडिज्म हो सकता हैं, आयोडीन की कमी या इड विफलता के कारण थकान, सुस्ती और हार्मोनल असंतुलन होता है। अगर अनुपचारित छोड़ दिया जाये, तो यह मायक्झोएडेमा का कारण बन सकती हैं, जिसमें त्वचा और ऊतकों में सूजन होती हैं।
आयुर्वेदिक उपचार में इस्तेमाल की जाने वाली अश्वगंधा, जड़ी बूटी इस रोग के दोनों रुपों, हायपर और हायपो के लिए जवाब साबित हो सकती हैं। यह भारत, अफ्रीका और भूमध्य सागर के सुखे क्षेत्रों में मिलती हे , इसका लैटिन नाम विथानिआ सोमनिफेरा हैं।मध्य प्रदेश में नीमच/मनासा/गरोठ ,अदि जगहों पर प्रमुख फसल के रूप में बोई जाती हे |
नीचे चार कारण दिये गये हैं, जिस के कारण इसका इस्तेमाल थाइरोइड के लिए किया जा सकता हैं।
यह आपके शरीर के साथ काम करती हैं, उसके खिलाफ नहीं।
यह एक एडाप्टोजेन हैं, एक हर्बल उत्पाद, जो शरीर की तनाव, आघात, चिंता और थकान के लिए प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता हैं। एडाप्टोजेन एक पुनः निर्माण करने वाली जड़ी बूटी हैं, आयुर्वेदिक संदर्भ में 'रसायना' और बलवर्धक हैं। यह पुष्टिकारक औषधी (टॉनिक) जड़ी बूटी भी हैं और नियमित रूप से ली जा सकती हैं। और वह अंतःस्त्रावी प्रणाली (हार्मोन) को ठीक भी करती हैं, जिससे व्यक्ति को हार्मोनल संतुलन की पुनःप्राप्ती होने में मदद मिलती हैं, और बेहतर महसूस होता हैं।
अश्वगंधा का उपयोग कर रहे व्यक्तियों से चर्चा द्वारा प्राप्त आकडे  और वास्तविक अनुभव यह दर्शाते हैं, कि एडाप्टोजेन सभी प्रकार के लोगों पर, इतना ही नही विशेष बीमारी के अति रोग ग्रस्त  लोगों पर भी कारगर हैं। उदाहरण के लिए एक व्यक्ति इसे एक मंद थाइरोइड को सही करने के लिए ले सकता है, जबकि दुसरा अन्य इसका उपयोग अपने अति सक्रिय थाइरोईड के इलाज के लिए ले सकता हैं।इसका अर्थ हे की हरमोंन बड़ने या घटने दोनों परिस्थतियो में लाभकारी होता हे |
वैज्ञानिकों को इनके  निरिक्षणों ने चौका दिया हैं, क्योंकि इसका शरीर पर एक समग्र प्रभाव हैं। 
यह जड़ी बूटी एक टॉनिक के रूप में हजारों वर्षों से इस्तेमाल की जा रही हैं, इसलिए इसको एक व्यक्ती दीर्घ अवधि के लिए, किसी दुष्प्रभाव की संभावना के बिना उपयोग कर सकता हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सक इसको तनाव,अनिद्रा और शक्ति अदि के लिए वर्षो से  उपयोग कर रहे हें |
प्रति दिन 200 से 1200 मिलीग्राम की छोटीसी खुराक(घन सत्व की)या २ से ५ ग्राम तक की मात्र  आपको लेनी चाहिए। यदि गंध अनचाही हैं, तो यह एक चाय/दूध  के साथ मिलाकर जिसे उत्तेजक गर्म पेय बनाने के लिए तुलसी मिलायी जा सकती हैं या सोठ(सुखा अदरख) (ताजे फलो के रस के साथ आईसक्रिम, दही या दुध मिलाकर बनाया एक गाढा मुलायम पेय) में लिया जा सकता हैं। हिमालय अदि कई औषधि  निर्माता केप्सूल भी बना रहे हें |मात्रा १से दो केप.रोज   दो बार | 
उपचार प्रभावी हो रहा हैं, यह निर्धारित करने के लिए अपने थायराइड हार्मोन की जाँच करना और 2 से 3 महीने की अवधि के बाद एक सकारात्मक बदलाव के लिए उनकी फिर से जाँच कराना एक सर्वोत्तम तरीका हैं। 
 यह एक हानि रहित/साइड इफेक्ट  रहित , निरापद औषधि हे |

समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान ,एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें |.
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चिकित्सा सेवा अथवा व्यवसाय?

स्वास्थ है हमारा अधिकार १

हमारा लक्ष्य सामान्य जन से लेकर प्रत्येक विशिष्ट जन को समग्र स्वस्थ्य का लाभ पहुँचाना है| पंचकर्म सहित आयुर्वेद चिकित्सा, स्वास्थय हेतु लाभकारी लेख, इच्छित को स्वास्थ्य प्रशिक्षण, और स्वास्थ्य विषयक जन जागरण करना है| आयुर्वेदिक चिकित्सा – यह आयुर्वेद विज्ञानं के रूप में विश्व की पुरातन चिकित्सा पद्ध्ति है, जो ‘समग्र शरीर’ (अर्थात शरीर, मन और आत्मा) को स्वस्थ्य करती है|

निशुल्क परामर्श

जीवन के चार चरणौ में (आश्रम) में वान-प्रस्थ,ओर सन्यास अंतिम चरण माना गया है, तीसरे चरण की आयु में पहुंचकर वर्तमान परिस्थिती में वान-प्रस्थ का अर्थ वन-गमन न मान कर अपने अभी तक के सम्पुर्ण अनुभवोंं का लाभ अन्य चिकित्सकौं,ओर समाज के अन्य वर्ग को प्रदान करना मान कर, अपने निवास एमआइजी 4/1 प्रगति नगर उज्जैन मप्र पर धर्मार्थ चिकित्सा सेवा प्रारंंभ कर दी गई है। कोई भी रोगी प्रतिदिन सोमवार से शनी वार तक प्रात: 9 से 12 एवंं दोपहर 2 से 6 बजे तक न्युनतम 10/- रु प्रतिदिन टोकन शुल्क (निर्धनों को निशुल्क आवश्यक निशुल्क ओषधि हेतु राशी) का सह्योग कर चिकित्सा परामर्श प्राप्त कर सकेगा। हमारे द्वारा लिखित ऑषधियांं सभी मान्यता प्राप्त मेडिकल स्टोर से क्रय की जा सकेंगी। पंचकर्म आदि आवश्यक प्रक्रिया जो अधिकतम 10% रोगियोंं को आवश्यक होगी वह न्युनतम शुल्क पर उपलब्ध की जा सकेगी। क्रपया चिकित्सा परामर्श के लिये फोन पर आग्रह न करेंं। ।

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