Rescue from incurable disease

Rescue from incurable disease
लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |

Heart disease, stroke, blood pressure diabetes ie are easily available 24 Hours X 7 days at every corner shop in our country?


हृदय रोग, स्ट्रोक, ब्लड प्रेशर मधुमेह, आदि आसानी से हमारे देश में हर कोने की दुकान में 24 घंटे X 7 दिन उपलब्ध हैं?
क्या ह्रदय रोग, स्ट्रोक, ब्लड प्रेशर मधुमेह, चोबीस घंटे सात दिन अर्थात हर समय हमारे देश में हर नुक्कड़ दुकान पर मिलता है?
जी हाँ यह बिलकुल सत्य है! और इनके कारण ही विश्व स्वास्थ्य संगठन भी चिंतित है! 
विश्व भर में विशेषकर हमारे देश में हृदय रोग, मधुमेह, स्ट्रोक, रक्तचाप आदि रोगों के रोगी अधिक मिल रहें हें| विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) में भी इन समस्याओं और उससे होने वाली निरंतर मोत जिनकी संख्या 5 लाख से अधिक है चिंतित हैं| इस संख्या में भारत भी उच्चतम पायदान पर है| 

15 मई 2018 को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने वर्ष 2023 तक इनके प्रमुख कारण खाद्य पदार्थों के साथ मिलने वाले ट्रांस फैट एसिड है|
ट्रांस फेट को न्यूनतम हानिरहित स्तर पर लाने के लिए डब्ल्यूएचओ ने छह सूत्रीय कार्यक्रम जिसे रिप्लेस (REPLACE) कहा गया है, बनाया गया है|  इस कार्यक्रम को जानने से पूर्व हमारे देश में आसानी से मिलने वाले और आनंद के लिए खाए जाने वाले खाद्य के बारे में जान लें|
बास्तव में तो आम जनता यह जानती ही नहीं की यह हानि कारक ख़राब कोलेस्ट्रोल (LDL) बढाने वाले फेट्स उन्हें कहाँ से मिल रहे है?
कैसे और कहाँ से मिलता है ट्रांस फेट?
इन ट्रांस फैट के स्त्रोत को समझने के लिए हमको यह केसे और कहाँ बनता है इस बात को समझना होगा|
ट्रांस फेट प्राक्रतिक एवं कृत्रिम दो रास्ते से मिलता है|
प्रकृतिक रूप से मिलने वाले ट्रांस फेट भेड़ बकरी आदि आदि पशुओं के शरीर में एक बेक्टीरिया से उत्पन्न होता है, जो उनके मांस आदि के रूप में एकत्र होता रहता है,  यही से ट्रांस फेट मांस खाने वाले व्यक्तियों में पहुँचता है| पशुओं विशेषकर भेंस आदि के दूध, पनीर आदि में भी यह पाया जाता है पर मांस की तुलना में कम मिलता है|
कृत्रिम रूप से विभिन्न वनस्पतियों से प्राप्त खाद्य तैल में प्राकृतिक रूप से ट्रांस फेट कम होता है परन्तु जब उसे अधिक तापमान पर गरम किया जाता है तब उसमें ट्रांसफेट बड़ने लगता है, जितना अधिक समय तक गर्म होगा उतना ही अधिक ट्रांसफेट उस तेल में सम्मलित हो जायेगा|
अब गली के नुक्कड़ों पर चाट पकोड़ी कचोरी आदि आदि जिसे बनाने में वह तेल दिन भर उबलता रहता है, उसमें ट्रांस फेट कितना अधिक होगा यह कल्पना आसानी से की जा सकती है|
वनस्पति घी बनाने की प्रक्रिया, हाइड्रोजनीकरण (Hydrogenation) में भी तेलों को अधिक गर्म किये जाने से वह घी भी ट्रांस फेट का भंडार बन जाया करता है|  
इन वनस्पति तेलों में तल कर बनाये जाने वाले खाध्य स्वयं ही ट्रांसफेट के भंडार होते हें|
शाकाहारी हो या मांसाहारी दोनों ही परिस्तितियों में ट्रांस फेट ख़राब कोलेस्ट्रोल को बढाता रहता है, रक्त की नलिकाएं (धमनिया) इससे भर जातीं हैं और परिणाम स्वरुप रक्तचाप, हृदय रोग, स्ट्रोक, मधुमेह आदि के कारम असमय मौत की संभावना बड जाती है|  
ख़राब कोलेस्ट्रोल से बचने का रास्ता इन सभी को त्याग देना ही सबसे अच्छा रास्ता है|  इसी कारण केनेडा आदि देशों में इन पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है|

ट्रांस फेट को न्यूनतम हानिरहित स्तर पर लाने के लिए डब्ल्यूएचओ का छह सूत्रीय कार्यक्रम जिसे रिप्लेस (REPLACE) कहा गया है, बनाया गया है|
 इस का उद्धेश्य खाद्य पदार्थों से ट्रांस फैट समाप्त करना है|
1. रिव्यु (Review): औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस फैट के आहार स्रोतों की समीक्षा|
 2. प्रमोट (Promote): ट्रांस फैट की अपेक्षा स्वस्थ फैट और तेलों के प्रतिस्थापन को बढ़ावा|
 3. लेजिस्लेट (Legislate): औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस वसा को खत्म करने के लिए विधि या विनियामक कार्यों को लागू करना|
4. एसेस (Assess): खाद्य आपूर्ति में ट्रांस फैट सामग्री का आकलन और निगरानी|
5. क्रिएट (Create): ट्रांस फैट से स्वास्थ्य को होने वाले हानि के बारे में जागरुक करना|
6. एनफोर्स (Enforce): नीतियों और विनियमों के अनुपालन को लागू कराना|
केनेडा आदि कई देशों में ट्रांस फेट से बने खाध्य प्रतिबंधित कर दिए गए है|
हमारे देश भारत में ट्रांस फेट मिश्रित खाद्य पर कोई प्रतिबंध नहीं है| देश की हर गली, नुक्कड़, चोराहे, बाज़ार, में बनाते बेचते और खाते 24 X 7 याने हर समय आसानी से देखा जा सकता है| इन खाद्यों के नामों की सूची भी इतनी अधिक बड़ी है की उसे लिखने और पड़ने में कई लेख लिखना होंगे| इतने अधिक ट्रांसफेट खाए जाने के कारण ही हमारे देश में यह समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है|
भारत के स्वास्थ्य विभाग से यह उम्मीद की जा सकती है, की वह भी इस विषय में निश्चय ही कुछ कर रहा होगा?

अच्छे कोलेस्ट्रोल (HDL) को कहाँ से प्राप्त करें?
विशेष लेख कई विषयों पर :- 
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