Rescue from incurable disease

Rescue from incurable disease
लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |
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Sciatica कटिस्नायुशूल (Panchakarma and Treatment:- According to disease).

(Panchakarma and Treatment:- According to disease)   (पंचकर्म एवं उपचार :- रोग अनुसार) 

गृध्रसी या साईटिका की चिकित्सा करें घर पर|

कोविड 19 के संक्रमण त्रासदी ने आयुर्वेदिक चिकित्सा के महत्त्व को भारत के जन जन तक पहुंचा दिया है| आज देश का लगभग प्रत्येक नागरिक किसी न किसी रूप में आयुर्वेदिक चिकित्सा का लाभ ले रहा है| आयुर्वेद चिकित्सा केवल व्यावसायिक नहीं है यह रसोईघर से ही प्रारम्भ हो जाती है, इसी कारण इसके महत्त्व को समझने में देर लगी|

यूँ तो पूर्ण आयुर्वेदिक चिकित्सा जिसमें, पंचकर्म, शल्य आयुर्वेद, रस चिकित्सा, काष्ठ ओषधि चिकित्सा आदि आदि कई अधिक विषय एसे हैं जिनमें बिना आयुर्वेद स्नातक और विशेषज्ञ आयुर्वेद के सलाह के चिकित्सा संभव नहीं है|

हम यहाँ कुछ एसे आयुर्वेद चिकित्सा विधियाँ प्रस्तुत कर रहें है जिन्हें आप अपने घर पर स्वयं करके बिना हानि के लाभ ले सकते है, यह हो सकता है की कुछ लाभ कम मिले|  यदि इसे आयुर्वेद चिकित्सक के परामर्श के साथ करेंगें तो अधिक लाभ होगा| 

निम्न चिकित्सा से एलोपेथिक आदि चिकित्सा (दवा कहते रहने तक आराम फिर कष्ट शुरू) द्वारा कभी ठीक न हो पाने वाला यह रोग तीन माह की चिकित्सा से हमेशा के लिए ठीक किया जा सकेगा

By continuously sitting on a long journey or resting on the bed, your blood may be frozen (clotting) and the cause of serious illness?

लगातार बैठकर लंबी यात्रा करने, या बिस्तर पर लगातार आराम करने से, आपका रक्त जम कर हो सकता है और गंभीर बीमारी "त्रिदोषज शिरा गत घनास्त्रता" का कारण? 
 Tridoshaj shira gat Ghanastrta 
चालीस वर्ष की आयु पार स्त्री पुरुषों, विशेषकर आराम तलब, मोटे, और ऐसे लोग जो किसी बीमारी, आपरेशन, आदि के बाद लम्बे समय तक आराम करते हें, या बैठकर कार, बस आदि में लम्बी यात्रायें लगातार करते रहते हें, उनके परों की रक्त वाहिनियों में सूजन, खड़े होते समय, या चलते समय पेरों में दर्द, सूजन सहित जलन का अहसास होने लगता है, कभी कभी त्वचा का रंग भी बदला हुआ दिखाई देने लगता हैसाँस लेने में कष्ट, जल्दी जल्दी साँस लेना, दिल की धड़कन बढ़ जाना जैसी कठिनाई का सामना करना पढता है
           इसका कारण खून के गाढ़ा होने से थक्कों का बनाना हो सकता है
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Exposed body- it means health, energy & power.

खुले शरीर का अर्थ है- स्वास्थ्य, ऊर्जा और शक्ति!
सूर्य धूप से बचने का अर्थ है, कमजोर शरीर?  
गोरे रंग के लिए धुप से बचने का मतलब जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द और बीमार कमजोर हड्डियों वाला शरीर प्राप्त करना, पर जब शरीर को खड़े रखने वाली हड्डियाँ ही कमजोर होने लगेंगीं तो कोई कितने दिन स्वस्थ खड़ा रह पायेगा| क्या इस मूल्य पर गोरा रंग पाने के लिए कोशिश ठीक होगी|
यहाँ हमारा मतलब शरीर के अंगों का कामुक प्रदर्शन भी नहीं है|
अक्सर हम आधुनिक लोग इस बात को गंभीरता से नहीं लेते, कुछ तो इसे असभ्यता (Vulgar) कह कर नकारते भी है| 
आधुनिक समाज के लोगों की तुलना में ग्रामीण

“Agnikarma”- ‘The amazing gift from 'Acharya Sushruta' for painful conditions.’

