Rescue from incurable disease

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लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |
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    ज्वर -बुखार
    हम सब इस ज्वर या बुखार से परिचित हे। सामन्यतय: मनुष्य के शारीर का तापमान 98.5 डिग्री फारेन हाईट होता हे । बुखार शरीर के तापमान में सामान्य से ज्यादा वृद्धि को कहते है । सामन्यतय: भी शरीर का तापमान बदलता रह सकता है, दोड़ने भागने शारीरिक परिश्रम इस तापमान में ब्रद्धि कर सकता हे । कार्यों के अलग अलग स्तर पर और दिन के अलग अलग समय पर भी यह तापमान अलग अलग हो सकता हे।  
    बुखार के कारण निम्न हो सकते हें
    अनेक  तरह के विषाणु , जीवाणु और परजीवी शरीर के में प्रवेश कर श्वसन संक्रमण , नेमोनिया , दस्त और मूत्र मार्ग का  संक्रमण, आदि संक्रमण कर देते हें। इनसे उत्प्पन्न विषाक्तता जब रक्त में आती हे तो प्रतिक्रिया स्वरुप शरीर की ऊष्मा बढ जाती हे। यही बुखार हे। सामन्यतय: यह विषाक्तता शरीर की प्राकृतिक क्रियाकलाप द्वारा हटा दी जाती हे, ओर ज्वर ठीक हो जाता हे| पर संक्रमण की अधिकता ओर अधिक विषम्यता, या अन्य शारीरिक कारणो से जब स्वत: ठीक नहीं हो पाती तो ज्वर अधिक हो सकता हे| इस प्रकार से यह शरीर में किसी रोग के होने का लक्षण बन जाता हे| कुछ गंभीर चोट जिसमे शल्य चिकित्सा सम्मिलित है, ओर टीके और दवाओं के प्रति प्रतिक्रिया , या कुछ प्रकार के कैंसर आदि का होना भी इस ज्वर का कारण हो सकता हे| 
    जब किसी को ज्वर छड़ता हे तो कुछ आम लक्षण दिखने लगते हें| 
    पसीना आना , कांपना, सिरदर्द , मॉस पेशियो  में दर्द , भूख में कमी , बेचैनी होना , चकत्ते पढ़ना , और पूरे शरीर में थकावट महसूस होना। 
    उच्च तं सीमा 102 F से अधिक ज्वर मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता हे|  जिससे  चक्कर-भ्रम, अत्याधिक नींद आना, चिडचिडापन और दौरे पढ़ना हो सकता हे| बच्चो मे  दोरे (पांच साल से कम उम्र के बच्चों में आम) की समस्या अधिक पाई जाती हे |
    यह दौरे प्राय शुरू में होते हैं जब तापमान अचानक से बढ़ना चालु हो जाता है । नवजात और बच्चों में ज्वर विषयक दौरे प्राय मासपेशिय में अकडन और पूरे शरीर में अकड़ कर देते है जो की १५ मिनट से कम समय के लिए होते है ।
    इनके अतिरिक्त कुछ विशिष्ट लक्षण जो की बुखार के साथ उत्पन्न हो सकते हे जेसे उल्टी ओर  दस्त के साथ  (गेस्ट्रोएंटराइटिस के कारण) या बुखार जो की खांसी , सांस का फूलना या  भूरा / पीला रंग का बलगम के साथ हो वह निमोनिया हो  सकता है ।
    एसी किसी भी अवस्था में जिन्हें  की १०२ F  से कम है उनको जरुरी हे की बहुत सारा पानी पिए और फलो के रस पिए ताकि निर्जलीकरण से बचा जा सके| द्रव्य आपके शरीर को ठंडा करने में मदद करते है और एव शरीर में ज़रूरी नमक और खनिजों को फिर से पूरा कर देते है जो की उलटी या  दस्त के द्वारा खत्म हो गए होते है
    हल्का खाना खाए जो की पचाने में आसानी हो| 
    पूर्ण  आराम करें|
     पेरासिटामोल टेब/ संजीवनी वटी/ बुखार संक्रमण से लड़ने में मदद कर सकता है| पर पूरी तरह ठीक करने के लिए कारण जानना ओर उसकी पूरी चिकित्सा जरूरी होती हे| अक्सर इनसे बुखार उतारने पर हम ध्यान नहीं देते समझते हें की "ठीक" हो गये |अधिकतर यह भ्रम होता हे ये ओषधियाँ तात्कालिक राहत भर देती हें|
    अगर आपके बच्चे को ज्वर के साथ  अकडन है तो अपने चिकित्सक से संपर्क करना हितकारी होगा|

    वयस्कों को  थकावट आदि से होने वाला ज्वर जल्दी  ठीक हो जाता हे ,पर  एक दिन में ठीक न होने पर अन्य चिकित्सा जरुरी होती हे| थकावट से उतप्न्न ज्वर में शरीर की मालिश / नहाना / विश्राम एक कारगर उपाय होता हे|
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    समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान ,एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें |.


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