Rescue from incurable disease

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  • क्या आप जानते हें? रेलवे पटरी पार करने पर जान का जोखिम बाद में भी हो सकता हे?

    क्या आप जानते हें? रेलवे पटरी पार करने पर जान का जोखिम बाद में भी हो सकता हे?
     रेलवे पटरी पार करने या प्लेटफार्म से कूद कर दुसरे प्लेटफार्म पर जाने से जान का जोखिम तत्काल ही नहीं बाद में भी हो सकता हे?
    शायद सभी को आश्चर्य हो रहा होगा। पर यह सच हे। जान का जोखिम एक दिन बाद से कई महीनो तक भी रह सकता हे, और यह भी केवल आपको ही नहीं आपके बच्चों या परिवार के अन्य सदस्यों को भी आपका यह पटरी पार करना, जोखिम का कारण हो सकता हे। 
    यह केसे ?
    सामान्यतय रेलवे के नियम अनुसार रेलवे पटरी पार करना या प्लेटफार्म से कूद कर दुसरे प्लेटफार्म पर जाना अपराध हे,  इसमें तत्काल तो जान का जोखिम रहता ही हे। हो सकता हे, आप बुद्धि मानी एवं चतुरता से पटरी पार कर दुसरे प्लेटफार्म पर चढ़ भी जाते हे , तो भी अनजाने ही आप मोत का सामान साथ लिए ही जाते हें, और आपको पता भी नहीं होता। और यह मोत का सामान अनजाने ही अपने बच्चों और उन्हें जिनसे आप प्यार करते हें उन्हें भी दे देते हें।

    इस बात को समझने के लिए हमारे रेलवे स्टेशनों की कल्पना करना होगी।

    हमारी रेलगाड़ियों में मल-मूत्र  विसर्जन का कार्य बिलकुल बिंदास किया जाता हे। अर्थात शोचालयों का प्रयोग स्टेशन पर खड़ी गाडियों सहित हर समय किया जाता हे। इस प्रकार उन पर मल-मूत्र, थूक ,जूठन,आदि सभी प्रकार की गन्दगी, सतत गिरती रहती हे। पटरी पर डाली गई गिट्टी में वह पूरी तरह से मिलती  रहती हे , गिट्टी न भी हो तो भी  सफाई ठीक न हो पाने, से रोगों के कीटाणु / विषाणु आदि प्रचुर मात्रा में पनपते रहते हें। ये सर्व प्रथम जूते पर लग जाते हें, जब वह व्यक्ति ऊँचें प्लेटफार्म पर चडता हे, तब उसे हाथ का सहारा लेना होता हे, इस प्रकार से पेरों से कीटाणु प्लेटफार्म पर और वहां से हाथो पर आ जाते हें, यही नहीं शरीर के अन्य भागों, कपड़ों आदी  पर भी पहुच जाते हें। साथ ही आपके द्वारा उठाये सामान सहित प्रत्येक उस बस्तु में पहुच जाते हें जिनका संपर्क इन सब से होता हे। आपको हाथों एवं शरीर के किसी भी अंगो,कपड़ो और इन सामानों से अच्छी तरह धोने का समय नहीं होता, अपने उन्ही हाथो से अपने नाक,आँख, मुहं,का स्पर्श मात्र उन कीटाणुओ को आपके शारीर में आसानी से पंहुचा देता हे, बच्चो को उठाने  से लेकर किसी मित्र से हाथ मिलाने तक आप सतत इन्हें दूसरों को भी बाँट देते हें। 

    शरीर के अन्दर पहुचकर ये जीवाणु  हॉस्पिटल एक्वायर्ड डिसीज की तरह ही अपनी गति विधि प्रारम्भ कर देते हें। इससे तत्काल होने वाले सर्दी,जुकाम,बुखार ,टिटेनस से लेकर दो तीन या अधिक माह बाद होने वाले महारोग जेसे हेपेटाईटिस, तपेदिक(टी बी ) जेसे रोग लगकर हमारेऔर अन्यों के लिए घातक सिद्ध हो जाते हें, और हम यह जान ही नहीं पाते की वे उस एक भूल का परिणाम हे। वास्तव में ये ही वे अज्ञात प्रेत और पिशाच होते हें   जो मोत  का सामान बन रेलवे स्टेशन से साथ ले आये थे, और हमको पता भी नहीं होता।
    अगली बार जब भी कभी पटरी पर करना हो तो यह जरुर सोचियेगा, चाहे रेलवे आपको दंड न दे पाए, और आप तत्काल जोखिम से बच भी जाएँ तो भी जोखिम बना ही रहेगा।
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    समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें|
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