Rescue from incurable disease

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लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |
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  • क्या मधु मेह का रोगी धूम्रपान से अधिक जोखिम उठता है?

    क्या मधु मेह का रोगी धूम्रपान से अधिक जोखिम उठता है?
    यू तो धूम्रपान समान्यत: ही हानी कारक होता है, पर जो लोग मधुमेह के मरीज होते हुए भी धूम्रपान करते रहते हैं,उन्हे ह्रदय रोग की आशंका अधिक हो जाती है। होता यह है की उनकी रक्त वाहिनियों की अंदरूनी दीवारों पर प्लेक जमने लगता है जिससे रक्त संचार अधिक बाधित होने लगता है कि रोगी के ह्रदय को पोषक रक्त कम मिल पाता है, ह्रदय को पर्याप्त ऑक्सीज़न न मिलने से ह्रदय की शरीर को रक्त भेजने की क्षमता मेँ कमी आती है, यह कमी एंजाइना [ ह्रदय स्थान का दर्द] ओर हार्ट अटैक हो जाता है। कुछ मरीजों को हृदयघात [हार्ट फेल] की समस्या भी हो सकती है,या उससे उन्हें जिन्दगी भर के लिए कोमा की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
     सिगरेट पीने से किसी भी व्यक्ति का शुगर लेवल अक्सर एकाएक उपर हो जाता है, और अगर मधुमेह का कोई मरीज धूम्रपान करता है तो उसके शुगर लेवल यानि रक्त शर्करा के स्तर में तुरंत ऐसा उछाल आता है जो उस मरीज को बहुत नुकसान पहुंचाता है। उसके शरीर की सारी मेटाबोलिक प्रक्रिया तहस नहस हो जाती है।
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    समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें|

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