Rescue from incurable disease

Rescue from incurable disease
लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |
  • Home
  • Contact Us
  • About Me
  • Q & A
  • Article's स्वास्थ्य लेख
  • Panchakarma(पंचकर्म)
  • Common Article
  • Specific article (विशेष लेख)
  • VIDEO
  • लीवर यकृत या जिगर की क्षति का मुख्य कारण -देर तक सोना देर से जागना


     क्या आप अपने स्वास्थ्य के बारे में ख्याल रखना चाहेंगे
    और यह केवल आपके ही लिए नहीं उनके लिए भी जो आपको प्यार करते हें, आपकी परवाह रखते हें। अपने स्वस्थ का ख्याल रख कर आप अपनों को आपकी बीमारी से होने वाले कष्टों से भी बचा सकेंगे। इसे कष्ट जो संभवतय आप देख या भोग चुके हों।



    जिगर शब्द को जब भी हम सुनते हें, तब 'जिगर वाला'आदि विशेषणों के कारण मनुष्यों की हिम्मत के बारे में विचार आता हे। पर अधिकतर नहीं जानते की ये जिगर वास्तव में क्या हे,और क्यों इस विशेषण से जोड़ा गया हे।
    मानव ही नहीं प्राणियों के शारीर का एक महत्त्व पूर्ण और बहुत आवश्यक अंगो में एक हे लीवर(LIVER) हिंदी में यकृत भी कहते हें। उर्दू/अरबी में ही इसका नाम जिगर हे।
    यह शारीर के सीधे(राईट) हिस्से में स्तिथ हे(चित्र देखें)।
    यह शरीर का महत्वपूर्ण और अति आवश्यक अंग इसलिए भी हे क्योंकि इसके क्षतिग्रस्त हो जाने या नष्ट होने से पर जीवन असंभव होता हे।
    यह समस्त प्राणियों में मेटाबोलिस्म (पाचन-पाचन और इससे सम्बन्धित समस्त क्रियाये) शारीर में रक्त की आपूर्ति/शारीर पोषण का मुख्य और एक मात्र आधार हे। यह ही रक्तचाप,से लेकर अन्य समस्त क्रियाओ के लिए सीधे हे जिम्मेदार और आवश्यक हे।
    शरीर के इस महत्व पूर्ण भाग को क्षतिग्रस्त होने से बचाना जीवन जीने का एक मात्र रास्ता हे।
    केसे- ध्यान रखे हम इसका ?

    लीवर यकृत या जिगर की क्षति का मुख्य कारण जीवन शेली का सही न होना हे।


    1. बहुत देरतक सोना, और बहुत देर से जागना इसका एक बड़ा  मुख्य कारण होता हे।

    2. सुबह में पेशाब नहीं आना या नहीं करना । 

    3. बहुत ज्यादा खाना (अति भोजन)खाते रहना ।

    4.  व्रत या लंघन के बाद अधिक और गरिष्ट खाना लीवर को हानी करता। यह अचानक  लीवर पर पचाने के  दबाव बनने से होता हे।

    5.  अधिक दवाये (मेडिसिन्स) खाते रहना । 


    6. बाज़ार की बने  खाद्य पदार्थो का अधिक सेवन-  बाज़ार में उन खाद्य पदार्थो  परिरक्षकों  (preservatives)  सहायक मिश्रण (additives ), खाद्य रंग( food coloring), और नकली मीठापन ( artificial sweetener) के शारीर में अधिक प्रवेश से।

    7. अधिक मात्रा    में  खाना पकाने के तेल.( Consuming unhealthy cooking oil.) का उपयोग। या अधिक प्रतिदिन तली हुई खाद्य पदार्थ खाते रहना। चाहे आप "फिट"भी क्यों न हों।

    8. एक साथ अधिक खाना या खाद्य पदार्थ की अधिकता  भी लीवर पर पचाने का बोझ डालती हे।

     कच्चे या पकाया हुआ खाना भी शरीर के लिए आवश्यक मात्र में, 3-5 भागों में ( कई बार) खाया जाना चाहिए।
    पूर्व में खाया हुआ खाना पचाने (या केलोरी खर्च) किये विना खाने को रोकना चाहिए। हम सिर्फ एक अच्छी दैनिक जीवन शैली और खाने की आदतों को अपनाने की जरुरत हे। हमारे शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं की हम अवशोषित करने के लिए अतिरिक्त और अनावश्यक खाने से छुटकारा पा लें।क्योकि यही बात हमारे लीवर पर पचाने का बोझ डालती हे और यही बोझ लीवर को हानी पंहुचा देता हे।

