Rescue from incurable disease

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  • घर पर बनाए तुलसी अमृत या अर्क।

    घर पर कैसे बनाए तुलसी का अर्क?
    भारतीय संस्कृति में तुलसी के पौधे का बहुत महत्व है और इस पौधे को बहुत पवित्र माना जाता है। ऎसा माना जाता है कि जिस घर में तुलसी का पौधा नहीं होता उस घर में भगवान भी रहना पसंद नहीं करते। माना जाता है कि घर के आंगन में तुलसी का पौधा लगा कलह और दरिद्रता दूर करता है। इसे घर के आंगन में स्थापित कर सारा परिवार सुबह-सवेरे इसकी पूजा-अर्चना करता है। यह मन और तन दोनों को स्वच्छ करती है। इसके गुणों के कारण इसे पूजनीय मानकर उसे देवी का दर्जा दिया जाता है। तुलसी केवल हमारी आस्था का प्रतीक भर नहीं है। इस पौधे में पाए जाने वाले औषधीय गुणों के कारण आयुर्वेद में भी तुलसी को महत्वपूर्ण माना गया है। भारत में सदियों से तुलसी का इस्तेमाल होता चला आ रहा है।
    तुलसी के अनेक लाभ ओर उपयोग हें, यह कई रोगों मेँ कारगर सिद्ध हुई है। इस कारण इसको तुलसी से व्यवसायिक लाभ लेने ओर आसान उपलब्धि हेतु तुलसी का अर्क निकाल कर मार्केटिंग की जाकर धन कमाया जा रहा है। यह अर्क या बिन्दु के रूप मेँ लाने ले जाने की सुविधा, पोधे के गुण की हमेशा उपलब्धि, की विचार से अति उत्तम प्रयोग है। अन्य ओषधियों की तरह इसकी गोली/ घनसत्व के केपसूल, बनाए जाना  संभव नहीं क्योकि इसमें उपस्थित उड़नशील तैल ही इसका लाभदायक अंश होता है, यदि यह बाष्पीकृत हो गया तो इसका किसी भी रोग पर कोई असर नहीं होगा। 
    इस कारण इसका अर्क निम्न निष्कासन विधि से निकाला जाना चाहिए। 

    अर्क निष्कासन विधि
    1. ताजा तुलसी (अच्छा परिपक्व अधिक पत्ते वाला पोधा जो सूखा न हो)  के पंचांग [जड़-मूल,पत्ते,फूल,सहित पूरा पोधा] को लेकर मिट्टी आदि ठीक तरह से साफ कर लें, कदाचित कोई रोगी/सूखा/खराब अंश हो तो हटा देवें।
    2.  लगभग एक एक इंच के छोटे-छोटे टुकड़े कर लें, इसको थोड़े से पानी में एक दिन के लिए भिगो दें{पानी अधिक होगा तो अर्क पतला (डाइलूट) बनेगा ओर कम असरकर होगा, कम पानी होगा तो तुलसी के जलने का खतरा रहेगा ओर अर्क भी नहीं निकलेगा}। 
    3. अगले दिन आप देखेंगे की इसमे ऊपर की ओर तैल जैसा तरल ऊपर की ओर चमक रहा होगा। इसका जल मिश्रित तैल ही अर्क है। इसे अब हमको अलग करना है। 
    4. अलग करने के लिए इसको एक प्रेशर कुकर में भर देवें। कुकर की वेट (सीटी) को हटकर उसमें लगभग तीन मीटर एक प्लास्टिक की टूयब इस प्रकार से लगा दे, की उससे निकली भाप इसी टूयब से निकले (बाहर न निकले) इस टूयब पर एक ठंडे पानी से  भिगोया कपढ़ा बांध देवें, इस ट्यूब के दूसरे सिरे पर एक बोतल इस प्रकार से रखें की इससे निकला अर्क इसके अंदर गिरता रहे ओर लपेटे हुए कपढ़े का पानी अंदर चला न जाए। बोतल को भी ठंडे पानी में रखें। 
    5. अब प्रेशर कुकर को हम गेस/स्टोव पर धीमी आंच पर रखें। थोड़ी देर में अंदर का पानी। तुलसी पंचांग सहित गरम होने लगेगा ओर भाप ट्यूब के रास्ते बाहर आने लगेगी, जहां टूयब पर लपेटा ठंन्डे पानी में भीगा कपढ़ा उस भाप को तरल बन देगा यह तरल ट्यूब में बहता हुआ बोतल में गिर जाएगा। सावधानी रखे की कुकर बोतल से लगभग 2 से 3 फिट उचाई पर हो। जब अनुमान हो जाए की प्रेशर का सारा पानी समाप्त हो गया है भाप निकालना बंद हो गई है तो बोतल को हटा कर ढक्कन से अच्छी तरह टाइट कर रखें। 
    6. लीजिये आपका तुलसी अर्क/ तुलसी अमृत/ तुलसी बिन्दु या आप जो भी नाम दें, तैयार है।
    7. आपके द्वारा किए व्यय के मान से यह कितना सस्ता होगा यह आप विचार करें अत: यदी आप इसे बनाते हें तो अपने परिजन मित्र, ओर जरूरत मंदों को बाँट कर पुण्य लाभ कमाएं।    

    प्रयोग विधि 

    • उपयोग के लिए ड्रोपर वाली छोटी बोतल में रखें, ताकि अधिक बिखरे नहीं। आवश्यकता के अनुसार 2 से चार बूंद अर्क चाय,शहद, दूध, पानी,आदि किसी में डालकर लिया जा सकता है । उपयोग के लिए देखें पोस्ट -- तुलसी एक 'दिव्य पौधा' -BENEFITS OF TULSI इसमें तुलसी के स्थान पर उसका अर्क लिया जा सकता है। 
    • तुलसी एक वेद कालीन दिव्य ओषधि- क्या कहता है आधुनिक विज्ञान? 
    • नोट- -गुलाब जल निर्माण यदि करना हो तो इसी विधि से ताजे गुलाबी गुलाब के फूलों की पंखुड़ियाँ लेकर उसी दिन अर्क निकाल लें, यही गुलाब जल कहलाता है।
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