Rescue from incurable disease

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लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |
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    Q-13 जून 2013 - क्या मधु मेह का रोगी धूम्रपान से अधिक जोखिम उठता है?
    A- यू तो धूम्रपान समान्यत: ही हानी कारक होता है, पर जो लोग मधुमेह के मरीज होते हुए भी धूम्रपान करते रहते हैं,उन्हे ह्रदय रोग की आशंका अधिक हो जाती है।
    होता यह है की उनकी रक्त वाहिनियों की अंदरूनी दीवारों पर प्लेक जमने लगता है जिससे रक्त संचार अधिक बाधित होने लगता है कि रोगी के ह्रदय को पोषक रक्त कम मिल पाता है, ह्रदय को पर्याप्त ऑक्सीज़न न मिलने से ह्रदय की शरीर को रक्त भेजने की क्षमता मेँ कमी आती है, यह कमी एंजाइना [ ह्रदय स्थान का दर्द] ओर हार्ट अटैक हो जाता है। कुछ मरीजों को हृदयघात [हार्ट फेल] की समस्या भी हो सकती है,या उससे उन्हें जिन्दगी भर के लिए कोमा की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
     सिगरेट पीने से किसी भी व्यक्ति का शुगर लेवल अक्सर एकाएक उपर हो जाता है, और अगर मधुमेह का कोई मरीज धूम्रपान करता है तो उसके शुगर लेवल यानि रक्त शर्करा के स्तर में तुरंत ऐसा उछाल आता है जो उस मरीज को बहुत नुकसान पहुंचाता है। उसके शरीर की सारी मेटाबोलिक प्रक्रिया तहस नहस हो जाती है।
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    आपके प्रश्नो पर हमारे उत्तर -लेबल: सौंदर्य --04-JUN-2013 Q-मेरे चेहरे पर कील मुहांसों के काफी दाग है। क्या इसे ठीक कैसे किया जा सकता है? A- 1-एलोवेरा जेल लगाने से त्‍वचा के दाग धब्बे धीरे धीरे हल्‍के पड़ने लगते हैं और इनसे मुंहसे भी ठीक हो जाते हैं।
    2- नियमित रुप से लहसुन का पेस्ट दाग धब्बों पर लगाने से वे हल्‍के पड़ जाते हैं।
    3- शहद को चंदन पाउडर के साथ मिलाइये और उसमें हल्‍का सा नींबू निचोड़ लीजिये। इस पैक को चेहरे पर लगा कर साफ त्वचा पाइये। नींबू का रस न केवल चेहरे से गहरे निशान मिटाता है बल्कि इसको चेहरे पर रगड़ने से चेहरे की रंगत भी बदल जाती है।
    4- दूध से अपने चेहरे की मसाज करने पर उसमें नमी आती है, और दाग धब्‍बों का रंग भी हल्‍का पड़ जाता है।
    5- प्‍याज के रस को गहरे निशान पर लगाइये और कुछ ही दिनों में देखिये कि गहरे रंग के दाग किस तरह से साफ हो जाते हैं।
    6-चंदन पाउडर को दही के साथ मिक्‍स कीजिये और उसमें नींबू की चार बूंद डाल लीजिये। इसको लगाने से आपके चेहरे के डार्क स्‍पॉट गायब होने लगेगें।
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    जून 03-13 Q- sir aap se mammi ke bare me kuch puchana tha, sir unki age 45 sal he or abhi 2 4 din se unke "knee" me bahut pen hone laga h to kiya kiya jay-Pintu Rathore
    A- घुटने सहित शरीर के किसी भी भाग में कभी कभी होने वाला दर्द समान्यत: हमारे दैनिक जीवन के कुछ कारण जैसे अधिक चलने, सीडी चड़ने, रक्त की कमी, महिलाओं में मासिक समस्या, से लेकर साधारण इन्फेक्शन सर्दी, जुकाम बुखार, गर्मी में पानी  की कमी आदि से हो सकता है, जो कारण के हटने से स्वत: ठीक हो जाता है, हमारे शरीर की प्रतिरोधक शक्ति  ही उसे सामान्य कर देती है। सामान्य स्थिति में  महा योगराज गूगल 1 -1 ग्राम प्रात: सायं दूध से 3 से पाँच दिन तक  दें। लाभ हो जाएगा। अन्य कारण से होने पर कुशल चिकित्सक से जांच ओर चिकित्सा करवाए।
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    Q- थायराइड क्या है और इसके लक्षण क्या होते हैं?
