Rescue from incurable disease

Rescue from incurable disease
लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |

गर्मी के मोसम में मूत्र त्याग में बेचेनी!

गर्मियों के मोसम में अक्सर मूत्राशय स्थान पर बेचेनी का अनुभव होता है।  एसा लगता है,  की मूत्र आ जाए तो आराम मिले पर नहीं आता। कभी कभी जलन या गर्मी की प्रतीति भी होने लगती हें। एसा इसलिए होता हे की शरीर का अधिकांश पानी पसीने, से निकलता रहता है, साथ ही यदि खाने पीने में मिर्च-मसाला, पूरी पकवान आदि अधिक खाया तो, उनके पचाने हेतु भी अधिक पानी की आवश्यकता होगी, जो न मिलने पर इस प्रकार की बेचेनी मिलती है। 
महिलाओं में भी अक्सर यह स्थिति देखी जाती है क्योकि विशेषकर प्रवास के समय (कहीं आने जाने के दोरान) मूत्र त्याग की व्यवस्था ठीक न मिलने से वे बचना चाहतीं है, वे तरल पदार्थों का सेवन कम करती हें, इससे उनमें इस प्रकार के कष्ट अधिक देखने मिलते हें।  
आयुर्वेद में इस इस स्थिति को मूत्रघात, मूत्रकृच्छ आदि नामो से जाना जाता है।  
इसका एक मात्र इलाज है, अधिक तरल पदार्थ का सेवन और कम से कम मिर्च मसाले जेसे खाद्य खाना।  प्रवास के समय जब बाथरूम आदि की व्यवस्था होने की संभावना न हो तो बिलकुल सादा मिर्च मसाले रहित भोजन/ नाश्ता खाना ही अच्छा होता है। साथ ही यह भी जरूरी है की मूत्र त्यागने में भी देर या आलस न किया जाए।
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