Rescue from incurable disease

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लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |

हॉस्पिटल एक्वायर्ड डिसीज

क्या आप जानते हें की हॉस्पिटल एक्वायर्ड डिसीज से बहुत सारे लोग विशेषकर बच्चे, पीड़ित हो जाते हें | 
अक्सर हम स्वयं या अपने बच्चों को लेकर, चिकित्सा के लिए, किसी रोगी मित्र या सम्बन्धी को देखने के लिए चिकित्सालय  जाते रहते हें | जब जाते हें तो कोई रोग नहीं होता या यदि किसी रोग की चिकित्सा के लिए जाते हें, वह तो ठीक हो जाये पर अन्य रोग हो जाता हे,जी हाँ एसा होता हे, कारण प्रेत और पिशाच वहां अधिक सक्रिय हो सकते हें।यह बात मन में उठाना स्वाभाविक हे की  क्या प्रेत और पिशाच होते हें? ।
 सामान्यतय: एसा उस अस्पताल में जाने से हुआ हे और यह पता भी नहीं चलता, पर एसा हो सकता हे  "यह ही हॉस्पिटल एक्वायर्ड डिसीज या रोग हे" जो वहां मोजूद न दिखने वाले इन भूत प्रेत,पिशाच कहे जा सकने वाले  विषाणु परजीवी,आदि के द्वारा विशेषकर छोटे बच्चों को उनमे रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी के कारण हो जाता हे | 
वास्तव में होता यह हे की चिकित्सालयों में सभी प्रकार के रोगी आतेजाते रहते हें जो अनजाने में अपने रोगों के कीटाणु थूंक,उलटी,स्पर्श,मल.मूत्र घाव का रक्त या पूय (पस) ,जूते, आदि- आदि अनेक माध्यमो से वहा छोड़ जाते हें| ये जीवाणु/विषाणु वहा आनेजाने वाले व्यक्तियों में भी साँस,स्पर्श आदि से पहुच कर शरीर में बढने लगते हें | यदि रोगप्रतिकारक शक्ति कम हुई तो रोग पैदा कर देते हें अत नया रोग समयानुसार उत्पन्न हो जाता हे ,यह रोग कहाँ से आया पता भी नहीं चलता | वेसे अस्पतालों में साफ़ सफाई का भी दयां रखा जाता हे पर इसके वावजूद भी हर समय,हर स्थान पर साफ करना संभव नहीं होता| 
अत: जरुरी यह हे की आप स्वस्थ बच्चो को नहीं ले जाये,और स्वयं भी विशेष ध्यान रखें जिस प्रकार वहां का स्टाफ स्वयं का रखता हे|  वहां कुछ खाए पिए नहीं बेठे नहीं अधिक देर न रुकें.मूत्रालयों-या शोचालयों का प्रयोग न करें या अधिक सावधान रहे|  बच्चो को हमेशा गोद में ही रखें ,किसी भी परिस्थिति में नीचे जमीन या सार्वजानिक बेंच कुर्सी पर नहीं बिठाएं | अस्पताल के पार्क से भी दूर रखें .क्योकि उन स्थानों का प्रयोग भी सतत रोगियों के पास आने जाने वाले लोग करते हें| 


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