    प्रश्‍नकर्ता- x --- On: 31-MAY-2013 |
    उत्‍तर:- गर्दन के निचले हिस्से में थायराइड  ्लैंड होती है, जो दो तरह के थायराइड हार्मोन टी-3 और टी-4 बनाती है। शरीर की सबसे जरूरी ग्रंथियों में से एक थायराइड ग्लैंड शरीर की कई चीजों को नियंत्रित और नियमित करती है। जैसे अच्छी नींद, स्वस्थ पाचन तंत्र, मेटाबोलिज्म, शरीर का तापमान, विकास आदि थायराइड की संतुलित मात्रा पर ही निर्भर करता है। ऐसे में थायराइड हार्मोन का जरूरत से ज्यादा बनना या कम बनना, दोनों ही स्थितियों में खतरनाक साबित हो सकता है। थाइरॉइड की समस्या होने पर भूख के बावजूद वजन में गिरावट, तेज धड़कन, हाई ब्लड प्रेशर, तनाव, खूब पसीना आना, गर्दन में सूजन, कम मासिक धर्म, बार-बार शौच जाना, हाथ कांपना आदि कुछ ऐसे संकेत हैं।
      लिंक भी देखे ---  थायराइड --हाइपोथायरायडिज्म-थायरॉयड हॉर्मोन का अपर्याप्त उत्पादन |
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    Q- स्लिप्ड डिस्क समस्या से कैसे बचा जा सकता है?
    A-नियमित तीन से छह किलोमीटर प्रतिदिन पैदल चलें। यह सबसे अच्छा व्यायाम है हर व्यक्ति के लिए। देर तक स्टूल या कुर्सी पर झुक कर न बैठें। अगर डेस्क जॉब करते हैं तो ध्यान रखें कि कुर्सी आरामदेह हो और इसमें कमर को पूरा सपोर्ट मिले। शारीरिक श्रम मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। लेकिन इतना भी परिश्रम न करें कि शरीर को आघात पहुंचे। देर तक न तो एक ही पोश्चर में खडे रहें और न एक स्थिति में बैठे रहें।किसी भी सामान को उठाने या रखने में जल्दबाजी न करें। पानी से भरी बाल्टी उठाने, आलमारियां-मेज खिसकाने, भारी सूटकेस उठाते समय सावधानी बरतें। अचानक झटके के साथ न उठें-बैठें।हाई हील्स और फ्लैट चप्पलों से बचें। 
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    Q- आजकल मुझे पसीना बहुत आता है, सारा बंदन 
    Q- धूप से बचाव के लिए क्या खाना चाहिए?
    A-सन बर्न से बचने के लिए कुछ विशेष फल ओर सब्जी खाते रहना लाभदायक होता है। गर्मी के इन दिनो में सन बर्न हो जाने से त्वचा काली सी हो सकती है। 
    गर्मियों का मौसम तरबूज खाना काफी फायदेमंद है। तरबूज न केवल हमें अंदर से ठंडा रखता है, बल्कि इसमें पाया जाने वाला तत्व लाइकोपिन हमारी त्वचा को सूर्य की हानिकारक किरणों से भी बचाता है। साथ ही स्किन कैंसर के खतरे से भी निजात दिलाता है। 
    नींबू एक साइट्रस फूड है इसमें लीमोनीन होता है, जो कैंसर से हमारी रक्षा करता है। साथ ही सनबर्न की जलन से भी बचाता है। 
    पालक, भिंडी, करेला जैसी हरी सब्जियां खूब खाएं। इनमें पाए जाने वाले विटामिन न केवल त्वचा की परतों को मजबूत बनाते हैं, बल्कि यूवी किरणों को भी दूर रखता है। 
    टमाटर का सेवन गर्मी के दिनों में खाया जाए तो सनबर्न से 25 प्रतिशत ज्यादा बचाव होता है।
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    Q-डाइरिया क्या है?