Agnikarma- The amazing gift from 'Acharya Sushruta' for painful conditions.
“अग्निकर्म”- ‘दर्दनाक स्थितियों के लिए 'आचार्य सुश्रुत' का अद्भुत वरदान’ 
डॉ.मधुसूदन व्यास उज्जैन 
तत्काल दर्द मिटाने की आश्चर्य जनक चिकित्सा पद्ध्ति!
आग्निकर्म वात रोगों और साइटिका जैसे रोग जो आर्थिक रूप से कमजोर मजदूरों वर्ग में अधिक पाया जाता है, के लिए अग्निकर्म चिकित्सा आचार्य सुश्रुत[1] का एक वरदान है| क्योंकि इसमें अत्याधिक कम समय, व्यय और ओषधि सेवन से पूर्ण लाभ दिया जाना संभव है|  

अग्नि कर्म द्वारा मोच, एड़ी दर्द, सिर दर्द, कटिस्नायुशूल और गठिया जैसे रोगों के चिकित्सा के लिए आदर्श है। कई रोग जैसे जानू-शूल (घुटने) (Knee pain), पीठ दर्द (Back Pain), कटिस्नायुशूल (Sciatica), लूम्बेगो (Lumbago), स्पोंडिलोसिस (Lumbar spondylosis), स्लिप डिस्क Slipped Disc, सरवाइकल स्पोंडिलोसिस (Cervical Spondylosis), पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस (Chronic Osteoarthritis), टेनिस एल्बो (Tennis Elbow) कार्पल टनल सिंड्रोम (Carpal Tunnel Syndrome (CTS), एड़ी में दर्द (Heel pain -Planter fasciitis), ग्रीवा शूल (Neck pain), Myofascial pain, Chronic fatigue pain, स्कंध स्तम्भ शूल (Frozen shoulder) Tendonitis आदि, कई वातज रोगों सहित, Warts,पाद कंटक Corn, आदि क्षुद्र रोगों की सफल चिकित्सा की जा रही है|
अग्निकर्म क्या है?

Baante or Muscle cramp- Muscular Stiffness with pain (बाएंटे या मसल क्रेम्प - मांस-पेशियों की एंठन और दर्द)

बाएंटे या मसल क्रेम्प - मांस-पेशियों की अकड़न का कष्ट।
   बाएंटे या मसल क्रेम्प किसी मांस पेशी में अचानक होने वाला कष्ट जिसका अनुभव लगभग प्रत्येक वयस्क ने अपने जीवन में किया ही होगा। कभी कभी अचानक एसा लगता है, की मांसपेशी अकड़ गई हें अंगुलियाँ सीधी नही हो रही हें, और बहुत अधिक दर्द का अनुभव हो रहा है। अक्सर यह कुछ देर बाद स्वयं या मालिश करने पर ठीक भी हो जाता है। यही बाएंटे या मसल क्रेम्प है।
यह कष्ट मांसपेशी से अधिक काम लेने, पानी की कमी या डिहाइड्रेशन, अवसाद, तनाव या  परिश्रम, वीटामिन बी की कमी आदि से हो जाता है। सोते समय पिंडली का कष्टदायक क्रैंप हो जिसका कारण पता न चल पा रहा हो तो वह नर्वस सिस्टम की खराबी संकेत होता है। विटामिन बी की कमी इसका एक प्रमुख कारण भी है| 
क्या करें

Without any warning, attack in one night, the terrible disease- Gout or Vata-Rakta . बिना चेतावनी के एक रात में दर्द से आने वाला भयानक रोग, - गाउट या वातरक्त|

Without any warning, attack in one night, the terrible disease- Gout or Vata-Rakta .
बिना चेतावनी के एक रात में दर्द से आने वाला भयानक रोग, - गाउट या  वातरक्त|
बिना चेतावनी के एक ही रात में पैरों की अँगुलियों में सूजन, और तेज दर्द के साथ अचानक होने वाला रोग जो वात रक्त या गाउट हो सकता है, यह पुरुषों में 30 वर्ष की आयु के बाद युवावस्था में, और प्रोढ़ महिलाओं होता है| वातरक्त के प्रत्येक पांच रोगियों में रोगी पुरुष 4  और स्त्री 1 होती है|

Rescue from Specific disorders The Overweight / Joint pain / Diabetes and Psoriasis by Panchkarma.(पंचकर्म का से कायाकल्प- स्वयं पर प्रयोग और उसके परिणाम|)

पंचकर्म का से कायाकल्प- स्वयं पर प्रयोग और उसके परिणाम|
Rescue from Specific disorders The Overweight / Joint pain / Diabetes  and Psoriasis by Panchkarma.
डॉ मधु सूदन व्यास
विशेष रोग अधिक वजन/ जोड़ों के कष्ट/ डाईविटिज और सोरायसिस, Psoriasis से मुक्ति की और| 
एजिंग से शरीर कमजोर होता है, धीरे धीरे रोग आक्रमण करते हें, जिनसे कोइ कुशल से कुशल, चिकित्सक भी बच नहीं पाता, देर सवेर सामना होना ही है|
रोग जो मुझे भी हुए!
में दुर्भाग्यवश डाइविटीज, को आने से रोक तो न सका, ओषधियों से एवं एलोपेथिक मित्रों के सहयोग से नियंत्रित अवश्य कर सका| पर बोनस में प्राप्त, सोरायसिस, Psoriasis (जो संपर्क या छूत से नही होती) के कुछ पेच, पेर पर हो गए, जब कई दिन की सामान्य चिकित्सा से लाभ नहीं हुआ, तो पंचकर्म द्वारा ठीक करने का मन बना लिया| क्योंकि इस जिद्धि रोग को एसे ही छोड़ना, उसे सारे शरीर पर विस्तार के लिए आमंत्रित करना जैसा ही सिद्ध होता|

