Rescue from incurable disease

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  • इंसटेंट नाश्ता भारतीय फास्ट फूड -- सत्तू सर्व श्रेष्ठ क्यों?

    अल्पाहार में दादी नानी का परंपरागत इंसटेंट नाश्ता भारतीय फास्ट फूड -- सत्तू सर्व श्रेष्ठ क्यों?
      हमारे देश में अल्पाहार ओर तीर्थ यात्रा आदि की कठिन परिस्थितीयों में आहार के एक विकल्प की तरह  ही,  सत्तू का प्राचीन काल से उपयोग होता रहा है, आज सत्तू की उपयोगिता भले ही महत्वपूर्ण हो, लेकिन वर्तमान में इसके चाहने वाले कम होते जा रहे हैं। पीत्जा, बर्गर के युग में अल्पाहार के तौर पर सत्तू की कल्पना भी तथाकथित प्रगतिशील विद्वानो को बेजा नजर आती है।

     सत्तू चूँकि धान्य से तैयार किया जाता है, इसलिए इसमें रेशे,
     कार्बोहाईड्रेट्स, प्रोटीन, स्टार्च तथा खनिज पदार्थ होते हैं।
    सभी अनाजों को गलाने से अंकुरण की प्रवृत्ति आ जाती है,
    इससे अधिक लाभकारी ओर विटामिन ई आदि सक्रिय होकर
     शरीर को पूरा लाभ देने लगते हें।  धान्यों को भूनने से
    सेल्यूलोज़ टूट जाता है, सत्तू में लघुता भी आती है,
    जिससे मनुष्यों को पचा सकना आसान हो जाता है।
    इसीलिए यह फेट रहित सत्तू,
    मोटापे और डायबिटीज को नष्ट करने में सहायक होता है।


      सत्तू एक इंडियन इंस्टेंट फास्ट फूड भी है, जो तत्काल शक्ति प्रदान करता है। यह सोचना की इसके सेवन करने वाले को लोग 'पिछड़ा' कहंगे तो उनकी बुद्धि पर तरस ही आता है।  अब यह भी सिद्ध हो गया है कि यह शरीर के पोषण के साथ-साथ मोटापा और डायबिटीज को भी सत्तू नियंत्रित रखता है।
        मौजूदा समय में सत्तू की श्रेष्ठता को समझने का समय अब आ गया है, कुछ दिन पूर्व ही हमारे एक परिचित भारत से सत्तू का पेकेट लेकर  स्टेट्स गये थे, वहाँ उनके संपर्क में एक डाइटीशियन [भोजन विशेषज्ञ] आईं उन्होने इसका प्रयोग कर लाभदायक पाकर इसकी सलाह देनी शुरू कर दी है, कुछ ही समय में हमको देखने मिल सकता है, कि सत्तू भी एक नए नाम से इंसटेंट फास्ट फूड के रूप में किसी भी नाम से पेटेंट होकर हमारे देश में भी बिकेगा ओर तब हमारे कथित प्रगतिशील इसके प्रति दीवाने हो जाएंगे! ओर कई लोग इससे करोड़पति भी हो गये [समाचार देखें] ओर भी हो जाएंगे।  हालांकि कई लोग यह नहीं जानते कि इस प्रकार के कई फास्ट फूड चना, जों, ओर गेहूं से ही बन रहे हें।

            इसको बनाना ओर सेवन इतना आसान है,  कि घर पर ही बढ़ी आसानी से बनाया जा सकता है, ओर कहीं भी किसी भी परिस्थिति में इसे खाया जा सकता है।

