Rescue from incurable disease

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  • क्या है? एक दिन अचानक किसी स्वस्थ्य को चेतना हीन कर देने वाला यह रोग- पैरलाइसिस पक्षाघात या लकवा।

    पैरलाइसिस पक्षाघात या लकवा  -क्या है?  एक दिन अचानक किसी स्वस्थ्य को चेतना हींन कर देने वाला यह रोग-  
    शरीर कई स्नायु(एक प्रकार की डोरियाँ) से रक्त ले जाने वाली नलिकाओं(आर्टिर्ज/वैन्स), नाड़ियों (नर्व) और मांसपेशीयों समूह को अस्थियों (कंकाल) पर बांधे रखता है। मांसपेशियाँ मस्तिष्क के द्वरा नाड़ियों की शयता से निर्देशित कर कार्य करतीं हें। जब भी ये मांसपेशियाँ अपने कार्य में पूर्णतः असमर्थ हों जाती हें तो इस स्थिति को पक्षाघात या लकवा मारना कहते हैं। पक्षाघात से प्रभावित क्षेत्र की संवेदन-शक्ति समाप्त हो सकती है, या उस भाग को चलना-फिरना या घुमाना असम्भव हो जाता है। यदि यह असमर्थता आंशिक है, तो उसे आंशिक पक्षाघात कहते हैं।
     एक किसी समय अचानक पैरालाइसिस या लकवे के द्वारा एक और या दोनों और का सपूर्ण शरीर या शरीर का आंशिक या कुछ भाग प्रभावित पाया जा सकता है। इसमें रोग के प्रभाव के अनुसार हाथ पैर या पूरा एक हिस्सा संज्ञा शून्य हो जाने से निष्क्रिय हो जाता है। हाथ पैरों के निष्क्रियता के साथ, वाणी(बोलना), श्वास,भी पूर्ण या आंशिक प्रभावित हौ सकता है।
    अचानक पक्षाघात के अटेक का कारण मस्तिष्क के किसी हिस्से मे रक्त आपूर्ति रुक जाती है, या मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका फट जाने से आस-पास की जगह में खून भर जाता है, इससे मस्तिष्क का नियंत्रण उनसे संबन्धित अंगों से छूट जाता है तब कहा जा सकता है कि आदमी को मस्तिष्क का दौरा पड़ गया है।
    शरीर की सभी पेशियों का नियंत्रण केंद्रीय तंत्रिकाकेंद्र (मस्तिष्क और मेरुरज्जु) की उन प्रेरक तंत्रिकाओं से जो उनसे संबन्धित पेशियों तक जाकर, उनको नियंत्रित करतीं हें, से होता है। अत: स्पष्ट है कि मस्तिष्क से पेशी तक का नियंत्रण जिस किसी भाग में हो वही संबंधी पेशियाँ पक्षाघात से प्रभावित होतीं हें।
    इसके पीछे समान्यत: कोई चोट, अर्बुद (कोई गठान) अथवा ब्लड प्रेशर की अधिकता आदि, या अन्य कोई कारण भी हो सकता है, जिससे यह आंशिक या पूर्ण पक्षाघात होता है
    क्रमश:---
    आगे देखें -- पैरालाइसिस कितनी तरह का होता है?
    आगे देखें – क्या पैरालाइसिस देवी विपत्ति है जो किसी “दैवी मानता: से ठीक होती है?
    आगे देखें-  पैरालाइसिस कैसे ठीक होगा?
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