Joint pain in the winter season,ठंड में जोड़ों का दर्द,

ठंड में जोड़ों का दर्द
एक भाई ने प्रश्न किया है की जब भी ठण्ड पड़ती है, उनके जोड़ों खास कर घुटनों में दर्द होता है| हड्डी के डाक्टर को दिखया तो उनने कहा घुटना बदलना पड़ेगा| कुछ दवाई दी, जब तक दवा चली आराम तब तक ही रहा क्या करूँ?
यह समस्या आजकल आम पाई जा रही है|

Spinal or Back Pain- रीढ़ की हड्डी में या पीठ, कमर का दर्द,

Spinal or Back Pain- रीढ़ की हड्डी में या पीठ, कमर का दर्द,

कभी-कभी वजन उठाते या धकाते समय, अथवा अज्ञात कारणों से कमर या पीठ में दर्द होने लगता है|  इसके अतिरिक्त बडती आयु के साथ साथ भी इस प्रकार का दर्द होने लगता है|

पैरालिसिस कैसे ठीक होगा- यह एक दैवी विपत्ति तो नहीं?

पैरालिसिस कैसे ठीक होगा? क्या यह एक दैवी विपत्ति नहीं?
देखें- पैरलाइसिस पक्षाघात या लकवा -क्या है?  या  देखें- पैरालिसिस कितनी तरह का होता है।

     शरीर कई स्नायु(एक प्रकार की डोरियाँ) से रक्त ले जाने वाली नलिकाओं (आर्टिर्ज/वैन्स), नाड़ियों (नर्व) और मांसपेशीयों समूह को अस्थियों (कंकाल) पर बांधे रखता है। मांसपेशियाँ मस्तिष्क के द्वरा नाड़ियों की शयता से निर्देशित कर कार्य करतीं हें। जब भी ये मांसपेशियाँ अपने कार्य में पूर्णतः असमर्थ हों जाती हें तो इस स्थिति को पक्षाघात या लकवा मारना कहते हैं। पक्षाघात से प्रभावित क्षेत्र की संवेदन-शक्ति समाप्त हो सकती है, या उस भाग को चलना-फिरना या घुमाना असम्भव हो जाता है। यदि यह असमर्थता आंशिक है, तो उसे आंशिक पक्षाघात कहते हैं।

पैरालाइसिस कितनी तरह का होता है?

पैरालाइसिस कितनी तरह का होता है?

शरीर की मांसपेशियों को बनाने वाले सेल्स के समूह या ऊतकों (टिशूज) को कार्य करने के लिए रक्त की आवश्यकता होती है, और यदि किसी रक्तवाहिका में खून रिसने (bleeding) या खून का थक्का (thrombosis) बनने के कारण खून की पूर्ति बंद हो जाय, अथवा धमनी (आर्टरी) के अंदर रुकावट (ओब्सट्रकषण) हो जाए तो खून की आपूर्त्ति प्रभावित हो जाने से पक्षाघात हो जाता है।
हेमीप्लेजिया (hemiplegia) या अर्धपक्षाधात-  प्रमस्तिष्कीय (cerebral) थ्रॉम्बोसिस अर्थात् मस्तिष्क की किसी धमनी में रुधिर का थक्का बनना अर्धपक्षाधात (hemiplegia) का एक साधारण कारण है। इसमें मस्तिष्क के जिस भाग में थ्रांबोसिस होता है उसके विपरीत शरीर भाग का (उस नर्व से नियंत्रण होने से उस भाग में) पक्षाधात हो जाता है।  

क्या है? एक दिन अचानक किसी स्वस्थ्य को चेतना हीन कर देने वाला यह रोग- पैरलाइसिस पक्षाघात या लकवा।

