Rescue from incurable disease

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    तनाव-नीद-और मधुमेह(डायबिटीज) 

    तनाव से नीद या नीद से तनाव होगा तो होगी
     "डायबिटीज" 
    वेसे ही जेसे चाकू खरबूजे  पर पड़े या खरबूजा चाकू पर कटना खरबूजे को ही होता हे ।
    नोकरी हो या व्यवसाय,सभी में  काम का बोझ, जबाबदेही या जिम्मेदारी का दबाब लगातार  बना रहता हे। इस पर "अधिकारी" का दबाब या व्यापारी को घाटा-या क़ानूनी मामले/ या  प्रतिद्वंदिता। कुछ भी हो मानसिक तनाव बढ जाता हे इससे नींद भी प्रभावित होती हे, और यह  डायबिटीज की और ले जाता हे ।   

    अब दुसरे पहलू  से सोचें,
     किसी भी कारण से डायबिटीज हो गई हे, इस 

    डायबिटीज के प्रभाव शरीर पर बहुत ही नकारात्‍मक पड़ता हैं यह शरीर को आंतरिक और बाहरी तौर पर बहुत नुकसान पहुंचाता है। 


    इसके कारण डायबिटीज के मरीजों को रात को सोने में भी तकलीफ होने लगती है। पर क्या डायबिटीज आपकी नींद को प्रभावित करता है। यह वाकई जानने के लिए एक दिलचस्प मुद्दा है कि कैसे डायबिटीज हमारी नींद को प्रभावित करती है। 
    समझना होगा कि डायबिटीज मरीजों की नींद भी डायबिटीज से प्रभावित होती है।


    यह तो सभी जानते ही हैं डायबिटीज का मरीजों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और ऐसे में नींद पर भी प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। 
    आयुर्वेद के स्वास्थ्य नियमों के अनुसार, सबको कम से कम छह घंटे सोना चाहिए, और बच्चों को कम से कम आठ घंटे सोने की सलाह दी जाती है, लेकिन यदि आप हर दिन किन्हीं कारणों से अपनी नींद पूरी नहीं कर पाते या फिर आप छह घंटे से कम सो रहे हैं तो इसका एक कारण हो सकता है कि आप डायबिटीज की चपेट में आ गए हैं। दुसरे शब्दों में आपको डायबिटीज हो गई हे या होने जा रही हे।


    शोधों में भी साबित हो चुकी है कि जो लोग प्रतिदिन छह सात घंटे से कम  नींद लेते हैं उनके टाइप टू डायबिटीज की चपेट में आने की संभावना अधिक हो जाती है। 

    जो लोग नींद पूरी नहीं कर प़ा रहे हें, या फिर जिन लोगों को रात में बार-बार उठना पड़ता है या नींद खुल जाती(तनाव आदि से) है, इसका अर्थ है कि उनकी डायबिटीज बढ़ रही है। 
     जिन लोगों को डायबिटीज होती है उन्हें बहुत बार पेशाब के लिए जाना पड़ता है और यही समस्या रात को भी रहती है, ऐसे में नींद का बार-बार टूटना या नींद का पूरी ना हो पाना डायबिटीज का कारण हो जाता हे । 


    कई लोगों को बढ़ते शुगर लेवल के कारण नींद नहीं आती या फिर उनके शरीर के कुछ हिस्सों जैसे कमर में, सिर में इत्यादि जगहों पर दर्द होने लगता है जिससे डायबिटीज मरीज सारी रात करवटें बदलते रहते हैं। 

    बढ़ते डायबिटीज के कारण मरीज को सारा दिन थकान रहने लगती है जिससे उसे दिन में बहुत नींद आती है और दिन में अधिक सोने के कारण रात की नींद भी ठीक से पूरी नहीं हो पाती। 
    शोधों में भी साबित हुआ है कि जो लोग बहुत ज्यादा या जो लोग बहुत कम सोते हैं उनके हार्मोंस में असंतुलन पैदा हो जाता है, जिससे उनके मेटाबॉजिल्म पर भी बुरा असर पड़ता है, जिसके कारण नींद भी सही तरीके से पूरी नहीं हो पाती।

    दिलचस्प बात यह भी हे की डायबिटीज के कारण भूख भी बहुत लगने  लगती है जिससे आपको खाना खाने के कुछ ही देर बाद फिर से भूख लगने लगती है, जबकि कई डायबिटीज मरीजों को रात को खाना खाने के बाद भी देर रात को भूख लग जाती है जिससे उनकी नींद में भी खलल पड़ता है। 

    शोधों में ये भी साबित हुआ है कि जो लोग छह घंटे की नींद नहीं लेते उनको भी डायबिटीज की संभावना बढ़ जाती है यानी उन्हें ग्लूकोज़ फास्टिंग को प्रभावित करने वाली बाधाओं के उत्पन्न होने का डर रहता है।
    कहने का अर्थ यह हे की तनाव से नीद या नीद से तनाव होगा तो होगी
     "डायबिटीज" 
    वेसे ही जेसे चाकू खरबूजे  पर पड़े या खरबूजा चाकू पर कटना खरबूजे को ही होता हे ।
    याने सीधा सा मतलब हे नीद या तनाव कुछ भी पाहिले हो  डायबिटीज को निमत्रण मिल ही जाता हे।
    अतः सावधान!
    यदि आपको डायबिटीज है और आपको ठीक तरीके से नींद नहीं आती है। या तनाव हे और नीद की कमी हो रही हे, तो आपको चाहिए कि आप अपनी इस समस्या को दूर करने के लिए प्रतिदिन एक्सरसाइज करें प्रतिदिन पैदल चलें, और साथ ही सबसे लाभदायक बात "ध्यान"मानसिक जप" और 'योग"का सहारा भी लें यह तनावों को दूर करेगा।साथ ही हेल्दी डायट को भी अपनाये । इसके साथ ही पानी और तरल पदार्थों को अधिक मात्रा में लें। एसा करने से आप  डायबिटीज से पूर्ण मुक्ति प़ा जायेंगे या उसको नियंत्रण में रख सकेंगे । 
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