Rescue from incurable disease

Rescue from incurable disease
लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |
  • Home
  • Contact Us
  • About Me
  • Q & A
  • Article's स्वास्थ्य लेख
  • Panchakarma(पंचकर्म)
  • Common Article
  • Specific article (विशेष लेख)
  • VIDEO
  • क्रोनिक टाइफोइड केसे ठीक हो? - आयुर्वेदिक चिकित्सा - प्रश्न पर उत्तर।


    उत्तर - टाइफाइड बेसिलस साल्मोनेला टाइफी, के कारण से मियादी बुखार जिसे आंत्रिक ज्वर (आंतों का बुखार) भी कह सकते हें होता है। 
        यह टाइफाइड बेसिलस, दूषित भोजन या पानी के द्वारा फैलता है। इसका फैलाव (ट्रांसमिशन) कच्चे फल, मानव मल, दूषित दूध और दूषित दूध उत्पादों (फूड प्रोडक्ट) दूषित पानी से पैदा की गई (निषेचित) सब्जियों को खाने के माध्यम से भी होता है। मक्खियां भी खाद्य पदार्थों के संक्रामण के लिए जिम्मेदार हो सकती हें। अधिकतर मामलों में पीने के पानी और अन्य उपयोग हेतु पानी के एक ही स्रोत का उपयोग टाइफाइड बुखार की महामारी का कारण पाया गया है। 
        टाइफाइड बुखार के गंभीर मामलों बुखार, सिरदर्द, बेचैनी, आहार और अनिद्रा की क्रमिक शुरुआत विशेषत: देखि जाती है। वयस्कों में कब्ज और बड़े बच्चों में ज्यादा दस्त होना आम है। 
      सही चिकित्सा नहीं करने पर कुछ रोगियों, कभी कभी, निमोनिया निरंतर बुखार, मंदनाड़ी, यकृत-या प्लीहा की वृद्धि (hepatosplenomegaly), हो सकती हें। 
      शरीर के मध्य भाग(ट्रंक) की त्वचा पर गुलाबी धब्बे, दिखाई दे सकते हें। तीसरे सप्ताह में रोग 10-20% तक घातक हो सकता है।
      
    कुछ मामलों में (2-से 5% तक) यह बैक्टीरिया बाईल डक्ट या पित्त वाहिनी को संक्रमित कर लबे समय तक रह सकता है, इस प्रकार से यह क्रोनिक टाइफाइड बुखार बन जाता है। 
       
      आपकी पत्नी को भी एसा ही होना चाहिए। यह स्थिति एलोपेथिक एंटीबाओटिक्स के लगातार प्रयोग करते रहने से बेक्टीरिया उसका आदी बन गया है, इसका उस पर कोई असर नहीं हो रहा है। अब किसी भी एंटीबायोटिक का प्रयोग तत्काल बंद कर दें। रोगी की रोग प्रतीकार क्षमता को ठीक कर के ही रोग मुक्त किया जा सकेगा। 
        इसके लिए किसी कुशल और शिक्षित आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से आयुर्वेदिक चिकित्सा लेने पर शीघ्र रोग मुक्ति हो जाएगी। सभव हो तो यहाँ एक सप्ताह के लिए उज्जैन आ जाए, किसी मित्र के निवास पर अथवा साधारण से व्यय पर इंडोर हॉस्पिटल (अंतरंग चिकित्सालय) में रखकर चिकित्सा की जा सकेगी। 
       