पैरलाइसिस पक्षाघात या लकवा  -क्या है?  एक दिन अचानक किसी स्वस्थ्य को चेतना हींन कर देने वाला यह रोग-  
शरीर कई स्नायु(एक प्रकार की डोरियाँ) से रक्त ले जाने वाली नलिकाओं(आर्टिर्ज/वैन्स), नाड़ियों (नर्व) और मांसपेशीयों समूह को अस्थियों (कंकाल) पर बांधे रखता है। मांसपेशियाँ मस्तिष्क के द्वरा नाड़ियों की शयता से निर्देशित कर कार्य करतीं हें। जब भी ये मांसपेशियाँ अपने कार्य में पूर्णतः असमर्थ हों जाती हें तो इस स्थिति को पक्षाघात या लकवा मारना कहते हैं। पक्षाघात से प्रभावित क्षेत्र की संवेदन-शक्ति समाप्त हो सकती है, या उस भाग को चलना-फिरना या घुमाना असम्भव हो जाता है। यदि यह असमर्थता आंशिक है, तो उसे आंशिक पक्षाघात कहते हैं।

पैर में असहनीय दर्द - गृध्रसी या सायटिका (Sciatica)॰

 पैर में असहनीय दर्द - गृध्रसी या सायटिका (Sciatica)
साइटिका  गृध्रसी
45-50 वर्ष की आयु तक पहुँचते-पहुँचते यदि किसी महिला या पुरुष को पीठ ओर पैर में दर्द होने लगे, घुटने और टखने के पीछे पीड़ा अधिक होती हो, कुछ दिनो में ही यह दर्द या पीड़ा  कमर के जोड (नितंबसंधि Hip joint) के पिछले हिस्से से प्रारंभ होकर, धीरे धीरे तीव्र होती हुई, एक लाइन में नीचे पैर के अंगूठे तक होने लगे,  पैरों में झनझनाहट होती हो, कुछ समय में धीरे धीरे बढ़ती हुई इतनी अधिक हो रही हो की पैर की उँगलियों को हिलाना भी कठिन हो गया

रक्त में यूरिक एसिड अधिकता से -गठिया (Gout), गुर्दे की पथरी,या गुर्दे के फेल आदि होने से बचाव कैसे हो?

 यह प्रश्न किसी एक के अतिरिक्त अन्य का भी हो सकता है। क्योकि यह समस्या आजकल के जीवन व्यवहार के दुष्परिणामों के कारण आम हो रहे है। इसीलिए इस समस्या के लिए सभी के लिए जानना आवश्यक है। 

डिस्क प्रोलेप्स्ड़ या रीड की हड्डियों L5,S1 की समस्या - पीठ का तेज दर्द ।

 रीड की हड्डियाँ एक बांस की संरचना के समान होती हें, बीच के जोड़ से जुड़े भाग को 'न्यूक्लियस' डिस्क कहा जाता है। इसमें जेली जैसा पदार्थ भर होता है जो झटकों से बचाने का काम करता है । इस हेतु इसमें रेशेदार परतें (called the 'annulus' which means "ring") होती हें।
बडती आयु के साथ साथ,

घुटनेके जोड़ [knee] का रोग वर्तमान समय की बड़ी समस्या-


घुटनेके जोड़ [knee] का रोग वर्तमान समय की बड़ी समस्या-

किसी भी प्राणी के जोड़ों की रचना में कई महत्वपूर्ण

Paralysis लकवा - पक्षाघात


Paralysis लकवा - पक्षाघात 
हमारे शरीर की समस्त हलचल या गति विधियाँ मांसपेशियों के द्वारा की जाती हें पर इन सभी मांसपेशियों को मस्तिष्क द्वारा नियंत्रित किया जाता हे| मस्तिष्क यह कार्य तंत्रिका तंत्र या नर्वस सिस्टम जो की एक विधुत के तारों की तरह सारे शरीर में फेला रहता हे के द्वारा सन्देश भेज कर सम्पादित करता हे| दुसरे शब्दों में हम कहें तो शरीर की सारी गतिविधियों के सञ्चालन की जिम्मेदारी मस्तिष्क पर होती हे या शरीर के सभी भागों से संदेश प्रक्रियाओं के नियंत्रण मस्तिष्क के अधीन है| कभी कभी तंत्रिका कोशिकाओं, या मस्तिष्क के न्यूरॉन्स, की मांसपेशियों को नियंत्रित नहीं कर पाती| तब वह मांसपेशियों को स्वेच्छा से नियंत्रण करने की क्षमता खो देता है, इससे व्यक्ति अपनी समस्त क्षमताएं खो देता हे | 

जब यह नियंत्रण शरीर के एक तरफ चेहरा, हाथ और पैर की मांसपेशियों का होता हे तब यह पक्षाघात, अर्धांगघात ("आधा") कहा जाता है इसी प्रकार जब किसी कारण  से रीढ़ की हड्डी की नसों या तंत्रिकाओं को नुकसान होता हे तो यह शरीर के विभिन्न अन्य भागों को प्रभावित करता है| क्षति की मात्रा तंत्रिकाओं के नुकसान पर निर्भर करती है| दोनों निचले अंगों का पक्षाघात अर्द्धांग (paraplegia,) कहा जाता है, और दोनों हाथ और दोनों पैरों का पक्षाघात चतुरांगघात (quadriplegia)कहा जाता है| पक्षाघात अस्थायी या स्थायी बीमारी या चोट के आधार पर हो सकता है , क्योंकि पक्षाघात शरीर में किसी भी मांसपेशियों को प्रभावित कर सकते हैं | व्यक्ति इससे चलने फिरने और अन्य किसी भी शारीरिक गतिविधयों की क्षमता से लेकर बात करने या साँस लेने की क्षमता भी खो सकता हैं| 

