Rescue from incurable disease

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लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |
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    शिरोधारा Shirodhara 
    शिरोधारा Shirodhara
    आचार्य चरक के अनुसार सिर पर एक आवश्यक समय के लिए तैल रखना (धारण) “मूर्ध तैल” कहा जाता है|
           आचार्य वग्भाट्ट मूर्ध तैल को 4 भागों में बांटा है|  
    1.         शिरोभ्यंग ओषधि तैल से सिर पर अभिषेक Annointing of head with medicated oils.
    2.        शिरो पिचुतेल में डूबा हुआ रुई का पैड शिर पर रखना Keeping a cotton piece dipped in oil over the head.
    3.      शिरोबस्ती -एक विशेष टोपी की सहायता से ओषधि तेल सिर पर रखना. Keeping medicated oil over head in a specialized cap like structure.
    4.  शिर:षेक सिर पर तेल डालना शिरोधारा है| Pouring oil over the head knows as Shirodhara.
    शिर:षेक या शिरोधारा - सिरगर्दन, आँखेंकानऔर नाक के साथ तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) से सम्बन्धित रोगों के लिए, शिरोधारा एक अच्छी चिकित्सा है| शिरोधारा में औषधीय तेल/ दुग्ध, तक्र या मट्ठा (बटर मिल्क), आवला आदि ओषधि क्वाथ आदि का रोगानुसार चयन कर एक सतत धारा के रूप में आँख की भौंहों के बीच माथे पर निर्धारित अवधि के लिए गिराया जाता है|  तदनुसार उसे तैल धारा, तक्र धारा,दुग्ध धारा, आमलकी धारा अदि नामों से जाना जाता है|
    शिरोधारा निम्न रोगों में लाभकारी है|  
                      Å                अनिद्रा रोग के लिए|  It cures long standing insomnia.
                      Å                शिर दर्द और माइग्रेन के लिए| It cures headache and migraine.
                      Å                रक्त चाप अधिक होने पर. It cures hypertension.
                      Å                इससे नेत्र ज्योति बढती है, It Checks blindness.
                      Å                बाल झड़ने से रोकता है It stops fall of hair.
                      Å                बालों को काला लम्बा और मजबूत बनता है| Hair becomes black, long and deep-rooted.
                  Å            चेहरे के पक्षाघात, के साथ पक्षाघात में भी लाभकारी है| It also give very beneficial affect on facial paralysis as well as paralysis also.
                   Å         इससे इंद्रियों और अधिक सक्षम बनती है और प्रभावी ढंग से काम करने लगतीं है| ।Sense organs become more sharp and work effectively.
                       Å             शिरोधार के बाद सुख दायक गहरी नींद आने लगती है|  Induce sound sleep and happiness.
    शिरोधारा प्रक्रिया Procedureशिरोधारा से अभिषेक की प्रक्रिया बिलकुल उसी प्रकार जैसे हम सभी ने भगवान शिव के लिंग पर के ऊपर जल धारा गिरा कर अभिषेक करते देखा है| रोगी को शिरोधारा चिकित्सा के लिए विशेष रूप से तैयार एक मेज पर उसकी पीठ पर लिटा दिया जाता है| फिर उसके सिर और शरीर पर औषधीय तैल से अभिषेक किया जाता है| शिरोधारा में रोगी के सिर को थोडा ऊंचा रखते हुए एक तकिये से आराम दायक स्तिथि में स्थिर किया जाता है|  
    पूर्व में ही औषधीय तेल आदि का रोग के अनुसार चयन कर लिया जाता है|
    अहमदाबाद | यहां छारोड़ी गुरुकुल में शनिवार को 1111 लोगों ने शिरोधारा
    करवाई और गिनीज बुक रिकॉर्ड के लिए दावा पेश किया। इतने ही वैद्य शिरोधारा
