Rescue from incurable disease

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    अलसी स्टार फूड
    अलसी का बोटनीकल नाम लिनिम यूजीटेटिसिन हे। इस पर नीले रंग के फूल आते हैं । इसका बीज तिल्ली जैसा छोटा ,भूरे या सुनहरे रंग का व चिकना होता हे। प्राचीन काल से इसका प्रयोग होता आया हे। अलसी में मुख्य पौष्टिक तत्व औमेगा3 फेटी एसिड एल्फा लिनोलेनिक एसिड, लिगनेन, प्रोटीन व फाइबर होते हे। अलसी में 30-40 प्रतिशत तैल,25 प्र प्रोटीन ,फाइबर,विटा,बी ,सेलेनियम, कैल्शियम, मैग्नेशियम , क्रोमियम, कापर जिकं, पोटेशियम ,लोहा, फोलिक,आदि तत्व होते हें। इसमें मौजूद तैल में 36-50 प्रतिशत औमेगा 3, एल्फा लिनोलेनिक एसिड, होते हें।
    औमेगा3 और औमेगा6 दौनो शरीर के लिये आवश्यक हें, पर हमारे शरीर में नही बन सकते हमका इन्हे भौजन के साथ ही लेना जरुरी होता है। यह औमेगा3 अलसी के अलावा अखरोट, बादाम, औमेगा 6 मुगफली सोयाबीन सनफ्लावर मकई आदि के तैलो में प्रचुर मात्रा में पाया जाता हे।
    आमेगा3 विशेष कर मस्तिष्क स्नायु तन्त्र एवं ऑखौं के विकास और सुचारु संचालन के लिये महत्व पूर्णयोगदान करते हें। शरीर कोशिका भित्तीयॉ (सेल वाल) औमेगा3 युक्त फोस्फोलिपिड से बनती हें।
    सेल वाल को लचीला बनाने वाले औमेगा3 की शरीर में कमी होने पर ये सेल वाल कठौर एवं कुरुप औमेगा6 से बनने लगती हे,और यहीं से उच्च रक्त चाप,मधुमेह(डायविटीस )2 अर्थराईटिस, मोटापा, कैंसर, जैसी बीमारियों की शुरुवात करता हे। औमेगा3 की कमी से इन्फ्लमेशन (सूजन) पैदा करने वाली औमेगा6 के हावी हो जाने पर प्रतिकि्रया स्वरुप वने साइटोकाईन सूजन करते हैं।
    इस प्रकार जहॉ औमेगा3 हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बडाते हें वहीं पर औमेगा6 शरीर में रोग पेदा करते हे। आजकल बहु प्रचलित फास्ट फूड, और जकं फूड, रिफायन्ड तैल , औमेगा6 से भरपूर होते हें। इस प्रकार हमारे भोजन में औमेगा3 कम पर औमेगा6 अधिक होने से ही हृदय रोग, डायविटीज, मोटापा, दमा, केंसर, आदि रोगों का शिकार हो रहे हें।

    औमेगा3 की यह कमी 30-40 ग्राम अलसी का सेवन कर आसानी से पूर्ति की जा सकती हे।

    औमेगा 3 की अलसी मे उपस्थिती ही इसको स्टार फूड का दर्जा देती हें ।

    अलसी (Linseeds or Flax Seeds) से बने खाद्य पदार्थ (Alsi Recipes) आपके परिवार को सर्दी जुकाम खांसी आदि से लड़ने की प्रतिरोधात्मक शक्ति देते हैं.
    अलसी हमारे रक्त चाप को संतुलित रखती हे। अच्छे कोलेस्ट्राल ;HDLCholestrol की मात्रा नियन्ति्रत करती हे , और खराब कोलेस्ट्राल ;;LDLCholestrol को कम करती है। दिल की धमनियौं में खून के थक्के बनने से रोकती हे ओर हृदयघात ,व स्ट्रोक जैसी बीमारियों से बचाव करती हे। अलसी हृदय की गति को नियत्रित कर वेट्रीकूलर एरद्मिया से होने वाली मृत्युदर को कम करती हे।

    अलसी, लिगनेन का दूसरा पौष्टिक तत्व तथा महत्वपूर्ण ओर सबसे बडा स्त्रोत होता हे, जो अन्य खाद्यानौं से कई सौ गुणा हे। ये लिगनेन एन्टी बैक्टीरियल,एन्टी फन्गल, और एन्टी कैंसर होते हैं।