लकवे या पक्षाघात का कारण, खेल या दुर्घटनाओं से कोई शारीरिक चोट, विषाक्तता, (poisoning) संक्रमण(infection,) रक्त वाहिकाओं का अवरोध(blocked blood vessels,) और ट्यूमर( tumors) के कारण पक्षाघात हो सकता हे | 
 भ्रूण या बच्चे के जन्म के दौरान मस्तिष्क की चोट से मस्तिष्क के विकास में बाधा भी मस्तिष्क पक्षाघात के रूप में जाना जाता है| एकाधिक काठिन्य(multiple sclerosis,) सूजन (inflammation) नसों के निशान,( scars ) 
मस्तिष्क और मांसपेशियों के बीच संचार व्यवस्था में अवरोध , कभी कभी मांसपेशियों में पेशी क्षय ( dystrophy) भी प्रभावित करती हे | हाथ और पैर की मांसपेशियों के ऊतकों की पेशी क्षय ( dystrophy) या गिरावट बढ़ती कमजोरी का कारण बनता है| 
पक्षाघात का इलाज है? 
पोलियो से होने वाले पक्षाघात को टीकाकरण से रोका जा सकता है| मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी की चोट से होने वाले पक्षाघात को जो कुछ मामलों में उचित सुरक्षा उपायों का उपयोग करके रोका जा सकता है| 
इसके अलावा, यह आमतौर पर पक्षाघात के कारण को रोकना के संभव नहीं है | 

कुच्छ एक कारण जेसे रक्तचाप या ब्लड प्रेशर  के बड़ने से होने वाले मष्तिष्क में रक्त लीकेज / ब्लड क्लोट के कारण ब्लोकेज से आदि जेसे कारणों से हो जाने वाले पक्षाघात को इनकी चिकित्सा द्वारा रोका जा सकता हे| दवाओं का प्रयोग रीढ़ की नसों को नुकसान की मात्रा सीमित करने की कोशिश में सूजन को कम करने के लिए रीढ़ की हड्डी में चोट के समय पर किया जाता है| 
पक्षाघात से पीड़ित हुए रोगी की चिकित्सा में संक्रमण होने से रोकना और दबाव घावों से बचने पर जोर दिया जाता हे |  सामन्यतय अधिकांश लोग की प्रारभिक चिकित्सा जो लगभग एक सप्ताह हो सकती हे, के बाद शरीर की स्वनियंत्रित प्रणाली द्वारा ठीक हो सकती हे| पर यदि शारीरिक अवयव जेसे हाथ/पैर आदि की मांस पेशियाँ जो मस्तिस्क से आदेश लिया करती थी वे आदेश न मिल पाने के कारण निष्क्रिय अवस्था में आ जाती हे को इस निष्क्रियता से हटाने के लिए फिजिकली एक्सरसाइज आदि की सहायता करना होती हें| इस अवस्था में रोगी कोई भी सहयोग नहीं करना चाहता , वह अधिक आराम पसंद हो सकता हे जो की मनोवैज्ञानिक कारणों से हो सकता हे | यदि लगातार कुछ माहों तक मांस पेशियाँ को सक्रिय नहीं रखा गया तो व्यक्ति हमेशा के लिए अपंग जेसी स्थिति में भी आ सकता हे| 
पंचकर्म से स्वास्थ लाभ
इसके ही लिए आयुर्वेद में पंचकर्म चिकित्सा (देखें  पंचकर्म से स्वास्थ लाभ: ) के माध्यम से रोगी में अंतर्निहित मनोवैज्ञानिक समस्या के साथ मांस पेशियों को सक्रियता प्रदान की जा सकती हे| इस चिकित्सा में ओषधियो के माध्यम से भी संक्रमण /रक्तचाप/और रक्त में थक्का जमने से रोकने के लिए सहायता की जाती हे| सतत पाचन सस्थान के क्रिया कलाप पर भी ध्यान भी बस्ती आदि द्वारा किया जाता हे| 
कुल मिलाकर जितने जल्दी (रोग आक्रमण के एक सप्ताह के बाद से हे) अधिक सक्रिय करने पर ध्यान दिया जायेगा उतना जल्दी और अधिक लाभ होगा | देर करने से या रोगी की मनोवृति "केवल आराम"करने दिया गया तो शेष जीवन अपंगता की स्तिथि में रहने की सम्भावना अधिक हो जाती हे| 
 पक्षाघात के बाद भी जो उक्त पंचकर्म चिकित्सा ले लेते हें वे पुनह सामान्य जीवन प्राप्त कर सकते हें| 
एक बात ध्यान रखने की हे की मष्तिष्क के कारण जो लकवा ग्रस्त हुए थे वे पुनह शरीर की स्वयं ठीक कर देने वाली शक्ति से कभी कभी पूरी तरह से ठीक भी हो जाते हें ,ऐसे में यदि कोई जादू-मंतर/ देवी देवता आदि की मन्नत मानी हे तो यह समझने की भूल हो जाती हे की देवी या मंत्रो ने ही रोगी को ठीक किया हे| पर यदि हाथ पेरों की मांस पेशियों के काम न करने देने या आराम के कारण अपंगता की स्तिथि जीवन भर बनी रह सकती हे | 