    एक अच्छी जीवनशेली अपनाना इसलिए जरुरी हे क्योंकि 
    शारीर की प्राक्रतिक क्रियाओ के अनुसार  शाम 9 बजे - 11  का समय अनावश्यक / जहरीले रसायनों जो हमारे   शारीर में दिन भर में एकत्र हुए हें को नष्ट करने (Detoxification ) के लिए है। इस समय 
    आराम करने या संगीत सुनने बचे को होमवर्क कराने,आदि में  इस समय अवधि के खर्च करना नहीं चाहिए। यह स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा। टहलना घूमना खेलना आदि लाभकारी हे।

    रात्रि 11 रात्रि  १ तक का समय जिगर detoxification प्रक्रिया में रहता हे इस समय  एक गहरी आदर्श  नींद की जरुरत होती हे ताकि यकृत को अपना कार्य करने हेतु पूरा और अधिक मात्रा  में रक्त संचार (प्रवाह) मिल सके ।  [जागते रहने से (रक्त मात्र बटने से) दुसरे शरीर  के अन्य हिस्सों को अधिक  मिलती रहती हे ]

    जल्दी एक सुबह - ३ बजे तक पित्त में detoxification प्रक्रिया होती हे यह समय भी एक आदर्श एक गहरी नींद का हे।
    सुबह 3 - ५ का समय फेफड़ों में detoxification का हे,  इसलिए कभी कभी इस समय स्वास - खांसी से ग्रस्त मरीजों के लिए विशेषकर Detoxification प्रक्रिया की विशेष जरुरत होती हे। 

    प्रात (सुबह) ५से ७ का समय बृहदान्त्र के , detoxification का हे  आप को  अपने आंत्र को खाली (शोच आदि द्वारा) करना चाहिए  चाहिए,इस समय सोना हानिकारक होता हे।
    7 सुबह 9 बजे: का समय छोटी आंत में पोषक तत्वों का अवशोषण का हो जाता हे आप,इस समय नाश्ता कर कर लें । बीमार नाश्ता 7:30 से पहले कर लें यह बात फिट रहने के चाहत  वालों के लिए बहुत लाभकारी है। जो हमेशा सुबह का नाश्ता नहीं लेते उन्हें अपनी आदतों में परिवर्तन करना चाहिए।
    बहुत देर रत तक सोना और बहुत देर से जागने के कारण अनावश्यक रसायनों  (detoxification ) को हटाने की प्रक्रिया को बाधित करेगा। 
    यहाँ इन कारणों के अतिरिक्त और भी कई कारण लीवर को क्षतिग्रस्त करने के हो सकते हें जेसे शराब सेवन,कुपोषण,पानी की कमी आदि की चर्चा पाहिले भी की जा चुकी हे शामिल नहीं किये हें।(पूर्व पोस्ट देखें)।


    --------------------------------------------------------------------------------------------------
    समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें|
    Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
    Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

    स्वास्थ /रोग विषयक प्रश्न यहाँ दर्ज कर सकते हें|

    स्वास्थ है हमारा अधिकार

    हमारा लक्ष्य सामान्य जन से लेकर प्रत्येक विशिष्ट जन को समग्र स्वस्थ्य का लाभ पहुँचाना है| पंचकर्म सहित आयुर्वेद चिकित्सा, स्वास्थय हेतु लाभकारी लेख, इच्छित को स्वास्थ्य प्रशिक्षण, और स्वास्थ्य विषयक जन जागरण करना है| आयुर्वेदिक चिकित्सा – यह आयुर्वेद विज्ञानं के रूप में विश्व की पुरातन चिकित्सा पद्ध्ति है, जो ‘समग्र शरीर’ (अर्थात शरीर, मन और आत्मा) को स्वस्थ्य करती है|

    चिकित्सक सहयोगी बने:
    - हमारे यहाँ देश भर से रोगी चिकित्सा परामर्श हेतु आते हैं,या परामर्श करते हें, सभी का उज्जैन आना अक्सर धन, समय आदि कारणों से संभव नहीं हो पाता, एसी स्थिति में आप हमारे सहयोगी बन सकते हें| यदि आप पंजीकृत आयुर्वेद स्नातक (न्यूनतम) हें! आप पंचकर्म केंद्र अथवा पंचकर्म और आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रक्रियाओं जैसे अर्श- क्षार सूत्र, रक्त मोक्षण, अग्निकर्म, वमन, विरेचन, बस्ती, या शिरोधारा जैसे विशिष्ट स्नेहनादी माध्यम से चिकित्सा कार्य करते हें, तो आप संपर्क कर सकते हें| 9425379102/ mail- healthforalldrvyas@gmail.com केवल परामर्श चिकित्सा कार्य करने वाले चिकित्सक सम्पर्क न करें|