    अलसी यदि मॉ को स्तन में दूध नही आरहा हे तो अलसी खिलानेके 24 घन्टे में दूध आने लगता हें ,रजोनिवृत्ति या मेनोपाज के दौरान होने वाली परेशानियों जैसे हाट प्लेशज में लाभ करती हे। अमेरिका में हुई शोध से पता चला हे, कि अलसी में 27 से भी अधिक कैंसर रोधी तत्व होते हें ।

    अलसी में फाईबर की अधिक मात्रा होने से कब्जी बवासीर आदि में भी लाभप्रद हे। अलसी के सेवन से पित्त की पथरी नहीं बनती बन गइ हो ता घुलने लगती हे।

    अलसी मुहॉसे ओर चर्म रोगों के लिये भी लाभदायक हे ।

    ओमेगा 3 से बाल भी चमक दार और मजबूत होते हे । अलसी खाने के साथ इसका तेल मालिश त्वचा के दाग धब्बों , झाइयां झुर्रियां आदि , रोगो को दूर कर युवा बनाती हे।

    अलसी के नित्य सेवन से मन प्रस्सन्न रहता हे , तनाव दूर होता हे ।

    गर्भवस्थ में अलसी का सेवन शिशु के मस्तिष्क नेत्र के विकास के लिये इसमें उपस्थित औमेगा3 का बडा योगदान हे।

    बच्चौं मे होने वाली बीमारियॉ दस्त ,एर्लजी, आदि का कारण भी औमेगा3 की कमी हे।

    अलसी ब्लड शुगर को नियन्ति्रत करती हे , इसके सेवन से पेट भरा हुआ लगता हे देर तक भूख नहीं लगती इससे मोटापे पर नियंत्रण रहता हे ं यह बी एम आर बडाती हे ओर हम अधिक कैलोरी खर्च करते हें

    अलसी हमारे शरीर के तापमान को नियत्रित करती हे इससे जून माह में भी गर्मी नहीं लगती। अलसी बाडी बिल्डरस के लिये आवश्यक व सम्पूर्ण आहार हे। इसके प्रोटीन्स मांस पेशिया बडाने में सहायक होते हें ।

    वर्तमान में टीवी पर बिकने वाले इस प्रकार के कई द्रव्य इसी के ऊपर बनाये और बेचे जा रहे हे | मल्टी नेशनल कंपनीया अलसी को ही कई रूपों में बेच कर भरी मुनाफा कमा रही हे |

    अलसी का प्रयोग कैसे करे एव अलसी ही क्यौ!


    उपर लिखे विवरण ने यह बताया कि औमेगा3 इतना जरुरी क्यौं हे ।
    पर इसके लिये अलसी ही क्यौं !
    बाजार में उपलब्ध औमेगा 3 अधिकतर शाकाहारी नहीं होते हें, साथ ही बहुत महंगा भी हे। अलसी कम कीमत में उपलब्ध हे, ओर इसमे अन्य खनिज तत्व , विटामिन्स,रेशा,,एन्टी आक्सीडेन्टस भी मिल जाते हें । फिर यह अलसी एक औषधि नहीं एक अनाज हें । जो कि पाचन तत्रं के लिये निरापद,तथा अन्य साईड इफेक्ट से मुक्त हे।
    सेवन कैसे करे !
    1 मालवा निमाड में गेहूॅ के साथ अलसी बोने की परंपरा रही हे,। आज से 30/40 वर्ष पहिले तक गेहू के साथ आये अलसी के दानों को न निकालकर साथ ही पीस दिया जाता था। वर्तमान मे मशीनों द्वारा अलग कर दिया जाता हे, या अब बोया ही नहीं जाता । इस लिये अनायास प्राप्त होने वाला यह अनाज अब हमारे भौजन से दूर हो गया हे। अतः सबसे अच्छा तरीका भी यही हे कि इसकी कम से कम 10 प्रतिशत की मात्रा में गंहूॅ में मिलाकर आटा बनाया जाये।
    2 साफ बीनी हुइ अलसी को धीमी ऑच पर सेक कर बारीक पीस लिया जाये और प्रातः सायः एक एक चममच खाकर पानी पी लिया जाये। पावडर एयर टाइट डब्बे में रखो। और थोडा थोडा बनाये क्योकि यह जल्दी खराब हो जाता हें ।
    3 इस पावडर को सब्जी दाल या सलाद, मीठे दूध,या दही के साथ भी लिया जा सकता हे।
    4 अलसी की चाय - एक चम्मच अलसी पावडर+दो कप पानी के साथ मन्द ऑच पर आधे से कम रहने तक पकाये फिर इसे कुछ ठन्डा कर शहद/ शकर के साथ पीने से भी लाभ होगा ं सर्दी खासीं जुकाम में दवा के वतोर तीन चार बार लेने से लाभ होता हें ।
    5 आप सब्जी के मसाले के साथ प्रति दिन पीस कर भी प्रयाग कर सकते हें।
    6 अलसी को भून कर, पाउडर बना कर, सब्जी में डाला में डाला जा सकता है. रोटी परांठे के लिये आटे में डाला जा सकता है, बेसन में डालकर नमकीन चीला बना सकते हैं. ब्रेड का आटा लगाते समय आटे में मिला लीजिये, इत्यादि. 