     करवाने के लिए यहां मौजूद थे। 50 संत एवं 511 महिलाओं के अलावा 600
     पुरुष शिरोधारा का हिस्सा बने। लगातार 48 मिनट तक शिरोधारा की गई।
     हर व्यक्ति पर 20 लीटर द्रव्य का उपयोग इसमें किया गया। शिरोधारा के इस
     गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड का हिस्सा बनने वाले 20 से 70 साल आयुवर्ग के थे।
    पांच हजार लोगों ने इस पूरे आयोजन को निहारा। मप्र-तमिलनाडु, महाराष्ट्र
     सहित चार राज्यों से वैद्यों को इस आयोजन के लिए आमंत्रित कर बुलाया गया था।
    प्रक्रिया में दो सहायक की जरुरत होती है| उनमें से एक शिरोधरा पात्र को पकड़ कर दो आँख भौंह के बीच बिल्कुल माथे पर पतली धारा के रूप में गिराता जाता है, जबकि दूसरा बर्तन नीचे रखा तेल एकत्र कर इसे फिर से शिरोधारा पात्र में डालता है। यह पात्र मिट्टी, लोह, स्टील, या तांबा से बना होता है इसकी क्षमता 2.5 लीटर, और 15 CM गहराई रहती है| यह पात्र एक धातु की जंजीर से शिर के ठीक ऊपर एक विशेष बने स्टेंड के सहारे लटकाया जाता है| इस पात्र में नीचे की और 1 cm का छिद्र रहता है| पात्र के अन्दर छेद पर एक छोटे अर्ध गोलाकार उल्टा प्याला रखा जाना चाहिए। इस प्याले के उपर भाग पर एक मोटा धागा बांध कर पात्र के छेद से 10 cm लम्बाई तक निकाल दिया जाता है| माथे पर गिरने वाली ओषधि इसीके सहारे माथे पर धार के रूप में गिरती है| इस धागे का अंतिम सिरा माथे से 8 cm या चार अंगुल दूर रखा जाता है|  
    चयनित औषधीय तेल या तरल शिरोधारा पात्र में भरा जाता है, जो माथे के मध्य भाग पर लगातार सूती धागे के सहारे गिरता रहता है इसे नीचे के एक और पात्र में एकत्र कर पुन: ऊपर वाले पात्र में डालता रहता है|   
    यह प्रक्रिया वात विकार के लिए - 50-55 मिनट पित्तज विकार के लिए  40-45 मिनट और कफज विकार के लिए 30-35 मिनट चलती है|
    इस शिरोधारा थेरेपी को दिनों/11 या 21 दिन तक रोग की प्रकृति के अनुसार लिए दिया जाना चाहिए। इसे समान्यत प्रतिदिन प्रात: 10 AM से पूर्व किया जाता है। मोसम के अनुसार समय भी चिकित्सक निर्धारित कर सकता है|
    वर्तमान में शिरोधारा के लिए स्वचालित मशीन उपलब्ध हैं, इनके माध्यम से प्रक्रिया बिना सहायक संपन्न होती है| चिकित्सक के निरिक्षण हेतु पर्याप्त होता है| शिरोधारा के तैल/या द्रव को लगभग मोसम अनुसार सुखोष्ण [लगभग 30 से 35-40 डिग्री सेल्सियस) रखना आवश्यक होता है जो मशीन निर्धारित किया जा सकता है| इसकारण तापमान कम ज्यादा नहीं होने पाटा और लाभ अधिक मिलता है| जबकि सहायको द्वारा बार-बार गर्म करने से ताप एक जैसा रखना मुश्किल होता है| हमारे वात्सल्य पंचकर्म केंद्र उज्जैन मप्र में इस हेतु स्वचालित मशीन (Automatic dispenser) उपलब्ध है|   
    video
    ओषधिय तेल निर्धारण Selection of Medicated Oil
    Ø    माइग्रेन (Migraine),उच्च रक्त चाप (hypertension) अनिद्रा (Insomnia) –
                      चन्दन बला लाक्षादी तैल (Chandan bala Lakshadi tail.)
    Ø    मानसिक विकार Mental disorders –
                    मेध्य रसायन तैल (Medhya Rasayan Oil) .
    Ø    तंत्रिका (Neurological) विकारों जैसे अर्दित  (facial paralysis) और पक्षाघात (paralysis) 
    महानारायण तैल Mahanarayan tail,
    महामाष तैल, (mahamash tail),
    नारायण तैल(Narayan tail),
    दशमूल तैल (Dashmuladi tail,)
    प्रसरनी तैल (Prasarni tail).
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