Rescue from incurable disease

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लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |
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          Heart Burning, Sour and bitter vomiting,
    उत्तर -
    खट्टी और कड़वी उल्टी होना, ह्रदय स्थान पर जलन होना, 

     ये सारे लक्षण अपचन के हें। लगातार कुछ न कुछ और वह भी जंक फूड (या आयुर्वेद अनुसार  मिथ्याहार करना) खाते रहना इसका एक मात्र कारण है। इलाज भी यही है की रोग के कारण को हटा दें, अर्थात इन सबको न खाएं। हो सकता है, आप कहें की, अब तो में ये नहीं खा रहा हूँ फिर भी तकलीफ नहीं मिटती। तो भी कारण और निवारण वही होगा। ठीक होने में समय भी तो देना होगा। 
    लगातार खाने के असंतुलन से शरीर की पाचक क्रिया भी असंतुलित हो जाती है और इस प्रकार का व्यवहार करने लगती है।
    पेट में बनाने वाले पाचक रस उपयुक्त खाने के अभाव में आमाशय में दाह जलन पेदा कर देते हें, अधिक बडने पर अल्सर या छाले भी हो जाते हें, इसे अम्लपित्त या एसिडिटी भी कहते हें। खाने का असंतुलन मल प्रक्रिया तक को प्रभावित करता है, शोच(मल त्याग) अच्छा नहीं होता। भोजन के संतुलित न होने से रस, रक्त, माँस आदि का ठीक पोषण न होने से शरीर कमजोर होने लगता है, कमजोर शरीर की रोग प्रतिकारक क्षमता कम होने से प्रारम्भ में साधारण रोग सर्दी जुकाम आदि से प्रारम्भ होकर अन्य गंभीर रोग अग्रसर होते हें। शोच के ठीक न होने से पाइल्स फिशर आदि गुदा रोग, संग्रहणी आदि पेट के रोग होने का खतरा बढ़ जाता है। पाचन की यही गड़बड़ी प्राणघातक हृदय रोग, किडनी रोग, लीवर के रोग, उत्पन्न कराते हें। 
      आपने लिखा है की अविपत्ति कर चूर्ण  खाने से कुछ समय लाभ मिलता है|  अविपत्तिकर चूर्ण में कब्ज मिटने वाली निशोथ और हरड आदि है कब्ज दूर होते ही आराम मिल जाता है| आपने कब्ज करने वाली खाना नहीं छोड़ा है इसलिए वापिस रोग कष्ट देता है| या रोग अधिक बढ़ जाने से भी पूरा लाभ नहीं मिलता| नींद न आना भी इसी कारण है| 
    आप पंचकर्म चिकित्सा के अंर्तगत वमन और विरेचन करवाएं
    इससे हमेशा के लिए रोग मुक्ति होगी यदि रोग अधिक समय रहेगा तो अल्सर, अर्श (पाइल्स), फिशर, अमिबिओसिसी, आदि कई रोग होना अधिक संभावित है| चिंता नींद की कमी से तनाव बढेगा और चिडचिडापन, एन्जायटी, भी होने लगेगी |
    वमन, विरेचन अथवा कोई एक पंचकर्म कार्य चिकित्सक के परामर्श एवं निर्देशन में कराने पर शोधन हो जायेगा और रोग हमेशा के लिए छूट जायेगा|  ओषधि प्रभाव से से कुछ समय के लिए ही ठीक होगा| आप उज्जैन आ जाएँ चिकित्सा कर रोग मुक्ति दी जा सकेगी| आने से पूर्व समय अवश्य लें|

    में दिनांक दिनांक 7 अगस्त से 10 अगस्त 2016 तक गाजियाबाद बाद उप्र में परामर्श हेतु उपलब्ध रहूँगा| पूर्व संपर्क कर परामर्श समय और स्थान की जानकारी सुनिश्चित कर लेंवें| 
    मोब- 9425379102 / 0120-6762317, 
    किसी कारण से संपर्क न हो पाए तो SMS या Whatsapp पर सन्देश देवें आपसे सपर्क किया जा सकेगा|
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    समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें| आपको कोई जानकारी पसंद आती है, ऑर आप उसे अपने मित्रो को शेयर करना/ बताना चाहते है, तो आप फेस-बुक/ ट्विटर/ई मेल/ जिनके आइकान नीचे बने हें को क्लिक कर शेयर कर दें। इसका प्रकाशन जन हित में किया जा रहा है।
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