Rescue from incurable disease

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लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |
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  • अस्‍थमा या श्वाश रोग

    अस्‍थमा या श्वाश  रोग  
     अस्‍थमा  के लक्षण- घरघराहट (हवा के रूप में एक सीटी बजाने जैसी ध्वनी को जबरन बाहर करना )
    साँस लेने में कठिनाई , सीने में जकडन, लगातार खांसी, तेज नाड़ी, पसीना, फूले नथुने और दबे होंठ |
    साँस लेने में कठिनाई कुछ लोगों में पुरानी खांसी ही दमा का मुख्य कारण है। कुछ लोगों में व्यायाम के बाद लक्षण बढ़ जाते है कई बार दमा के दौरे के समय हलके या गम्भीर लक्षणों का पता नहीं लगता । दमा के साथ गम्भीर लक्षण आते हैं जब एक उपरी श्वसन संक्रमन हो जाने से जैसे फ्लू या सर्दी । इसके अलावा साँस कि कमी और छाती कि जकडन भी दमा का गम्भीर दौरा हो सकता है |
    कारण-श्वास रोग , या अस्थमा  कभी कभी किन कारणों से हे, यह पता लगाना बड़ा ही मुश्किल होता हे | एसा अधिकतर एलर्जिक अस्थमा में पाया जाता हे |
     कुछ खाने ,या पीने से - हम प्रतिदिन खाने के साथ विभिन्न प्रकार के मसाले जिनमे कई कई जीरा राइ अदि द्रव्य होते हें उनमे से कोन सी बस्तु अस्थमा  का कारण हो पता नहीं?
    वातावरण- या उपयोग की बस्तुये-फूलों ,अगरवत्ती,पर्फुम्स,धुल,अदि,यहाँ तक की सिंथेटिक,आदि बिस्तर, तकिया, या कुछ एसा जिसेके बारे में  कोई सोच भी न सके| श्वाश उठने का कारण हो सकता हे | आधुनिक चिकित्सा विज्ञान द्वारा इस प्रकार की खोज के लिए परीक्षणों में एलर्जी टेस्ट के लिए में कई सो की संख्या इंजेक्शन द्वारा शरीर में उस विषयक द्रव्य  डाल कर पता लगाने की कोशिश भी की जाती हे पर सटीक रूप से किसी एक ही कारण की खोज अभी भी मुश्किल बनी हुई हे | अक्सर इस खोज के बाद चिकित्सक एक लम्बी लिस्ट दे देता हे ,जो कारण हो सकती हें|
    बचने का उपाय- इस मुश्किल से निकलने का बस एक ही रास्ता हे ,की रोगी स्वयं कारण की खोज करे| जब भी श्वास का अटेक या आक्रमण हो तब प्रथम  तत्काल स्प्रे/औषधि , आदि से लाभ लेकर फिर चिंतन करना शुरू करे, की अटेक से पाहिले उसने क्या खाया,पिया ,किया,सुंघा,आदि,आदि| पुरे विवरण को नोट करें| बार-बार यही प्रक्रिया दोहराए | फिर कई बार की इस जानकारी में से "कोमन" जो अधिक नोटिग्ज में हो वह  कारण अलग कर ता जाये| इससे अंत में आपको अपने रोग के होने का कारण पता चल जायेगा, बस इससे बचते हुए हमेशा स्वस्थ रहा जा सकता हे |  
    इसके अतिरिक्त अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनायें: 
    हमारी शरीर की  प्रतिरक्षा प्रणाली किसी भी प्रकार के संक्रमण/या आक्रमण  से लड़ने के लिए हमेशा तैयार रहती है और इस  प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत  भी बनाना है, इसके लिए पौष्टिक आहार का सेवन करें। अपने खाने में पपीता, कद्दू, गाजर, टमाटर, पालक, अमरूद जैसे मौसमी फलों को शामिल करें। बेहतर प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए भरपूर नींद लें और तनाव के स्तर को कम रखें।
    व्यायाम में सावधानी:
    हमेशा नाक से सांस लेने की कोशिश करें क्योंकि व्यायाम के दौरान अगर मुंह से सांस लेंगे, तो आपको परेशानी हो सकती है। अच्‍छा होगा आप धूल वाले मौसम में घर के अंदर ही व्‍यायाम करें। 
    कुछ आयुर्वेदिक दवाये, जेसे  हरिद्रा खंड,[प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने] टेब डेस्मा जे एंड जे.डिशेंन हेदराबाद, {अटेक को न होने देने के लिए} की बहुत  ही सस्ती और असरकार हानी रहितऔषधि हे | इसके अतिरिक्त अन्य दवाये भीआयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श कर ली जा सकती हें | जो रोगी एलर्जिक अस्थमा से पीड़ित नहीं हें उनके लिए आयुर्वेदिक पंचकर्म चिकित्सा  द्वारा भी ठीक किया जा सकता हे |
    कुछ खास बातें--एलर्जिक अस्थमा के रोगी अपना इन्हेलर हमेशा अपने पास रखें। इन्हेलर दमे की सबसे अच्छी चिकित्सा हे| नहा कर तुरंत एसी या पंखे के नीचे ना बैठें।घर और बाहर तापमान में हो रहे परिवर्तन से सावधान रहें।धूल भरे मौसम में बाहर जाने से बचें।बाहर जाते समय मास्‍क पहन लें।इस तरह आप आसान जीवन जी सकते हें|

    समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान ,एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें |.
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