Rescue from incurable disease

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लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |
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  • Prevention of Child malnutrition by herbal medicinal, milk-dessert (supustiksirapaka) & massage.

    सुपुष्टिक्षीरपाक एवं  अभ्यंग से  बाल  कुपोषण निवारण- लेख प्रस्तुतिकरण- डॉ. मधु सूदन व्यास 
    Prevention of Child Malnutrition by Herbal medicinal Milk-Dessert (Supustiksirapaka) & Massage (Abhyang) 

    कार्यक्रम संचालक
    डॉ. एस. एन. पाण्डे
     मार्गदर्शक
    डॉ विनोद वैरागी
     सुपुष्टिक्षीरपाक एवं  अभ्यंग से  बाल  कुपोषण निवारण

    बाल कुपोषण
    बच्चो में आहार की कमी से होने वाली गंभीर एक समस्या
    Ø  विकास एवं जीवनीय क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव|
    Ø  शरीर के पोषण, विकास एवं स्वास्थ्य संरक्षण में कमी आहार का समुचित उपयोग न होना|
    Ø   
    कुपोषण एक दुश्चक्र है जिसमे फसने के बाद, या तो बच्चे की मोत या सम्पूर्ण जीवन शारिरिक, बोद्धिक, शेक्षिक, आर्थिक, द्रष्टि से कमजोर बना रहेगा|
    यदि यह बालिका है तो कुपोषण का चक्र अगली कई पीढ़ी तक चलता रहता है|
      बाल  कुपोषण  कारण
    v  गर्भावस्था के समय माता को समुचित आहार न मिलना |
    v  टीका-करण में देरी एवं सम्पूर्ण टीकाकरण न  होना|
    v  शरीर में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी |
    v  स्तनपान और पूरक आहार में कमी|
    v  माँ का दूध दे से मिलना, या कमी होना|
    v  बच्चो को  कोलस्ट्रम न पिलाना|
    v  प्रथम छह माह माँ का दूध न मिलना|
    v  बीमार बच्चो को समय पर उचित चिकित्सा न मिलना|
    v  बीमारी के दोरान उचित पोष्टिक आहार न मिलना|
    v  शरीर में बार बार होने वाले संक्रमण|
    v  मेटाबोलोक कारणों से पोषक तत्वों का उपलब्ध न होना|


    बाल कुपोषण निवारण में आयुर्वेद की भूमिका
    महिला बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग
    के बहुतेरे प्रयासो के बावजूद भी बाल कुपोषण की संख्या में
    संतोष जनक कमी न आने के कारण आयुष विभाग के
    निर्देशन में सुपुष्टि योग की खीरएवं महामाष तेलके अभ्यंग
    द्वारा उपचार के २१ दिवसीय शिविर जन सहयोग के माध्यम से उज्जैन
    जिले के आयुष विंग, आयुष ओषधालयो में लगाये गये
    जिसके परिणाम बाल कुपोषण निवारण की दिशा
    में जो मिले है, उन्है प्रस्तुत किया जा रहा है।  
     सुपुष्टि योग क्षीरपाक
    अश्वगंधा मूल चूर्ण -100 ग्राम
    शतावरी मूल चूर्ण -30 ग्राम
    यष्टि मधु चूर्ण -15 ग्राम
    शुण्ठी चूर्ण - 5 ग्राम
    क्षीर (खीर) निर्माण
    क्षीर पाक विधि से खीर बनाई गई!
    प्रयुक्त मात्रा एवं प्रक्रिया
    सुपुष्टि योग- कुपोषित बच्चों की आयु,  पाचन -बल के अनुसार 3 से 6 ग्राम प्रतिदिन
    अभ्यंग पश्चात 50 मि.ली. खीर पिलाई गई !
    क्षीर प्राशन के पूर्व
    सर्वांग - अभ्यंग
    महामाष तेल से सर्वांग अभ्यंग
    अभ्यंग-महामाष तेल
    कुपोषित बच्चो को प्रतिदिन 15 मिनिट
    शरीर का स्नेहन (मालीश)
    तैल मात्रा 20-25 ग्राम प्रति बच्चा
    सुपुष्टि क्षीरपान तथा महामाष तेल अभ्यंग प्रति बच्चे को 21 दिन किया गया| लगभग 50 से 60 पंजीकृत कुपोषित बच्चो के शिविर आयुष ओषधालय में  आगनवाडी के माध्यम से 14 शिविर लगाये गये|
    निष्कर्ष
    शिविर संख्या -    014
    कुल बच्चे-            599
    **अनियमित रहे      067
    शेष उपचारित-    532
    वजन बढा -       495
    ग्रेड परिवर्तन-     180
    वजन कम हुआ-    044
    (**शिविर के दोरान अतिसार, ज्वर, प्रतिश्याय, होने के कारण)
    भार में न्यूनतम वृद्धि       60-200 ग्राम
     भार में अधिकतम वृद्धि       700-1340 ग्राम

    महिला एवं बाल विकास की रिर्पोट के अनुसार उज्जैन जिले में स्वास्थ विभाग के पोषण पुनर्वास केन्द्रो में उपचारीत बच्चो के मुकाबले आयुर्वेद उपचार से अधिक लाभदायक सिद्ध हुआ।
     
    म.प्र. शासन ने पूरे प्रदेश में इस उपचार को आंगनवाडियो में लागू करने की अनुशंसा की  
    आयुर्वेद उपचार क्यो पसंद किया गया!
    Ø बच्चो को भर्ती की आवश्यकता नही!
    Ø एक आधा धन्टे में शिविर में उपचार!
    Ø सक्रियता, चेष्टा और चंचलता में वृद्धि!
    Ø बार बार होने वाले संक्रमण से बचाव!
    Ø दो तीन दिन में ही पाचन (भूख) में वृद्धि!
    Ø इन्जेक्शन के स्थान पर दुलार भरा स्पर्श अभ्यंग!
    Ø कडवी दवाई की जगह मीठी खीर खाने का आनंद!
    सुपुष्टिक्षीरपाक एवं  अभ्यंग  से  बाल  कुपोषण  निवारण 
    समाचार पत्रों ने की प्रशंसा 
    कार्यक्रम ने कई समाचार पत्रों ने प्रमुख स्थान बनाया
    जी न्यूज़ पर मंत्री शिक्षा महोदय ने किया विशेष उल्लेख
    दूरदर्शन ने किया कवरेज और दिया लम्बा समय|
    कार्यक्रम को सभी के द्वारा सराहा गया
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