    A- गर्मियों के इन दिनो में डायरिया अधिक देखा जाता है इसका सबसे प्रमुख लक्षण है पतले दस्त का आना। आमतौर पर मरीज को चौबीस घंटे में चार से पांच पतले दस्त होते हैं। इसके साथ पेट के निचले हिस्से में बहुत तेज दर्द होता है। दर्द हल्के या तेज मरोड़ के रूप में हो सकता है। बुखार और कमजोरी से शरीर बेजान लगने लगता है। कुछ रोगियों को दस्त के साथ उल्टियां भी हो सकती हैं। बाहर खुले में बिकने वाली चीजें न खाएं ओर न ही चाहे जहां का पानी पिये। इस मौसम में ज्यादा मात्रा में छाछ / दही का सेवन करें। इससे ठंडक मिलेगी और त्वचा को भी लाभ होगा। पानी के साथ तरल पदार्थों का सेवन बढाएं। मिर्च-मसाले का तला-भुना खाना खाने से बचें। इसकी जगह जल्दी पचने वाला हल्का व सादा, कम कैलोरी वाला भोजन करें। इस मौसम में चीनी और नमक का घोल लेते रहें, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो पाए।
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    Q- क्या उदासी या मन न लगना डिप्रेशन है?
    A-डिप्रेशन एक मनोवैज्ञानिक असंतुलन है। आमतौर पर लोग डिप्रेशन को आमतौर पर रहने वाली उदासी ही मानते हैं। लेकिन ऐसा है नहीं। उदासी में जहां व्‍यक्ति कुछ समय बाद सामान्‍य हो जाता है, वहीं डिप्रेशन में यही उदासी काफी लंबे समय तक और गहरी बनी रहती है। यह उदासी हर जगह उसके साथ रहती है। इसका असर उसके काम पर भी पड़ता है। डिप्रेशन ग्रस्‍त व्‍‍यक्ति की रुचि किसी काम में नहीं रहती। यहां तक कि वह काम जो कभी उसे सबसे ज्‍यादा पसंद होता था,उस काम को करने का भी उसका मन नहीं करता। अपने वर्तमान और भविष्‍य को लेकर भी वह काफी उदास और नाउम्‍मीद रहता है। अवसादग्रस्‍त व्‍यक्ति की नींद और भूख भी बिगड़ जाती है।
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    Q- मुझे अक्सर स्ट्रेस रहता है , जब से ज्ञात हुआ की स्ट्रेस से ब्लड प्रेशर ओर डाइबिटीज़ हो जाती है, में बहुत  परेशान हूँ?
    A-सभी प्रकार का स्ट्रैस बुरा नहीं होता। बिना तनाव के हम किसी भी प्रकार से काम्पटीटिव नहीं हो पायेंगे। स्ट्रैस्ड होकर ही हम अपनी जीत को तौल सकते हैं और दूसरों की तुलना में खुद को आगे रखने की कोशिश करते हैं। लेकिन इसके अलावा पाज़िटिव और निगेटिव स्टै्रस के बीच हमें बैलेंस बना कर रखना चाहिए।समय के अनुसार हमें फाइनेंशियल और फैमिली प्रेशर को भी समझना चाहिए। लेकिन ज़्यादा समय तक रहने वाला तनाव अगर आपको शारीरिक या मानसिक रूप से परेशान कर रहा है तो हमें समझना चाहिए और उसे कम करने की हर मुमकिन कोशिश करें। ना कहना भी सीखें क्योंकि कभी कभी ना कहना भी ज़रूरी हो जाता है।
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