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समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें|

आस्‍टियोपोरोसिस

    हड्डियों के भंगुर( कमजोर ) होने की बीमारी है जिसमें असामान्य रुप से अस्थि ऊतक का नुकसान होता है जिससे हड्डियां छिद्रपूर्ण और कमजोर हो जाती हैं। जब हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है, उनमें हल्की सी भी चोट लगने से और उठाने और झुकने से भी फ्रेक्चर हो सकता है। हड्डी हानि के लिए आम जगहें रीढ़, कूल्हे और कलाई हैं। आस्‍टियोपोरोसिस महिलाओं में आम है, खासकर रजोनिवृत्ति के बाद, लेकिन यह पुरुषों को भी उम्र के साथ प्रभावित करता है। इस रोग का प्रमुख कारण कुपोषित आहार है जिसमें कैल्शियम और विटामिन डी कम हो और व्यायाम की कमी है।

   किसी भी उम्र में व्यायाम हड्डियों के निर्माण और घनत्व को बनाए रखने में मदद करता है। आस्‍टियोपोरोसिस कुछ पोषक तत्वों (कैल्शियम और विटामिन डी) वाले संतुलित आहार से और जीवन में जल्दी शुरू किये गये नियमित व्यायाम के संयोजन के द्वारा रोका जा सकता है। हालांकि, वयस्क होने के बाद भी यह शुरू करने के लिए देर नहीं हुई है। वजन उठाने वाले व्यायाम हड्डी के गठन को प्रोत्साहित करते हैं और हड्डियों को कैल्शियम बरकरार रखने में मदद करता है जिससे वे भार सहन कर लेती हैं।

     वजन उठाने वाले अभ्यास के दौरान, हड्डियों के खिलाफ मांसपेशियों का खींचाव, हड्डियों के निर्माण और उन्हें मजबूत बनाने की प्रक्रिया को प्रोत्साहित करते हैं। यह महत्वपूर्ण है कि हड्डी को मजबूत करना साइट स्पेसिफिक है मतलब यदि आप अपने पैरों को प्रशिक्षित करें तो सिर्फ पैरों की हड्डियां मजबूत होंगी और यदि आप केवल अपने ऊपरी शरीर को भार व्यायाम से प्रशिक्षित करें तो आपकी केवल संबंधित हड्डियां ही मजबूत होंगी। व्यायाम से संतुलन, समन्वय और मांसपेशियों की ताकत बढ़ती है, जिससे बुजुर्गों में गिरने की संभावना कम हो जाती है।

     वर्तमान में, ऑस्टियोपोरोसिस का कोई इलाज नहीं है लेकिन मेडिकल ट्रीटमेंट और व्यायाम से इसके प्रभाव को धीमा और यहां तक कि उल्टा भी कर सकते हैं। वजन उठाने वाले व्यायाम ऑस्टियोपोरोसिस के इलाज में सबसे ज़्यादा प्रभावी हैं लेकिन कुछ अभ्यास उन्नत ऑस्टियोपोरोसिस में हानिकारक हो सकते हैं। इसलिए किसी भी व्यायाम दिनचर्या शुरू करने से पहले एक चिकित्सक के अनुमोदन आवश्यक है।

    समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान ,एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें |.