    निम्न आयुर्वेदिक चिकित्सा दी जा सकती है। 
     रुद्राक्ष मारिच योग 500 एमजी +
     लघुबसंत मालती   250 एमजी +
     गिलोय सत्व         250 एमजी + 
     सर्व ज्वर हर लोह  500 एमजी 
                       एसी एक खुराक दिन में तीन बार सप्रेटा दूध से 
     सुदर्शन घन वटी   500 एमजी की गोली दो बार रोज 
    अमृता रिष्ट 25 एमएल 
                      बराबर पानी मिलाकर दिन में दो बार रोज खाने के बाद। 
    लगभग एक माह तक औषधि देना चाहिए
    खाने में- दूध (बिना मलाई) ,पपीता, चीकू, सेव (एप्पल) , फलों के रस, सूखे अंगूर या मुन्न्क्का, अंजीर, खूबकला, आदि (सूखे फल पानी में पीस कर),  मूंग दल खिचड़ी, दलीया, और इसी प्रकार का हल्का आसानी से पचने वाला खाना  दें। 
    पानी शुद्ध आर ओ का, अथवा उबला हुआ दें फ्रिज का पानी, अधिक समय रखा पानी हानिकारक है।  
      अपथ्य - रोगी को कोल्ड ड्रिंक्स, मिर्च मसाले वाला खाना, फास्ट फूड, चाय, काफी,  जंक फूड, आदि नहीं दें।

    इस चिकित्सा से एक माह से भी कम में रोग ठीक किया जा सकता है। ओषधि अवश्यकता के अनुसार कम अधिक कर तीन से छह माह भी दी जा सकती है। 

    ध्यान दें कि उपरोक्त चिकित्सा एक सामान्य चिकित्सा है, रोगी के लक्षणो के आधार पर मात्रा और अन्य आवश्यक ओषधियाँ कम या बड़ाई जा सकती हें, इसी कारण सलाह है की किसी चिकित्सक से व्यक्तिगत जांच करवा ही कर उसकी देखरेख में चिकित्सा की जाए।  
     यदि रोगी का यकृत या प्लीहा व्रद्धि हो तो इसके लिए अतिरिक्त ओषधि दी जाना चाहिए।  

    समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें| आपको कोई जानकारी पसंद आती है, ऑर आप उसे अपने मित्रो को शेयर करना/ बताना चाहते है, तो आप फेस-बुक/ ट्विटर/ई मेल/ जिनके आइकान नीचे बने हें को क्लिक कर शेयर कर दें। इसका प्रकाशन जन हित में किया जा रहा है।

    Book a Appointment.

    Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
    Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

    स्वास्थ /रोग विषयक प्रश्न यहाँ दर्ज कर सकते हें|

    स्वास्थ है हमारा अधिकार

    हमारा लक्ष्य सामान्य जन से लेकर प्रत्येक विशिष्ट जन को समग्र स्वस्थ्य का लाभ पहुँचाना है| पंचकर्म सहित आयुर्वेद चिकित्सा, स्वास्थय हेतु लाभकारी लेख, इच्छित को स्वास्थ्य प्रशिक्षण, और स्वास्थ्य विषयक जन जागरण करना है| आयुर्वेदिक चिकित्सा – यह आयुर्वेद विज्ञानं के रूप में विश्व की पुरातन चिकित्सा पद्ध्ति है, जो ‘समग्र शरीर’ (अर्थात शरीर, मन और आत्मा) को स्वस्थ्य करती है|

    चिकित्सक सहयोगी बने:
    - हमारे यहाँ देश भर से रोगी चिकित्सा परामर्श हेतु आते हैं,या परामर्श करते हें, सभी का उज्जैन आना अक्सर धन, समय आदि कारणों से संभव नहीं हो पाता, एसी स्थिति में आप हमारे सहयोगी बन सकते हें| यदि आप पंजीकृत आयुर्वेद स्नातक (न्यूनतम) हें! आप पंचकर्म केंद्र अथवा पंचकर्म और आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रक्रियाओं जैसे अर्श- क्षार सूत्र, रक्त मोक्षण, अग्निकर्म, वमन, विरेचन, बस्ती, या शिरोधारा जैसे विशिष्ट स्नेहनादी माध्यम से चिकित्सा कार्य करते हें, तो आप संपर्क कर सकते हें| 9425379102/ mail- healthforalldrvyas@gmail.com केवल परामर्श चिकित्सा कार्य करने वाले चिकित्सक सम्पर्क न करें|