           सत्तू की आयुर्वेदिक परिभाषा के अनुसार किसी भी धान्य को भाड़ में भूनकर तथा पीसकर सत्तू बनाया जा सकता है। इसमें गेहूँ, जौ, चना एवं चावल आदि शामिल हैं। बस आपको गहूँ, चना, जों, [ओर चावल को भी स्वाद व जरूरत के अनुसार] को बराबर [या 3:2:1 आदि न्यूनाधिक] लेकर अलग अलग पहिले चौबीस घंटे पानी में गलाएँ ,फिर छाया सूखा कर हल्के नमी युक्त अनाजों को बिना घी या तेल के कढ़ाई में भून कर  एक साथ मिलाकर पीस लें, सत्तू तैयार है। कुछ लोग चने आदि से छिलका निकालकर या चने की दाल का प्रयोग भी करते हें पर यह अधिक उपयोगी नहीं होता, छिलके सहित चना जों अधिक उपयोगी होता है, इसी प्रकार चावल भी धान वाला या विना पोलिश वाला ही लेना चाहिए। 
         सत्तू चूँकि धान्य से तैयार किया जाता है, इसलिए इसमें रेशे, कार्बोहाईड्रेट्स, प्रोटीन, स्टार्च तथा खनिज पदार्थ होते हैं। सभी अनाजों को गलाने से अंकुरण की प्रवृत्ति आ जाती है, इससे अधिक लाभकारी ओर विटामिन ई आदि सक्रिय होकर शरीर को पूरा लाभ देने लगते हें।  धान्यों को भूनने से सेल्यूलोज़ टूट जाता है, सत्तू में लघुता भी आती है, जिससे मनुष्यों को पचा सकना आसान हो जाता है। इसीलिए यह फेट रहित सत्तू, मोटापे और डायबिटीज को नष्ट करने में सहायक होता है। इससे तत्काल पूर्ण शक्ति [केलोरी] मिल जाती है, पर चर्बी जमा नहीं होती। बस जब भी सत्तू खाना हो तब इसमें पानी जिसमें गुड़ या शक्कर  घुला हो इतना मिलाएँ जिससे गाढ़ा पेस्ट ज़ैसा बन जाये, सत्तू खाने के लिये तैयार है।  डायबिटीज के रोगी चाहें तो गुड़ या शक्कर के स्थान पर नमक भी डालकर, या शुगर फ्री से स्वादिष्ट बना सकते हैं। 
          इंसटेंट फास्ट फूड की तरह प्रयोग करेने के लिए आपको सिर्फ इतना ओर करना है, की तैयार सत्तू में आवश्यकता के अनुसार पिसी चीनी[शक्कर], या गुड, या शुगर फ्री, या नमक पहिले से ही स्वाद अनुसार मिला कर रखना होगा- बस लीजिये तैयार हे सत्तू - बस पानी मिलाये ओर खाएं। आकर्षण या स्वाद के लिए ओर भी प्रयोग करना चाहें तो चाकलेट, आदि मिलाये ओर बच्चो के लिए भी आकर्षण बनाएँ। पर याद रखें की केलोरी जरूर अधिक हो जाएगी, जिन्हे  इसकी जरूरत हो, जैसे बच्चों को तो कोई हर्ज भी नहीं। 
            मोटापे में बार बार भूख लगती है, ऐसे समय पर इस जौ एवं चने से निर्मित सत्तू का खाने से भूख तो शांत हो ती ही है, साथ ही लंबे समय तक क्षुधा [खाने की इच्छा] भी शांत होती है, इसी के कारण बार बार खाने से मोटापा बढ़ जाता है।
         साधारणतया सत्तू में जौ होने से यह पाचन में हल्का होता है, इससे शरीर को छरहरा बनता हैं। जल के साथ घोलकर पीने से या शक्ति या ताकत के साथ,  मल को प्रवृत्त करने वाले, रुचिकारक, श्रम, भूख एवं प्यास को नष्ट करने वाला  होता है।  जो लोग प्रतिदिन धूप में अत्यधिक थकाने वाला श्रम करते हैं, उन्हें सत्तू का प्रयोग करना भी श्रेष्ठ होता है। पसीना जिन्हें अधिक आता है। इसी कारण हमारे देश में तीर्थ यात्रियों कि पहली पसंद है।
          आयुर्वेद में इसे खाने के नियम भी बनाऐ गये हें।
    1. भोजन के बाद कभी भी सत्तू का सेवन ना करें। सत्तू स्वयं पूर्ण भोजन हे इसलिए इसके बाद भोजन करना अति भोजन होने से हानी कारक होगा। 
    2.  अधिक मात्रा में सत्तू ना खाएँ। कम मात्रा ही पर्याप्त होती है, इसके बाद पानी अधिक पिया जाता है, जिससे इसमें चना, जों आदि पेट में जाकर फूल जाते हें इस कारण अधिक मात्रा से पेट में दर्द हो सकता है। 
    3. रात्रि में सत्तू ना खाएँ। ऊपर लिखे कारण से ही। 
    4.  पानी अधिक मात्रा में ना मिलाएँ। पतला सत्तू पेट में अधिक देर नहीं रह पाएगा इससे पेट में मिलने वाले पाचक रस कम या नहीं मिल पाएंगे जो लाभकारी नहीं होगा। 
    5. सत्तू सेवन के बीच में पानी ना पिएँ। 
    आयुर्वेद के तीन उपस्तंभ आहार, निद्रा ओर ब्रह्मचर्य के बारे में शीघ्र ही । 
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