ओस्टियोपोरोसिस का निवारण

• कैल्शियम और विटामिन डी की ठीक मात्रा ले।काफी डाक्टर नित्यक्रम से अतिरिक्त कैल्शियम 500 से 1000 मिलिग्राम रोजाना कैल्शियम कार्बोनेट के रूप मे और अन्य सस्ते रूपो मे दे सकते हैं।अगर आपका आहार कैल्शियमहीन है या फिर आप स्तनपानकरा रही है तो आपको कैल्शियम कि मात्रा ज्यादा लेनी होगी।आपको रोज एक मल्टीविटामिन कि गोली जिसमे विटामिन डी होता है वो भी ले सकते है।
आयुर्वेदिक मुक्ता पिष्ठी, प्रवाल भस्म /पिष्टी बहुत उपयोगी और निरापद हें |
• वजन सहने कि नित्यक्रम कसरते कर और धीरे धीरे बढ़ाते रहे |
• धूम्रपान न करे
• अधिक शराब न पिए
अगर आप एक ऐसी महिला है जो कि अभी अभी रजोनिवृत्ति में आई हैं तो अपने डाक्टर से ओस्टियोपोरोसिस के लिए अपना मूल्यांकन कि बात करें।रजोनिवृत्ति से सम्बंधित ओस्टियोपोरोसिस के लिए निवारण के कई विकल्प है जैसे एस्ट्रोजन रिपलेस्मेंट थेरेपी ,रेलोक्सीफीन (ईविस्टा), एलेनड्रोनेट (फोसामेक्स) या राइसेड्रोनेट (एक्टोनेल)।क्योकि एस्ट्रोजन हड्डियो के टूटने को धीरे कर देता है रजोनिवृत्ति के समय एस्ट्रोजन कि कमी कि वजह से हड्डियो का नुकसान होता है।एस्ट्रोजन थेरेपी और रेलोक्सीफीन (जो कि हड्डियो पर एस्ट्रोजन कि तरह काम करता है)इस प्रक्रीया का विरोध करते है।एस्ट्रोजन रिपलेस्मेन्ट थेरेपी ओस्टियोपोरोसिस के उपचार और निवारण के लिए अब उपयोग नही किया जाता क्योकि इसके हानिकारक प्रभाव काफी है,जिनमे कि ह्रदय कि बिमारी और नस फटने के जोखिम है।एलेनड्रोनेट और राइसेड्रोनेट जिन्हे बाईफोसफोनेटस कहते है दवाओ का एक परिवार है जो कि हड्डियो को तोडने वाली कोशिकाओ को धीरे कर देते है।इस तरह से यह दवाए हड्डियो को मोटा होने मे मदद करती है।एक हड्डी घनत्व जाँच इस निर्णय को आसान बना देगा अगर यह समस्या के संकेत दिखाता है।क्योकि ओस्टियोपोरोसिस संबंधित कम्प्रेशन फ्रेक्चर कि वजह से जो लम्बाई मे कमी आती है वह और कोई लक्षण नही दिखाती है इसलिए अगर आप 40 साल से ज्यादा उम्र कि है अपनी लम्बाई को हर साल नापना एक अच्छा विचार है।

ओस्टियोपोरोसिस के निवारण का अन्य तरीका है कि अपने थाइराइड दवाओ को लगातार निगरानी मे रखना क्योकि ज्यादा दवाए आपको ओस्टियोपोरोसिस और अन्य चिकित्सक समस्याए कर सकती है।अगर आप किसी कारण कि वजह से प्रेडनिसोलोन ले रहे है तो अपने डाक्टर से इस दवा को कम करने के लिए बात करे या फिर इस दवा को छोडने कि बात करे।

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गर्दन दर्द या सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस


   प्रतिदिन होने वाली समस्याओं में से गर्दन दर्द या सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस भी एक है। आज घंटों डेस्क पर काम करना हमारी मजबूरी बन गया है, ऐसे में गर्दन दर्द लगभग कामन कोल्ड की तरह सामान्य होता जा रहा है।
वैसे तो यह समस्या सामान्य होती है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में यह गंभीर रूप भी ले लेती है। गर्दन दर्द किसी पुरानी चोट या स्वास्‍थ्‍य संबंधी जटिलताओं के कारण भी हो सकता है।
गर्दन दर्द के कारण सामान्य या जटिल भी हो सकते हैं, जैसे :
लंबे सामय तक डेस्क का काम, उठने-बैठने, सोने की गलत पोजीशन या कठोर तकिए का इस्तेमाल।
किसी प्रकार की चोट के कारण हड्डियों का अपने स्थान से खिसक जाना। 
ट्यूमर या मांस पेशियों में मोच।
गर्दन के स्पाइन में अर्थराइटिस। 
भारी वस्तु्ओं को उठाने का काम।
तनाव या स्वास्‍थ्‍य संबंधी दूसरी समस्याएं।
  •     कैसे करें बचाव:

गर्दन दर्द सामान्य प्रकार का दर्द है। यह दर्द अकसर लम्बे समय तक रहने वाला होता है इसलिए आप ऐसे में घरेलू उपायों या वैकल्पिक चिकित्सा का सहारा ले सकते हैं।
गर्दन दर्द की स्थिलति में प्रभावित क्षेत्र पर अधिक ज़ोर पड़ने से दर्द बढ़ जाता है इसलिए तीव्र दर्द होने पर आराम करें। 
प्रभावित क्षेत्र पर गर्म पानी के वाटर बैग या बर्फ के टुकड़ों से सिंकाई करना भी एक अच्छा् विकल्प है।
गर्दन दर्द से बचने के लिए आप एक्यूप्रेशर, एक्यूपंचर, जल चिकित्सा व, चुम्बकीय चिकित्सा, योग, मालिश, फीजि़योथेरेपी जैसी वैकल्पि क चिकित्साओं को भी अपना सकते हैं।
  • आयुर्वेदिक पञ्च कर्म चिकित्सा द्वारा आसानी से ठीक किया जा सकता हे | इसकी जानकारी के लिए आप मुझसे संपर्क कर सकते

तेज़ दर्द होने पर दर्द निवारक दवाईयां भी ली जा सकती हैं।२६/१०/११ अगर आपको लंबे समय से गर्दन में दर्द की शिकायत है, तो व्यायाम या योगा को अपनी आदत में शामिल करें। असहनीय दर्द की स्थिति में, चिकित्सक से परामर्श लेकर उचित उपचार करें क्योंकि चिकित्सा के अभाव में यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है।

समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान ,एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें |.
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चिकित्सा सेवा अथवा व्यवसाय?

स्वास्थ है हमारा अधिकार १

हमारा लक्ष्य सामान्य जन से लेकर प्रत्येक विशिष्ट जन को समग्र स्वस्थ्य का लाभ पहुँचाना है| पंचकर्म सहित आयुर्वेद चिकित्सा, स्वास्थय हेतु लाभकारी लेख, इच्छित को स्वास्थ्य प्रशिक्षण, और स्वास्थ्य विषयक जन जागरण करना है| आयुर्वेदिक चिकित्सा – यह आयुर्वेद विज्ञानं के रूप में विश्व की पुरातन चिकित्सा पद्ध्ति है, जो ‘समग्र शरीर’ (अर्थात शरीर, मन और आत्मा) को स्वस्थ्य करती है|

निशुल्क परामर्श

जीवन के चार चरणौ में (आश्रम) में वान-प्रस्थ,ओर सन्यास अंतिम चरण माना गया है, तीसरे चरण की आयु में पहुंचकर वर्तमान परिस्थिती में वान-प्रस्थ का अर्थ वन-गमन न मान कर अपने अभी तक के सम्पुर्ण अनुभवोंं का लाभ अन्य चिकित्सकौं,ओर समाज के अन्य वर्ग को प्रदान करना मान कर, अपने निवास एमआइजी 4/1 प्रगति नगर उज्जैन मप्र पर धर्मार्थ चिकित्सा सेवा प्रारंंभ कर दी गई है। कोई भी रोगी प्रतिदिन सोमवार से शनी वार तक प्रात: 9 से 12 एवंं दोपहर 2 से 6 बजे तक न्युनतम 10/- रु प्रतिदिन टोकन शुल्क (निर्धनों को निशुल्क आवश्यक निशुल्क ओषधि हेतु राशी) का सह्योग कर चिकित्सा परामर्श प्राप्त कर सकेगा। हमारे द्वारा लिखित ऑषधियांं सभी मान्यता प्राप्त मेडिकल स्टोर से क्रय की जा सकेंगी। पंचकर्म आदि आवश्यक प्रक्रिया जो अधिकतम 10% रोगियोंं को आवश्यक होगी वह न्युनतम शुल्क पर उपलब्ध की जा सकेगी। क्रपया चिकित्सा परामर्श के लिये फोन पर आग्रह न करेंं। ।

चिकित्सक सहयोगी बने:
- हमारे यहाँ देश भर से रोगी चिकित्सा परामर्श हेतु आते हैं,या परामर्श करते हें, सभी का उज्जैन आना अक्सर धन, समय आदि कारणों से संभव नहीं हो पाता, एसी स्थिति में आप हमारे सहयोगी बन सकते हें| यदि आप पंजीकृत आयुर्वेद स्नातक (न्यूनतम) हें! आप पंचकर्म चिकित्सा में रूचि रखते हैं, ओर प्रारम्भ करना चाह्ते हैं या सीखना चाह्ते हैं, तो सम्पर्क करेंं। आप पंचकर्म केंद्र अथवा पंचकर्म और आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रक्रियाओं जैसे अर्श- क्षार सूत्र, रक्त मोक्षण, अग्निकर्म, वमन, विरेचन, बस्ती, या शिरोधारा जैसे विशिष्ट स्नेहनादी माध्यम से चिकित्सा कार्य करते हें, तो आप संपर्क कर सकते हें| सम्पर्क समय- 02 PM to 5 PM, Monday to Saturday- 9425379102/ mail- healthforalldrvyas@gmail.com केवल एलोपेथिक चिकित्सा कार्य करने वाले चिकित्सक सम्पर्क न करें|

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