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  • विश्व मलेरिया दिवस 25 अप्रैल को |

    विश्व मलेरिया दिवस 25 अप्रैल को |
    हमारे देश भारत में हर साल करीब एक करोड़ लोग मलेरिया की चपेट में आते हैं. और इनमें से 40 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है। 

    विश्व स्वास्थय संगठन (w h o) का कहना है की भारत में 111 करोड़ लोग इससे प्रभावित हैं और 28 करोड़ में उच्च जोखिम है| 

    जबकि भारत शासन स्वस्थ्य विभाग केवल 8.88 लाख मलेरिया केस होना बताता है| 

    सीधा सा अर्थ है की केवल 7% केस ही कनफर्म्ड है|

    संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने विश्व मलेरिया दिवस पर एक रिपोर्ट जारी की है, जिसके अनुसार हर साल लगभग 8.5 लाख लोग मच्छर की मार से मारे जाते हैं। इनमें से 90 प्रतिशत लोग अफ्रीका के सहारा क्षेत्र में मलेरिया से मारे जाते हैं।

    ब्रिटिश साइंस पत्रिका 'दी लांसेट' के अनुसार कि 2010 में 46800 भारतीयों की मौत की वजह मलेरिया बना था। इनमें से 4800 पांच साल से कम उम्र के थे।

    मलेरिया के बारे में डब्ल्यूएचओ की एक स्टडी कहती है कि साल 2000 से अब तक मलेरिया से होने वाली मौतों में 25 फीसदी से ज्यादा की कमी आई है। इसमें कहा गया है कि मलेरिया से सबसे ज्यादा प्रभावित 99 में से 50 देश 2015 तक मलेरिया के केसेज में 75 फीसदी तक की कमी लाने के रास्ते पर हैं। स्टडी के मुताबिक, इस उपलब्धि के बावजूद हकीकत यह है कि आज भी दुनिया में मलेरिया से हर साल करीब छह लाख 60 हजार लोगों की मौत हो जाती है। इनमें से ज्यादातर बच्चे होते हैं। अफ्रीका के उप सहारा क्षेत्र में आज भी मलेरिया की वजह से सबसे ज्यादा बच्चों की जान जा रही है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि दुनिया में हर साल मलेरिया के करीब 20 करोड़ नए केस सामने आते हैं। साधनों की कमी के कारण इनमें से बहुतों को स्तरीय इलाज तक नहीं मिल पाता।


    मलेरिया' ठण्‍ड (कंपकपी) के साथ आने वाला ज्वर या बुखार जिसमें सरदर्द, उलटी और अचानक तेज सर्दी लगना, और सारे शरीर में दर्द होता है| 


    यह संक्रमित मादा एनाफ़िलीज मच्‍छर द्वारा काटने पर ही होता है। मच्‍छर के काटने के 10-12 दिनो के बाद उस व्‍यक्ति में मलेरिया रोग के लक्षण प्रकट हो जाते हैं। 

    अक्सर लोग इसके इलाज में लापरवाही वरतते हें, एक या कुछ क्लोरोक़ुइन आदि मलेरिया डोज और पेरासिटामोल लेने से आराम मिलता है पर रोग ठीक नहीं होता जबतक की पूरा इरेडिकेशन डोज नहीं लिया जाये जो की लगभग 10 से 15 दिन का हो सकता है| 

    दवा के असर से मलेरिया पेरासाईट लीवर और स्प्लीन (तिल्ली ) में छुपकर धीरे धीरे अपनी संख्या बडाता है और बार बार मलेरिया के लक्षण बुखार पैदा करता रहता है| एसा कई वर्षों तक भी चलता रह सकता है| इसलिए जरुरी है की एक बार मलेरिया हो जाये तो पूरी चिकित्सा लें|

    इसमें एक बात और जानने की है की यदि रोगी ने अपने रक्त की जाँच का सेम्पल दिए बिना यदि कोई दवा सेवन करली है तो जाँच में मलेरिया पेरासाईट मिलता ही नहीं क्योंकि वह तो पाहिले ही लीवर आदि में पहुँच गया है| और रोगी समझता है की उसे मलेरिया है ही नहीं|


    नोट- मलेरिया से बचने का आज केवल एक मात्र सबसे अच्छा तरीका है, मच्छर दानी का प्रयोग|

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