    निम्न साइडस पर इसकी अन्य रेसिपी उपलब्ध हें। nishamadhulika.com/sweets/alsi
    -pinni-recipe.html अलसी की पिन्नी (Alsi Pinni) सर्दियो में खाई जाने वाली पारम्परिक पौष्टिक मिठाई है. अलसी की पिन्नी सर्दियों में बनाकर रख लीजिये, रोजाना 1-2 अलसी की पिन्नी (Alsi Ki Pinni) खाइये, सर्दी, जुकाम, खासी, जोड़ों के दर्द सभी में फायदा पहुंचाती है., तो आइये अलसी की पिन्नी बनाना (Alsi Ladoo or Alsi Ki Barfi) शुरू करें.
    अलसी की पिन्नी – Alsi Pinni Recipe – Alsi Ladoo Recipe
    nishamadhulika.com
    सर्दियों के मौसम ने दस्तक दे दी है. इस मौसम में आपके परिवार को अधिक केयर की जरूरत है. अलसी (Linseeds or Flax Seeds) से बने खाद्य पदार्थ (Alsi Recipes) आपके परिवार को सर्दी जुकाम खांसी आदि से लड़ने की प्रतिरोधात्मक शक्ति देते हैं.

     डॉ योहाना वुडविजने ठंडी विधि से निकले अलसी के तेल व् पनीर के मिश्रण तथा केंसर रोधी फलो ,सब्जियों ,से केंसर के उपचार का तरीका विकसित किया था |
    The Budwig Diet Protocol - The Treatment of Cancer and Other Diseases - The Treatment of Cancer and Other Diseasesइससे कई केंसर के रोगियों को लाभ होने लगा था इस उपचार से ९० प्रतिशत रोगी ठीक हुए थे इस पर नोवेल पुरुस्कार समिति ने पुरुस्कार देना चाहा था पर उनको यह दर लगा की इससे इस चिकित्सा को मान्यता मिलने से २०० बिलियन डोलर का व्यवसाय ( किमो थेरेपी और विकिरण चिकित्सा के उपकरण बनाने वाली बहु राष्ट्रीय कम्पनियां को हानी होगी इस कारण उनको कहा गया की , आपकी इस पद्धति में किमो थरेपी और रेडिओ थेरेपी को शामिल करना होगा | सशर्त दिए जाने वाले इस नोवेल पुरुस्कार का उन्होंने सैट बार ठुकराया |

    विस्तृत जानकारी,< www.The Budwig Diet Protocol - The Treatment of Cancer and Other Diseases> पर देखे |
    The Budwig Diet
    Cottage Cheese and Flaxseed Oil
    by Mike Vrentas
    Independent Cancer Research Foundation, Inc.
    TREATMENT RATING: This is a very potent cancer treatment, however, it should not be used as the only cancer treatment. This protocol is generally combined, and is part of, a complete protocol and is used to stabilize the patient and "buy time" for more potent treatments to work. Examples would be the Cellect-Budwig protocol, the Bill Henderson protocol, etc.
    Chapter on Treatments Rated For Advanced Cancer Patients
    The Budwig Diet Protocol - The Treatment of Cancer and Other Diseases
    This Article in Icelandic: The Budwig Diet (Icelandic)
    Note: This article is "Part 2" of the Cellect-Budwig Protocol for cancer. The product Cellect and the Budwig Diet are very synergistic protocols. Because of the way Internet search engines work, it is unwise to have long articles on one web page. That is why articles are sometimes split apart. Here is a link to Part 1 of the Cellect-Budwig artice:
    Part 1 of the Cellect-Budwig Protocol For Cancer
    In my research, Dr Johanna Budwig’s name has been referred to on numerous occasions. The articles mentioned that Dr Budwig was using Organic Flaxseed Oil combined with Organic Low Fat Cottage Cheese in preventing and curing Cancer and Chronic Diseases. I would just shake my head in disbelief and, without giving it a second thought, move onto other research. I was not willing to take the time to investigate this protocol. It did not make any sense to me how this could possibly work. That was a big mistake on my part.
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